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	<title>Jitendra Muchhal &#124; Jitendra Muchhal Website &#124; J Muchhal &#124; जीतेंद्र मुछाल &#187; अमेरिकी अर्थव्यवस्था | अमेरिकी इकॉनॉमिक</title>
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		<title>अरबों का फैसला, चित या पट! सिक्का उछालकर विशाल संपत्ति का बँटवारा</title>
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		<pubDate>Tue, 03 Nov 2009 11:06:05 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[अमेरिकी अर्थव्यवस्था]]></category>
		<category><![CDATA[अमेरिका]]></category>
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		<description><![CDATA[न्यूयॉर्क और वॉशिंगटन में 8000 फ्लैट, 9 इमारतें और कई जगह चल रहीं नई योजनाएँ- ये हैं रॉकरोज समूह, जिसे 4 दशकों से भी अधिक समय से तीन भाई हेनरी, फ्रैड्रिक और थॉमस इलघानयन चला रहे थे। पूरे समूह की संपत्ति कोई 3 बिलियन डॉलर (14000 करोड़ रु.) से अधिक है। कारोबार की शुरुआत 50 के दशक में इनके पिता नौरोल्लाह इलघानयन ने की थी, जो ईरान से अमेरिका आए थे। कारोबार में तीनों भाइयों ने उत्तरोत्तर वृद्धि की और [...]]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><img class="alignleft size-full wp-image-2083" alt="“अरबों का फैसला, चित या पट! सिक्का उछालकर विशाल संपत्ति का बँटवारा”" src="https://www.jmuchhal.com/wp-content/uploads/2009/11/1361.jpg" width="311" height="307" />न्यूयॉर्क और वॉशिंगटन में 8000 फ्लैट, 9 इमारतें और कई जगह चल रहीं नई योजनाएँ- ये हैं रॉकरोज समूह, जिसे 4 दशकों से भी अधिक समय से तीन भाई हेनरी, फ्रैड्रिक और थॉमस इलघानयन चला रहे थे।</p>
<p>पूरे समूह की संपत्ति कोई 3 बिलियन डॉलर (14000 करोड़ रु.) से अधिक है। कारोबार की शुरुआत 50 के दशक में इनके पिता नौरोल्लाह इलघानयन ने की थी, जो ईरान से अमेरिका आए थे। कारोबार में तीनों भाइयों ने उत्तरोत्तर वृद्धि की और न्यूयॉर्क के सबसे बड़े और नामी गिरामी &#8220;<em>बिल्डर्स</em>&#8221; में उनकी गिनती आती है।</p>
<p><b>अगली पीढ़ी&#8230; और मतभेद : </b>तीनों भाइयों के कार्य क्षेत्र बँटे हुए थे और उनकी शैली भी अलग थी। इसीलिए उन्होंने इतनी प्रगति की। हेनरी के बेटे जस्टिन के कारोबार में शामिल होने पर भाइयों को लगा कि अब शायद गाड़ी साथ में नहीं चल पाएगी। पर विवाद, मुकदमेबाजी से परे उन्होंने पारिवारिक वकील और सलाहकार माइकल कोरोत्किन की मदद से इतनी विशाल संपत्ति के बँटवारे को सरल बना दिया।</p>
<div class="simplePullQuoteRightPerpal">न्यूयॉर्क और वॉशिंगटन में 8000 फ्लैट, 9 इमारतें और कई जगह चल रहीं नई योजनाएँ- ये हैं रॉकरोज समूह, जिसे 4 दशकों से भी अधिक समय से तीन भाई हेनरी, फ्रैड्रिक और थॉमस इलघानयन चला रहे थे<span></span></div>
<p><b>पहले ढेरी बनाई&#8230; : </b>आपसी सलाह के बाद फ्रेड को कारोबार को तीन ढेरियों में बाँटने का काम मिला। जो उसने दो महीनों में पूरा किया। उसके बाद मार्च महीने में हेनरी और फ्रेड-थॉमस के प्रतिनिधि माइकल के दफ्तर में मिले। माइकल ने एक लिफाफा घुमाकर ये तय किया कि सिक्के पर चित या पट कौन बोलेगा। नाम निकला हैनरी का। तय हुआ कि अगर उसने सही पुकारा तो तीन हिस्से में से पसंद वह चुनेगा। माइकल ने एक क्वार्टर उछाला, हेनरी ने पुकारा &#8220;<em>पट</em>&#8221; (टेल्स) और सिक्का गिरा &#8220;<em>पट</em>&#8220;। उसने ढेरी तीन चुनी, जिसमें समूह का नाम &#8220;<em>रॉकरोज</em>&#8221; और 2500 किराए के फ्लैट वाली 8 रहवासी इमारतें मिली।</p>
<p><b>बँटवारे के बाद भी साथ :</b> फ्रेड और थॉमस ने बँटवारे के बाद भी एक साथ ही काम करने का फैसला किया। इत्तेफाक ऐसा कि मार्च महीने में फैसले के ठीक एक दिन पहले उनकी माँ चल बसी और अगले दिन उनके पिता। मुख्य निर्णय तो मार्च में हो गया, लेकिन कुछ मतभेदों के बाद बँटवारा अभी अक्टूबर में पूरी तरह हो गया। भाइयों में थोड़ा मनमुटाव तो है, लेकिन बँटवारे की इसी शालीन प्रक्रिया से न तो समूह का कारोबार बिग़ड़ा, न ही अखबारों में चर्चाओं-अफवाहों का बाजार गर्म हुआ।</p>
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		<title>&#8220;रहिमन पानी राखिए&#8230; वित्त जगत में &#8216;साख&#8217; का अभाव&#8221;</title>
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		<pubDate>Sat, 11 Oct 2008 12:16:46 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[अमेरिकी अर्थव्यवस्था]]></category>
		<category><![CDATA[21वीं शताब्दी]]></category>
		<category><![CDATA[एआईजी]]></category>
		<category><![CDATA[क्रेडिट क्राइसिस]]></category>
		<category><![CDATA[डाउ जोन्स]]></category>
		<category><![CDATA[लेहमैन]]></category>
		<category><![CDATA[शेयर बाजार]]></category>

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		<description><![CDATA[अमेरिका सहित सारी दुनिया के शेयर बाजारों में निरंतर गिरावट, पूरी अर्थव्यवस्था में हर संस्था और व्यक्ति द्वारा दूसरे की &#8216;साख&#8216; पर घोर संदेह, शताब्दियों पुराने बैंकों का चंद दिनों में पतन, इसके बाद- अब और क्या?? 21वीं शताब्दी में अमेरिका के लिए 9/11 का दिन अभी तक एक ऐसा मील का पत्थर था, जिसने पूरे रास्ते का निर्धारण किया। लेकिन इस साल 9/11 से 10/11 तक के इस माह ने ऐसा इतिहास रच दिया, जो पूरी दुनिया को हमेशा [...]]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><img class="alignleft size-full wp-image-2108" alt="&quot;रहिमन पानी राखिए... वित्त जगत में 'साख' का अभाव&quot;" src="https://www.jmuchhal.com/wp-content/uploads/2008/08/1281.jpg" width="311" height="307" /><span class="dropcap">अ</span>मेरिका सहित सारी दुनिया के शेयर बाजारों में निरंतर गिरावट, पूरी अर्थव्यवस्था में हर संस्था और व्यक्ति द्वारा दूसरे की &#8216;<em>साख</em>&#8216; पर घोर संदेह, शताब्दियों पुराने बैंकों का चंद दिनों में पतन, इसके बाद- अब और क्या??</p>
<p>21वीं शताब्दी में अमेरिका के लिए 9/11 का दिन अभी तक एक ऐसा मील का पत्थर था, जिसने पूरे रास्ते का निर्धारण किया। लेकिन इस साल 9/11 से 10/11 तक के इस माह ने ऐसा इतिहास रच दिया, जो पूरी दुनिया को हमेशा याद दिलाता रहेगा कि &#8216;<em>रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून&#8230;.</em>&#8216;</p>
<p><b>बीता मास :</b> 9/11 की बरसी को गुजरे अभी महीना भी पूरा नहीं हुआ है, पर लग रहा है मानो बरसों बीत गए। हर शुक्रवार और सप्ताहांत पर एक नई वित्त समस्या सिर उठाए खड़े रहती है, जो सभी को ध्वस्त करने जैसी लगती है। पहले लेहमैन, मेरिल, एआईजी का हादसा हुआ फिर 700 बिलियन डॉलर के बेल आउट बिल और उसकी राजनीतिक रस्साकशी को अंतिम रामबाण दवाई बताया गया।</p>
