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	<title>Jitendra Muchhal &#124; Jitendra Muchhal Website &#124; J Muchhal &#124; जीतेंद्र मुछाल &#187; अमेरिका में भारत | अमेरिका में भारतीय स्थिति</title>
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		<title>न्यूयॉर्क में खाने की &#8216;छप्पन दुकान&#8217;</title>
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		<pubDate>Mon, 09 Apr 2012 07:39:41 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[अमेरिका में भारत]]></category>
		<category><![CDATA[छप्पन दुकान]]></category>
		<category><![CDATA[न्यूयॉर्क]]></category>
		<category><![CDATA[फूड रियलिटी शो]]></category>
		<category><![CDATA[वर्ली फूड फेस्टिवल]]></category>
		<category><![CDATA[शेफ]]></category>
		<category><![CDATA[संजीव कपूर]]></category>

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		<description><![CDATA[न्यूयॉर्क में खाने की &#8216;छप्पन दुकान&#8217; वर्ली फूड फेस्टिवल में पूरा आनंद कहीं गरमा-गरम आलूटिक्की, तो कहीं लजीज भेलपुरी। कहीं स्वादिष्ट &#8216;राज-कचोरी&#8216;, और कहीं पराठा और पनीर। ना मैं इंदौर की छप्पन दुकान पे हूं और ना ही दिल्ली के निरूलास में, यह नजारा था 5 अप्रैल की शाम वर्ली फूड फेस्टिवल के दूसरे सोपान में। जहां हजारों की तादाद में न्यूयॉर्क के भारतीय भोजनप्रेमियों ने कई तरह के शाकाहारी और निरामिश भोजन का &#8216;आस्वादन&#8216; किया। वर्तमान में चल रही [...]]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p align="center"><b>न्यूयॉर्क में खाने की </b><b>&#8216;छप्पन दुकान&#8217;</b></p>
<p align="center"><b>वर्ली फूड फेस्टिवल में पूरा आनंद</b></p>
<p><img class="alignleft size-full wp-image-2057" alt="न्यूयॉर्क में खाने की 'छप्पन दुकान'" src="https://www.jmuchhal.com/wp-content/uploads/2013/01/1111.jpg" width="311" height="307" />कहीं गरमा-गरम आलूटिक्की, तो कहीं लजीज भेलपुरी। कहीं स्वादिष्ट &#8216;<em>राज-कचोरी</em>&#8216;, और कहीं पराठा और पनीर। ना मैं इंदौर की छप्पन दुकान पे हूं और ना ही दिल्ली के निरूलास में, यह नजारा था 5 अप्रैल की शाम वर्ली फूड फेस्टिवल के दूसरे सोपान में। जहां हजारों की तादाद में न्यूयॉर्क के भारतीय भोजनप्रेमियों ने कई तरह के शाकाहारी और निरामिश भोजन का &#8216;<em>आस्वादन</em>&#8216; किया।</p>
<p>वर्तमान में चल रही भोजन, टॉप शेफ, फूड रियलिटी शो आदि की लोकप्रियता को देखते हुए वर्ली सिंह और उनके पति ने &#8216;<em>वर्ली फूड फेस्टिवल</em>&#8216; के नाम से भोजन का मेला न्यूयॉर्क में लगाया। न्यूयॉर्क, न्यूजर्सी के सभी नामी-गिरामी भारतीय रेस्टोरेंट ने यहां बूथ लगाए, आने वालों को अपनी 2-3 विशेष ‍&#8217;<em>डिशेज</em>&#8216; का स्वाद चखाया। साथ ही में ग्लैमर और ख्याति को बढ़ाने के लिए मुख्य अतिथि और आकर्षण के केंद्र विख्यात संजीव कपूर और पद्मा लक्ष्मी और टॉप शेफ में भारत में प्रचलित हो रहे कई उभरते &#8216;शेफ&#8217;।</p>
<div class="simplePullQuoteRightPerpal">आकर्षण के केंद्र विख्यात संजीव कपूर और पद्मा लक्ष्मी और टॉप शेफ में भारत में प्रचलित हो रहे कई उभरते &#8216;शेफ&#8217;<span></span></div>
<p>न्यूयॉर्क के मेट्रोपॉलिटन पैवेलियन में शाम 5 से 10 के इस आयोजन में हजारों की तादाद में इस इलाके के प्रवासी और कई अमेरिकन लोगों ने एक ही छत के नीचे सारे मशहूर भारतीय रेस्टोरेंट्‍स के खाने के स्वाद का आनंद लिया। इंट्री फीस $100 और $250 थी। अंदर सभी स्टॉल्स पे &#8216;<em>सैम्पलिंग</em>&#8216; का कोई शुल्क नहीं था। इसके साथ सभी को इन रेस्टोरेंट्‍स के डिस्काउंट कूपन भी दिए गए। कोई 50 से ‍अधिक रेस्टोरेंट्‍स ने वहां पर अपने बूथ लगाए थे। लोग दफ्तरों से सीधे टाई-सूट और काम की पोशाक में आए थे। लेकिन अंगुलियों में भरीं &#8216;<em>डिशेज</em>&#8216; के स्वाद के चटखारे लेने में कोई लाजो-शरम नहीं थी।</p>
<p>वर्ली फूड फेस्टिवल का यह दूसरा साल था, और इसके बाद यह अगले साल दुबई में आयोजित किया जाने वाला है। टीवी पर सदा छाए हुए संजीव कपूर और पद्मा लक्ष्मी को इतने पास से देखने, बात करने और हां, पाक-प्रणाली की विधियां बताते हुए लोगों को बहुत आनंद आया। इंदौरी हूं, मालवी स्वाद अंतस में बसा है,  गोया यहां पर श्रीमाया या जैन-मधुरम का एक बूथ होता और यहां लोग पाये से उतरती जलेबी और मसालेदार गराड़ू खाते तो यह सब भी धन्य हो जाते!!</p>
<p><em>www.Varlifoodfestival.com</em></p>
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		<title>कर्म साधना ही असली दिवाली</title>
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		<pubDate>Thu, 27 Oct 2011 11:23:04 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[अमेरिका में भारत]]></category>
		<category><![CDATA[अनिल अंबानी]]></category>
		<category><![CDATA[कर्म साधना]]></category>
		<category><![CDATA[दिवाली]]></category>
		<category><![CDATA[न्यूयॉर्क]]></category>
		<category><![CDATA[रतन टाटा]]></category>
		<category><![CDATA[लक्ष्मी-पूजा]]></category>

