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	<title>Jitendra Muchhal &#124; Jitendra Muchhal Website &#124; J Muchhal &#124; जीतेंद्र मुछाल &#187; अमेरिका जनजीवन | अमेरिकी जनजीवन पर आलेख</title>
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		<title>अमेरिका में &#8216;आइरीन&#8217; ने दी दस्तक</title>
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		<pubDate>Sun, 28 Aug 2011 11:17:37 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[जनजीवन]]></category>
		<category><![CDATA[अमेरिका आइरीन]]></category>
		<category><![CDATA[अर्थव्यवस्था]]></category>
		<category><![CDATA[आइरीन तूफान]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रपति बराक ओबामा]]></category>

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		<description><![CDATA[अमेरिका में हाल के वर्षों में यह पहला मौका है, जब उत्तर-पूर्वी राज्यों में आपातकाल की घोषणा की गई है। यहां आइरीन तूफान आने के कारण जनजीवन पर खासा असर पड़ा है। न्यूयॉर्क में सभी ट्रेनें रद्द कर दी गई हैं, उपनगर मैनहट्टन में बिजली आपूर्ति बंद की जा सकती है। आइरीन तूफान का असर अमेरिका के 5-6 करोड़ लोगों पर पड़ेगा। न्यूयॉर्क में ट्रेनों और सब-वे परिवहन सेवा बंद होने के बाद शनिवार से क्षेत्र के सभी विमानतलों को [...]]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><img class="alignleft size-full wp-image-2085" alt="अमेरिका में 'आइरीन' ने दी दस्तक" src="https://www.jmuchhal.com/wp-content/uploads/2011/08/141.jpg" width="311" height="307" /><span class="dropcap">अ</span>मेरिका में हाल के वर्षों में यह पहला मौका है, जब उत्तर-पूर्वी राज्यों में आपातकाल की घोषणा की गई है। यहां आइरीन तूफान आने के कारण जनजीवन पर खासा असर पड़ा है। न्यूयॉर्क में सभी ट्रेनें रद्द कर दी गई हैं, उपनगर मैनहट्टन में बिजली आपूर्ति बंद की जा सकती है। आइरीन तूफान का असर अमेरिका के 5-6 करोड़ लोगों पर पड़ेगा।</p>
<p>न्यूयॉर्क में ट्रेनों और सब-वे परिवहन सेवा बंद होने के बाद शनिवार से क्षेत्र के सभी विमानतलों को बंदकर दिया गया है। 136 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तूफान ने सबसे पहले उत्तरी कैरोलिना राज्य में दस्तक दी, जो वर्जीनिया की ओर बढ़ेगा। राष्ट्रपति बराक ओबामा ने तूफान के ऐतिहासिक होने की संभावना जताई है।</p>
<p><b>आवश्यक खरीदारी :</b> तूफान सहने के लिए लोगों ने इस बार भी पानी, टार्च, जनरेटर, ब्रेड और दूध जैसी आवश्यक वस्तुओं की खरीदारी कर ली। कोई हादसा न हो इसके लिए सभी बड़े पुल और राजमार्गों पर यातायात बंद कर दिया गया है। तूफान के कारण एहतियातन प्रभावित इलाकों में 6500 उड़ानें रद्द कर दी गई हैं।</p>
<p>शनिवार देर रात से रविवार देर शाम के बीच न्यू जर्सी और न्यूयॉर्क में तूफान का ज्यादा असर होगा। तूफान के प्रभाव वाले संभावित इलाकों में लोग प्रार्थना कर रहे हैं कि यह आपदा बिना किसी नुकसान के गुजर जाए।</p>
<div class="simplePullQuoteRight">अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा कि तूफान बेहद खतरनाक और अर्थव्यवस्था के लिए महँगा साबित होगा<span></span></div>
<p><b>न्यूयॉर्क में बाढ़ का खतरा : </b>तूफान आइरीन ने भारी बारिश और तेज हवाओं के साथ न्यूयॉर्क में अपनी आमद दे दी है। इसके साथ ही यहां बाढ़ का खतरा पैदा हो गया है। शहर के बाढ़ संभावित क्षेत्रों के लगभग 3,70,000 लोगों को घर छोड़ने को कहा गया है।</p>
<p>मेयर माइकल ब्लूमबर्ग ने कहा कि तूफान अंतत: हम तक पहुंच ही गया है। दूर जाने का समय अब बीत गया है। उन्होंने कहा कि अगर आप कहीं और नहीं गए हैं, तो हमारा सुझाव है कि आप अब जहां हैं, वहीं रहें। प्रकृति हमसे कहीं ज्यादा बलशाली है।</p>