<p>भारी मतभेद के बावजूद बिल पास हुए, लेकिन सारे बाजार पर उसका असर रहा। गरम तवे पर पानी की चंद बूँदों सा। वारेन बफेट ने गोल्डमैन और जीई में भारी निवेश घोषित किया, उसका प्रभाव भी टिका नहीं। सरकार ने बैंकों में जमा पूँजी की सुरक्षा सीमा बढ़ा दी और 2.0 प्रतिशत की न्यूनतम दर से भी घटाकर ब्याज दर 1.5 प्रतिशत कर दी, लेकिन ये आर्थिक सुनामी ऐसे थमती नहीं लगती। जॉर्ज बुश और वित्त मंत्री पाउलसन तो प्रायः रोज ही टीवी पर आकर जनता को संबल देने का भरसक प्रयास कर रहे हैं, लेकिन कोई असर नहीं।</p>
<div class="simplePullQuoteRightGolden">21वीं शताब्दी में दुनिया ने ग्लोबलाइजेशन (वैश्वीकरण) से बढ़ती हुई प्रगति और व्यापार का सिर्फ &#8216;सुंदरम्‌&#8217; पक्ष देखा था, अब उसी का &#8216;सत्यम्‌&#8217; पक्ष भी देखना होगा<span></span></div>
<p><b>बीता सप्ताह :</b> इस सप्ताह ने तो मानो ऐसा डर पैदा कर दिया कि मानो इस रात की कोई सुबह नहीं। डाउ जोन्स सूचकांक के 112 वर्षीय इतिहास में इन 5 दिनों में ये सर्वाधिक 18 प्रतिशत गिर गया। गुरुवार को सिर्फ आखिरी एक घंटे के कारोबार में डाउ 679 अंक गिरा। शुक्रवार को पुनः डाउ के इतिहास में पहली बार एक ही दिन में इंडेक्स ने 1000 अंकों का &#8216;<em>ज्वार-भाटा</em>&#8216; दिखा दिया। सुबह खुलते ही बाजार 697 अंकों तक गिरा और डाउ 8000 के भी नीचे गिर गया। दिनभर बाजार 500-600 अंक नीचे रहा, आखिरी एक घंटे में बाजार 322 अंकों तक चढ़ा और आखिरी कुछ पलों में फिर गिरकर अंत में 128 अंक नीचे 8451 पर बंद हुआ। सिर्फ एक सप्ताह ने जैसे पूरी दुनिया के बाजारों और सरकारों को हिला दिया है और दिग्गजों-विशेषज्ञों की समझ के परे है कि ये कहाँ थमेगा? विडम्बना है कि ठीक एक साल पहले 9 अक्टूबर 2007 को डाउ ने 14164 अंक का कीर्तिमान बनाया था। डाउ सूचकांक एक वर्ष में 40 प्रतिशत से अधिक गिर चुका है। ये ही हाल एस एंड पी 500 और नेस्देक का भी है।</p>
<p><b>अब मूल मजारा क्या है</b><b>? :</b> वैसे तो समस्या इतनी विकराल और एक दूसरे में गुत्थम-गुत्था है कि संक्षिप्त में इसका विवेचन असंभव है, लेकिन आज आर्थिक और मॉर्टगेज, सब प्राइम समस्या से भी बढ़कर चुनौती <em>&#8216;साख&#8217;</em> की है, यानी &#8216;<em>क्रेडिट क्राइसिस</em>&#8216;। साख अथवा क्रेडिट अथवा विश्वास को पूँजी की तरलता से सौ गुना साकार संबल तो दिया जा सकता है, लेकिन उसका मूलाधार निर्गुण, निराकार है।</p>
<p>एक बैंक या संस्था दूसरे बैंक या संस्था को कर्ज देने और उसके साथ कोई भी लेन-देन करने में डर रही है। क्या पता दूसरे बैंक के पास इतनी पूँजी है भी कि नहीं या &#8216;<em>कल हो न हो</em>&#8216;। विगत में लेहमैन और एआईजी और कई बैंकों ने भी बार-बार उद्घोषणा की थी कि सब एकदम ठोस है, उनके पास अथाह वित्तीय जमा पूँजी है, लेकिन उन्हें ध्वस्त होने में ताश के पत्तों के महल से ज्यादा वक्त नहीं लगा।</p>
<p>स्वाभाविक है, जब उन जैसे महारथियों का कोई भरोसा नहीं, तो फिर किसी और का कैसे? उनकी ऐसी दयनीय हालत की बुनियाद थे मकानों को दिए गए बेतहाशा कर्ज और उस खोखली नींव के ऊपर खड़े अरबों-खरबों के वित्तीय सौदे, ऊँची इमारतें। जब तक &#8216;<em>क्रेडिट क्राइसिस</em>&#8216; की पूरी जकड़न का वित्तीय और सरकारी मालिश से इलाज नहीं होता, दुनियाभर के स्टॉक मार्केट को स्थायी राहत नहीं मिलेगी। 21वीं शताब्दी में दुनिया ने ग्लोबलाइजेशन (वैश्वीकरण) से बढ़ती हुई प्रगति और व्यापार का सिर्फ &#8216;<em>सुंदरम्‌</em>&#8216; पक्ष देखा था, अब उसी का &#8216;<em>सत्यम्‌</em>&#8216; पक्ष भी देखना होगा कि दुनिया के एक भाग की परेशानी से दूसरा अछूता नहीं रह सकता और फिर इस सर्वव्याप्त गरल के कड़वे घूँट को &#8216;<em>शिवम्‌</em>&#8216; की तरह सारी दुनिया को पीना पड़ेगा। सारे प्रमुख देशों के वित्तमंत्री इस समय वाशिंगटन में इसी चर्चा के लिए मिल रहे हैं, सारी दुनिया की आँखें उन पर टिकी हैं कि कुछ ऐसे सामूहिक निर्णय लिए जाएँ, जो सभी को मान्य हों और जिससे इस &#8216;<em>क्रेडिट क्राइसिस</em>&#8216; से निपटा जा सके। प्रबल आशा है कि कुछ साहसिक निर्णय लिए जाएँगे, जिनका प्रभाव विश्वव्यापी होगा।</p>
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		<title>अमेरिकी वित्त व्यवस्था के ट्वि&#8217;न टॉवर्स गिरे</title>
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		<pubDate>Tue, 16 Sep 2008 12:30:38 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[अमेरिकी अर्थव्यवस्था]]></category>
		<category><![CDATA[अमेरिकी वित्त व्यवस्था]]></category>
		<category><![CDATA[ट्वि'न टॉवर्स]]></category>
		<category><![CDATA[मेरिल लिंच]]></category>
		<category><![CDATA[यूएस डॉलर]]></category>
		<category><![CDATA[लेहमैन ब्रदर्स]]></category>
		<category><![CDATA[वर्ल्ड ट्रेड सेंटर]]></category>

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		<description><![CDATA[अमेरिकी वित्त व्यवस्था की दु:खद घटनाओं में से एक न्यूयॉर्क में ट्‍विन टॉवर्स गिराए जाने की सातवीं बरसी के कुछेक दिन बाद हुई। तेजी से बदलते घटनाक्रम में मात्र 24 घंटों के दौरान 150 वर्ष पुरानी वित्तीय संस्थाएँ, जो कि अपने आकार में अमेरिका के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर से कम नहीं थीं, लेहमैन ब्रदर्स और मेरिल लिंच सोमवार को इतिहास का एक हिस्सा बन गईं। अमेरिकी वित्त व्यवस्था में लगातार गिरावट के चलते लेहमैन ब्रदर्स के शेयरों का मूल्य अंतिम [...]]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><img class="alignleft size-full wp-image-2876" alt="अमेरिकी वित्त व्यवस्था के ट्वि'न टॉवर्स गिरे" src="https://www.jmuchhal.com/wp-content/uploads/2008/09/JM_3_Lehman.jpg" width="311" height="307" /><span class="dropcap">अ</span>मेरिकी वित्त व्यवस्था की दु:खद घटनाओं में से एक न्यूयॉर्क में ट्‍विन टॉवर्स गिराए जाने की सातवीं बरसी के कुछेक दिन बाद हुई। तेजी से बदलते घटनाक्रम में मात्र 24 घंटों के दौरान 150 वर्ष पुरानी वित्तीय संस्थाएँ, जो कि अपने आकार में अमेरिका के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर से कम नहीं थीं, लेहमैन ब्रदर्स और मेरिल लिंच सोमवार को इतिहास का एक हिस्सा बन गईं।</p>
<p>अमेरिकी वित्त व्यवस्था में लगातार गिरावट के चलते लेहमैन ब्रदर्स के शेयरों का मूल्य अंतिम सप्ताह में 3.50 डॉलर तक नीचे आ गया था जो कि एक वर्ष पहले के मूल्य की तुलना में 95 फीसदी नीचे था। इस निवेश बैंक को वित्तीय मदद की जरूरत थी और इसके लिए न्यूयॉर्क फेड ने सभी वैश्विक वित्तीय संस्थाओं- सिटी, जेपी मॉर्गन, गोल्डमैन, मेरिल, बैंक ऑफ अमेरिका और अन्य की आपात बैठक भी बुलाई थी। बैठक में अमेरिकी वित्तमंत्री हैंक पॉल्सन भी शामिल हुए थे। बैठक का उद्देश्य था कि किसी तरह लेहमैन ब्रदर्स को सुरक्षित बनाए रखा जाए, क्योंकि ऐसा नहीं होने पर अन्य वित्तीय संस्थाओं पर भी इसका बुरा असर पड़ सकता था। इससे पहले अमेरिकी सरकार ने बीयर स्टर्न्स को खरीदने में जेपी मॉर्गन की मदद की थी। पिछले माह फैनी मे और फ्रैडी मैक को सरकार से सहारा मिला था, लेकिन इस बार सरकार लेहमैन को बचाने के लिए आगे नहीं आई।</p>