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		<description><![CDATA[दिवाली के दिन 26 अक्टूबर को एयर इंडिया की मुंबई-न्यूयॉर्क उड़ान एआई-191 ने मुंबई से मंगलवार रात 1.30 बजे उड़ान भरी। डायरेक्ट फ्लाइट के लिए अमेरिका की दूरी 15.30 घंटे में तय होनी थी। 300 से अधिक यात्रियों वाली उड़ान में सिर्फ 37 यात्री थे। जहाज के कप्तान परमार के अनुसार भी ये सबसे हल्की उड़ान थी। 37 यात्रियों में एक मैं था, एक मेरा अमेरिकन दोस्त बॉब और दो थे बिलेनियर रतन टाटा और अनिल अंबानी। टाटा को तो [...]]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><img class="alignleft size-full wp-image-2115" alt="कर्म साधना ही असली दिवाली" src="https://www.jmuchhal.com/wp-content/uploads/2011/10/144.jpg" width="311" height="307" /><span class="dropcap">दि</span>वाली के दिन 26 अक्टूबर को एयर इंडिया की मुंबई-न्यूयॉर्क उड़ान एआई-191 ने मुंबई से मंगलवार रात 1.30 बजे उड़ान भरी। डायरेक्ट फ्लाइट के लिए अमेरिका की दूरी 15.30 घंटे में तय होनी थी। 300 से अधिक यात्रियों वाली उड़ान में सिर्फ 37 यात्री थे। जहाज के कप्तान परमार के अनुसार भी ये सबसे हल्की उड़ान थी। 37 यात्रियों में एक मैं था, एक मेरा अमेरिकन दोस्त बॉब और दो थे बिलेनियर रतन टाटा और अनिल अंबानी।</p>
<p>टाटा को तो मैंने प्लेन के टेकऑफ के समय देख लिया था, लेकिन प्लेन के स्टाफ ने अनिल अंबानी के बारे में भी बताया। अनिल अंबानी सीट-1 पर और उसके ठीक पीछे रतन टाटा सीट-2 पर बैठे थे। यात्रा के दौरान दोनों से मिलने और फोटो की इच्छा जाहिर की लेकिन फर्स्ट क्लास के यात्रियों से मिलने के लिए सब निर्णय जहाज का कप्तान ही लेता है।</p>
<p>न्यूयॉर्क में सुबह 7.30 बजे उतरते समय दोनों को बहुत करीब से देखा और व्यक्तिगत रूप से अनिल अंबानी और रतन टाटा को हैप्पी दिवाली कहा, जिसका उन्होंने बड़े मुस्कराते हुए उत्तर दिया। अनिल अंबानी हरी टी-शर्ट और ऊपर से ओवरकोट और टाटा बिजनेस शर्ट और ओवरकोट में थे।</p>
<div class="simplePullQuoteRight">कर्म-साधना ही असली लक्ष्मी-पूजा है, बता दिया रतन और अनिल ने!! हैप्पी दिवाली&#8230;.।<span></span></div>
<p>दोनों के लिए अमेरिका में भी प्लेन के दरवाजे पर उनके भारतीय मूल के आफिसर रिसीव करने आए थे, इमीग्रेशन में दोनों दस खिड़कियों की दूरी पर खड़े थे और फिर रतन टाटा तो सामान के लिए बैगेज एरिया में भी पांच मिनट रुके।</p>
<p>टाटा को प्लेन में देखकर अच्छा लगा लेकिन अनिल अंबानी को देखकर बहुत आश्चर्य हुआ कि दिवाली के दिन अपने देश और घर से दूर ये लक्ष्मी पुत्र किस लक्ष्मी की सेवा में सात समुंदर पार आए थे? क्योंकि अनिल अंबानी तो वैसे भी काफी धार्मिक हैं। क्या प्लेन में इन दोनों ने एक-दूसरे से कोई बात की, वो फर्स्ट क्लास के पर्दे के पीछे छुपा है। दिवाली के दिन अमेरिका में अनिल अंबानी और रतन टाटा को हैप्पी दिवाली बोलकर और सुनकर मैं तो धन्य हो गया। और हां, मेरी मां सहित भारत की हर मां के लिए जिनका बेटा दिवाली के दिन उनके साथ नहीं हैं, एक संदेश कि कोकिला बेन अंबानी भी आप ही की तरह हैं!! कर्म-साधना ही असली लक्ष्मी-पूजा है, बता दिया रतन और अनिल ने!! हैप्पी दिवाली&#8230;.।</p>
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		<title>पार्क एवेन्यू बना नॉर्थ ब्लॉक</title>
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		<pubDate>Sat, 10 Sep 2011 06:28:08 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[अमेरिका में भारत]]></category>
		<category><![CDATA[क्लिंटन]]></category>
		<category><![CDATA[नॉर्थ ब्लॉक]]></category>
		<category><![CDATA[पार्क एवेन्यू]]></category>
		<category><![CDATA[प्रणब मुखर्जी]]></category>
		<category><![CDATA[मनमोहनसिंह]]></category>

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		<description><![CDATA[प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह तो इस वक्त न्यूयॉर्क में हैं ही, लेकिन भारत सरकार के छह और वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री भी उन्हीं तारीखों में न्यूयॉर्क-वॉशिंगटन में विभिन्न बैठकों में शरीक थे। प्रतिवर्ष सितंबर माह का दूसरा पखवाड़ा न्यूयॉर्क-वॉशिंगटन में विश्व के नेताओं का जमघट लग जाता है। न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र की महासभा और वॉशिंगटन में आईएमएफ और वर्ल्ड बैंक की सालाना बैठक। इसी के साथ अब नया जुड़ गया है पूर्व राष्ट्रपति क्लिंटन द्वारा स्थापित &#8216;क्लिंटन ग्लोबल इनिशिएटिव&#8217;। मानो सारी दुनिया [...]]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><a href="https://www.jmuchhal.com/park-avenue-bana-north-block/park_avenue" rel="attachment wp-att-3726"><img src="https://www.jmuchhal.com/wp-content/uploads/2011/09/Park_Avenue.jpg" alt="Park_Avenue" width="311" height="307" class="alignleft size-full wp-image-3726" /></a>प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह तो इस वक्त न्यूयॉर्क में हैं ही, लेकिन भारत सरकार के छह और वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री भी उन्हीं तारीखों में न्यूयॉर्क-वॉशिंगटन में विभिन्न बैठकों में शरीक थे।</p>
