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	<title>Jitendra Muchhal &#124; Jitendra Muchhal Website &#124; J Muchhal &#124; जीतेंद्र मुछाल</title>
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		<title>न्यूयॉर्क में खाने की &#8216;छप्पन दुकान&#8217;</title>
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		<pubDate>Mon, 09 Apr 2012 07:39:41 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[अमेरिका में भारत]]></category>
		<category><![CDATA[छप्पन दुकान]]></category>
		<category><![CDATA[न्यूयॉर्क]]></category>
		<category><![CDATA[फूड रियलिटी शो]]></category>
		<category><![CDATA[वर्ली फूड फेस्टिवल]]></category>
		<category><![CDATA[शेफ]]></category>
		<category><![CDATA[संजीव कपूर]]></category>

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		<description><![CDATA[न्यूयॉर्क में खाने की &#8216;छप्पन दुकान&#8217; वर्ली फूड फेस्टिवल में पूरा आनंद कहीं गरमा-गरम आलूटिक्की, तो कहीं लजीज भेलपुरी। कहीं स्वादिष्ट &#8216;राज-कचोरी&#8216;, और कहीं पराठा और पनीर। ना मैं इंदौर की छप्पन दुकान पे हूं और ना ही दिल्ली के निरूलास में, यह नजारा था 5 अप्रैल की शाम वर्ली फूड फेस्टिवल के दूसरे सोपान में। जहां हजारों की तादाद में न्यूयॉर्क के भारतीय भोजनप्रेमियों ने कई तरह के शाकाहारी और निरामिश भोजन का &#8216;आस्वादन&#8216; किया। वर्तमान में चल रही [...]]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p align="center"><b>न्यूयॉर्क में खाने की </b><b>&#8216;छप्पन दुकान&#8217;</b></p>
<p align="center"><b>वर्ली फूड फेस्टिवल में पूरा आनंद</b></p>
<p><img class="alignleft size-full wp-image-2057" alt="न्यूयॉर्क में खाने की 'छप्पन दुकान'" src="https://www.jmuchhal.com/wp-content/uploads/2013/01/1111.jpg" width="311" height="307" />कहीं गरमा-गरम आलूटिक्की, तो कहीं लजीज भेलपुरी। कहीं स्वादिष्ट &#8216;<em>राज-कचोरी</em>&#8216;, और कहीं पराठा और पनीर। ना मैं इंदौर की छप्पन दुकान पे हूं और ना ही दिल्ली के निरूलास में, यह नजारा था 5 अप्रैल की शाम वर्ली फूड फेस्टिवल के दूसरे सोपान में। जहां हजारों की तादाद में न्यूयॉर्क के भारतीय भोजनप्रेमियों ने कई तरह के शाकाहारी और निरामिश भोजन का &#8216;<em>आस्वादन</em>&#8216; किया।</p>
<p>वर्तमान में चल रही भोजन, टॉप शेफ, फूड रियलिटी शो आदि की लोकप्रियता को देखते हुए वर्ली सिंह और उनके पति ने &#8216;<em>वर्ली फूड फेस्टिवल</em>&#8216; के नाम से भोजन का मेला न्यूयॉर्क में लगाया। न्यूयॉर्क, न्यूजर्सी के सभी नामी-गिरामी भारतीय रेस्टोरेंट ने यहां बूथ लगाए, आने वालों को अपनी 2-3 विशेष ‍&#8217;<em>डिशेज</em>&#8216; का स्वाद चखाया। साथ ही में ग्लैमर और ख्याति को बढ़ाने के लिए मुख्य अतिथि और आकर्षण के केंद्र विख्यात संजीव कपूर और पद्मा लक्ष्मी और टॉप शेफ में भारत में प्रचलित हो रहे कई उभरते &#8216;शेफ&#8217;।</p>
<div class="simplePullQuoteRightPerpal">आकर्षण के केंद्र विख्यात संजीव कपूर और पद्मा लक्ष्मी और टॉप शेफ में भारत में प्रचलित हो रहे कई उभरते &#8216;शेफ&#8217;<span></span></div>
<p>न्यूयॉर्क के मेट्रोपॉलिटन पैवेलियन में शाम 5 से 10 के इस आयोजन में हजारों की तादाद में इस इलाके के प्रवासी और कई अमेरिकन लोगों ने एक ही छत के नीचे सारे मशहूर भारतीय रेस्टोरेंट्‍स के खाने के स्वाद का आनंद लिया। इंट्री फीस $100 और $250 थी। अंदर सभी स्टॉल्स पे &#8216;<em>सैम्पलिंग</em>&#8216; का कोई शुल्क नहीं था। इसके साथ सभी को इन रेस्टोरेंट्‍स के डिस्काउंट कूपन भी दिए गए। कोई 50 से ‍अधिक रेस्टोरेंट्‍स ने वहां पर अपने बूथ लगाए थे। लोग दफ्तरों से सीधे टाई-सूट और काम की पोशाक में आए थे। लेकिन अंगुलियों में भरीं &#8216;<em>डिशेज</em>&#8216; के स्वाद के चटखारे लेने में कोई लाजो-शरम नहीं थी।</p>
<p>वर्ली फूड फेस्टिवल का यह दूसरा साल था, और इसके बाद यह अगले साल दुबई में आयोजित किया जाने वाला है। टीवी पर सदा छाए हुए संजीव कपूर और पद्मा लक्ष्मी को इतने पास से देखने, बात करने और हां, पाक-प्रणाली की विधियां बताते हुए लोगों को बहुत आनंद आया। इंदौरी हूं, मालवी स्वाद अंतस में बसा है,  गोया यहां पर श्रीमाया या जैन-मधुरम का एक बूथ होता और यहां लोग पाये से उतरती जलेबी और मसालेदार गराड़ू खाते तो यह सब भी धन्य हो जाते!!</p>
<p><em>www.Varlifoodfestival.com</em></p>
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		<title>कर्म साधना ही असली दिवाली</title>
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		<pubDate>Thu, 27 Oct 2011 11:23:04 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[अमेरिका में भारत]]></category>
		<category><![CDATA[अनिल अंबानी]]></category>
		<category><![CDATA[कर्म साधना]]></category>
		<category><![CDATA[दिवाली]]></category>
		<category><![CDATA[न्यूयॉर्क]]></category>
		<category><![CDATA[रतन टाटा]]></category>
		<category><![CDATA[लक्ष्मी-पूजा]]></category>