<p><b>आठ लोगों की मौत : </b>लगभग 140 किमी प्रति घंटे की गति से चल रही हवाओं के साथ आइरीन अब तक के सबसे खतरनाक तूफानों में से एक है। तूफान में अब तक 11 साल के एक बच्चे समेत कम से कम आठ लोगों की मौत हो चुकी है। आइरीन के कारण लगभग 10 लाख लोगों को बिजली नहीं मिल रही, लगभग 8,000 उड़ानों को भी निरस्त किया गया है और लगभग 20 लाख लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया है।</p>
<p><b>दुनिया भर से खैरियत :</b> अमेरिका में तूफान आना नई बात तो नहीं है फिर भी लोग चिंतित और डरे हुए हैं। अमेरिकियों को उनके दुनिया भर में रह रहे रिश्तेदारों के फोन कॉल और ई-मेल संदेश मिल रहे हैं। इनमें सभी रिश्तेदार खैरियत पूछ रहे हैं। ताजा जानकारी के लिए लोग ट्विटर जैसी अन्य सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट का सहारा ले रहे हैं। उत्तर-पूर्वी इलाकों में रहने वाले ज्यादातर लोगों का तूफान या बाढ़ से होने वाले नुकसान का बीमा नहीं है।</p>
<p><b>बेहद खतरनाक :</b> अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा कि तूफान बेहद खतरनाक और अर्थव्यवस्था के लिए महँगा साबित होगा। यह तूफान ऐसे समय आ रहा है जब देश वर्ष 2005 में कैटरीना तूफान के जख्मों से उबर ही रहा है।</p>
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		<title>पूर्वोत्तर अमेरिका बर्फ की सर्द चादर से ढका</title>
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		<pubDate>Tue, 15 Jan 2008 07:49:51 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[जनजीवन]]></category>
		<category><![CDATA[न्यूजर्सी]]></category>
		<category><![CDATA[न्यूयॉर्क शहर]]></category>
		<category><![CDATA[पूर्वोत्तर अमेरिका]]></category>
		<category><![CDATA[बर्फ की चादर]]></category>
		<category><![CDATA[वॉशिंगटन]]></category>

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		<description><![CDATA[इस मौसम की पहली &#8216;बर्फ&#8216; ने बोस्टन से लेकर वॉशिंगटन तक सारे पूर्वोत्तर अमेरिका को बर्फ की मोटी चादर से ढंक दिया है। मौसम विभाग ने 2-3 दिन पहले से ही इस तूफान की चेतावनी देने लगा था। लोगों ने खाद्य सामग्री, डीवीडी, दवाइयां आदि से अपनों को पूरी तरह लैस कर लिया था। वैसे भी भारी बर्फ आंधी कई बार वीकेंड पर ही आती है। जैसे ही घड़ी की सुइयां शनिवार दोपहर बारह बजे; न्यूयॉर्क न्यूजर्सी और लांग आयलैंड [...]]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><img src="https://www.jmuchhal.com/wp-content/uploads/2008/01/jm_7_Snow.jpg" alt="पूर्वोत्तर अमेरिका बर्फ की सर्द चादर से ढका" width="311" height="307" class="alignleft size-full wp-image-2882" /><span class="dropcap">इ</span>स मौसम की पहली &#8216;<em>बर्फ</em>&#8216; ने बोस्टन से लेकर वॉशिंगटन तक सारे पूर्वोत्तर अमेरिका को बर्फ की मोटी चादर से ढंक दिया है। मौसम विभाग ने 2-3 दिन पहले से ही इस तूफान की चेतावनी देने लगा था। लोगों ने खाद्य सामग्री, डीवीडी, दवाइयां आदि से अपनों को पूरी तरह लैस कर लिया था। वैसे भी भारी बर्फ आंधी कई बार वीकेंड पर ही आती है। जैसे ही घड़ी की सुइयां शनिवार दोपहर बारह बजे; न्यूयॉर्क न्यूजर्सी और लांग आयलैंड में बर्फ पड़ने लगती थी और तब से अब रविवार की सुबह तक बर्फ के पहाड़ हर ओर नजर आ रहे हैं। न्यूयॉर्क, न्यूजर्सी सहित कई राज्यों ने मौसम की &#8216;<em>आपात स्थिति</em>&#8216; घोषित कर दी है।</p>
<p>यानी बेगैरजरूरी काम के कोई भी नागरिक को अपनी गाड़ी से घर के बाहर नहीं निकलने की सख्त हिदायत है। वैसे तो सभी राज्यों में सरकारी महकमा सड़कों की बर्फ हटाने के काम में जुटा हुआ है। पूरे न्यूयॉर्क शहर में हरेक इंच बर्फ साफ करने के लिए प्रशासन को लगभग 5 करोड़ रुपए खर्च होते हैं। तो 20 इंच बर्फ यानी 100 करोड़ रुपए का अतिरिक्त खर्चा।</p>