<p>प्रतिवर्ष सितंबर माह का दूसरा पखवाड़ा न्यूयॉर्क-वॉशिंगटन में विश्व के नेताओं का जमघट लग जाता है। न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र की महासभा और वॉशिंगटन में आईएमएफ और वर्ल्ड बैंक की सालाना बैठक। इसी के साथ अब नया जुड़ गया है पूर्व राष्ट्रपति क्लिंटन द्वारा स्थापित &#8216;क्लिंटन ग्लोबल इनिशिएटिव&#8217;। मानो सारी दुनिया की सरकारें न्यूयॉर्क और वॉशिंगटन में आ जाती हैं। प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह के दल में विदेश मंत्री एसएम कृष्णा शरीक हैं, वहीं वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी आईएमएफ और वर्ल्ड बैंक की बैठक में आए हैं। उनके साथ ऊर्जा मंत्री सुशील कुमार शिंदे, वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा और गैर-परम्परागत ऊर्जा मंत्री फारूख अब्दुल्ला भी विभिन्न अमेरिकन कंपनियों और निवेशकों से बैठक और विचार-विमर्श के लिए आए हैं। इस समय स्वास्थ्य मंत्री गुलाब नबी आजाद चिकित्सा से संबंधित एक बैठक में भाग लेने यहां आए हैं। यह सभी ‍वरिष्ठ मंत्री न्यूयॉर्क और वॉशिंगटन में पूरी बैठकों और मुलाकातों में व्यस्त हैं और उसके साथ विकसित देशों की आर्थिक मंदी और भारत में गृह-वित्तमंत्री की &#8216;<em>तकरार</em>&#8216; ने घटनाक्रम को और भी सुर्ख बना दिया है।</p>
<div class="simplePullQuoteRight">मानो सारी दुनिया की सरकारें न्यूयॉर्क और वॉशिंगटन में आ जाती हैं<span></span></div>
<p>इन मंत्रियों के साथ रतन टाटा, राजन मित्तल जैसे भारत के शीर्ष उद्योगपति और प्रशासक भी अमेरिकन निवेशकों और कंपनियों से चर्चा करने यहां आए हैं। तभी तो &#8216;<em>प्रणब दा</em>&#8216; साधारणत: मनमोहनजी से मिलने गाड़ी में साउथ ब्लॉक से सामने नॉर्थ ब्लॉक जाते होंगे, आज वही सिंह से मिलने वॉशिंगटन से न्यूयॉर्क आ रहे हैं। यही नहीं, मंत्री कपिल सिब्बल, ज्योतिरादित्य सिंधिया और सुबोधकांत सहाय इन्हीं दिनों में दूसरे देशों के दौरों पर हैं।</p>
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		<title>नस्दक पर शाहरुख की दस्तक</title>
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		<pubDate>Tue, 02 Feb 2010 11:11:09 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[अमेरिका में भारत]]></category>
		<category><![CDATA[काजोल]]></category>
		<category><![CDATA[नस्दक]]></category>
		<category><![CDATA[माई नेम इज खान]]></category>
		<category><![CDATA[शाहरुख]]></category>
		<category><![CDATA[शाहरुख खान]]></category>
		<category><![CDATA[स्टॉक मार्केट]]></category>

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		<description><![CDATA[नस्दक स्टॉक मार्केट की टाइम स्क्वेयर के बीच एक काँच की इमारत है, जो कहलाती है नस्दक मार्केट साइट। रोज सुबह 9.30 बजे मार्केट के शुरू होने के समय बड़ी कंपनियाँ और उनके प्रबंधक वहाँ होते हैं। आज सोमवार एक फरवरी को नस्दक मार्केट साइट के बाहर थोड़ी भीड़ जमा थी, वो भी भारतीय प्रवासियों की। खास वजह थी : आज सुबह नस्दक की शुरुआत के समय वहाँ शाहरुख खान और काजोल आए हुए थे, अपनी आने वाली ‍फिल्म &#8216;माई [...]]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><img class="alignleft size-full wp-image-1742" alt="नस्दक पर शाहरुख की दस्तक  " src="https://www.jmuchhal.com/wp-content/uploads/2010/02/137.jpg" width="311" height="307" /><span class="dropcap">न</span>स्दक स्टॉक मार्केट की टाइम स्क्वेयर के बीच एक काँच की इमारत है, जो कहलाती है नस्दक मार्केट साइट। रोज सुबह 9.30 बजे मार्केट के शुरू होने के समय बड़ी कंपनियाँ और उनके प्रबंधक वहाँ होते हैं। आज सोमवार एक फरवरी को नस्दक मार्केट साइट के बाहर थोड़ी भीड़ जमा थी, वो भी भारतीय प्रवासियों की।</p>
<p><strong>खास वजह थी</strong> : आज सुबह नस्दक की शुरुआत के समय वहाँ शाहरुख खान और काजोल आए हुए थे, अपनी आने वाली ‍फिल्म &#8216;<em>माई नेम इज खान</em>&#8216; का प्रचार करने।</p>
<p>नस्दक इतिहास में शायद पहली बार किसी विदेशी फिल्म का इस तरह प्रचार हो रहा था। बंद गले की काली जोधपुरी में शाहरुख और सुर्ख लाल सलवार-कुर्ते में काजोल को देखकर वहाँ एकत्रित चहेतों को सर्द सुबह में गर्मी आ गई। मार्केट की शुरुआत के बाद शाहरुख-काजोल टाइम स्क्वेयर पर आए और वहाँ खड़े प्रशंसकों और पत्रकारों के बीच चंद पल रहे। चूँकि सुबह का समय था और इस कार्यक्रम की ज्यादा लोगों को जानकारी नहीं थी, इसलिए थोड़ी ही भीड़ जमा थी।</p>
<p>&#8216;<em>माई नेम इज खान</em>&#8216; के निर्माण और वितरण में अमेरिकन कंपनी फॉक्स सर्चलाइट भी संलग्न है और फिल्म की अधिकांश शूटिंग अमेरिका में ही की गई है।</p>
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		<title>न्यूयॉर्क में दोस्तों को देखकर उमड़ा प्यार</title>
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		<pubDate>Sat, 21 Nov 2009 11:08:50 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[अमेरिका में भारत]]></category>
		<category><![CDATA[अनुराग कश्यप]]></category>
		<category><![CDATA[न्यूयॉर्क]]></category>
		<category><![CDATA[लॉ फर्म मोसेस एंड सिंगर]]></category>
		<category><![CDATA[सिंधिया स्कूल ग्वालियर]]></category>