<div class="simplePullQuoteRight">मेरिल के शेयर भी लगातार नीचे गिरते जा रहे थे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मेरिल के सीईओ जॉन थाइन ने खुद बैंक ऑफ अमेरिका के सीईओ से मिलकर 48 घंटों में सौदा पक्का कर लिया<span></span></div>
<p>लेहमैन ब्रदर्स को लेने के लिए बैंक ऑफ अमेरिका और बार्कलेज बैंक ने दिलचस्पी दिखाई थी, लेकिन अमेरिकी सरकार द्वारा कोई सहयोग या सहारा न देने की सूरत में वे मैदान छोड़ गए। तभी स्पष्ट हो गया कि सोमवार से लेहमैन ब्रदर्स को दिवालिया घोषित किए जाने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। मात्र एक सप्ताह के भीतर अरबों डॉलर के शेयरों का मूल्य शू्न्य हो गया।</p>
<p><b>मेरिल बिकी :</b> बैंक ऑफ अमेरिका ने लेहमैन को खरीदने में दिलचस्पी तो दिखाई, लेकिन इसने मेरिल लिंच को 29 डॉलर प्रति शेयर की दर पर खरीद लिया। कंपनी ने इसकी खरीदी के लिए 50 बिलियन डॉलर की राशि चुकाई। मेरिल के शेयर भी लगातार नीचे गिरते जा रहे थे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मेरिल के सीईओ जॉन थाइन ने खुद बैंक ऑफ अमेरिका के सीईओ से मिलकर 48 घंटों में सौदा पक्का कर लिया।</p>
<p><b>एआईजी और अन्य की हालत खस्ता :</b> इंश्योरेंस क्षेत्र की महाकाय कंपनी एआईजी पर भी ऐसा ही दबाव है और यह अपनी कैश पोजीशन को बनाए रखने के लिए अपनी कई परिसंपत्तियाँ बेच सकती है। वॉशिंगटन म्यूचुअल का भी यही हाल है। लेहमैन ब्रदर्स में 25 हजार से अधिक कर्मचारी काम करते हैं, जबकि मेरिल लिंच के कर्मचारियों की संख्‍या 60 हजार है। एआईजी और अन्य वित्तीय संस्थाओं में भी करीब इतने ही कर्मचारी काम करते हैं। न्यूयॉर्क क्षेत्र में हजारों की संख्या में ऊँची तनख्वाह वाले पद खत्म हो जाएँगे।</p>
<p>इससे पहले लेहमैन ब्रदर्स ने खुद को दिवालिया घोषित करने का एक आवेदन न्यूयॉर्क में दाखिल कर दिया। एक अनुमान के मुताबिक उन पर 613 बिलियन यूएस डॉलर की उधारी है। उन्होंने अपने नाम पर टोक्यो, हांगकांग, न्यूयॉर्क, सिंगापुर, ताईपे और कई अन्य बैंकों से लाखों डॉलर का ऋण ले रखा है। गौरतलब है कि दिवालिएपन के अमेरिकी इतिहास में यह अब तक का सबसे बड़ा मामला है। इसकी भरपाई वॉल स्ट्रीट फर्म द्वारा की जाएगी, जो अमेरिकी सरकार को इस पूरे मामले में विश्वास दिलाने में नाकाम रही। लेहमैन ब्रदर्स द्वारा दिवालिया घोषित किए जाने की याचिका के मुताबिक उनकी कुल संपत्ति 639 मिलियन डॉलर है।</p>
<p>अदालती टिप्पणी के मुताबिक सिटी बैंक और बैंक ऑफ न्यूयॉर्क इतनी बड़ी रकम के लिए लेहमैन ब्रदर्स को पहले ही असुरक्षित निवेशकों की सूची में डाल चुके हैं। टोक्यो का अजोरा बैंक 463 मिलियन डॉलर लोन के साथ ऋण प्रदाताओं में सबसे ऊपर है। मिजुहो कॉरपोरेट बैंक (289 मिलियन डॉलर) इस मामले में दूसरे स्थान पर है। जानकारी के मुताबिक लेहमैन ब्रदर्स सिटी बैंक से 275 मिलियन डॉलर, बीएनपी परिबास से 250 मिलियन डॉलर, जापान की शिंसेई बैंक लिमिटेड से 231 मिलियन डॉलर, जापान की ही यूएफजे बैंक से 185 मिलियन डॉलर और सुमितोमो मिश्तुबिशी बैंकिंक कॉरपोरेशन से 177 मिलियन डॉलर का ऋण अप्रतिभूति उधारी के तहत ले चुके हैं।</p>
<p>मिजुहो कॉरपोरेट बैंक, शिंकिन सेंट्रल बैंक, चुओ मिट्स्यूई ट्रस्ट और बैंकिंग समेत जापान के सभी बैंकिंग प्रतिष्ठान, नोवा स्कोशिया की सिंगापुर शाखा, न्यूयॉर्क की लॉयड बैंक, ताईपे और चीन की हुआ नेन व्यावसायिक बैंक और इसकी न्यूयॉर्क शाखा, ये सभी अप्रतिभूति ऋण अदायगी के रूप में लेहमैन ब्रदर्स को 50 मिलियन डॉलर से ज्यादा की राशि दे चुके हैं। सोमवार सुबह जब मैं ट्रेन में मैनहट्टन से न्यूजर्सी आ रहे कुछ लोगों से मिला, उनमें से एक यात्री वॉल स्ट्रीट जर्नल पढ़ रहा था, जिसका शीर्षक था- &#8216;<em>लुक लाइक 9/11</em>&#8216;। मैंने दुःखद भाव के साथ कहा-बहुत बुरा हुआ। एक अन्य यात्री जो लेहमैन ब्रदर्स के न्यूबर्गर डिवीजन में कार्यरत थे, ने बताया उनका डिवीजन बहुत अच्छी तरह काम कर रहा था। वे जल्द ही इस सिलसिले में सुबह बैठक करने की योजना बना रहे थे, मगर सब कुछ बिखर गया। उन्होंने इसे 9/11 हादसे से भी ज्यादा भयानक करार दिया।</p>
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		<title>मौजूदा संकट अमेरिका के लिए सदमा</title>
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		<pubDate>Mon, 15 Sep 2008 12:28:12 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[अमेरिकी अर्थव्यवस्था]]></category>
		<category><![CDATA[आर्थिक मंदी]]></category>
		<category><![CDATA[फेडरल रिजर्व बैंक]]></category>
		<category><![CDATA[मेरिल लिंच]]></category>
		<category><![CDATA[वित्तीय गिरावट]]></category>

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		<description><![CDATA[अमेरिकी अर्थव्यवस्था में पैदा हुए ताजा गंभीर संकट से यहाँ के वित्त विश्लेषक भी हैरत में हैं। उनकी राय में अमेरिका के लिए यह सारी स्थिति सदमे की तरह है। हालाँकि अधिकतर ने तरलता के जरिये बाजार को सुधारने की सलाह दी है। पूर्व फेडरल रिजर्व चीफ एलेन ग्रीनस्पेन के मुताबिक अमेरिका सदी की सबसे बड़ी आर्थिक मंदी के दौर से गुजर रहा है। वित्त विपदाएँ इसमें &#8216;आग में घी&#8216; का काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि जब तक [...]]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><img class="alignleft size-full wp-image-2077" alt="मौजूदा संकट अमेरिका के लिए सदमा " src="https://www.jmuchhal.com/wp-content/uploads/2008/09/1301.jpg" width="311" height="307" /><span class="dropcap">अ</span>मेरिकी अर्थव्यवस्था में पैदा हुए ताजा गंभीर संकट से यहाँ के वित्त विश्लेषक भी हैरत में हैं। उनकी राय में अमेरिका के लिए यह सारी स्थिति सदमे की तरह है। हालाँकि अधिकतर ने तरलता के जरिये बाजार को सुधारने की सलाह दी है।</p>
<p>पूर्व फेडरल रिजर्व चीफ एलेन ग्रीनस्पेन के मुताबिक अमेरिका सदी की सबसे बड़ी आर्थिक मंदी के दौर से गुजर रहा है। वित्त विपदाएँ इसमें &#8216;<em>आग में घी</em>&#8216; का काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि जब तक घरेलू कीमतों में सुधार नहीं होता, इन हालात से ऐसे ही जूझना पड़ेगा। मुझे विश्वास ही नहीं हो रहा है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था इतना बुरा वक्त देख रही है।</p>
<p>एक पूर्व केंद्रीय बैंकर के अनुसार इससे बुरी स्थिति उन्होंने अपने पेशे में कभी नहीं देखी। हालाँकि उन्होंने उम्मीद जताई कि हालात जल्द ही सामान्य होने लगेंगे।</p>
<div class="simplePullQuoteRight">अमेरिकी बैंक पहले ही भयानक स्थिति का सामना कर रहे हैं। मुझे समझ में नहीं आता अमेरिकी बैंक को मेरिल लिंच को सत्तर फीसदी राशि देने की जरूरत क्या थी?<span></span></div>
