एअरपोर्ट 1975

12 अगस्त 1992

एअरपोर्ट 1975कोलंबिया एअर लाइंस की उड़ान क्रमांक 409 देर रात डलास से लॉस एंजिल्स की उड़ान हेतु तैयार है। विमान में 125 लोग सवार हैं। यात्रियों में विभिन्न वर्गों के लोग हैं। दो ‘नन’ हैं, धुत्त व्यवसायियों का समूह है, एक प्रेमी युगल है, एक प्रौढ़ अपनी विमान यात्रा पर ‘नर्वस’ है तो उसकी पड़ोसी सहयात्री महिला सैक़ड़ों विमान-यात्राओं की अनुभवी है। एक प्यारी-सी किंतु रुग्णावस्था में बालिका है जिसकी किडनी का प्रत्यारोपण होना है।

अनुभवी चालक दल के नेतृत्व में विमान निर्धारित समय पर डलास से प्रस्थान करता है। आगे मौसम खराब होने के कारण वह सॉल्ट लेक सिटी में ही उतरने की तैयारी करता है। कोलंबिया 409 के ठीक बाद एक छोटा प्लेन भी खराब मौसम के कारण सॉल्ट लेक सिटी में आकस्मिक लैंडिंग की तैयारी कर रहा था। उस छोटे-से वायुयान को एक व्यवसायी उड़ा रहा था, जो कि उसका यात्री भी था।

छोटे विमान के चालक को अचानक हृदयाघात हो जाता है, जिसके फलस्वरूप यह विमान हवा में कलाबाजियां खाने लगता है। इसी दौर में वह जंबो 747 के ‘काकपिट‘ को चीरता हुआ आर-पार निकल जाता है। उतरने की तैयारी कर रहे विमान कोलंबिया 409 में अचानक आए असंतुलन की जांच करने वरिष्ठ परिचारिका नेंसी (कैरेन ब्लैक) ‘कॉकपिट’ में जाती है, तो वहां का दृश्य उसके होश उड़ा देता है। ‘कॉकपिट’ की सभी सीलबंद खिड़कियां ध्वस्त हो चुकी थीं। यंत्र प्रणाली तहस-नहस हो चुकी थी। तीन चालकों में से एक ‘कॉकपिट‘ से खुले आसमान में विलीन हो गया था, एक की अपनी सीट पर ही मृत्यु हो गई थी। प्रमुख चालक को गहरी चोटें आई थीं, जिसके कारण उसकी नेत्रज्योति चली गई। इस दृश्य को पर्दें पर देखकर ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं।

चारों तरफ खुला आसमान, बर्फीली हवाएं, पहाड़ों की भयावह चोटियां, तेजी से बढ़ता हुआ जंबो 747 विमान, जिसको उड़ाने वाला कोई नहीं

नेंसी बड़ी मुश्किल से अपने थोड़े बहुत ज्ञान का उपयोग कर ‘कंट्रोल-टॉवर’ से संपर्क कर स्थिति का बयान करती है, तो वे भी हतप्रभ रह जाते हैं। स्थिति का पूरा नियंत्रण सौंप दिया जाता है अनुभवी पाइलट कैप्टन मर्डोक को, जो कि कोलंबिया एअर लाइंस के वरिष्ठ कर्मी होने के अलावा नेंसी को बेहद प्यार भी करते थे। जुड़ते-टूटते रेडियो संबंधों से मर्डोक अत्यंत विचलित और स्तब्ध नेंसी को हौसला बंधाते हैं कि वह उड़ान की कमान संभाले। नेंसी साहस करती है। बमुश्किल सिर्फ रेडियो सहायता के द्वारा विमान को नियंत्रण प्रदान करती है। एक बारगी तो रेडियो संबंध भी टूट जाता है, और सामने ऊंची चोटियां विमान को ललकार रही होती हैं। ऐसे में अत्यंत असहाय नेंसी अकेले उस विमान को सुरक्षित रख पाती है। नेंसी विमान को अधिक समय तक आसमान में नहीं रख सकती है और उसकी लैंडिंग अकेले नेंसी के लिए असंभव है। इस भीषण समस्या का सिर्फ एक पागल-सा लगने वाला उपाय था। किसी दूसरे विमान से इस ध्वस्त विमान में ‘पायलट’ को जमीन से दस हजार फुट ऊपर पहुंचाया जाए।

दूसरी ओर विमान के यात्रियों में खलबली थी। इस घोर विपत्ति के समय में उनके हाव-भाव का चित्रण बहुत ही वास्तविक है। दूसरे विमान से पायलट 409 के ‘कॉकपिट’ तक पहुंच भी जाता है, अंतिम समय रस्सी का छोर खुल जाने से वह आकाश में गिर जाता है। अब तो फ्लाइट 409 का खुदा ही रखवाला है। किंतु नहीं, कैप्टन मर्डोक अपनी प्रेयसी और संस्था की खातिर ध्वस्त विमान के ‘कॉकपिट’ में उतरने का खतरनाक फैसला करते हैं। क्या वे विमान को सकुशल उतारने में सफल होते हैं?

फिल्म : एअरपोर्ट 1975

समय : 1 घंटा 45 मिनट

निर्देशकः जैक स्माइट

पार्श्व संगीत : जॉन काकावस

निर्माता : विलियम फ्रेय

कलाकार : चार्ल्टन हस्टन/कैरेन ब्लैक/जॉर्ज कैनेडी/सुसान क्लार्क/ प्रदर्शन वर्ष : 1974

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