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		<description><![CDATA[किसी स्कूल के पुराने विद्यार्थियों का बरसों बाद मिलना अब परंपरा सी हो गई है। अमेरिका निवासी ऐसे भारतीयों को एक मंच पर लाने की पहल भारत के दस पब्लिक स्कूलों ने की है। न्यूयॉर्क में यह काम जितेन्द्र मुछाल व नीरज लाल ने कर दिखाया। 18 नवंबर को न्यूयॉर्क की लॉ फर्म मोसेस एंड सिंगर के कार्यालय में मिले पुराने विद्यार्थी न केवल मिले बल्कि ढेरों गप्प लगाई और भोजन का लुत्फ भी लिया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे [...]]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><a href="https://www.jmuchhal.com/newyork-mein-doston-ko-dekhkar-umda-pyar/soba_alumni_pic" rel="attachment wp-att-3699"><img src="https://www.jmuchhal.com/wp-content/uploads/2009/11/soba_alumni_pic.jpg" alt="न्यूयॉर्क में दोस्तों को देखकर उमड़ा प्यार" width="311" height="307" class="alignleft size-full wp-image-3699" /></a><span class="dropcap">कि</span>सी स्कूल के पुराने विद्यार्थियों का बरसों बाद मिलना अब परंपरा सी हो गई है। अमेरिका निवासी ऐसे भारतीयों को एक मंच पर लाने की पहल भारत के दस पब्लिक स्कूलों ने की है। न्यूयॉर्क में यह काम जितेन्द्र मुछाल व नीरज लाल ने कर दिखाया।</p>
<p><strong>18 नवंबर</strong> को न्यूयॉर्क की लॉ फर्म मोसेस एंड सिंगर के कार्यालय में मिले पुराने विद्यार्थी न केवल मिले बल्कि ढेरों गप्प लगाई और भोजन का लुत्फ भी लिया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे भारतीय काउंसलर जरनल प्रभु दयाल।</p>
<p>फिल्म निर्माता व निर्देशक अनुराग कश्यप भी उपस्थित थे। जो सिंधिया स्कूल ग्वालियर के 1989 बैच के विद्यार्थी रहे है। कार्यक्रम में सिंधिया स्कूल ग्वालियर, मेयो कॉलेज अजमेर, दून स्कूल देहरादून, लारेंस स्कूल सनावर, लारेंस स्कूल लवडेल, डेली कॉलेज इंदौर, सिंधिया कन्या विद्यालय, ग्वालियर, एमजीडी जयपुर, वेलहेम्स गर्ल्स व राजकुमार कॉलेज राजकोट के पुराने विद्यार्थियों ने भाग लिया।</p>
<p><iframe width="680" height="400" src="https://www.youtube.com/embed/_xG97flJ9Rg?feature=player_detailpage" frameborder="0" allowfullscreen></iframe></p>
<p><iframe width="680" height="400" src="https://www.youtube.com/embed/OJbtR0pRuHM?feature=player_detailpage" frameborder="0" allowfullscreen></iframe></p>
]]></content:encoded>
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		<title>न्यू जर्सी में हिन्दी महोत्सव</title>
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		<pubDate>Tue, 17 Jun 2008 12:14:37 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[अमेरिका में भारत]]></category>
		<category><![CDATA[कवि सम्मेलन]]></category>
		<category><![CDATA[दिनकर]]></category>
		<category><![CDATA[निराला]]></category>
		<category><![CDATA[प्रसाद]]></category>
		<category><![CDATA[भारतीय संस्कृति]]></category>
		<category><![CDATA[हिन्दी महोत्सव]]></category>
		<category><![CDATA[हिन्दी यूएसए]]></category>

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		<description><![CDATA[अमेरिका में भारतीय संस्कृति के सभी आयाम अपनी जड़ें मजबूत कर रहे हैं। इनमें सर्वोपरि है भाषा, जो किसी भी संस्कृति और सभ्यता की पहचान होती है। &#8216;हिन्दी यूएसए&#8217; नामक संस्थान पिछले सात सालों से न्यू जर्सी अमेरिका के कई राज्यों में हिन्दी के प्रचार-प्रसार में कार्यरत है। विगत सप्ताहांत 14-15 जून को न्यू जर्सी में हिन्दी यूएसए ने अपने &#8216;वार्षिक हिन्दी महोत्सव&#8216; का सफल आयोजन किया। अमेरिका में हिन्दी को स्थापित करने का बीड़ा : हिन्दू यूएसए का मुख्‍य [...]]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><img class="alignleft size-full wp-image-2073" alt="न्यू जर्सी में हिन्दी महोत्सव" src="https://www.jmuchhal.com/wp-content/uploads/2008/06/127.jpg" width="311" height="307" /><span class="dropcap">अ</span>मेरिका में भारतीय संस्कृति के सभी आयाम अपनी जड़ें मजबूत कर रहे हैं। इनमें सर्वोपरि है भाषा, जो किसी भी संस्कृति और सभ्यता की पहचान होती है। &#8216;हिन्दी यूएसए&#8217; नामक संस्थान पिछले सात सालों से न्यू जर्सी अमेरिका के कई राज्यों में हिन्दी के प्रचार-प्रसार में कार्यरत है। विगत सप्ताहांत 14-15 जून को न्यू जर्सी में हिन्दी यूएसए ने अपने &#8216;<em>वार्षिक हिन्दी महोत्सव</em>&#8216; का सफल आयोजन किया।</p>
<p><strong>अमेरिका में हिन्दी को स्थापित करने का बीड़ा</strong> : हिन्दू यूएसए का मुख्‍य उद्‍देश्य है अमेरिका की शिक्षा प्रणाली में हिन्दी को ऐच्छिक भाषा के रूप में स्थापित करना, अमेरिका में जन्मी-बसी प्रवासी पीढ़ी को हिन्दी का बुनियादी ज्ञान देना और हिन्दी के प्रचार के लिए अमेरिका में शिक्षकों को तैयार करना।</p>
<div class="simplePullQuoteRightPerpal">हिन्दी यूएसए एक वृहद रूप ले चुका है। 124 से अधिक कार्यकर्ता इससे जुड़े हुए हैं, जो प्रति सप्ताह अमेरिका में करीब 25 पाठशालाओं में 1200 से अधिक बच्चों को हिन्दी पढ़ाते हैं<span></span></div>
<p>एक दंपति देवेन्द्र और रुचिता सिंह के प्रयासों से प्रारंभ होकर अब हिन्दी यूएसए एक वृहद रूप ले चुका है। 124 से अधिक कार्यकर्ता इससे जुड़े हुए हैं, जो प्रति सप्ताह अमेरिका में करीब 25 पाठशालाओं में 1200 से अधिक बच्चों को हिन्दी पढ़ाते हैं। संस्थान ने कनिष्ठ से वरिष्ठ तक हिन्दी के नौ विभिन्न स्तरों का पाठ्‍यक्रम तैयार किया है, जिसके आधार पर शिक्षकों और छात्रों को तैयार किया जाता है। सिर्फ कार्यकर्ताओं के सहयोग और समर्पण से तेजी से बढ़ रहे इस संस्थान में कोई पदाधिकारी नहीं है, फिर भी इसकी पकड़ और प्रगति सराहनीय है।</p>