<p>डब्ल्यूएल रॉस एंड कंपनी के चेअरमैन और सीईओ विलबर रॉस ने कहा &#8216;<em>आने वाले महीनों में हजारों बैंक बंद होंगे। यही स्थिति निवेशकों के लिए अवसर पैदा करेगी। मुझे लगता है कई क्षेत्रीय बैंकों पर भी ताले पड़ जाएँगे। इन बैंकों ने 90 के दशक में भी बचत और ऋण से जुड़े ऐसे ही हालात पैदा किए थे।</em>&#8216;</p>
<p>रॉस एक ऐसे छोटे वित्तीय संस्थान की तलाश में हैं, जहाँ निवेश की संभावना हो। वे इसके लिए जोखिम नहीं उठाना चाहते, इसीलिए स्थिर जमापूँजी वाले स्रोत पर ध्यान दे रहे हैं, ऋण उपलब्ध कराने वाली निवेश सूची पर नहीं। पिमको के सीईओ ईआई एरैन का कहना था &#8216;<em>हमें तरलता लाना होगी और इसे पूँजी के विस्तार के लिए जल्द जुटाना होगा। मौजूदा संकट से उबरना भी इतना आसान नहीं है, क्योंकि निकाय के पास पर्याप्त पूँजी नहीं है</em>।&#8217;</p>
<p>निवेश सलाहकार मार्क फेबर की भी ऐसी ही राय थी। उन्होंने कहा कि वित्तीय गिरावट और आगे कितना जाएगी, कुछ कहा नहीं जा सकता। हमें कुछ परिवर्तन करना होंगे, क्योंकि केंद्रीय बैंक बाजार में तरलता लाएगा। नतीजतन, ब्याज दरें गिरेंगी। अमेरिकी बैंक पहले ही भयानक स्थिति का सामना कर रहे हैं। मुझे समझ में नहीं आता अमेरिकी बैंक को मेरिल लिंच को सत्तर फीसदी राशि देने की जरूरत क्या थी?</p>
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		<title>ऐसो को उदार जग माहीं</title>
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		<pubDate>Tue, 20 Jun 2006 11:42:11 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[अमेरिकी अर्थव्यवस्था]]></category>
		<category><![CDATA[बिल गेट्‍स]]></category>
		<category><![CDATA[बिल-मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन]]></category>
		<category><![CDATA[भारतीय दुनिया]]></category>
		<category><![CDATA[वॉरेन बफेट]]></category>
		<category><![CDATA[समाजसेवा]]></category>

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		<description><![CDATA[दुनिया के दूसरे नंबर के अमीर व्यक्ति ने दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति द्वारा स्थापित दुनिया के सबसे संपन्न पारमार्थिक ट्रस्ट में दुनिया के सबसे बड़े दान की आज घोषणा की है और यह भी ठीक उसी दिन जिस दिन एक भारतीय दुनिया के इस्पात उद्योग का बादशाह बन गया। इन पंक्तियों में छुपी कहानी यूं हैं- 75 वर्षीय वॉरेन बफेट बर्कशर हैथवे कंपनी के चेयरमैन और दुनिया में अमीरों की श्रेणी में नंबर दो पर हैं। नंबर एक पर [...]]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><img src="https://www.jmuchhal.com/wp-content/uploads/2006/06/jm_f_buffet_bill_melinda.jpg" alt="ऐसो को उदार जग माहीं" width="311" height="307" class="alignleft size-full wp-image-3194" /><span class="dropcap">दु</span>निया के दूसरे नंबर के अमीर व्यक्ति ने दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति द्वारा स्थापित दुनिया के सबसे संपन्न पारमार्थिक ट्रस्ट में दुनिया के सबसे बड़े दान की आज घोषणा की है और यह भी ठीक उसी दिन जिस दिन एक भारतीय दुनिया के इस्पात उद्योग का बादशाह बन गया।</p>
<p><strong>इन पंक्तियों में छुपी कहानी यूं हैं-</strong> 75 वर्षीय वॉरेन बफेट बर्कशर हैथवे कंपनी के चेयरमैन और दुनिया में अमीरों की श्रेणी में नंबर दो पर हैं। नंबर एक पर हैं उन्हीं के अभिन्न मित्र और ताश में ब्रिज के साथी 50 वर्षीय बिल गेट्‍स। वॉरेन बफेट ने आज फॉर्च्यून पत्रिका को दिए एक साक्षात्कार के जरिए सारी दुनिया को चकाचौंध कर दिया, जब उन्होंने कहा कि बर्कशर हैथवे के अंशधारक के रूप में उनकी व्यक्तिगत पूंजी का 85% वो समाज सेवा हेतु &#8216;<em>दान</em>&#8216; कर देंगे। यही नहीं,  इस धन का अधिकांश हिस्सा आने वाले सालों में बिल और मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन को जाएगा, जो कि दुनिया के अविकसित क्षेत्रों में बीमारी और शिक्षा के महान कार्यों में वर्षों से संलग्न है। और आगे चलने से पहले एक नजर कुछ गगनचुंबी आंकड़ों पर- वॉरेन बफेट की वर्तमान पूंजी कोई 44 बिलियन डॉलर (20,000 करोड़ रुपए)&#8230; इसका 85% हिस्सा आने वाले सालों में समाज सेवा हेतु- यानी 37.4 बिलियन डॉलर (17,200 करोड़ रुपए)।</p>
<p>इस राशि में से 30 बिलियन डॉलर (14,000 करोड़ रुपए) आने वाले वर्षों में बर्कशर हैथवे के शेयर्स (अंश) के रूप में बिल-मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन को मिलते रहेंगे। बाकी धनराशि बफेट के बच्चों और दिवंगत पत्नी के नाम पर चल रहे संस्थानों को जाएगी। इसकी कुछ सीधी शर्तें भी हैं &#8211; बिल मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन को हर साल इसमें न्यूनतम राशि की सेवा करना जरूरी, बिल या मेलिंडा में से एक उस फाउंडेशन के निदेशक पद पर बने रहना, बफेट के जीवनकाल में भी इस फाउंडेशन के निदेशक और बस!</p>
<div class="simplePullQuoteRight">बफेट का बहुत पहले से मानना था कि उनकी सम्पत्ति का अधिकांश हिस्सा वे समाजसेवा के लिए ही लगाना चाहते हैं<span></span></div>
<p>इस पूरी घोषणा की विस्तृत जानकारी बर्कशर हैथवे की वेबसाइट पर दी गई है। बिल-मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन वर्तमान में भी विश्व की सबसे बड़ी समाजसेवा संस्थान है, जिसकी पूंजी 30  बिलियन डॉलर है। बफेट ने इस घोषणा के लिए फॉर्च्यून पाक्षिक पत्रिका के सम्पादक और उनकी वर्षों से मित्र और प्रशंसक कैरल लूमिस के जरिए साक्षात्कार को, जिसमें उन्होंने इस विश्वव्यापी अनुदान की घोषणा की। कैरल लूमिस पिछले 40 वर्षों से  <em>फॉर्च्यून पत्रिका</em> में लिख रही हैं।</p>
<p><strong>सम्पत्ति का अधिकांश हिस्सा समाजसेवा के लिए&#8230;</strong></p>
<p>बफेट का बहुत पहले से मानना था कि उनकी सम्पत्ति का अधिकांश हिस्सा वे समाजसेवा के लिए ही लगाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि ना सिर्फ वे बिल और मेलिंडा के पिछले 20 वर्षों से घनिष्ठ मित्र हैं, बल्कि बिल मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन के कार्यकलापों और उनकी प्रतिबद्धता से बहुत प्रभावित हैं। अगर इतनी बड़ी धनराशि से किसी सुसंचालित सेवा फाउंडेशन का काम और बढ़ सके, उन्हें यह ज्यादा मुनासिब लगा बजाय एक और नए फाउंडेशन की स्थापना करना।</p>
<p>बिल गेट्‍स के 2 वर्षों बाद माइक्रोसॉफ्ट छोड़कर पूरी तरह समाजसेवा में लगने के निर्णय से उन्हें कोई प्रभाव नहीं पड़ा; क्योंकि बफेट तो अपना मन पहले ही बना चुके थे। बफेट की पत्नी का देहांत कुछ वर्षों पूर्व हो गया था और अपने बच्चों के लिए &#8216;वे इतना छोड़ के जा रहे हैं कि वे जो चाहें, वह कर सकते हैं, लेकिन इतना नहीं कि वह कुछ भी ना करें। 50 वर्षीय बिल गेट्‍स और 75 वर्षीय वॉरेन बफेट की अनूठी दोस्ती पिछले 20 सालों में प्रगाढ़ हुई। वे एक-दूसरे का बहुत आदर करते हैं। साथ में ब्रिज खेलते हैं, लेकिन कुछ वर्षों पूर्व तक एक-दूसरे की कंपनी में एक भी शेयर नहीं खरीदते थे। अमेरिका में कई बार दोनों एक ही मंच पर एक साथ सवालों के जवाब भी देते देखे गए हैं।</p>
