भूत-प्रेतों से साक्षात्कार

29 जुलाई 1992

भूत-प्रेतों से साक्षात्कार पूना में टाटा मैनेजमेंट ट्रेनिंग सेंटर के रजत जयंती समारोह में बोलते हुए जे.आर.डी. ने एक मजेदार वाकया सुनाया, ‘बात उस वक्त की है, जब पूना में हमने यह बंगला खरीदा था, जहाँ वर्तमान में यह ट्रेनिंग सेंटर चल रहा है। एक रात मेरी पत्नी ने झकझोर कर मुझे नींद में से उठाकर कहा कि मैं उसे धक्का क्यों दे रहा हूं?’ मैंने ऐसा कुछ भी नहीं किया होने से साफ इंकार कर दिया, आखिर गहरी नींद में मुझे ऐसी शरारत कहां सूझती?

क्या विज्ञान और प्रौद्योगिकी में दिन-रात बिताने वाले जे.आर.डी. भूत-प्रेत पर विश्वास करते हैं?

थोड़ी ही देर बाद मेरी बारी थी। शरीर पर किसी के द्वारा धक्का दिए जाने का आभास होने पर जब मैंने मेरी पत्नी से पूछा तो वह भी ऐसी कोई हरकत किए होने से साफ मुकर गईं। मुझे ऐसा लगता है कि वह उस मकान मालकिन की रूह थी, जिसका मकान हमने खरीदा था।’

‘दूसरा वाकया डॉ. होमी भाभा की विमान दुर्घटना में मृत्यु होने के कुछ ही दिनों बाद का है। उसी दुर्घटना में मरने वालों में एक पादरी भी था, जिसकी आत्मिक शांति के लिए हुई प्रर्थना सभा में मैं भी मौजूद था। अगली बार जब मैं स्विट्‌जरलैंड गया, तो मैंने एक रात उसी पादरी को अपने बिस्तर के पास खड़ा पाया।’ क्या विज्ञान और प्रौद्योगिकी में दिन-रात बिताने वाले जे.आर.डी. भूत-प्रेत पर विश्वास करते हैं? मजाकिया लहजे में उत्तर देते हुए जे.आर.डी. ने कहा, ‘अब जब जीवन में दो बार उनसे साक्षात्कार हो चुका है, तो फिर मानना ही पड़ेगा।’

टिप्पणी करें

CAPTCHA Image
Enable Google Transliteration.(To type in English, press Ctrl+g)