द डे ऑव द जैकॉल

17 जुलाई 1991

द डे ऑव द जैकॉल  अंग्रेजी फिल्मों का इतिहास- हत्या, अपहरण एवं अपराध कथाओं में संख्या एवं गुणवत्ता दोनों ही मापदंडों में बेजोड़ है। पर्दे पर चित्रित कल्पना-दृश्य दर्शक को कई बार विश्वास करने के लिए बाध्य करते हैं। लगातार बढ़ रही इस भीड़ में कुछ फिल्में ऐसी हैं, जो वर्षों बाद भी वही रोमांच और सिरहन पैदा कर देती हैं।

सुप्रसिद्ध अंगरेजी उपन्यासकर फ्रेड्रिक फोरसिथ के बहुचर्चित उपन्यास ‘द डे ऑव द जैकॉल’ पर आधारित इसी नाम की फिल्म भी इसी श्रेणी में है। साठ के दशक के पूर्वार्द्ध में, जब फ्रांस के अधिकांश नागरिक वहां के जनप्रिय नेता और राष्ट्राध्यक्ष जनरल चार्ल्स डी गॉल द्वारा अल्जीरिया को गुलामी से मुक्त कर देने पर प्रसन्न थे, वहीं फ्रांसीसी सेना के कुछ अफसर जनरल डी गॉल की इस कथित गद्दारी के लिए उन्हें मौत के घाट उतार देना चाहते थे।

ओ.ए.एस. नामक इस गुट के कई असफल प्रयासों के बाद उसके नेता कर्नल रोडीन (एरीक पोर्टर) द्वारा एक स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय हत्यारे को पांच लाख डॉलर की रकम देकर इस कार्य हेतु भाड़े पर लिया जाता है। यहीं से शुरू हो जाता है फिल्म का कुर्सी के कोने से चिपकाए रखने वाला रोमांच। किस प्रकार एक व्यक्ति कैसे फ्रांस सहित योरोप के कई राष्ट्रों की पूरी पुलिस एवं खुफिया व्यवस्था को बार-बार चकमा देकर जनरल डी गॉल तक पहुंचता है- यही फिल्म की पकड़ है।

सही मायनों में तो योरोप के केनवास पर यह चोर-पुलिस की दौड़ जैकॉल एवं लिबेल के आपस में बिछी एक शतरंज की बाजी है। बस, दांव पर हैं- जनरल डी गॉल

जैकॉल उर्फ चार्ल्स केलथ्राप उर्फ पॉल डबलिन उर्फ पियरे लिंडक्विस्ट जैसे कपड़ों की तरह नाम, वेशभूषा, भाषा, चेहरा, चाल-ढाल बदल-बदलकर कार्य करने वाला यह व्यक्ति (एडवर्ड फॉक्स) दुर्दांत हत्यारा होने के बावजूद अत्यंत मनमोहक एवं लुभावने व्यक्तित्व का स्वामी है। प्रथम दृष्टया हीरो उर्फ एंटी हीरो उर्फ विलेन को देखकर कमिश्नर क्लॉड लिबेल (मिचेल लॉन्सर्डल) भी नहीं कह सकते कि यह एक पेशेवर हत्यारा है, जबकि वे ‘जैकॉल’ को गिरफ्तार करने के लिए बनाए गए विशेष पुलिस दल के प्रमुख हैं। निर्देशक फ्रेड जिनेमान ने फिल्म की गति पर बहुत अच्छी पकड़ रखी है। जिस प्रकार एक श्रेष्ठ पेशेवर अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए साम-दाम-दंड-भेद सभी का इस्तेमाल बखूबी करता है, उसी प्रकार ‘जैकॉल’ जालसाजी, तस्करी, चोरी, स्त्री संसर्ग आदि सभी हथकंडों की सहायता लेकर पूरे योरोप की पुलिस एवं प्रशासन क्षमता को अकेला चकमा देता है- यही इस फिल्म की उत्तेजना है। सही मायनों में तो योरोप के केनवास पर यह चोर-पुलिस की दौड़ जैकॉल एवं लिबेल के आपस में बिछी एक शतरंज की बाजी है। बस, दांव पर हैं- जनरल डी गॉल।

द डे ऑव अ जैकॉल

भाषा : अंग्रेजी/रंगीन

समय : 135 मिनट

निर्माण : यूनिवर्सल पिक्चर्स (1973)

निर्देशक : फ्रेड जिनेमान

निर्माता : जॉन वूल्फ

पार्श्व संगीत : जॉर्ज डीलरी

फोटोग्रॉफी : जीन टर्नर

कलाकार : एडवर्ड फॉक्स, एलन बदेल, टॉनी ब्रिटॉन, सायरील कुसाक, एरीकपोर्टर, मीचेल लॉन्सडेल

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