<p>एक तरह से यूं कहें तो वॉरेन बफेट ने सही मायनों में बिल-मेलिंडा गेट्स को अपनी &#8216;<em>विरासत</em>&#8216; का सही &#8216;<em>उत्तराधिकारी</em>&#8216; पाया है। बिल और मेलिंडा गेट्स आज की इस घोषणा से अत्यंत भावविभोर महसूस कर रहे हैं। विश्व के इतिहास में अमीर और रईस तो हर युग में हुए हैं, लेकिन व्यापार और समाजसेवा- दोनों में ऐसे गेट्‍स और बफेट विलक्षण &#8216;<em>जुगलबंदी</em>&#8216; अद्वितीय है।</p>
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		<title>अमेरिका की साख पर आंच</title>
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		<pubDate>Fri, 26 Jul 2002 11:17:18 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[अमेरिकी अर्थव्यवस्था]]></category>
		<category><![CDATA[अमेरिका की रेटिंग]]></category>
		<category><![CDATA[अमेरिका की साख]]></category>
		<category><![CDATA[पर्ल हार्बर]]></category>
		<category><![CDATA[मूडीज संस्था]]></category>
		<category><![CDATA[स्टैंडर्ड एंड पूअर्स]]></category>

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		<description><![CDATA[1941 के बाद पहली बार साख निर्धारण संस्था स्टैंडर्ड एंड पूअर्स (एसएंडपी) ने अमेरिका के &#8216;दीर्घकालीन&#8216; साख को एएए से एए+ कर दिया है। क्या होती है क्रेडिट (साख) रेटिंग : आर्थिक विश्व में व्यक्ति, संस्था और राष्ट्र सभी का आकलन किया जाता है, जिसके आधार पर उनके &#8216;आर्थिक सुदृढ़ता&#8216; और दीर्घ और लघु अवधि के कर्ज चुकाने की क्षमता का अंदाजा लगाया जाता है। पश्चिमी देशों में स्टैंडर्ड एंड पूअर्स, मूडीज, और फिच रेटिंग- तीन प्रमुख साख निर्धारण संस्थाएँ [...]]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><img class="alignleft size-full wp-image-3243" title="अमेरिका की साख गिरी" alt="" src="https://www.jmuchhal.com/wp-content/uploads/2013/01/302.jpg" width="311" height="307" />1941 के बाद पहली बार साख निर्धारण संस्था स्टैंडर्ड एंड पूअर्स (एसएंडपी) ने अमेरिका के &#8216;<em>दीर्घकालीन</em>&#8216; साख को एएए से एए+ कर दिया है।</p>
<p><b>क्या होती है क्रेडिट (साख) रेटिंग : </b>आर्थिक विश्व में व्यक्ति, संस्था और राष्ट्र सभी का आकलन किया जाता है, जिसके आधार पर उनके &#8216;<em>आर्थिक सुदृढ़ता</em>&#8216; और दीर्घ और लघु अवधि के कर्ज चुकाने की क्षमता का अंदाजा लगाया जाता है। पश्चिमी देशों में स्टैंडर्ड एंड पूअर्स, मूडीज, और फिच रेटिंग- तीन प्रमुख साख निर्धारण संस्थाएँ हैं। ये तीनों ही गैर सरकारी कंपनियां हैं।</p>
<p><b>अमेरिका की क्रेडिट रेटिंग : </b>1941 से 5 अगस्त 2011 तक देश के रूप में अमेरिका की क्रेडिट रेटिंग हमेशा एएए (सर्वोच्च) रही है। दुनिया में जर्मनी, इंग्लैंड, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा सहित कुछ और राष्ट्र ही एएए साख रखते हैं। अमेरिका के कर्ज वृद्धि को लेकर चल रही बहस के तहत साख संस्थाओं ने बार-बार चेतावनी दी थी कि अगर अमेरिका ने अपने कर्ज को कम करने के कठोर कदम नहीं उठाए तो अमेरिका की साख पर गलत प्रभाव जरूर पड़ेगा।</p>
<div class="simplePullQuoteRightGolden">जापान हो, एप्पल कंपनी हो या अमिताभ बच्चन, राष्ट्र, संस्था या व्यक्ति सभी अपनी खोई हुई साख को दोबारा हासिल कर सकते हैं बशर्ते वो कमर कस लें, सच्चाई का सामना करें, आमदनी के अनुसार खर्चा करें और नई प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार रहें<span></span></div>
<p>मूडीज संस्था ने अभी तो अमेरिका को लेकर अपना आकलन &#8216;<em>एएए</em>&#8216; रखा है, लेकिन उनकी नजर कुछ नरम है। बीते सप्ताह अमेरिका सहित दुनिया में स्टॉक मार्केट में काफी गिरावट रही। उसके बाद शुक्रवार शाम एसएंडपी ने ऐतिहासिक घोषणा कर इतिहास में पहली बार अमेरिका की रेटिंग को एक पायदान नीचे उतार दिया।</p>
<p><b>क्या मतलब है इसका</b><b>? : </b>सीधे शब्दों में आपके पास का 24 कैरेट सोना अगर किसी दिन 22 कैरेट ही करार दिया जाए तो क्या होगा। देश की आर्थिक रेटिंग के आधार पर ही उसे दूसरे राष्ट्र कर्ज देते हैं। चीन ने अमेरिका को 1 ट्रिलियन डॉलर से अधिक कर्ज दिया है। साख की पायदान कम होते ही चीन ने अमेरिका को चेतावनी संदेश भेजा है कि उसे अपने खर्च को कम करना होगा और जितनी चादर हो उतने ही पैर पसारने होंगे।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि ये साख कुछ दिन और हफ्तों की उथल-पुथल से नहीं बिगड़ी, बल्कि वर्षों से चल रहे खर्चों, इराक और अफगानिस्तान में पानी की तरह बहाया अरबों-खरबों और 14 ट्रिलियन डॉलर का कर्ज भी इसकी वजह है। कई बड़ी कंपनियों के नियमों में लिखा होता है कि वे एएए से कम रेटिंग में पैसा नहीं लगा सकतीं। ये सब कंपनियाँ अब अमेरिका को दीर्घकालीन कर्ज नहीं दे सकतीं।</p>
<p><b>और अब आगे</b><b>? :</b> एसएंडपी ने पायदान को नीचे करते ही ये भी कहा है कि अगर अब भी अमेरिका नहीं सुधरा तो साख और भी नीचे हो सकती है। क्या अमेरिका और दुनिया दोबारा आर्थिक मंदी में डूब जाएँगे? अभी ऐसा नहीं लगता, लेकिन आर्थिक हालत जल्दी नहीं सुधरी तो ऐसा हो भी सकता है। अभी तो अमेरिका की बड़ी कंपनियां काफी मुनाफा कमा रही हैं लेकिन बेरोजगारी कम नहीं हो पा रही है।</p>
<p>जापान हो, एप्पल कंपनी हो या अमिताभ बच्चन, राष्ट्र, संस्था या व्यक्ति सभी अपनी खोई हुई साख को दोबारा हासिल कर सकते हैं बशर्ते वो कमर कस लें, सच्चाई का सामना करें, आमदनी के अनुसार खर्चा करें और नई प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार रहें।</p>
<p>जैसे 1945 के पर्ल हार्बर आक्रमण के बाद 2001 में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर अटैक ने अमेरिका को हिला दिया था, ठीक उसी तरह 1941 के बाद 2011 में इस गिरी हुई साख ने अमेरिका को वित्तीय तौर पर हिला दिया है। क्या कोई इससे सीखेगा, वक्त ही बताएगा।</p>
<p><b>कुछ दूसरे पहलू :</b> वैसे तो यह तीनों साख संस्थाएं भी प्रायवेट कंपनियां है और दरों की गिरावट के समय इन संस्थाओं की काफी निंदा हुई थी। एसएंडपी कंपनी मैकग्रा हिल कंपनी की शाखा है और इसके अध्यक्ष बिट्स पिलानी के पूर्व छात्र भारतीय मूल के देवेन शर्मा हैं।</p>
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		<title>रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून</title>
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		<pubDate>Fri, 26 Jul 2002 10:41:53 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[अमेरिकी अर्थव्यवस्था]]></category>
		<category><![CDATA[अमेरिका की अर्थव्यवस्था]]></category>
		<category><![CDATA[इंदौर]]></category>
		<category><![CDATA[डो जोंस]]></category>