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		<description><![CDATA[दिवाली के दिन 26 अक्टूबर को एयर इंडिया की मुंबई-न्यूयॉर्क उड़ान एआई-191 ने मुंबई से मंगलवार रात 1.30 बजे उड़ान भरी। डायरेक्ट फ्लाइट के लिए अमेरिका की दूरी 15.30 घंटे में तय होनी थी। 300 से अधिक यात्रियों वाली उड़ान में सिर्फ 37 यात्री थे। जहाज के कप्तान परमार के अनुसार भी ये सबसे हल्की उड़ान थी। 37 यात्रियों में एक मैं था, एक मेरा अमेरिकन दोस्त बॉब और दो थे बिलेनियर रतन टाटा और अनिल अंबानी। टाटा को तो [...]]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><img class="alignleft size-full wp-image-2115" alt="कर्म साधना ही असली दिवाली" src="https://www.jmuchhal.com/wp-content/uploads/2011/10/144.jpg" width="311" height="307" /><span class="dropcap">दि</span>वाली के दिन 26 अक्टूबर को एयर इंडिया की मुंबई-न्यूयॉर्क उड़ान एआई-191 ने मुंबई से मंगलवार रात 1.30 बजे उड़ान भरी। डायरेक्ट फ्लाइट के लिए अमेरिका की दूरी 15.30 घंटे में तय होनी थी। 300 से अधिक यात्रियों वाली उड़ान में सिर्फ 37 यात्री थे। जहाज के कप्तान परमार के अनुसार भी ये सबसे हल्की उड़ान थी। 37 यात्रियों में एक मैं था, एक मेरा अमेरिकन दोस्त बॉब और दो थे बिलेनियर रतन टाटा और अनिल अंबानी।</p>
<p>टाटा को तो मैंने प्लेन के टेकऑफ के समय देख लिया था, लेकिन प्लेन के स्टाफ ने अनिल अंबानी के बारे में भी बताया। अनिल अंबानी सीट-1 पर और उसके ठीक पीछे रतन टाटा सीट-2 पर बैठे थे। यात्रा के दौरान दोनों से मिलने और फोटो की इच्छा जाहिर की लेकिन फर्स्ट क्लास के यात्रियों से मिलने के लिए सब निर्णय जहाज का कप्तान ही लेता है।</p>
<p>न्यूयॉर्क में सुबह 7.30 बजे उतरते समय दोनों को बहुत करीब से देखा और व्यक्तिगत रूप से अनिल अंबानी और रतन टाटा को हैप्पी दिवाली कहा, जिसका उन्होंने बड़े मुस्कराते हुए उत्तर दिया। अनिल अंबानी हरी टी-शर्ट और ऊपर से ओवरकोट और टाटा बिजनेस शर्ट और ओवरकोट में थे।</p>
<div class="simplePullQuoteRight">कर्म-साधना ही असली लक्ष्मी-पूजा है, बता दिया रतन और अनिल ने!! हैप्पी दिवाली&#8230;.।<span></span></div>
<p>दोनों के लिए अमेरिका में भी प्लेन के दरवाजे पर उनके भारतीय मूल के आफिसर रिसीव करने आए थे, इमीग्रेशन में दोनों दस खिड़कियों की दूरी पर खड़े थे और फिर रतन टाटा तो सामान के लिए बैगेज एरिया में भी पांच मिनट रुके।</p>
<p>टाटा को प्लेन में देखकर अच्छा लगा लेकिन अनिल अंबानी को देखकर बहुत आश्चर्य हुआ कि दिवाली के दिन अपने देश और घर से दूर ये लक्ष्मी पुत्र किस लक्ष्मी की सेवा में सात समुंदर पार आए थे? क्योंकि अनिल अंबानी तो वैसे भी काफी धार्मिक हैं। क्या प्लेन में इन दोनों ने एक-दूसरे से कोई बात की, वो फर्स्ट क्लास के पर्दे के पीछे छुपा है। दिवाली के दिन अमेरिका में अनिल अंबानी और रतन टाटा को हैप्पी दिवाली बोलकर और सुनकर मैं तो धन्य हो गया। और हां, मेरी मां सहित भारत की हर मां के लिए जिनका बेटा दिवाली के दिन उनके साथ नहीं हैं, एक संदेश कि कोकिला बेन अंबानी भी आप ही की तरह हैं!! कर्म-साधना ही असली लक्ष्मी-पूजा है, बता दिया रतन और अनिल ने!! हैप्पी दिवाली&#8230;.।</p>
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		<title>पार्क एवेन्यू बना नॉर्थ ब्लॉक</title>
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		<pubDate>Sat, 10 Sep 2011 06:28:08 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[अमेरिका में भारत]]></category>
		<category><![CDATA[क्लिंटन]]></category>
		<category><![CDATA[नॉर्थ ब्लॉक]]></category>
		<category><![CDATA[पार्क एवेन्यू]]></category>
		<category><![CDATA[प्रणब मुखर्जी]]></category>
		<category><![CDATA[मनमोहनसिंह]]></category>

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		<description><![CDATA[प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह तो इस वक्त न्यूयॉर्क में हैं ही, लेकिन भारत सरकार के छह और वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री भी उन्हीं तारीखों में न्यूयॉर्क-वॉशिंगटन में विभिन्न बैठकों में शरीक थे। प्रतिवर्ष सितंबर माह का दूसरा पखवाड़ा न्यूयॉर्क-वॉशिंगटन में विश्व के नेताओं का जमघट लग जाता है। न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र की महासभा और वॉशिंगटन में आईएमएफ और वर्ल्ड बैंक की सालाना बैठक। इसी के साथ अब नया जुड़ गया है पूर्व राष्ट्रपति क्लिंटन द्वारा स्थापित &#8216;क्लिंटन ग्लोबल इनिशिएटिव&#8217;। मानो सारी दुनिया [...]]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><a href="https://www.jmuchhal.com/park-avenue-bana-north-block/park_avenue" rel="attachment wp-att-3726"><img src="https://www.jmuchhal.com/wp-content/uploads/2011/09/Park_Avenue.jpg" alt="Park_Avenue" width="311" height="307" class="alignleft size-full wp-image-3726" /></a>प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह तो इस वक्त न्यूयॉर्क में हैं ही, लेकिन भारत सरकार के छह और वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री भी उन्हीं तारीखों में न्यूयॉर्क-वॉशिंगटन में विभिन्न बैठकों में शरीक थे।</p>