<p><strong>हिन्दी महोत्सव के नाम से वार्षिकोत्सव</strong> : हिन्दी यूएसए ने अपने भगीरथ प्रयासों से प्रतिवर्ष एक महाकुंभ के रूप में &#8216;<em>हिन्दी महोत्सव</em>&#8216; मनाना शुरू किया। न्यू जर्सी के समरसेट विद्‍यालय में हाल में संपन्न दो दिवसीय वार्षिकोत्सव में 500 से अधिक बच्चों ने भाग लिया। हिन्दी कविता पाठ, हिन्दी शब्द अंताक्षरी और भारतीय संस्कृति से जुड़े अन्य कार्यक्रमों से पूरा परिसर हिंदीमय हो गया था। अमेरिका में ही पले-बसे प्रवासी बच्चों के मुख से निराला, प्रसाद, दिनकर की कविताएँ सुनना एक अनूठा अनुभव था। महोत्सव के मुख्‍य कार्यक्रम के रूप में हिन्दी यूएसए ने हिन्दी कवि सम्मेलन का आयोजन किया, जिसमें ओमप्रकाश आदित्य, राजेश चेतन और बाबा सत्यनारायण मौर्य ने काव्यपाठ से श्रोताओं को हिन्दी से ओतप्रोत कर दिया।</p>
<p>ओमप्रकाश आदित्य ने तो मंच से यहाँ तक कह दिया कि कि आने वाली पीढ़ी में हिन्दी का इतना आदर और प्रचार-प्रसार तो अब भारत में भी लुप्त होता जा रहा है। विगत वर्षों में हिन्दी महोत्सव में ‍नीतीश भारद्वाज, राजू श्रीवास्तव, बाबा रामदेव जैसी हस्तियाँ मुख्‍य अतिथि रह चुकी हैं। महोत्सव के उपलक्ष में हिन्दी यूएसए &#8216;<em>कर्मभूमि</em>&#8216; के नाम से स्मारिका भी प्रकाशित करती है। संस्था की जानकारी www.hindiusa.org पर भी उपलब्ध है।</p>
<p style="text-align: right;">
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		<title>न्यूयॉर्क में भारत का अतुल्य उत्सव</title>
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		<pubDate>Wed, 26 Sep 2007 12:04:48 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[अमेरिका में भारत]]></category>
		<category><![CDATA[अतुल्य! भारत]]></category>
		<category><![CDATA[इनक्रेडिबल इंडिया]]></category>
		<category><![CDATA[प्रणब मुखर्जी]]></category>
		<category><![CDATA[प्रवासी भारतीय दिवस]]></category>
		<category><![CDATA[मैनहटन]]></category>
		<category><![CDATA[सुनिल मित्तल]]></category>

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		<description><![CDATA[स्वतंत्रता के साठ वर्षों में भारत की विविधता में एकता और प्रगति का अद्भुत दृश्य-श्रृव्य और रसमय उत्सव का 23 सितम्बर को न्यूयॉर्क में शुभारंभ हुआ। इनक्रेडिबल इंडिया-60! (अतुल्य! भारत) उत्सव के परचम तले भारत के राजनीतिक, आर्थिक, कला और सांस्कृतिक जगत के दिग्गज न्यूयॉर्क में एकत्रित हुए हैं। सीआईआई और भारत सरकार के आठ मंत्रालयों के इस अतुल्य सामूहिक प्रयास ने वाकई भारत के हर पहलू को न्यूयॉर्क के आँगन में उतार दिया है। देश के बाहर पहली बार [...]]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><img src="https://www.jmuchhal.com/wp-content/uploads/2007/09/JM_5_incredibleindia.jpg" alt="न्यूयॉर्क में भारत का अतुल्य उत्सव" width="311" height="307" class="alignleft size-full wp-image-2880" />स्वतंत्रता के साठ वर्षों में भारत की विविधता में एकता और प्रगति का अद्भुत दृश्य-श्रृव्य और रसमय उत्सव का 23 सितम्बर को न्यूयॉर्क में शुभारंभ हुआ। इनक्रेडिबल इंडिया-60! (अतुल्य! भारत) उत्सव के परचम तले भारत के राजनीतिक, आर्थिक, कला और सांस्कृतिक जगत के दिग्गज न्यूयॉर्क में एकत्रित हुए हैं। सीआईआई और भारत सरकार के आठ मंत्रालयों के इस अतुल्य सामूहिक प्रयास ने वाकई भारत के हर पहलू को न्यूयॉर्क के आँगन में उतार दिया है।</p>
<p>देश के बाहर पहली बार मनाए जा रहे &#8216;<em>प्रवासी भारतीय दिवस</em>&#8216; में भारत का प्रतिनिधित्व करने विदेशमंत्री प्रणब मुखर्जी, वित्तमंत्री चिदम्बरम, वाणिज्य मंत्री कमलनाथ और एनआरआई मंत्री व्यालार रवि सभी आए हुए हैं। सीआईआई के अध्यक्ष सुनिल मित्तल, पूर्व अध्यक्ष नंदन निलेकनी और गोदरेज, किर्लोस्कर, कल्याणी, एचडीएफसी, बिरला औद्योगिक समूह के प्रमुख इस आयोजन में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।</p>
<p><strong>न्यूयॉर्क की सड़कों पर भारत</strong> : पिछले दिनों में मानों भारत वाकई मैनहटन की सड़कों और जनजीवन में छा गया। पार्क एवेन्यू और टाइम्स स्क्वेयर पर चारों ओर इनक्रेडिबल इंडिया-60! के पोस्टर लगे हुए हैं। न्यूयॉर्क में चल रही यात्री बसों पर भारत के विहंगम दृश्य यहाँ के लोगों में कौतूहल पैदा कर रहे हैं।</p>
<div class="simplePullQuoteRight">हिंदुस्तान के हर कोने से 150 से अधिक कलाकार न्यूयॉर्क आए हैं<span></span></div>
<p><strong>वृहद् आयोजन</strong> : बताया जा रहा है कि इस पूरे आयोजन पर करीब 40 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं, जिसकी मेजबानी भारत की मुख्य कंपनियाँ कर रही हैं। हिंदुस्तान के हर कोने से 150 से अधिक कलाकार न्यूयॉर्क आए हैं। आयोजन में ब्रायंट पार्क, बस स्टेशन, न्यूयॉर्क पब्लिक लाइब्रेरी, लिंकन सेंटर और साउथ स्ट्रीट सीपोर्ट जैसे न्यूयॉर्क के मुख्य पर्यटक आकर्षणों में भारतीय जीवन के अलग-अलग रंग छाए हुए हैं।</p>
