रेगिस्तान में हरियाली – कायाकल्प केंद्र

2 अप्रैल 2000

रेगिस्तान में हरियाली – कायाकल्प केंद्रपिछले दिनों तीन दिन की छुट्टी मिली। मैं जयपुर के आसपास कोई ऐसी जगह खोज रहा था, जहां जाकर शरीर और मन दोनों रीचार्ज हो जाएं। तभी किसी ने सुझाया ‘कायाकल्प’ क्यों नहीं जाते? ‘नेचरोपैथी‘ नाम सुनते ही मन में आता है- उबली हुई सब्जियां, मिट्टी की पट्टी का शरीर पर लेप, इलाज आदि-आदि। फिर भी विचार बना ही लिया कि चलो ‘कायाकल्प’ ही चलते हैं, देखें तो सही, जगह क्या है, जब नाम इतना है तो।

जयपुर से कोई 150 किलोमीटर पर सीकर से आगे लक्ष्मणगढ़ जगह है। यहां से प्रसिद्ध हनुमान मंदिर सालासरजी जाने के लिए एक रास्ता कटता है। उसी पर मुख्य मार्ग से कोई 15-16 किलोमीटर की दूरी पर ताराकुंज में बना है ‘शांतिप्रसाद गोयनका कायाकल्प एंड रिर्सच सेन्टर।’ स्थान, हरी घास के बगीचे, फूलों की क्यारियों से घिरा कैम्पस, भव्य इमारत- प्रथम दृष्टि में तो काफी प्रभावी लगा। अंदर जाते ही रिसेप्शन में कमरे की एंट्री की और वहीं पर मुलाकात हुई कायाकल्प के स्थानीय मैनेजर श्री जालोदिया से, जो संयोग से इंदौर के ही थे। परिचयों का सिलसिला निकल पड़ा और बड़ा अच्छा लगा। कायाकल्प मुख्यतः जीवन का पुनर्निर्माण केन्द्र है।

सालासर के हनुमानजी के परम भक्त उद्योगपति, सदैव कर्म में प्रवृत्त रहने वाले कर्मयोगी, स्वप्नदृष्टा, अन्वेषी श्री शांतिप्रकाश गोयनका ने त्रस्त मानवता को रोगमुक्त करने तथा राष्ट्रीय स्वास्थ्य के विकास का सपना देखा कि स्वास्थ्य समस्या का स्थायी तथा सही समाधान भारत की प्राचीन एवं प्रभावी चिकित्सा पद्धति शुद्ध आयुर्वेद, योग, सिद्ध तथा प्राकृतिक चिकित्सा में सन्निहित है। विशाल कायाकल्प सेन्टर के रूप में वह सपना साकार हो उठा है।

जयपुर से कोई 150 किलोमीटर पर सीकर से आगे लक्ष्मणगढ़ जगह है। यहां से प्रसिद्ध हनुमान मंदिर सालासरजी जाने के लिए एक रास्ता कटता है। उसी पर मुख्य मार्ग से कोई 15-16 किलोमीटर की दूरी पर ताराकुंज में बना है ‘शांतिप्रसाद गोयनका कायाकल्प एंड रिर्सच सेन्टर।’

प्राचीन-पवित्र आयुर्वेद, योग तथा प्राकृतिक चिकित्सा विज्ञान द्वारा समस्त पीड़ित मानवता के लिए शारीरिक, मानसिक एवं आत्मिक सुख, शांति प्राप्ति को समर्पित विश्व का अनूठा केंद्र है। करोड़ों रुपयों से निर्मित यह केंद्र परम्परागत प्राचीनतम चिकित्सा पद्धति एवं आधुनिकतम जीवनशैली का बेजोड़ समन्वय एवं स्थापत्य कला का अपूर्व नमूना है। सुख, शांति एवं स्वास्थ्य का प्रकाश फैलाते श्री शांतिप्रकाश गोयनका कायाकल्प एवं अनुसंधान केंद्र में तन, मन तथा चेतना के रूपान्तरण द्वारा जीवन का ‘कायाकल्प’ किया जाता है।

यहां राष्ट्रीय स्वास्थ्य निर्माण का अपूर्व प्रयोग चल रहा है। सरल एवं स्वाभाविक आश्रमीय जीवन पर आधारित रोगियों तथा स्वास्थ्य साधकों का कार्यक्रम प्रातः साढ़े चार बजे प्रारम्भ होकर रात्रि दस बजे स्वास्थ्यदायी सृजनात्मक चिन्तन के साथ समाप्त होता है। स्वास्थ्य संबंधी नित्य नवीन शोधों से परिपूर्ण व्याख्यान एवं नैसर्गिक जीवनशैली, सम्यक चिन्तन, सम्यक विश्राम, सम्यक भोजन तथा प्रकृति के पंच तत्वों के उन्मुक्त सम्यक सेवन के व्यावहारिक ज्ञान से रोगियों को सुसंस्कारित कर स्वस्थ जीवन में प्रतिष्ठित किया जाता है। रोगी यहां से रोग मुक्ति के साथ-साथ चिकित्सक बनकर जाता है। वह समझ जाता है कि रोग क्या है, रोग का कारण क्या है।

केन्द्र में 125 रोगियों के रहने के लिए पृथक-पृथक 56 कमरे, विशाल डाइनिंग हॉल, कम्युनिटी हॉल तथा योग चिकित्सा कक्ष की व्यवस्था इस प्रकार की गई है कि वह गर्मी के दिनों में ठंडा, ठंड के दिनों में गरम रखा जा सके। प्रत्येक कमरा वातानुकूलित है। प्रत्येक कमरे में रंगीन दूरदर्शन (टेलीविजन), ड्रेसिंग टेबल, गलीचा, टेलीफोन आदि आधुनिक सुविधाएं दी गई हैं। प्रत्येक वातानुकूलित कमरा आधुनिक स्नान घर से सुसज्जित है। चिकित्सा के विभागों में हाइड्रो थैरेपी विभाग, मड थैरेपी विभाग, फिजियो थैरेपी एवं जिम विभाग, एक्यूप्रेशर विभाग, मैग्नेट थैरेपी विभाग, योग थैरेपी विभाग, रैकी और वैकल्पिक चिकित्सा विभाग शामिल हैं।

कमरों का भाड़ा पहले पहल तो थोड़ा-सा ज्यादा प्रतीत होता है (तल मंजिल पर डबल रूम 1700 रुपए रोज और पहली मंजिल पर 2200 रुपए रोज क्योंकि ये कमरे थोड़े बड़े और बालकनी के साथ हैं), लेकिन सभी समय का भोजन और अन्य उपचार सुविधाएं मिलाकर यह काफी ठीक है क्योंकि ‘कायाकल्प’ में प्राकृतिक उपचार के साथ-साथ आधुनिक जीवन जीने की व्यवस्था, जनरेटर (जाजोदियाजी ने कहा कि मासिक खर्च में डीजल ही सबसे बड़ा खर्च है।) से सभी वातानुकूलित कमरे और पूरे कैम्पस की बिजली का खर्च और मध्यम वर्ग के परिवारों के लिए पात्रता सिद्ध होने पर निःशुल्क उपचार की व्यवस्था भी है।

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