<p>प्रतिवर्ष सितंबर माह का दूसरा पखवाड़ा न्यूयॉर्क-वॉशिंगटन में विश्व के नेताओं का जमघट लग जाता है। न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र की महासभा और वॉशिंगटन में आईएमएफ और वर्ल्ड बैंक की सालाना बैठक। इसी के साथ अब नया जुड़ गया है पूर्व राष्ट्रपति क्लिंटन द्वारा स्थापित &#8216;क्लिंटन ग्लोबल इनिशिएटिव&#8217;। मानो सारी दुनिया की सरकारें न्यूयॉर्क और वॉशिंगटन में आ जाती हैं। प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह के दल में विदेश मंत्री एसएम कृष्णा शरीक हैं, वहीं वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी आईएमएफ और वर्ल्ड बैंक की बैठक में आए हैं। उनके साथ ऊर्जा मंत्री सुशील कुमार शिंदे, वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा और गैर-परम्परागत ऊर्जा मंत्री फारूख अब्दुल्ला भी विभिन्न अमेरिकन कंपनियों और निवेशकों से बैठक और विचार-विमर्श के लिए आए हैं। इस समय स्वास्थ्य मंत्री गुलाब नबी आजाद चिकित्सा से संबंधित एक बैठक में भाग लेने यहां आए हैं। यह सभी ‍वरिष्ठ मंत्री न्यूयॉर्क और वॉशिंगटन में पूरी बैठकों और मुलाकातों में व्यस्त हैं और उसके साथ विकसित देशों की आर्थिक मंदी और भारत में गृह-वित्तमंत्री की &#8216;<em>तकरार</em>&#8216; ने घटनाक्रम को और भी सुर्ख बना दिया है।</p>
<div class="simplePullQuoteRight">मानो सारी दुनिया की सरकारें न्यूयॉर्क और वॉशिंगटन में आ जाती हैं<span></span></div>
<p>इन मंत्रियों के साथ रतन टाटा, राजन मित्तल जैसे भारत के शीर्ष उद्योगपति और प्रशासक भी अमेरिकन निवेशकों और कंपनियों से चर्चा करने यहां आए हैं। तभी तो &#8216;<em>प्रणब दा</em>&#8216; साधारणत: मनमोहनजी से मिलने गाड़ी में साउथ ब्लॉक से सामने नॉर्थ ब्लॉक जाते होंगे, आज वही सिंह से मिलने वॉशिंगटन से न्यूयॉर्क आ रहे हैं। यही नहीं, मंत्री कपिल सिब्बल, ज्योतिरादित्य सिंधिया और सुबोधकांत सहाय इन्हीं दिनों में दूसरे देशों के दौरों पर हैं।</p>
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		<item>
		<title>अमेरिका में &#8216;आइरीन&#8217; ने दी दस्तक</title>
		<link>https://www.jmuchhal.com/america-mein-iron-ne-di-dastak</link>
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		<pubDate>Sun, 28 Aug 2011 11:17:37 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[जनजीवन]]></category>
		<category><![CDATA[अमेरिका आइरीन]]></category>
		<category><![CDATA[अर्थव्यवस्था]]></category>
		<category><![CDATA[आइरीन तूफान]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रपति बराक ओबामा]]></category>

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		<description><![CDATA[अमेरिका में हाल के वर्षों में यह पहला मौका है, जब उत्तर-पूर्वी राज्यों में आपातकाल की घोषणा की गई है। यहां आइरीन तूफान आने के कारण जनजीवन पर खासा असर पड़ा है। न्यूयॉर्क में सभी ट्रेनें रद्द कर दी गई हैं, उपनगर मैनहट्टन में बिजली आपूर्ति बंद की जा सकती है। आइरीन तूफान का असर अमेरिका के 5-6 करोड़ लोगों पर पड़ेगा। न्यूयॉर्क में ट्रेनों और सब-वे परिवहन सेवा बंद होने के बाद शनिवार से क्षेत्र के सभी विमानतलों को [...]]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><img class="alignleft size-full wp-image-2085" alt="अमेरिका में 'आइरीन' ने दी दस्तक" src="https://www.jmuchhal.com/wp-content/uploads/2011/08/141.jpg" width="311" height="307" /><span class="dropcap">अ</span>मेरिका में हाल के वर्षों में यह पहला मौका है, जब उत्तर-पूर्वी राज्यों में आपातकाल की घोषणा की गई है। यहां आइरीन तूफान आने के कारण जनजीवन पर खासा असर पड़ा है। न्यूयॉर्क में सभी ट्रेनें रद्द कर दी गई हैं, उपनगर मैनहट्टन में बिजली आपूर्ति बंद की जा सकती है। आइरीन तूफान का असर अमेरिका के 5-6 करोड़ लोगों पर पड़ेगा।</p>
<p>न्यूयॉर्क में ट्रेनों और सब-वे परिवहन सेवा बंद होने के बाद शनिवार से क्षेत्र के सभी विमानतलों को बंदकर दिया गया है। 136 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तूफान ने सबसे पहले उत्तरी कैरोलिना राज्य में दस्तक दी, जो वर्जीनिया की ओर बढ़ेगा। राष्ट्रपति बराक ओबामा ने तूफान के ऐतिहासिक होने की संभावना जताई है।</p>
<p><b>आवश्यक खरीदारी :</b> तूफान सहने के लिए लोगों ने इस बार भी पानी, टार्च, जनरेटर, ब्रेड और दूध जैसी आवश्यक वस्तुओं की खरीदारी कर ली। कोई हादसा न हो इसके लिए सभी बड़े पुल और राजमार्गों पर यातायात बंद कर दिया गया है। तूफान के कारण एहतियातन प्रभावित इलाकों में 6500 उड़ानें रद्द कर दी गई हैं।</p>
<p>शनिवार देर रात से रविवार देर शाम के बीच न्यू जर्सी और न्यूयॉर्क में तूफान का ज्यादा असर होगा। तूफान के प्रभाव वाले संभावित इलाकों में लोग प्रार्थना कर रहे हैं कि यह आपदा बिना किसी नुकसान के गुजर जाए।</p>
<div class="simplePullQuoteRight">अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा कि तूफान बेहद खतरनाक और अर्थव्यवस्था के लिए महँगा साबित होगा<span></span></div>
<p><b>न्यूयॉर्क में बाढ़ का खतरा : </b>तूफान आइरीन ने भारी बारिश और तेज हवाओं के साथ न्यूयॉर्क में अपनी आमद दे दी है। इसके साथ ही यहां बाढ़ का खतरा पैदा हो गया है। शहर के बाढ़ संभावित क्षेत्रों के लगभग 3,70,000 लोगों को घर छोड़ने को कहा गया है।</p>
<p>मेयर माइकल ब्लूमबर्ग ने कहा कि तूफान अंतत: हम तक पहुंच ही गया है। दूर जाने का समय अब बीत गया है। उन्होंने कहा कि अगर आप कहीं और नहीं गए हैं, तो हमारा सुझाव है कि आप अब जहां हैं, वहीं रहें। प्रकृति हमसे कहीं ज्यादा बलशाली है।</p>
<p><b>आठ लोगों की मौत : </b>लगभग 140 किमी प्रति घंटे की गति से चल रही हवाओं के साथ आइरीन अब तक के सबसे खतरनाक तूफानों में से एक है। तूफान में अब तक 11 साल के एक बच्चे समेत कम से कम आठ लोगों की मौत हो चुकी है। आइरीन के कारण लगभग 10 लाख लोगों को बिजली नहीं मिल रही, लगभग 8,000 उड़ानों को भी निरस्त किया गया है और लगभग 20 लाख लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया है।</p>
