अखर गया अटलजी का देर से आना

8 सितम्बर 2000

अखर गया अटलजी का देर से आनासंयुक्त राष्ट्र सम्मेलन अपने पूरे जोर पर है। अटलजी गुरुवार की दोपहर (अमेरिकी समय के अनुसार) यहां देरी से पहुंचे जबकि विश्व के सभी महत्वपूर्ण नेता कल से यहां मौजूद हैं। सम्मेलन बुधवार से शुरू हो चुका है। पर अटलजी विलंब से यहां पहुंचे हैं। शहर के पूर्वी भाग में जहां सम्मेलन चल रहा है, लिमोसिन गाड़ियों का काफिला नजर आता है। अमेरिकी राष्ट्रपति क्लिंटन, रूसी राष्ट्रपति पुतिन, चीन के जियांग जेमिन, इसराइल के एहुद बराक, फिलिस्तीनी नेता यासेर अराफात पहले दिन अपना भाषण दे चुके हैं। जब भारत का अवसर शुक्रवार को आएगा तब तक सम्मेलन का खुमार उतार पर होगा। बुधवार को दुनियाभर के नेताओं ने एक ऐतिहासिक तस्वीर खिंचवाई। इन्हीं में से एक नेता का कहना था- सहस्राब्दी सम्मेलन एक हजार वर्ष में एक बार होते हैं। करीब 150 देशों के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और राजा आदि यहां मौजूद हैं। यहां के वॉड्रोफ एस्टोरिया होटल में 30 से अधिक नेता रुके हैं। इसमें क्लिंटन, अराफात, बराक शामिल हैं। अटलजी भी यहीं रुके हैं।

इन्हीं में से एक नेता का कहना था- सहस्राब्दी सम्मेलन एक हजार वर्ष में एक बार होते हैं

पर अफसोस इस बात का है कि अटलजी के देर से आगमन से कुछ ऐसा लग रहा है जैसे ‘वर निकासी’ की बजाय ‘कन्या बिदाई’ के समय किसी शादी में शरीक होना। हालांकि उनका स्वास्थ्य सर्वोपरि है। लेकिन हमारे प्रशासकों ने कहीं न कहीं चूक की जो तीन दिन की अहमियत को पूरी तरह भुना न सके।

अटलजी एक जबर्दस्त प्रतिनिधि :

बुधवार को न्यूयॉर्क टाइम्स में पाक सैन्य शासक मुशर्रफ का काफी बड़ा साक्षात्कार था। ऐसे में अटलजी की कमी खलती है। वे दुनिया की कुल आबादी के 1/6 भाग का प्रतिनिधित्व करते हैं। संयुक्त राष्ट्र में अटलजी की व्यक्तिगत धाक भी जबर्दस्त है। वर्षों पहले हिंदी में उनके ओजस्वी भाषण और कुछ वर्षों पूर्व विपक्ष में रहकर भी संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान को दी करारी हार सबके मानस पटल पर अभी भी है। संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थायी सदस्यता के लिए आवाज उठाने का यह सुनहरा अवसर है।

लेकिन हमारे प्रशासकों ने कहीं न कहीं चूक की जो तीन दिन की अहमियत को पूरी तरह भुना न सके

पर जैसा यहां पता चला है कि अटलजी की विश्व के राजनीतिज्ञों और सामरिक महत्व के देशों के नेताओं से कोई खास मुलाकात तय नहीं है। अमेरिका से भी चर्चा का दौर 13 सितंबर के बाद ही है। आशा है कि आने वाले दस दिनों में अटलजी की उपस्थिति और उनके उद्‌गारों से हमारा ये गिला दूर हो जाएगा। प्रेट्र के अनुसार इतिहास का आज दूसरा अवसर था जबकि सुरक्षा परिषद की बैठक विभिन्न देशों और सरकारों के प्रमुखों की उपस्थिति में हुई। इसमें संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों पर विचार किया गया। बैठक में परिषद के सभी 15 सदस्य उपस्थित थे।

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