		<category><![CDATA[नेस्डैक]]></category>
		<category><![CDATA[न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज]]></category>
		<category><![CDATA[रहिमन पानी राखिए]]></category>
		<category><![CDATA[वॉल स्ट्रीट]]></category>

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		<description><![CDATA[पानी शब्द पढ़ते ही नईदुनिया के पाठकों को वो जल याद आ जाएगा, जो नल में कभी-कभी आता है और सावन में भी बरस नहीं रहा, लेकिन आज मेरा संकेत रहीम के उस &#8216;पानी&#8216; से नहीं- जिसके बिना &#8216;मोती&#8216; और &#8216;चून&#8217; सून हो जाते हैं, वरन मनुष्य जीवन के चरित्र और ईमान के उस &#8216;पानी&#8216; से है, जिसके ओझल हो जाने से आज सारे विश्व का अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर से विश्वास &#8216;पानी-पानी&#8216; हो रहा है। एक ओर जहां इंदौर में [...]]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><img class="alignleft size-full wp-image-2113" alt="रहिमन पानी राखिए बिन पानी सब सून" src="https://www.jmuchhal.com/wp-content/uploads/2002/07/140.jpg" width="311" height="307" /><span class="dropcap">पा</span>नी शब्द पढ़ते ही नईदुनिया के पाठकों को वो जल याद आ जाएगा, जो नल में कभी-कभी आता है और सावन में भी बरस नहीं रहा, लेकिन आज मेरा संकेत रहीम के उस &#8216;<em>पानी</em>&#8216; से नहीं- जिसके बिना &#8216;<em>मोती</em>&#8216; और &#8216;चून&#8217; सून हो जाते हैं, वरन मनुष्य जीवन के चरित्र और ईमान के उस &#8216;<em>पानी</em>&#8216; से है, जिसके ओझल हो जाने से आज सारे विश्व का अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर से विश्वास &#8216;<em>पानी-पानी</em>&#8216; हो रहा है।</p>
<p>एक ओर जहां इंदौर में &#8216;<em>इंद्र</em>&#8216; की अनावृष्टि को मनाने के लिए यज्ञ-कर्म हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अमेरिका में कुछ लालची और लोभी कंपनी मालिकों की &#8216;<em>इंद्रियों</em>&#8216; की अतिवृष्टि ने निवेशकों के खरबों डॉलर की जमा पूंजी को होम करके स्वाहा-सा कर दिया।</p>
<p><b>डो जोंस को आखिर हुआ क्या है</b><b>?</b></p>
<p>10 दिनों तक लगातार गिरने के बाद कल पहली बार न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज का डो जोंस इन्डेक्स उन्मुक्त होकर 488 अंश चढ़ा है, जिससे सबकी सांस में सांस आई है। क्या यह बढ़त स्थायी है या सिर्फ चातक की स्वाति बूंद? ये तो वक्त ही बताएगा, लेकिन इसके पिछले महीनों में जो हुआ, उससे तो पूरा अमेरिका सिहर उठा है। अमेरिका की अर्थव्यवस्था तो पिछले 18 महीनों से सुस्त ही है, उस पर ओसामा के 11 सितंबर के वारों ने आग में घी का काम किया, लेकिन डॉट कॉम और आतंकवाद से ये घाव कुछ अलग हैं, क्योंकि ये अंदरूनी हैं। व्यवस्था की निष्पक्षता, सिस्टम की स्ट्रेंथ और कार्पोरेट गवर्नेंस का विश्व में पाठ पढ़ाने वाले राष्ट्र के खुद के पिछवाड़े में इतनी पोल? ऑडिटर्स, बैंकर्स, कंपनी के ऑफिसर्स और वॉल स्ट्रीट के दलालों की मिलीभगत ने मिलकर ऐसा तांडव मचाया है कि चरमराई आर्थिक परिस्थिति में &#8216;<em>विश्वासघात</em>&#8216; की दोहरी मार से अमेरिका के पूरे शेयर बाजार का मूल्यांकन मार्च 2000 के 17 ट्रिलियन डॉलर से घटकर सिर्फ 10 ट्रिलियन डॉलर रह गया है। 7 ट्रिलियन डॉलर का घाटा यानी भारत की सालाना जीडीपी का 16 गुना। नेस्डैक मार्च 2000 के 5000 इंडेक्स में तो लगभग 75 प्रतिशत की गिरावट आ गई है और 23 जुलाई तक सिर्फ 9 दिनों में डो इंडेक्स 18 प्रतिशत गिर गया था।</p>
<div class="simplePullQuoteRightGolden">7 ट्रिलियन डॉलर का घाटा यानी भारत की सालाना जीडीपी का 16 गुना<span></span></div>
<p>नहीं, बल्कि अमेरिका की अर्थव्यवस्था तो सुधार पर है, 2002 की पहली तिमाही में जीडीपी ने रिकॉर्ड 6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की, ब्याज दर 1.75 प्रतिशत के न्यूनतम स्तर पर है, महंगाई भी नहीं के बराबर है। जो अवयव बिगड़ गया है, वह है कंपनियों के फाइनेंशियल स्टेटमेंट्‌स और उनके सीईओ और मुख्य अधिकारियों की नीयत और अपने अंशधारकों के प्रति जवाबदेही पर से लोगों का विश्वास, जो कि एनरॉन, एंडरसन, वर्ल्डकॉम, एडेलफिया और ऐसी कई नामी-गिरामी कंपनियों के इस साल में &#8216;<em>काले चिट्ठों</em>&#8216; के एक साथ उजागर होने से हिल गया है।</p>
<p><b>पितामह ग्रीनस्पेन उवाच</b></p>
<p>हाल ही में अमेरिकी सांसदों के सामने बोलते हुए फेडरल रिजर्व बैंक के चेयरमैन और अमेरिकी अर्थव्यवस्था के &#8216;<em>पितामह भीष्म</em>&#8216; एलन ग्रीनस्पेन ने इस मद को नया नाम दिया &#8216;इन्फेक्शियस ग्रीड।&#8217; चातुर्मास में किसी संत के प्रवचन जैसे उद्‌गारों में उन्होंने कहा, &#8216;<em>हमारे अधिकांश आर्थिक समुदाय को मानो</em> &#8216;<em>लालच की महामारी</em>&#8216; ने ग्रस्त कर लिया है। ऐसा नहीं है कि आज का मानव पुरानी पीढ़ी के बजाय कुछ ज्यादा लोभी हो गया है, सच तो ये है कि आज उसकी लोभ-लालसा पूर्ति के साधन बहुत बढ़ गए हैं और इन सब साधनों की पंक्ति में सबसे मादक साबित हुए स्टॉक और स्टॉक ऑपशन्स।</p>
<p><b>कनक-कनक ते सौ गुनी</b><b>, </b><b>मादकता अधिकाय</b></p>
<p>90 के दशक में अमेरिका की आर्थिक प्रगति का सर्वोच्च परिचायक था, यहां के स्टॉक मार्केट के कुलांचे और अंशधारकों के स्टॉक्स की बढ़ती कीमत। कंपनियों के सारे मुख्य अधिकारियों के वेतन का मुख्य हिस्सा कंपनी के स्टॉक्स की प्रगति पर आधारित था और उद्देश्य बहुत साफ था। सब अधिकारी मिलकर कंपनी की प्रगति के लिए जी-जान लगाएंगे, जिससे होंगे कंपनी के अच्छे वार्षिक परिणाम और उससे बढ़ेगी स्टॉक की कीमत, जिससे अंशधारक, कर्मचारी और अधिकारी सभी लाभान्वित होंगे। 1995 से 2000 तक का ये &#8216;<em>स्वर्णिम युग</em>&#8216; तो हम सबको याद है। अधिकारियों और कर्मचारियों को तो घटे दरों से भविष्य में कंपनी के स्टॉक्स खरीदने के लिए लाखों स्टॉक ऑप्शन भी प्रदान किए जाते रहे और ये प्रचलन टेक्नालॉजी कंपनियों में सर्वाधिक था, जिसके अधिकांश प्रभाव तो काफी कारगर सिद्ध हुए।</p>
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		<title>&#8216;एनरॉन&#8217; के दिवाले से लाखों की जमा पूंजी नष्ट</title>
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		<pubDate>Sun, 25 Nov 2001 10:24:23 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[अमेरिकी अर्थव्यवस्था]]></category>
		<category><![CDATA[एनरॉन कंपनी]]></category>
		<category><![CDATA[एनरॉन कॉर्पोरेशन]]></category>
		<category><![CDATA[न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज]]></category>
		<category><![CDATA[पॉवर और ऊर्जा कंपनी]]></category>