<p><b>दुनिया भर से खैरियत :</b> अमेरिका में तूफान आना नई बात तो नहीं है फिर भी लोग चिंतित और डरे हुए हैं। अमेरिकियों को उनके दुनिया भर में रह रहे रिश्तेदारों के फोन कॉल और ई-मेल संदेश मिल रहे हैं। इनमें सभी रिश्तेदार खैरियत पूछ रहे हैं। ताजा जानकारी के लिए लोग ट्विटर जैसी अन्य सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट का सहारा ले रहे हैं। उत्तर-पूर्वी इलाकों में रहने वाले ज्यादातर लोगों का तूफान या बाढ़ से होने वाले नुकसान का बीमा नहीं है।</p>
<p><b>बेहद खतरनाक :</b> अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा कि तूफान बेहद खतरनाक और अर्थव्यवस्था के लिए महँगा साबित होगा। यह तूफान ऐसे समय आ रहा है जब देश वर्ष 2005 में कैटरीना तूफान के जख्मों से उबर ही रहा है।</p>
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		<title>भारत में विदेशी निवेशकों के लिए सुनहरा मौका बुनियादी ढाँचे में निवेश की संभावनाएँ</title>
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		<pubDate>Wed, 15 Sep 2010 11:14:33 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[कारोबार की दुनिया]]></category>
		<category><![CDATA[आर्थिक मंदी]]></category>
		<category><![CDATA[इंडिया इन्वेस्टमेंट फोरम]]></category>
		<category><![CDATA[ऊर्जा उत्पादन]]></category>
		<category><![CDATA[परिवहन मंत्रालय]]></category>
		<category><![CDATA[भारत]]></category>
		<category><![CDATA[विदेशी निवेश]]></category>

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		<description><![CDATA[भारत में बुनियादी ढाँचे के विकास के लिए अगले पाँच वर्षों में 15 खरब डॉलर निवेश की योजना है। इसमें से 500 अरब डॉलर का निवेश निजी क्षेत्र से संभावित है। भारत की प्रगति में शरीक होने का विदेशी निवेशकों के लिए यह सुनहरा अवसर है। हाल ही में न्यूयॉर्क में आयोजित इंडिया इन्वेस्टमेंट फोरम में ये बातें भारत सरकार के कैबिनेट मंत्रियों और शीर्षस्थ अधिकारियों ने कहीं। परिवहन मंत्री कमलनाथ ने कहा कि अगले पाँच सालों तक रोजाना 20 [...]]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><img class="alignleft size-full wp-image-1744" alt="भारत में विदेशी निवेशकों के लिए सुनहरा मौका बुनियादी ढाँचे में निवेश की संभावनाएँ" src="https://www.jmuchhal.com/wp-content/uploads/2013/01/138.jpg" width="311" height="307" /><span class="dropcap">भा</span>रत में बुनियादी ढाँचे के विकास के लिए अगले पाँच वर्षों में 15 खरब डॉलर निवेश की योजना है। इसमें से 500 अरब डॉलर का निवेश निजी क्षेत्र से संभावित है। भारत की प्रगति में शरीक होने का विदेशी निवेशकों के लिए यह सुनहरा अवसर है। हाल ही में न्यूयॉर्क में आयोजित इंडिया इन्वेस्टमेंट फोरम में ये बातें भारत सरकार के कैबिनेट मंत्रियों और शीर्षस्थ अधिकारियों ने कहीं।</p>
<p>परिवहन मंत्री कमलनाथ ने कहा कि अगले पाँच सालों तक रोजाना 20 किमी सड़क बनाने की योजना है। अगर भारत में सड़क एक उत्पाद है, तो उसकी माँग के बारे में तो सोचना निरर्थक है। उनके साथ सड़क और परिवहन मंत्रालय के उच्च अधिकारियों ने भी विदेशी निवेशकों को भारत में सड़क निर्माण के बारे में अवगत कराया।</p>
<p><b>विकास की ऊर्जा : </b>ऊर्जा मंत्री सुशील कुमार शिंदे के अनुसार अगले 5 वर्षों में 80 हजार मेगावॉट ऊर्जा उत्पादन की योजना है। यानी पिछले 22 वर्षों में ऊर्जा उत्पादन को सिर्फ अगले 5 वर्षों में दोहराना है। इसके लिए परंपरागत और नए संयंत्रों का भारत में भविष्य उज्ज्वल है।</p>
<div class="simplePullQuoteRightPerpal">ऊर्जा मंत्री सुशील कुमार शिंदे के अनुसार अगले 5 वर्षों में 80 हजार मेगावॉट ऊर्जा उत्पादन की योजना है<span></span></div>
<p><b>विकास का मतलब :</b> प्रधानमंत्री के प्रमुख सचिव टीकेए नायर के अनुसार भारत में प्रगति का सबसे बड़ा मापदंड है कि वहाँ सकल विकास हो, जिसका प्रभाव और परिणाम समाज के हर तबके को महसूस हो। सिर्फ कुछ तबकों तक सीमित प्रगति और उन्नति से पूरे भारत का विकास संभव नहीं है।</p>
<p><b>नहीं है साख की समस्या :</b> सेबी के प्रमुख सीवी भावे ने बताया कि आर्थिक मंदी के बावजूद भारत के आर्थिक बाजार में साख की समस्या कभी नहीं आई।</p>
<p><b>निजी क्षेत्र में उत्साह :</b> मुख्य आयोजक और कोटक महिंद्रा के प्रमुख उदय कोटक के अनुसार वर्ष 2005 से 2008 तक भारत में वार्षिक विकास दर 9 से 10 प्रतिशत रही। इस वर्ष यह 6 से 7 प्रतिशत रहेगी। विकास दर 9 से 10 प्रश पहुँचाने के लिए सरकार व निजी क्षेत्र को प्रयास करना होगा।</p>
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		<title>नस्दक पर शाहरुख की दस्तक</title>
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		<pubDate>Tue, 02 Feb 2010 11:11:09 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[अमेरिका में भारत]]></category>
		<category><![CDATA[काजोल]]></category>
		<category><![CDATA[नस्दक]]></category>
		<category><![CDATA[माई नेम इज खान]]></category>
		<category><![CDATA[शाहरुख]]></category>
		<category><![CDATA[शाहरुख खान]]></category>
		<category><![CDATA[स्टॉक मार्केट]]></category>