<p>ब्रायंट पार्क में तो ताजमहल का एक विशाल नमूना खुले मंच के रूप बनाया गया है, जहाँ रविवार, 23 सितंबर से चार दिनों तक दिन भर भारतीय संगीत, कला, बॉलीवुड और फैशन का अनूठा आयोजन चल रहा है। न्यूयॉर्क की गगनचुंबी इमारतों के बीच ताजमहल और उसके सामने सरोज खान की टुकड़ी के फिल्मी लटके-झटके, भारत की लावणी, गिद्धा और गरबा की मोहक थाप, ऋतु कुमार और राघवेन्द्र राठौर के फैशन शो, शिव मानी और रेमो फर्नांडीस और कोलोनियन कजिंस की मस्ती और यह सब हो रहा है न्यूयॉर्क के &#8216;<em>राजबाड़े</em>&#8216; में जनसाधारण के बीच।</p>
<p>पोर्ट अथॉरिटी बस स्टेशन पर उड़ीसा के कलाकारों ने रेत से ताजमहल की विशाल कृति बनाई है। साउथ स्ट्रीट सीपोर्ट पर भारत के हर प्रांत के भोजन और विशेष मसालों का रसास्वादन हो रहा है। लिंकन सेंटर में भारत के प्रसिद्ध कथक, भरतनाट्यम और मणिपुरी सहित सभी नृत्य कलाओं का अनूठा आयोजन है। एक होटल में नेशनल जियोग्रॉफिक के प्रसिद्ध फोटोग्राफर स्टीव की भारत यात्राओं की फोटो प्रदर्शनी लगी है। स्टीव 80 से अधिक बार भारत जा चुके हैं। औद्योगिक, आर्थिक और राजनैतिक धरातल पर कई सेमीनार आयोजित किए गए हैं, जिनमें भारत की प्रगति और उसकी चुनौतियों पर चर्चा हो रही है। ऐसा लगता है मानो चार दिनों के लिए जैसे भारत माता अपने पूरे कुनबे के साथ न्यूयॉर्क में ही बस गई हो।</p>
<p><b>शुभारंभ :</b> लिंकन सेंटर में रविवार को शाम होने से पहले ही परंपरागत शैली में संगीत और पुष्पों से मेहमानों का स्वागत किया गया। उस समय मौसम भी एकदम साफ और अत्यंत खुशनुमा था। खचाखच भरे हाल को संबोधित करते हुए अपने स्वागत भाषण में सीआईआई के अध्यक्ष और भारती समूह के चेयरमैन सुनिल मित्तल ने कहा कि इस आयोजन की कल्पना पिछले साल दावोस में भारत के सफल आयोजन के बाद की गई थी। भारत के उपभोक्ता, भारत की आशाएँ और भारत के विश्वास को अब सारी दुनिया देख और महसूस कर रही है।</p>
<p>विदेशमंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा कि एक समय था, जब समीक्षक भारत की विभिन्नता और जनसंख्या को भारत का अभिशाप बताते थे। यह अभिशाप ही आज भारत के लिए वरदान सिद्ध हुए हैं। अमेरिकावासियों की तरफ से बोलते हुए न्यूयॉर्क राज्य के सीनेटर चक शूमर ने कहा कि भारत की छटा तो हर साल निखर रही है। अमेरिका और भारत के संबंध आने वाले समय में और भी प्रगाढ़ होंगे।</p>
<p>उन्होंने अमेरिका में बसे भारतवासियों के योगदान और प्रगति के लिए पूरे देश को बधाई दी। कार्यक्रम का संचालन कलाकार कबीर बेदी ने किया। फिल्म कलाकार अनिल कपूर, इंदिरा नुई और भारत के अनेक उद्योगपति और न्यूयॉर्क में भारत के गणमान्य नागरिक आयोजन में उपस्थित थे। उसके बाद न्यूयॉर्क पब्लिक लाइब्रेरी के साये में अमजद अली खान और उनके दोनों पुत्रों के सरोद वादन ने लोगों को मोहित कर दिया।</p>
<p>दूसरी ओर ब्रायंट पार्क में लावणी और भांगड़ा ने समा बाँध दिया। नैपथ्य में रोशनी में नहाया ताजमहल, भारतीय संगीत के विविध रंग और उसकी थाप पर चलते हुए ऋतु कुमार का फैशन शो और यह सब न्यूयॉर्क के बीचों-बीच। उस समय वाकई लग रहा था- चक दे इंडिया!!! सितंबर महीने में संयुक्त राष्ट्र की बैठक के लिए सारी दुनिया से राजनयिक न्यूयॉर्क आते हैं। और 2 अक्टूबर को सोनिया गाँधी भी न्यूयॉर्क आ रही हैं। यह आयोजन बुधवार तक चलेगा।</p>
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		<title>हिलैरी क्लिंटन को भारतीय समुदाय का समर्थन</title>
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		<pubDate>Mon, 25 Jun 2007 11:53:21 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[अमेरिका में भारत]]></category>
		<category><![CDATA[अमेरिका]]></category>
		<category><![CDATA[डेमोक्रेटिक पार्टी]]></category>
		<category><![CDATA[न्यूयॉर्क]]></category>
		<category><![CDATA[भारतीय समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रपति चुनाव]]></category>
		<category><![CDATA[हिलैरी क्लिंटन]]></category>

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		<description><![CDATA[रविवार की रात न्यूयॉर्क के आलीशान शेरटन होटल के बॉल रूम में अमेरिका में बसे भारतीय समुदाय के प्रमुख व्यवसायी, डॉक्टर और गणमान्य नागरिकों ने डेमोक्रेटिक पार्टी के टिकट पर राष्ट्रपति पद की दावेदार हिलैरी क्लिंटन के समर्थन में आयोजित भोज में हिस्सा लिया। अपने उद्‍बोधन में हिलैरी क्लिंटन ने अमेरिका में भारतीय समुदाय के योगदान और भारत-अमेरिका के बहुआयामी रिश्तों पर जोर दिया। इस कार्यक्रम के मुख्‍य आयोजक थे होटल व्यवसायी और क्लिंटन परिवार के घनिष्ठ मित्र संतसिंह चटवाल। [...]]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><img class="alignleft size-full wp-image-1702" alt="हिलैरी क्लिंटन को भारतीय समुदाय का समर्थन" src="https://www.jmuchhal.com/wp-content/uploads/2007/06/123.jpg" width="311" height="307" /><span class="dropcap">र</span>विवार की रात न्यूयॉर्क के आलीशान शेरटन होटल के बॉल रूम में अमेरिका में बसे भारतीय समुदाय के प्रमुख व्यवसायी, डॉक्टर और गणमान्य नागरिकों ने डेमोक्रेटिक पार्टी के टिकट पर राष्ट्रपति पद की दावेदार हिलैरी क्लिंटन के समर्थन में आयोजित भोज में हिस्सा लिया।</p>
<p>अपने उद्‍बोधन में हिलैरी क्लिंटन ने अमेरिका में भारतीय समुदाय के योगदान और भारत-अमेरिका के बहुआयामी रिश्तों पर जोर दिया। इस कार्यक्रम के मुख्‍य आयोजक थे होटल व्यवसायी और क्लिंटन परिवार के घनिष्ठ मित्र संतसिंह चटवाल। हालाँकि बिल क्लिंटन कार्यक्रम में मौजूद नहीं थे।</p>