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		<description><![CDATA[एशिया में ही अमेरिका की 7वीं सबसे बड़ी कंपनी एनरॉन कॉर्पोरेशन चंद महीनों में ही &#8216;बहुत अच्छी कमाई&#8216; से सीधे दिवाला घोषित करने पर मजबूर हो गई। पिछले साल 80 डॉलर तक हुआ एनरॉन का शेयर न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज से असूचीबद्ध कर दिया गया। एनरॉन कंपनी राष्ट्रपति श्री बुश और रिपब्लिकन पार्टी की बहुत बड़ी समर्थक रही है और &#8216;पार्टी फंड&#8216; में उसने लाखों डॉलर दिए हैं। एनरॉन के साथ-साथ उसके ऑडिटर्स ऑर्थर एंडरसन भी कांग्रेस की जांच के घेरे [...]]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><img class="alignleft size-full wp-image-1501" alt="'एनरॉन' के दिवाले से लाखों की जमा पूंजी नष्ट " src="https://www.jmuchhal.com/wp-content/uploads/2012/12/27.jpg" width="311" height="307" />एशिया में ही अमेरिका की 7वीं सबसे बड़ी कंपनी एनरॉन कॉर्पोरेशन चंद महीनों में ही &#8216;<em>बहुत अच्छी कमाई</em>&#8216; से सीधे दिवाला घोषित करने पर मजबूर हो गई। पिछले साल 80 डॉलर तक हुआ एनरॉन का शेयर न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज से असूचीबद्ध कर दिया गया।</p>
<p>एनरॉन कंपनी राष्ट्रपति श्री बुश और रिपब्लिकन पार्टी की बहुत बड़ी समर्थक रही है और &#8216;<em>पार्टी फंड</em>&#8216; में उसने लाखों डॉलर दिए हैं। एनरॉन के साथ-साथ उसके ऑडिटर्स ऑर्थर एंडरसन भी कांग्रेस की जांच के घेरे में आ गए हैं, क्योंकि उन पर ऑडिटर के रूप में अपने &#8216;<em>कर्तव्यों</em>&#8216; का पालन तो दूर, उनको ताक पर रख देने के आरोप है&#8230;। आज पूरे अमेरिका में ओसामा से ज्यादा एनरॉन छाया हुआ है।</p>
<p>भारतवासियों को एनरॉन नाम से काफी परिचय है, क्योंकि एनरॉन कंपनी ने महाराष्ट्र में दाभोल परियोजना के नाम से एक विशाल पॉवर प्लांट लगाया, जो कि भारत में एक प्रोजेक्ट में सर्वाधिक विदेशी निवेश की मिसाल रहा। प्लांट लगाने के पहले से कानून और राजनीतिक विवादों में लिप्त रही एनरॉन की रिबेका मार्क भारत में विदेशी निवेशकों की पहचान बन गईं और प्लांट लगाने के बाद उसकी बिजली की दर और भुगतान का बखेड़ा खड़ा है, लेकिन पिछले महीनों में अमेरिका में जिस तरह एनरॉन जैसी &#8216;<em>ठोस</em>&#8216; कंपनी भी ताश के ढेर के समान ढह गई, उससे तो भारत के हर्षद काल के दिन याद आ गए&#8230;।</p>
<p><b>क्या थी एनरॉन</b><b>?</b></p>
<p>पिछले साल &#8216;एनरॉन&#8217; फॉर्च्यून पत्रिका द्वारा अमेरिका की सबसे बड़ी कंपनियों की सूची फॉर्च्यून-500 में 7वें नंबर पर थी। एनरॉन का वार्षिक कारोबार 100 बिलियन डॉलर का था और उसका मार्केट कॉम्पीटिशन भी 50 बिलियन डॉलर था। टेक्सॉस में ह्यूस्टन शहर में बसी एनरॉन मुख्य एनर्जी (ऊर्जा) से संबंधित कारोबारों में संलग्न थी जिसमें प्राकृतिक गैस, तेल और बिजली का जनरेशन और डिस्ट्रीब्यूशन मुख्य था। एनरॉन के चेयरमैन केनेथ ले काफी पहुंच वाले व्यक्ति थे। 1992 में पहले बुश के चुनाव के समय भी उन्होंने और एनरॉन ने मुक्तहस्त से डोनेशन दिए थे। वैसे भी टेक्सास और एनर्जी व्यवस्था सदा से ही रिपब्लिकन पार्टी के &#8216;करीब&#8217; रहा है।</p>
<div class="simplePullQuoteRightGolden">पिछले महीनों में अमेरिका में जिस तरह एनरॉन जैसी &#8216;<em>ठोस</em>&#8216; कंपनी भी ताश के ढेर के समान ढह गई, उससे तो भारत के हर्षद काल के दिन याद आ गए&#8230;।<span></span></div>
<p>लेकिन कुछ समय से एनरॉन इनके आगे निकल गई थी। उसने ऊर्जा में फ्यूचर्स कॉन्ट्रेक्ट्‌स के बिचौलिए के रूप में भी जोर-शोर से काम करना शुरू कर दिया था। यहां तक कि सन्‌ 2000 में तो अमेरिका की ऊर्जा के सारे वायदे सौदे में से 25 प्रतिशत एनरॉन के जरिये ही थे। इंटरनेट का एनरॉन ने जमकर इस्तेमाल किया और वह दुनिया की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी कहलाने लगी। अब तो ऊर्जा से आगे बढ़कर एनरॉन ने हर तरह के वायदे सौदे शुरू कर दिए, फिर वह चाहे पानी, इस्पात, कागज यहां तक कि मीडिया में एडवरटाइजिंग, स्पेस और इंटरनेट की बैंड-विड्‌थ के भी वह वायदे सौदे करवा रही थी। धंधा जोरों पर था और एनरॉन ह्यूस्टन शहर के मुकुट का ताज था। एनरॉन के 20 हजार से भी अधिक कर्मचारी खुश थे। उनके रिटायरमेंट फंड में भी सर्वाधिक एनरॉन के ही शेयर थे। एनरॉन की ऑडिटर कंपनी थी-आर्थर एंडरसन, जो कि अकाउंटिंग पेशे में &#8216;बिग फाइव&#8217; में से एक है। 85 देशों में उनके 9 बिलियन डॉलर से सालाना बिलिंग में एनरॉन विश्व में उनका दूसरा सबसे बड़ा क्लाइंट था, जो कि ऑडिटिंग के अलावा &#8216;बिजनेस कंसल्टिंग&#8217; के लिए भी एंडरसन के लिए &#8216;सोने के अंडे वाली मुर्गी&#8217; थी।</p>
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		<title>अमेरिकन मंदी ने 10 लाख रोजगार खाए</title>
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		<pubDate>Wed, 25 Jul 2001 11:04:48 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
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		<description><![CDATA[अमेरिका में नास्दाक शेयर बाजार में आई गिरावट के बाद शुरू हुई मंदी थमने का नाम नहीं ले रही है। हाल ही में प्रकाशित आंकड़ों से यह बात ज्ञात हुई है कि दिसंबर 2000 से शुरू हुई मंदी अभी तक 10 लाख लोगों को विदा कर चुकी है। मंदी का प्रभाव केवल टेक्नोलॉजी क्षेत्र तथा आईटी कंपनियों पर ही नहीं, जैसा कि विशेषकर भारत में प्रचारित किया जा रहा है, बल्कि इसकी चपेट में ऑटोमोबाइल, भारी उद्‌योग, उत्पादन इकाइयों से [...]]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><img class="alignleft size-full wp-image-3247" title="अमेरिकन मंदी ने 10 लाख रोजगार खाए" alt="" src="https://www.jmuchhal.com/wp-content/uploads/2001/07/341.jpg" width="311" height="307" />अमेरिका में नास्दाक शेयर बाजार में आई गिरावट के बाद शुरू हुई मंदी थमने का नाम नहीं ले रही है। हाल ही में प्रकाशित आंकड़ों से यह बात ज्ञात हुई है कि दिसंबर 2000 से शुरू हुई मंदी अभी तक 10 लाख लोगों को विदा कर चुकी है।</p>
<p>मंदी का प्रभाव केवल टेक्नोलॉजी क्षेत्र तथा आईटी कंपनियों पर ही नहीं, जैसा कि विशेषकर भारत में प्रचारित किया जा रहा है, बल्कि इसकी चपेट में ऑटोमोबाइल, भारी उद्‌योग, उत्पादन इकाइयों से लेकर उपभोक्ता सामग्री बनाने वाली कंपनियां, बड़े-बड़े डिपार्टमेंटल स्टोर्स भी आ गए हैं। किसी न किसी बड़ी कंपनी द्वारा हजारों की संख्या में छंटनी की खबर आना यहां आम बात हो गई है। एक आंकड़े के अनुसार नास्दाक शेयर बाजार में सूचीबद्ध आईटी की कपंनियों ने इस गिरावट में 3 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर का नुकसान उठाया है। कई डॉट कॉम कंपनियों के शेयर, एक समय जिनका भाव 200 डॉलर तक पहुंच चुका था, आज 1 डॉलर में बिक रहे हैं।</p>
<p><b>किसने कितनों को अलविदा कहा</b></p>
<p>न्यूयॉर्क में हाल ही में अमेरिका की बड़ी कंपनियों द्वारा अपने कर्मचारियों की छंटनी की सूची जारी की गई है। इस सूची में कंपनी का नाम तथा कोष्ठक में उनके द्वारा निकाले गए कर्मचारियों की संख्या को देखकर स्थिति की गंभीरता का पता चलता है।</p>