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		<description><![CDATA[नस्दक स्टॉक मार्केट की टाइम स्क्वेयर के बीच एक काँच की इमारत है, जो कहलाती है नस्दक मार्केट साइट। रोज सुबह 9.30 बजे मार्केट के शुरू होने के समय बड़ी कंपनियाँ और उनके प्रबंधक वहाँ होते हैं। आज सोमवार एक फरवरी को नस्दक मार्केट साइट के बाहर थोड़ी भीड़ जमा थी, वो भी भारतीय प्रवासियों की। खास वजह थी : आज सुबह नस्दक की शुरुआत के समय वहाँ शाहरुख खान और काजोल आए हुए थे, अपनी आने वाली ‍फिल्म &#8216;माई [...]]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><img class="alignleft size-full wp-image-1742" alt="नस्दक पर शाहरुख की दस्तक  " src="https://www.jmuchhal.com/wp-content/uploads/2010/02/137.jpg" width="311" height="307" /><span class="dropcap">न</span>स्दक स्टॉक मार्केट की टाइम स्क्वेयर के बीच एक काँच की इमारत है, जो कहलाती है नस्दक मार्केट साइट। रोज सुबह 9.30 बजे मार्केट के शुरू होने के समय बड़ी कंपनियाँ और उनके प्रबंधक वहाँ होते हैं। आज सोमवार एक फरवरी को नस्दक मार्केट साइट के बाहर थोड़ी भीड़ जमा थी, वो भी भारतीय प्रवासियों की।</p>
<p><strong>खास वजह थी</strong> : आज सुबह नस्दक की शुरुआत के समय वहाँ शाहरुख खान और काजोल आए हुए थे, अपनी आने वाली ‍फिल्म &#8216;<em>माई नेम इज खान</em>&#8216; का प्रचार करने।</p>
<p>नस्दक इतिहास में शायद पहली बार किसी विदेशी फिल्म का इस तरह प्रचार हो रहा था। बंद गले की काली जोधपुरी में शाहरुख और सुर्ख लाल सलवार-कुर्ते में काजोल को देखकर वहाँ एकत्रित चहेतों को सर्द सुबह में गर्मी आ गई। मार्केट की शुरुआत के बाद शाहरुख-काजोल टाइम स्क्वेयर पर आए और वहाँ खड़े प्रशंसकों और पत्रकारों के बीच चंद पल रहे। चूँकि सुबह का समय था और इस कार्यक्रम की ज्यादा लोगों को जानकारी नहीं थी, इसलिए थोड़ी ही भीड़ जमा थी।</p>
<p>&#8216;<em>माई नेम इज खान</em>&#8216; के निर्माण और वितरण में अमेरिकन कंपनी फॉक्स सर्चलाइट भी संलग्न है और फिल्म की अधिकांश शूटिंग अमेरिका में ही की गई है।</p>
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		<title>न्यूयॉर्क में दोस्तों को देखकर उमड़ा प्यार</title>
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		<pubDate>Sat, 21 Nov 2009 11:08:50 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[अमेरिका में भारत]]></category>
		<category><![CDATA[अनुराग कश्यप]]></category>
		<category><![CDATA[न्यूयॉर्क]]></category>
		<category><![CDATA[लॉ फर्म मोसेस एंड सिंगर]]></category>
		<category><![CDATA[सिंधिया स्कूल ग्वालियर]]></category>

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		<description><![CDATA[किसी स्कूल के पुराने विद्यार्थियों का बरसों बाद मिलना अब परंपरा सी हो गई है। अमेरिका निवासी ऐसे भारतीयों को एक मंच पर लाने की पहल भारत के दस पब्लिक स्कूलों ने की है। न्यूयॉर्क में यह काम जितेन्द्र मुछाल व नीरज लाल ने कर दिखाया। 18 नवंबर को न्यूयॉर्क की लॉ फर्म मोसेस एंड सिंगर के कार्यालय में मिले पुराने विद्यार्थी न केवल मिले बल्कि ढेरों गप्प लगाई और भोजन का लुत्फ भी लिया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे [...]]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><a href="https://www.jmuchhal.com/newyork-mein-doston-ko-dekhkar-umda-pyar/soba_alumni_pic" rel="attachment wp-att-3699"><img src="https://www.jmuchhal.com/wp-content/uploads/2009/11/soba_alumni_pic.jpg" alt="न्यूयॉर्क में दोस्तों को देखकर उमड़ा प्यार" width="311" height="307" class="alignleft size-full wp-image-3699" /></a><span class="dropcap">कि</span>सी स्कूल के पुराने विद्यार्थियों का बरसों बाद मिलना अब परंपरा सी हो गई है। अमेरिका निवासी ऐसे भारतीयों को एक मंच पर लाने की पहल भारत के दस पब्लिक स्कूलों ने की है। न्यूयॉर्क में यह काम जितेन्द्र मुछाल व नीरज लाल ने कर दिखाया।</p>
<p><strong>18 नवंबर</strong> को न्यूयॉर्क की लॉ फर्म मोसेस एंड सिंगर के कार्यालय में मिले पुराने विद्यार्थी न केवल मिले बल्कि ढेरों गप्प लगाई और भोजन का लुत्फ भी लिया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे भारतीय काउंसलर जरनल प्रभु दयाल।</p>
<p>फिल्म निर्माता व निर्देशक अनुराग कश्यप भी उपस्थित थे। जो सिंधिया स्कूल ग्वालियर के 1989 बैच के विद्यार्थी रहे है। कार्यक्रम में सिंधिया स्कूल ग्वालियर, मेयो कॉलेज अजमेर, दून स्कूल देहरादून, लारेंस स्कूल सनावर, लारेंस स्कूल लवडेल, डेली कॉलेज इंदौर, सिंधिया कन्या विद्यालय, ग्वालियर, एमजीडी जयपुर, वेलहेम्स गर्ल्स व राजकुमार कॉलेज राजकोट के पुराने विद्यार्थियों ने भाग लिया।</p>
<p><iframe width="680" height="400" src="https://www.youtube.com/embed/_xG97flJ9Rg?feature=player_detailpage" frameborder="0" allowfullscreen></iframe></p>
<p><iframe width="680" height="400" src="https://www.youtube.com/embed/OJbtR0pRuHM?feature=player_detailpage" frameborder="0" allowfullscreen></iframe></p>
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		<title>अरबों का फैसला, चित या पट! सिक्का उछालकर विशाल संपत्ति का बँटवारा</title>
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		<pubDate>Tue, 03 Nov 2009 11:06:05 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[अमेरिकी अर्थव्यवस्था]]></category>
		<category><![CDATA[अमेरिका]]></category>