<p>अपने गरिमापूर्ण भाषण में हिलैरी ने अमेरिका के मुख्‍य आंतरिक विषय स्वास्थ्य सेवा, अर्थव्यवस्था और जनता के लिए प्रतिबद्ध शासन की चर्चा की। वहीं दूसरी ओर उन्होंने अमेरिका की विश्व में एक मित्र और मददगार राष्ट्र के रूप में छवि को वापस स्थापित करने के लिए अपना संकल्प दोहराया। उन्होंने भारत की महिला राष्ट्रपति बनने की संभावना का उल्लेख और स्वागत किया।</p>
<div class="simplePullQuoteRightGolden">कार्यक्रम में डेमोक्रेटिक पार्टी के कई प्रमुख नेता भी मौजूद थे। भारतीय अमेरिका समुदाय में दीपक चोपड़ा और डॉ. राणावत भी उपस्थित थे<span></span></div>
<p>हिलैरी के भाषण के शुरू और अंत में 1250 से अधिक भारतीय समुदाय के लोगों ने खड़े होकर उनका अभिवादन किया और भारत के नाम के उल्लेख पर बार-बार तालियों से स्वागत किया। हिलैरी रोधम क्लिंटन का स्वागत करते हुए संतसिंह चटवाल ने कहा कि क्लिंटन परिवार और भारतीय समुदाय तथा भारत के रिश्ते बहुत पुराने और गहरे हैं। किसी भी चुनाव प्रत्याशी के लिए भारतीय समुदाय की ओर से यह पहला और अपने आप में सबसे बड़ा आयोजन था।</p>
<p>हिलैरी क्लिंटन का परिचय चटवाल के पुत्र विक्रम चटवाल ने दिया। पूरे अमेरिका से भारतीय इस कार्यक्रम के लिए आए थे। भारत से भी हिलैरी और क्लिंटन समर्थक गणमान्य व्यक्ति कार्यक्रम में शरीक थे। उनमें प्रमुख थे जी समूह के सुभाष चंद्रा, हिंदुजा और केन्द्रीय मंत्री प्रफुल्ल पटेल। पटेल कार्यक्रम के कुछ पहले निकल गए थे। कार्यक्रम में डेमोक्रेटिक पार्टी के कई प्रमुख नेता भी मौजूद थे। भारतीय अमेरिका समुदाय में दीपक चोपड़ा और डॉ. राणावत भी उपस्थित थे।</p>
<p>पीले रंग की पोषाक और गले में बड़े मोतियों की माला पहने हिलैरी हर एक व्यक्ति से काफी आत्मीयता से हाथ मिला रही थीं और उनके समर्थन के लिए धन्यवाद व्यक्त कर रही थीं। बीच-बीच में संत चटवाल ‘<em>खास</em>’ मित्रों का हिलैरी को थोड़ा लंबा परिचय दे रहे थे। जिन चुनिंदा व्यक्तियों को हिलैरी क्लिंटन के साथ हाथ मिलाने और व्यक्तिगत तस्वरी खिंचवाने का भी अनूठा अवसर मिला, उस कतार में खड़े होकर बहुत करीब से हिलैरी क्लिंटन को चंद पलों के लिए देखने का अवसर मिला। अमेरिका में चुनाव प्रक्रिया के दौरान इस तरह के ‘<em>डोनेशन डिनर</em>’ का काफी प्रचलन है। कल रात के भोज में प्रति सीट 1000 डॉलर के अनुमान से भारतीय समुदाय के हिलैरी क्लिंटन के समर्थकों ने अपना ‘योगदान’ दिया था। आयोजन में लगभग 10 से 15 लाख डॉलर (4 से 5 करोड़ रुपए) हिलैरी क्लिंटन के चुनाव फंड के लिए जमा हुए।</p>
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		<title>आईआईटी ने भारत की एक अलग पहचान बनाई है</title>
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		<pubDate>Sun, 22 May 2005 07:43:24 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[अमेरिका में भारत]]></category>
		<category><![CDATA[आईआईटी अमेरिका]]></category>
		<category><![CDATA[आईआईटी के स्नातक]]></category>
		<category><![CDATA[आईआईटी भारत]]></category>
		<category><![CDATA[सिलिकॉन वैली]]></category>

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		<description><![CDATA[आईआईटी के स्नातकों ने अमेरिका में भारत को एक नई पहचान दी है। पिछले 50 सालों में भारत के सभी आईआईटी से लगभग 150,000 विद्यार्थी निकले हैं, उसमें से कोई 40,000 अमेरिका में कार्यरत हैं। अमेरिका में इनके द्वारा शुरू किए गए कारोबार में 200,000 से अधिक लोगों को रोजगार मिलता है। 20 से 22 मई तक वॉशिंगटन के समीप मैरीलैंड में पीएएन-आईआईटी के ध्वज तले भारत के सातों आईआईटी के भूतपूर्व छात्रों, आईआईटी के वर्तमान निदेशकगण और गणमान्य उद्यमियों [...]]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><img src="https://www.jmuchhal.com/wp-content/uploads/2005/05/jm_j2_paniit.jpg" alt="आईआईटी ने भारत की एक अलग पहचान बनाई है" width="311" height="307" class="alignleft size-full wp-image-3199" />आईआईटी के स्नातकों ने अमेरिका में भारत को एक नई पहचान दी है। पिछले 50 सालों में भारत के सभी आईआईटी से लगभग 150,000 विद्यार्थी निकले हैं, उसमें से कोई 40,000 अमेरिका में कार्यरत हैं। अमेरिका में इनके द्वारा शुरू किए गए कारोबार में 200,000 से अधिक लोगों को रोजगार मिलता है।</p>
<p><strong>20 से 22</strong> मई तक वॉशिंगटन के समीप मैरीलैंड में पीएएन-आईआईटी के ध्वज तले भारत के सातों आईआईटी के भूतपूर्व छात्रों, आईआईटी के वर्तमान निदेशकगण और गणमान्य उद्यमियों का वृहद सम्मेलन आयोजित किया गया था। दुनिया के सभी कोनों से आए आईआईटी से 1600 से अधिक पूर्व छात्रों के इन सम्मेलनों का प्रारंभ 2 साल पहले सिलिकॉन वैली में हुआ था।</p>
<p><b>‍</b>हाल ही में अमेरिकी संसद ने एक विशेष बिल पारित करते हुए अमेरिका की आर्थिक और तकनीकी प्रगति में भारत के आईआईटी और उसके स्नातकों के विशेष योगदान का उल्लेख और आभार व्यक्त किया। विगत इतिहास में अमेरिकी संसद द्वारा किसी विदेशी शिक्षण संस्थान और उसके योगदान के उल्लेख की यह एक अनूठी मिसाल है।</p>
<div class="simplePullQuoteRightGreen">किसी विदेशी शिक्षण संस्थान और उसके योगदान के उल्लेख की यह एक अनूठी मिसाल है<span></span></div>
<p>एक और जहां पुराने छात्र अपने बीते हुए साथियों से बरसों बाद मिलकर आईआईटी में साथ गुजारे बीते दिनों को याद कर रहे थे, वहीं सम्मेलन को संबोधित करने आए नामी-गिरामी वक्ताओं  की सूची से ही अमेरिका और भारत में आईआईटी के प्रभाव का अंदाजा लगाया जा सकता है।</p>