<div class="simplePullQuoteRight">उन्होंने आशान्वित करने वाली एक ही बात कही है कि अब स्थिति और अधिक खराब नहीं होगी<span></span></div>
<p><b>आईटी कंपनियों में छंटनी एक नजर में</b></p>
<p>नॉर्टेल नेटवर्क (30,000), मोटोरोला (26,000), सोलेक्ट्रॉन (20,850), वर्ल्डकॉम (11,550), लुसेंट टेक्नोलॉजी (10,000), कम्पॉक कम्प्यूटर (9000), इरिक्सॅन (9000), सिस्को सिस्टम्स (8,500), फिलिप्स इलेक्ट्रॉनिक्स (7,000), कॉर्निंग (6,125), डेल कम्प्यूटर (5,700) व सीमेन्स (5,500)।</p>
<p><b>उत्पादन कंपनियों में छंटनी</b></p>
<p>जनरल इलेक्ट्रिक (75,000), हनीवेल (50,000), डेमलर क्रिसलर्स जनरल मोटर्स (15,000), डेल्फी ऑटोमोटिव (11,500), प्रॉक्टर्स एंड गेम्बल (9, 600), मित्सुबिशी (9,500), बोइंग (8,600), यूनीलीवर (8,000)।</p>
<p><b>ग्रीनस्पान अचंभे में</b></p>
<p>अमेरिकी फेडरल रिजर्व के प्रमुख (अमेरिकी वित्तमंत्री) एलन ग्रीनस्पान को भी देश को मंदी से उबारने का रास्ता नजर नहीं आ रहा है। तीन बार ब्याज की दरों को कम करने के बाद भी वे अमेरिका को मंदी से उबारने में सफल नहीं हो पाए हैं। अमेरिकी सरकार ने उपभोक्ता मांग में तेजी लाने के उद्‌देश्य से देश की जनता को करीब 1 ट्रिलियन डॉलर से ज्याद टैक्स में कटौती की घोषणा की है।</p>
<p>हाल ही में फेडरल रिजर्व के कर्ताधर्ता ग्रीनस्पान ने निकट भविष्य में मंदी छंट जाने का कोई ठोस आश्वासन देने से इंकार कर दिया। उन्होंने आशान्वित करने वाली एक ही बात कही है कि अब स्थिति और अधिक खराब नहीं होगी। शुभ संकेत के रूप में यह भी देखा जा सकता है कि अमेरिका में उपभोक्ता की व्यय शक्ति बढ़ी है। जाहिर है कि मांग बढ़ने से कंपनियों की स्थिति में सुधार आएगा। दूसरी ओर अमेरिकी मंदी का असर अब यूरोप की ओर भी बढ़ रहा है। जापान भी मंदी की चपेट में है और चीन की अर्थव्यवस्था के विकास को झटका लगने की खबर है। इस चिंताजनक हालात में सुधार की उम्मीद पर टिकी है व्यापार की दुनिया।</p>
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		<title>कैथरीन ग्राहम : रसोई से &#8216;वॉशिंगटन पोस्ट&#8217; तक</title>
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		<pubDate>Wed, 25 Jul 2001 06:26:52 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[अमेरिकी अर्थव्यवस्था]]></category>
		<category><![CDATA[अमेरिकी सरकार]]></category>
		<category><![CDATA[कैथरीन ग्राहम]]></category>
		<category><![CDATA[वॉटरगेट घोटाले]]></category>
		<category><![CDATA[वॉटरगेट स्कैंडल]]></category>
		<category><![CDATA[वॉशिंगटन पोस्ट]]></category>

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		<description><![CDATA[अमेरिकी इतिहास में &#8216;वॉटरगेट स्कैंडल&#8216; के दौरान प्रेस की महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली तथा &#8216;वॉशिंगटन पोस्ट&#8216; की प्रकाशक रहीं कैथरीन ग्राहम का हाल में 84 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। एक सीधी-सादी घरेलू अमेरिकन महिला की जिंदगी जी रही ग्राहम को अचानक &#8216;वॉशिंगटन पोस्ट&#8216; जैसे समाचार पत्र को प्रकाशित करने की जिम्मेदारी संभालना पड़ी, जब उनके पति फिलिप ने आत्महत्या कर ली। अपने पति की आत्महत्या के बाद कैथरीन ने फैसला किया कि वे &#8216;वॉशिंगटन पोस्ट&#8216; को संभालेंगी। [...]]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><img class="alignleft size-full wp-image-1498" alt="कैथरीन ग्राहम : रसोई से वॉशिंगटन पोस्ट तक " src="https://www.jmuchhal.com/wp-content/uploads/2001/07/26.jpg" width="311" height="307" /><span class="dropcap">अ</span>मेरिकी इतिहास में &#8216;<em>वॉटरगेट स्कैंडल</em>&#8216; के दौरान प्रेस की महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली तथा &#8216;<em>वॉशिंगटन पोस्ट</em>&#8216; की प्रकाशक रहीं कैथरीन ग्राहम का हाल में 84 वर्ष की उम्र में निधन हो गया।</p>
<p>एक सीधी-सादी घरेलू अमेरिकन महिला की जिंदगी जी रही ग्राहम को अचानक &#8216;<em>वॉशिंगटन पोस्ट</em>&#8216; जैसे समाचार पत्र को प्रकाशित करने की जिम्मेदारी संभालना पड़ी, जब उनके पति फिलिप ने आत्महत्या कर ली।</p>
<p>अपने पति की आत्महत्या के बाद कैथरीन ने फैसला किया कि वे &#8216;<em>वॉशिंगटन पोस्ट</em>&#8216; को संभालेंगी। हालांकि उस समय तक ग्राहम एक आम गृहिणी की भूमिका निभा रही थीं तथा उन्हें अखबार चलाने का न तो विश्वास था और न ही अनुभव, लेकिन उनके दृढ़ निश्चय ने न केवल अखबार को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया, बल्कि वे &#8216;फारच्यून 500 बिजनेस&#8217; नामक प्रतिष्ठित संगठन की प्रमुख बनने वाली पहली अमेरिकी महिला भी बनीं।</p>
<p>कैथरीन ग्राहम ने न केवल अखबार का प्रबंधन अच्छी तरह संभाला, बल्कि उन्होंने अपने आप को एक सुलझा हुआ पत्रकार भी साबित किया। ग्राहम में छिपे पत्रकार को सम्मान देते हुए उनकी आत्मकथा &#8216;<em>पर्सनल हिस्ट्री</em>&#8216; के लिए उन्हें पुलित्जर सम्मान भी दिया गया। उन्हें याद करते हुए संपादक ब्रेन ब्रेडले कहते हैं कि &#8216;उन्होंने बहुत जल्दी तथा अच्छी तरह सब कुछ सीखा। सीखने का वही तरीका था जिसको हम सभी अपनाते हैं, अर्थात अपनी गलतियों से सीखना। एक पत्रकार के रूप में ग्राहम को कई कड़ी परीक्षाओं से गुजरना पड़ा, लेकिन ऐसे समय में उन्होंने वे निर्णय लिए जो एक पत्रकार ले सकता है, लेकिन संभवतः मालिक नहीं।</p>
<div class="simplePullQuoteRightGreen">अपने पति की आत्महत्या के बाद कैथरीन ने फैसला किया कि वे &#8216;<em>वॉशिंगटन पोस्ट</em>&#8216; को संभालेंगी। उनके दृढ़ निश्चय ने न केवल अखबार को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया<span></span></div>
<p>1971 की बात है। ग्राहम पर अमेरिकी सरकार का दबाव बढ़ता जा रहा था कि वे वियतनाम युद्ध के दौरान अमेरिकी सरकार के कुछ निर्णयों और गुप्त कागजातों को अपने अखबार में स्थान न दें, लेकिन ग्राहम ने सभी तथ्यों को अखबार में छापने का निर्णय लिया।</p>
<p>इसी तरह वॉटरगेट घोटाले में ग्राहम ने अपने अखबार में तत्कालीन राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन के खिलाफ लगे आरोपों को प्रमुखता से स्थान दिया। उन्होंने सरकार से मिलने वाली धमकियों का हर कीमत पर सामना करते हुए इस मुद्‌दे पर मीडिया की शक्ति को सरकार की ताकत से ऊपर सिद्ध कर दिया। ग्राहम के कार्यकाल में &#8216;<em>वॉशिंगटन पोस्ट</em>&#8216; ने अच्छी-खासी तरक्की की तथा इसे फारच्यून 500 कंपनियों में जगह मिली। इन तमाम उपलब्धियों के बावजूद ग्राहम उपलब्धि के गुमान से कोसों दूर एक ऐसी शख्सियत रहीं, जिनके चेहरे का मुस्कुराहट से तनाव के क्षणों में भी रिश्ता बना रहा।</p>
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