		<category><![CDATA[चित या पट]]></category>
		<category><![CDATA[थॉमस इलघानयन]]></category>
		<category><![CDATA[फ्रैड्रिक]]></category>
		<category><![CDATA[माइकल कोरोत्किन]]></category>
		<category><![CDATA[रॉकरोज]]></category>
		<category><![CDATA[हेनरी]]></category>

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		<description><![CDATA[न्यूयॉर्क और वॉशिंगटन में 8000 फ्लैट, 9 इमारतें और कई जगह चल रहीं नई योजनाएँ- ये हैं रॉकरोज समूह, जिसे 4 दशकों से भी अधिक समय से तीन भाई हेनरी, फ्रैड्रिक और थॉमस इलघानयन चला रहे थे। पूरे समूह की संपत्ति कोई 3 बिलियन डॉलर (14000 करोड़ रु.) से अधिक है। कारोबार की शुरुआत 50 के दशक में इनके पिता नौरोल्लाह इलघानयन ने की थी, जो ईरान से अमेरिका आए थे। कारोबार में तीनों भाइयों ने उत्तरोत्तर वृद्धि की और [...]]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><img class="alignleft size-full wp-image-2083" alt="“अरबों का फैसला, चित या पट! सिक्का उछालकर विशाल संपत्ति का बँटवारा”" src="https://www.jmuchhal.com/wp-content/uploads/2009/11/1361.jpg" width="311" height="307" />न्यूयॉर्क और वॉशिंगटन में 8000 फ्लैट, 9 इमारतें और कई जगह चल रहीं नई योजनाएँ- ये हैं रॉकरोज समूह, जिसे 4 दशकों से भी अधिक समय से तीन भाई हेनरी, फ्रैड्रिक और थॉमस इलघानयन चला रहे थे।</p>
<p>पूरे समूह की संपत्ति कोई 3 बिलियन डॉलर (14000 करोड़ रु.) से अधिक है। कारोबार की शुरुआत 50 के दशक में इनके पिता नौरोल्लाह इलघानयन ने की थी, जो ईरान से अमेरिका आए थे। कारोबार में तीनों भाइयों ने उत्तरोत्तर वृद्धि की और न्यूयॉर्क के सबसे बड़े और नामी गिरामी &#8220;<em>बिल्डर्स</em>&#8221; में उनकी गिनती आती है।</p>
<p><b>अगली पीढ़ी&#8230; और मतभेद : </b>तीनों भाइयों के कार्य क्षेत्र बँटे हुए थे और उनकी शैली भी अलग थी। इसीलिए उन्होंने इतनी प्रगति की। हेनरी के बेटे जस्टिन के कारोबार में शामिल होने पर भाइयों को लगा कि अब शायद गाड़ी साथ में नहीं चल पाएगी। पर विवाद, मुकदमेबाजी से परे उन्होंने पारिवारिक वकील और सलाहकार माइकल कोरोत्किन की मदद से इतनी विशाल संपत्ति के बँटवारे को सरल बना दिया।</p>
<div class="simplePullQuoteRightPerpal">न्यूयॉर्क और वॉशिंगटन में 8000 फ्लैट, 9 इमारतें और कई जगह चल रहीं नई योजनाएँ- ये हैं रॉकरोज समूह, जिसे 4 दशकों से भी अधिक समय से तीन भाई हेनरी, फ्रैड्रिक और थॉमस इलघानयन चला रहे थे<span></span></div>
<p><b>पहले ढेरी बनाई&#8230; : </b>आपसी सलाह के बाद फ्रेड को कारोबार को तीन ढेरियों में बाँटने का काम मिला। जो उसने दो महीनों में पूरा किया। उसके बाद मार्च महीने में हेनरी और फ्रेड-थॉमस के प्रतिनिधि माइकल के दफ्तर में मिले। माइकल ने एक लिफाफा घुमाकर ये तय किया कि सिक्के पर चित या पट कौन बोलेगा। नाम निकला हैनरी का। तय हुआ कि अगर उसने सही पुकारा तो तीन हिस्से में से पसंद वह चुनेगा। माइकल ने एक क्वार्टर उछाला, हेनरी ने पुकारा &#8220;<em>पट</em>&#8221; (टेल्स) और सिक्का गिरा &#8220;<em>पट</em>&#8220;। उसने ढेरी तीन चुनी, जिसमें समूह का नाम &#8220;<em>रॉकरोज</em>&#8221; और 2500 किराए के फ्लैट वाली 8 रहवासी इमारतें मिली।</p>
<p><b>बँटवारे के बाद भी साथ :</b> फ्रेड और थॉमस ने बँटवारे के बाद भी एक साथ ही काम करने का फैसला किया। इत्तेफाक ऐसा कि मार्च महीने में फैसले के ठीक एक दिन पहले उनकी माँ चल बसी और अगले दिन उनके पिता। मुख्य निर्णय तो मार्च में हो गया, लेकिन कुछ मतभेदों के बाद बँटवारा अभी अक्टूबर में पूरी तरह हो गया। भाइयों में थोड़ा मनमुटाव तो है, लेकिन बँटवारे की इसी शालीन प्रक्रिया से न तो समूह का कारोबार बिग़ड़ा, न ही अखबारों में चर्चाओं-अफवाहों का बाजार गर्म हुआ।</p>
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		<title>तुम आशा, विश्वास हमारे…</title>
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		<pubDate>Tue, 20 Jan 2009 11:03:10 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[व्हाईट हाऊस]]></category>
		<category><![CDATA[अमेरिका ड्रीम]]></category>
		<category><![CDATA[पायलट ओबामा]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रपति ओबामा]]></category>
		<category><![CDATA[व्हाइट हाउस]]></category>
		<category><![CDATA[सो हेल्प मी गॉड]]></category>

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		<description><![CDATA[अमेरिका के राष्ट्रपति पद की शपथ में सामान्यत: अंतिम चार शब्द होते हैं &#8216;सो हेल्प मी गॉड&#8216;! 20 जनवरी को यह शब्द कहने के साथ ही बराक ओबामा अमेरिका के 44वें राष्ट्रपति बन गए। व्हाइट हाउस में पहले अश्वेत राष्ट्रपति ओबामा के पहुँचने से &#8216;अमेरिका ड्रीम&#8216; का यह शिखर अब हर आम और खास को अपना-सा लगने लगा है। उनके शपथ ग्रहण से जुड़े हर पहलू के लिए लोगों में गजब का उत्साह देखने को मिला। लाखों की तादाद में [...]]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><img class="alignleft size-full wp-image-2870" alt="तुम आशा, विश्वास हमारे…" src="https://www.jmuchhal.com/wp-content/uploads/2009/01/JM_1_Obama_Hope.jpg" width="311" height="307" /><span class="dropcap">अ</span>मेरिका के राष्ट्रपति पद की शपथ में सामान्यत: अंतिम चार शब्द होते हैं &#8216;<em>सो हेल्प मी गॉड</em>&#8216;! 20 जनवरी को यह शब्द कहने के साथ ही बराक ओबामा अमेरिका के 44वें राष्ट्रपति बन गए। व्हाइट हाउस में पहले अश्वेत राष्ट्रपति ओबामा के पहुँचने से &#8216;<em>अमेरिका ड्रीम</em>&#8216; का यह शिखर अब हर आम और खास को अपना-सा लगने लगा है।</p>