<p>प्रमुख वक्ताओं में जीई कंपनी के भूतपूर्व चेयरमैन जैक वेल्च और पूर्व कैबिनेट मंत्री अरूण शौरी ने आईआईटी के स्नातकों की महती तारीफ की। अरुण शौरी ने कहा कि ना सिर्फ आईआईटी के स्नातकों ने विदेशों और स्वदेश, दोनों में ही अपने योगदान से भारत की छवि बढ़ाने में चार चांद लगाए हैं। नेतृत्व के गुणों का उल्लेख करते हुए जैक वेल्च ने लीडर को नितांत स्पष्टवादी होना जरूरी बताया।</p>
<p>न्यूयॉर्क टाइम्स के संवाददाता और कई किताबों के लेखक टॉम फ्राइडमैन ने अपनी नई किताब ‘<em>द वर्ल्ड इज फ्लैट</em>’ की चर्चा करते हुए जोर देकर कहा कि आने वाले कल की दुनिया में आर्थिक संभावनाओं के दौर का मैदान समतल होने वाला है। विकसित और विकासशील देशों के बीच की दूरी अब खत्म होती जा रही है। भारत और चीन देशों ने लोगों के लिए असीम संभावनाएं हैं। अमेरिका और पश्चिम के देशों के आर्थिक प्रभुत्व और ‘<em>मोनोपॉली</em>’ अब ज्यादा नहीं चलने वाली। और इस पर भी अमेरिका का ध्यान आर्थिक और तकनीकी प्रति से हटकर आतंकवाद और इराक में फंस गए हैं। आईसीआईसीआई के चेयरमैन श्री कामथ, हावर्ड विश्वविद्यालय के निदेशक लैरी समर्स, सिटीबैंक के विक्टर मैंनेजेंस, मैक्किंजे के रजत गुप्ता, प्रोफेसर प्रहलाद, सैम पित्रोदा, फिल्मकार सुभाष घई और सूचना प्रौद्योगिकी की कई कंपनियों के निदेशक और प्रमुख इस सम्मेलन में शरीक थे। मैरीलैंड के इस शहर ने 20 मई की तारीख को आईआईटी दिवस घोषित किया।</p>
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		<title>भारतीय इंदिरा के हाथों में पेप्सी का भविष्य सुरक्षित</title>
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		<pubDate>Sat, 21 May 2005 06:03:56 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[अमेरिका में भारत]]></category>
		<category><![CDATA[इंदिरा नूई]]></category>
		<category><![CDATA[कोकाकोला]]></category>
		<category><![CDATA[पेप्सी]]></category>
		<category><![CDATA[फॉर्च्यून पत्रिका]]></category>
		<category><![CDATA[मोटोरोला]]></category>
		<category><![CDATA[सर्वश्रेष्ठ सी.एफ.ओ]]></category>

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		<description><![CDATA[अमेरिका में सिलिकॉन वैली और सॉफ्टवेयर के क्षेत्र में तो भारतीय महिलाएं पहले ही सफलता के झंडे गाड़ चुकी हैं। पर परंपरागत कॉर्पोरेट सेक्टर में अभी भारतीय पुरुष ही उच्च पदों पर आसीन हैं। ऐसे में मिलिए अपने देश की महिलाओं का नाम रोशन करने वाली इंदिरा नूयी से। फॉर्च्यून पत्रिका के अनुसार विश्व की 5 सर्वाधिक महत्वपूर्ण उद्‌यमी महिलाओं की श्रेणी में पेप्सी की अध्यक्ष इंदिरा नूयी का नाम भी है। इंदिरा इस समय अमेरिका में कॉर्पोरेट सेक्टर में [...]]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><img class="alignleft size-full wp-image-1463" alt="भारतीय इंदिरा के हाथों में पेप्सी का भविष्य सुरक्षित" src="https://www.jmuchhal.com/wp-content/uploads/2005/05/10.jpg" width="311" height="307" /><span class="dropcap">अ</span>मेरिका में सिलिकॉन वैली और सॉफ्टवेयर के क्षेत्र में तो भारतीय महिलाएं पहले ही सफलता के झंडे गाड़ चुकी हैं। पर परंपरागत कॉर्पोरेट सेक्टर में अभी भारतीय पुरुष ही उच्च पदों पर आसीन हैं। ऐसे में मिलिए अपने देश की महिलाओं का नाम रोशन करने वाली इंदिरा नूयी से। फॉर्च्यून पत्रिका के अनुसार विश्व की 5 सर्वाधिक महत्वपूर्ण उद्‌यमी महिलाओं की श्रेणी में पेप्सी की अध्यक्ष इंदिरा नूयी का नाम भी है।</p>
<p>इंदिरा इस समय अमेरिका में कॉर्पोरेट सेक्टर में कार्यरत भारतीय मूल की पहली सर्वोच्च अधिकारी हैं। इंदिरा इस समय विश्व की सबसे बढ़िया शीतल पेय कम्पनी पेप्सी की मुख्य वित्तीय अधिकारी यानी चीफ फाइनेन्शियल ऑफिसर (सी.एफ.ओ.) हैं। पेप्सी की भिड़ंत हमेशा अपनी प्रतिद्वंद्वी कंपनी कोकाकोला से चलती रहती है। पेप्सी कम्पनी के सीईओ के अनुसार इंदिरा सबसे हटकर है, उसकी काम करने की क्षमता लाजवाब है।</p>
<div class="simplePullQuoteRight">कंपनी का भविष्य इंदिरा नूयी के हाथों में पूरी तरह से सुरक्षित है<span></span></div>
<p>इंदिरा ने अमेरिका में पहला कदम 1978 में रखा था। उस समय इंदिरा येल विश्वविधालय के ग्रेजुएट स्कूल ऑफ मैनेजमेण्ट में पढ़ाई करने के लिए आई थीं। उस समय उनके पास इतने भी पैसे नहीं थे कि वे अपने लिए एक बिजनेस सूट खरीद सकें। उन्होंने समर ट्रेनिंग के लिए अपने सारे इंटरव्यू साड़ी पहन कर ही दिए थे। हाथ कंगन को आरसी क्या और पढ़े-लिखे को फारसी क्या। जल्द ही अपनी कड़ी मेहनत से उन्होंने पढ़ाई पूरी करने के बाद बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप, मोटोरोला, एबीबी और छह वर्षों पहले पेप्सी को कुशलता से संभाला। इसके बाद तो उन्होंने कभी भी पीछे मुड़कर नहीं देखा।</p>
<p>सफल उधमी होने के साथ-साथ 44 वर्षीय इंदिरा अपने घर पर एक संपूर्ण भारतीय गृहिणी हैं। वे अपने घर में अपनी पुत्रियों के साथ पूजाघर में रोज एक घण्टे पूजा करती हैं। &#8216;<em>पेप्सी</em>&#8216; इन दिनों काफी परिवर्तनों के दौर से गुजर रही है। ऐसे में कंपनी के सीईओ को बहुत सुकून मिलता है कि उनकी कंपनी का भविष्य इंदिरा नूयी के हाथों में पूरी तरह से सुरक्षित है।</p>
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