<p>उनके शपथ ग्रहण से जुड़े हर पहलू के लिए लोगों में गजब का उत्साह देखने को मिला। लाखों की तादाद में लोग लोकतंत्र के इस महाकुंभ में शामिल होने के लिए वॉशिंगटन पहुँचे। और इसी ऐतिहासिक समारोह के नैपथ्य में छाई है मंदी, चरमराती अर्थव्यवस्था, बढ़ती बेरोजगारी, ध्वस्त होते बैंक, बंद होती कंपनियाँ, भविष्य के प्रति इतनी &#8216;<em>अनसर्टेनिटी</em>&#8216; अमेरिका ने तो कई दशकों में नहीं महसूस की। इसी अंधकार में आशा और विश्वास के पुंज बराक ओबामा का हार्दिक स्वागत है।</p>
<p><b>दुष्कर चुनौतियाँ : </b>अमेरिका सहित दुनिया में गंभीर आर्थिक समस्याएँ हैं। सारी सरकारें परिस्थिति से निबटने के लिए हरसंभव, असंभव प्रयास कर रही हैं, लेकिन अभी तो सब मंदी के होम में &#8216;स्वाह&#8217; हो रहे हैं। गहराती आर्थिक मंदी कहीं 1930 जैसी &#8216;<em>इकोनॉमिक डिप्रेशन</em>&#8216; के गर्त में न डूब जाए। क्या आने वाला कल आज से बेहतर होगा? मेरा कारोबार, नौकरी रहेगी? कीमतें कब तक गिरती रहेंगी? कितनी कंपनियाँ, बैंकें और डूबेंगी? ओबामा और उनके प्रशासन की सबसे बड़ी चुनौती है इनसान के नैसर्गिक &#8216;<em>विश्वास</em>&#8216; और &#8216;<em>आशा</em>&#8216; को जीवंत रखना। सिर्फ अमेरिका नहीं, पूरी दुनिया की उम्मीदें ओबामा पर लगी हैं।</p>
<div class="simplePullQuoteRight">&#8216;सो हेल्प मी गॉड&#8217;! 20 जनवरी को यह शब्द कहने के साथ ही बराक ओबामा अमेरिका के 44वें राष्ट्रपति बन गए।<span></span></div>
<p><b>और अभूतपूर्व जनमत&#8230; :</b> ओबामा के पास सबसे बड़ी पूँजी है उनकी &#8216;<em>सर्वभौमिक लोकप्रियता</em>&#8216;। हमेशा से दुनिया अमेरिका की आर्थिक-सामरिक सत्ता और डॉलर के प्रभुत्व को मानती रही है, लेकिन अमेरिकी प्रशासन की दुनिया में लोकप्रियता कम ही रहती है। आज अमेरिका की आर्थिक-सामरिक सत्ता पर तो प्रश्नचिह्न है ही डॉलर की एकछत्र प्रभुता खतरे में है, लेकिन अमेरिका का भावी राष्ट्रपति पद ग्रहण के पहले ही दुनिया का चहेता और आशा का प्रति‍बिंब बन गया है।</p>
<p>सरल सम्मोहन में लिप्त उनका व्यक्तित्व, जैसे अपने आप उनकी ओर आकर्षित करता है। मानो इस व्यक्ति में &#8216;<em>कोई बात है</em>&#8216;, गोया इसकी बात पर भरोसा कर सकते हैं कि कल आज से अच्छा होगा। पूरी दुनिया में बुरी खबरों के बीच जैसे सिर्फ एक ही खुशखबरी है, जो आशा बनाए रख रही है- &#8216;<em>ओबामा</em>&#8216;! वह खुद भी जानते हैं कि उनके तरकश में उनकी यह &#8216;<em>ग्लोबल एक्सेप्टेशन</em>&#8216; उनका ब्रह्मास्त्र है- जिसकी मदद से उन्हें अमेरिका सहित पूरी दुनिया में समस्याओं से जूझना है। अमेरिका में किए गए एक विस्तृत जनमत सर्वेक्षण के अनुसार राष्ट्रपति ओबामा की लोक‍‍प्रियता 79% है। (बुश की रेटिंग सिर्फ 22% है) पिछले पाँच राष्ट्रपतियों में से किसी को भी कार्यकाल के प्रारंभ में ऐसी लोकप्रियता नहीं मिली। यही नहीं, अधिकांश अमेरिकी लोगों का मानना है कि ओबामा के कार्यकाल में परिस्थितियाँ आज से बेहतर होंगी, ओबामा कोई जादू नहीं कर सकते और अमेरिका के आर्थिक उबार में लगभग 2 वर्षों का समय लगेगा। कार्यकाल शुरू होने से पहले ही उनकी गिनती या चर्चा लिंकन, रूज़वेल्ट, कैनेडी जैसे प्रसिद्ध राष्ट्रपतियों के साथ होने लगी है।</p>
<p>ओबामा इस लोकप्रियता में छिपी उम्मीदों को पहचानते हैं, इसलिए वे बार-बार कह रहे हैं कि समस्याओं से निबटने में वक्त लगेगा, और पीड़ा अभी बाकी है। कार्यकाल शुरू होने के पहले ही ओबामा ने अपनी पूरी कैबिनेट तैयार कर ली है, शपथ लेते ही वे देश और दुनिया की समस्याओं का सामना करने को कटिबद्ध हैं और सामान्य नागरिक के रोजमर्रा की पीड़ा और अड़चनों से वह बखूबी जुड़े हुए हैं।</p>
<p><b>चमत्कार में </b><b>&#8216;</b><b>पग फेरा</b><b>&#8216; : </b>अपने यहाँ परिवारों में नए सदस्य के आगमन के साथ होने वाले शुभ को &#8216;<em>अच्छा पग फेरा</em>&#8216; कहते हैं। घटनाएँ तो विलग हैं, लेकिन मुझे ऐसा लगा जैसे 155 यात्रियों से भरे प्लेन का पानी में उतरने के बावजूद किसी का बाल भी बाँका नहीं होने का &#8216;<em>चमत्कार</em>&#8216; कहीं तो इस देश में आने वाले दिनों में मनने वाली खुशियों और उनके &#8216;<em>पग फेरे</em>&#8216; से जुड़ा है। गौर से देखें, यूएस एयरवेज के प्लेन के दोनों इंजन क्षतिग्रस्त होने से उसे आपात स्थिति में पानी पर उतारना पड़ा, लेकिन होनहार चालक की सूझबूझ और ऊपर वाले की कृपा से चमत्कार हो गया। यूएस के खचाखच भरे प्लेन के इंजन भी खराब हो गए हैं, आपात स्थिति है, हम सबको &#8216;<em>आशा और विश्वास</em>&#8216; है कि <em>&#8216;पायलट ओबामा&#8217;</em> जहाज और यात्रियों को अंतत: डूबने से बचा पाएँगे। &#8216;<em>सो हेल्प हिम गॉड!</em>&#8216;</p>
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		<title>ओबामा के शपथ ग्रहण समारोह की शुरुआत</title>
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		<pubDate>Sat, 17 Jan 2009 10:59:06 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[व्हाईट हाऊस]]></category>
		<category><![CDATA[44वें राष्ट्रपति]]></category>
		<category><![CDATA[ओबामा]]></category>
		<category><![CDATA[ओबामा शपथ ग्रहण समारोह]]></category>
		<category><![CDATA[टॉम हैंक्स]]></category>
		<category><![CDATA[बराक ओबामा]]></category>
		<category><![CDATA[शकीरा]]></category>

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		<description><![CDATA[अमेरिका में बराक ओबामा के 44वें राष्ट्रपति बनने के अवसर पर आयोजित होने वाले शपथ ग्रहण समारोह के कार्यक्रम की शुरुआत शनिवार 17 जनवरी से हो जाएगी। इस समारोह के दौरान तकनीक का अधिकाधिक प्रयोग किया जाएगा और इसके दौरान जोर इस बात पर होगा कि यह आयोजन अधिक से अधिक लोगों के लिए खुला रहे। 1. ओबामा, बिडेन और उनके परिवार ‍फिलाडेल्‍फिया से वॉशिंगटन डीसी की यात्रा रेल से पूरी करेंगे। चमचमाती नीले रंग की पुरानी रेल कार इन [...]]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><img class="alignleft size-full wp-image-2873" alt="ओबामा के शपथ ग्रहण समारोह की शुरुआत" src="https://www.jmuchhal.com/wp-content/uploads/2009/01/JM_2_Obama_Inaugaration.jpg" width="311" height="307" /><span class="dropcap">अ</span>मेरिका में बराक ओबामा के 44वें राष्ट्रपति बनने के अवसर पर आयोजित होने वाले शपथ ग्रहण समारोह के कार्यक्रम की शुरुआत शनिवार 17 जनवरी से हो जाएगी। इस समारोह के दौरान तकनीक का अधिकाधिक प्रयोग किया जाएगा और इसके दौरान जोर इस बात पर होगा कि यह आयोजन अधिक से अधिक लोगों के लिए खुला रहे।</p>
<p><strong>1</strong>. ओबामा, बिडेन और उनके परिवार ‍फिलाडेल्‍फिया से वॉशिंगटन डीसी की यात्रा रेल से पूरी करेंगे। चमचमाती नीले रंग की पुरानी रेल कार इन लोगों को शनिवार को फिला‍डेल्फिया से वॉशिंगटन तक ले जाएगी जो इस बात का प्रतीक होगी कि यह उनके व्हाइट हाउस पहुँचने की यात्रा है। वर्ष 1861 में देश की राजधानी तक पहुँचने के लिए 16वें राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन को 12 दिनों की यात्रा करना पड़ी थी। यह यात्रा सोलहवें और 44वें राष्ट्रपति के बीच समानता को भी स्थापित करेगी।</p>
<p>निर्वाचित राष्ट्रपति बराक ओबामा और उनके परिवार के लोग एक निजी रेल कार &#8216;जॉर्जिया 300&#8242; में सवार होकर राजधानी पहुँचेंगे। पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज एचडब्ल्‍यू बुश और‍ बिल क्लिंटन भी इसकी सवारी कर चुके हैं, जबकि वर्ष 2004 में व्हाइट हाउस की अपनी दावेदारी के लिए सीनेटर जॉन केरी ने इसकी सवारी की थी।</p>
<p>ओबामा परिवार सहित शनिवार 17 जनवरी की सुबह फिला‍डेल्फिया की 30वीं स्ट्रीट से इस पर सवार होंगे और रास्ते में बिलमिंगटन, डेलवारे और बाल्टीमोर में रुकेंगे। बिलमिंगटन में ओबामा निर्वाचित उपराष्ट्रपति जोसेफ आर बिडेन और उनके परिवार को साथ लेंगे। इस रेल के 135 मील लंबे सफर के दौरान लोग रास्ते में मौजूद होंगे और भावी राष्ट्रपति का स्वागत करेंगे।</p>
<div class="simplePullQuoteRightGolden">निर्वाचित राष्ट्रपति बराक ओबामा और उनके परिवार के लोग एक निजी रेल कार &#8216;<em>जॉर्जिया 300</em>&#8216; में सवार होकर राजधानी पहुँचेंगे<span></span></div>
<p>ओबामा और बिडेन परिवारों के साथ राष्ट्रपति के शपथ ग्रहण समारोह समिति द्वारा चुने गए मेहमान भी होंगे जो विभिन्न कार्यक्रमों के दौरान राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के साथ होंगे। गाड़ी अंत में वॉशिंगटन के यूनियन स्टेशन पर रुकेगी, जहाँ ओबामा और बिडेन के शाम करीब सात बजे पहुँचने की संभावना है।</p>
<p><strong>2</strong>. रविवार 18 जनवरी को वॉशिंगटन डीसी में लिंकन मेमोरियल पर एक विशेष समारोह आयोजित किया गया है, जिसे एचबीओ ने आयोजित किया है। यह वक्ताओं और प्रसिद्ध लोगों के प्रदर्शन का कार्यक्रम होगा जो आम लोगों के लिए भी खुला होगा। इस अवसर पर टाइगर वुड्‍स, मार्टिन लूथर किंग तृतीय और हॉलीवुड की हस्तियाँ- जैक ब्लैक, टॉम हैंक्स, डेंजिल वॉशिंगटन, क्वीन लतीफा, स्टीव कैरेल, रोजारियो डॉसन और लॉरा लिनी मौजूद होंगे।</p>
<p>इस कार्यक्रम को एचबीओ केबल ऑपरेटरों के लिए नि:शुल्क प्रसारित करेगा, जिसके दौरान बेयोंस, शकीरा, यूटू, ब्रूस स्प्रिंगस्टीन, स्टीवी वॉन्डर, जोन बोन जोवी, गार्थ ब्रुक्स, रेनी फ्लेमिंग और जॉन लीजेंड अपने गायन की प्रस्तुति देंगे।</p>
<p><strong>3</strong>. सोमवार 19 जनवरी को अमेरिका में मार्टिन लूथर किंग दिवस मनाया जाता है और इस दिन सार्वजनिक अवकाश रहेगा।</p>
<p><strong>4</strong>. ओबामा का शपथ ग्रहण समारोह अब तक का सबसे खुला और सभी के लिए सहज उपलब्ध समारोह होगा। ऐसा अनुमान है कि इसमें 15 लाख से 30 लाख तक लोगों के भाग लेने की संभावना है, जिसको देखते हुए संघीय सरकार ने इसे एक राष्ट्रीय आयोजन घोषित कर दिया है। मौसम संबंधी सूचनाओं के मुताबिक आसमान में बादल छाए रहेंगे और तापमान मिड से लो 30 डिग्री फारेनहाइट तक रहने की संभावना है। लोगों की भारी भीड़ को देखते हुए लोगों से कहा गया है कि वे घर में ही रहें तो बेहतर होगा।</p>
<p><strong>5</strong>. मंगलवार 20 जनवरी को शपथ ग्रहण समारोह के कार्यक्रम इस प्रकार होंगे- सुबह प्रेयर सर्विस होगी और इसके बाद निर्वाचित राष्ट्रपति निवृत्तमान राष्ट्रपति से भेंट करने के लिए व्हाइट हाउस जाएँगे। इसके बाद दोनों शपथ ग्रहण समारोह के लिए साथ-साथ आएँगे।</p>
<p>साढ़े ग्यारह बजे सुबह अमेरिकी राजधानी के पश्चिमी हिस्से में निर्वाचित राष्ट्रपति और निर्वाचित उपराष्ट्रपति और उनके परिवार परम्परागत समारोहों और कार्यक्रमों में भाग लेंगे। इस अवसर पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित होंगे।</p>
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