<p>इस इलाके के लगभग सारे एयरपोर्ट अमुमन ठप हैं। रेल सेवा भी काफी प्रभावित हुई है। पूरे इलाके में 12 से 18 इंच तक बर्फ और तेज हवाओं ने  &#8216;<em>ब्लिजर्ड</em>&#8216; के हालात पैदा कर दिए हैं। बोस्टन और उत्तरी राज्यों में तो कई जगह 25 से 30 इंच तक बर्फ गिरी है।</p>
<div class="simplePullQuoteRightPerpal">पूरे इलाके में 12 से 18 इंच तक बर्फ और तेज हवाओं ने &#8216;ब्लिजर्ड&#8217; के हालात पैदा कर दिए हैं<span></span></div>
<p>बहुत ही कम लोग घरों से बाहर निकल रहे हैं। गाड़ियां और घरों के आंगन में बर्फ की मोटी परत जमी हुई है, जिसे हटाने में घंटों का समय लगेगा। इसे पिछले 100 सालों में आए बर्फ के 10 सबसे भीषण तूफानों में से एक आंका जा रहा है और इसकी तुलना जनवरी 1996 के तूफान से की जा रही है। शनिवार और रविवार तो घरों में रहकर फिर भी इतना मालूम नहीं पड़ा; जब सोमवार की सुबह लोगों को काम और बच्चों को स्कूल्स के लिए निकलना होगा, तब भारी कठिनाइयों का सामना करना होगा। अनुमान है कि बर्फ रविवार की रात तक थम जाएगी, और सोमवार को बहुत सर्दी रहेगी।</p>
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		<title>न्यूयॉर्क : जनवरी में जून का मौसम</title>
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		<pubDate>Wed, 10 Jan 2007 06:22:38 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[जनजीवन]]></category>
		<category><![CDATA[क्रिसमस]]></category>
		<category><![CDATA[गर्म मौसम]]></category>
		<category><![CDATA[नववर्ष]]></category>
		<category><![CDATA[न्यूयॉर्क मौसम]]></category>
		<category><![CDATA[फ्लोरिडा]]></category>

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		<description><![CDATA[चौंकिए नहीं, इस रपट में कोई गफलत नहीं है। गफलत है तो अमेरिका के मौसम में। न्यूयॉर्क सहित अमेरिका के पूर्वोत्तर के सभी राज्यों में सबसे &#8216;गर्म&#8216; सर्दी ने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। 2007 को अभी से अमेरिका के इतिहास का सबसे गर्म वर्ष माना जा रहा है। शनिवार 6 जनवरी के दिन न्यूयॉर्क शहर में पारा रिकॉर्ड 72 डिग्री फ़ारेनहाइट (यानी 22 डिग्री सेल्सियस) तक चढ़ गया। इससे पहले 1950 में 6 जनवरी को पारा 63 डिग्री फ़ारेनहाइट (यानी [...]]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><img class="alignleft size-full wp-image-1692" alt="न्यूयॉर्क : जनवरी में जून का मौसम" src="https://www.jmuchhal.com/wp-content/uploads/2013/01/118.jpg" width="311" height="307" /><span class="dropcap">चौं</span>किए नहीं, इस रपट में कोई गफलत नहीं है। गफलत है तो अमेरिका के मौसम में। न्यूयॉर्क सहित अमेरिका के पूर्वोत्तर के सभी राज्यों में सबसे &#8216;<em>गर्म</em>&#8216; सर्दी ने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। 2007 को अभी से अमेरिका के इतिहास का सबसे गर्म वर्ष माना जा रहा है। शनिवार 6 जनवरी के दिन न्यूयॉर्क शहर में पारा रिकॉर्ड 72 डिग्री फ़ारेनहाइट (यानी 22 डिग्री सेल्सियस) तक चढ़ गया। इससे पहले 1950 में 6 जनवरी को पारा 63 डिग्री फ़ारेनहाइट (यानी 17 डिग्री सेल्सियस) और 26 जनवरी 1950 को 72 डिग्री तक गया था। सामान्य रूप से जनवरी में न्यूयॉर्क शहर में तापमान 38 डिग्री फ़ारेनहाइट (यानी 3 डिग्री सेल्सियस) रहता है।</p>
<p>अपनी &#8216;<em>व्हाइट क्रिसमस</em>&#8216; (बर्फ से ढंके क्रिसमस और नववर्ष) के लिए मशहूर न्यूयॉर्क को अभी तक तो मौसम की पहली बर्फ का भी दर्शन नहीं हुआ है। इससे पहले तक सन् 1878 का साल न्यूयॉर्क शहर के इतिहास में दर्ज था, जब मौसम की पहली बर्फ 4 जनवरी जितनी देर से हुई थी। 2006-7 की सर्दी में अभी तक बर्फ के दर्शन ना होने से 128 वर्षों का यह रिकॉर्ड टूट गया है।</p>
<div class="simplePullQuoteRight">2006-7 की सर्दी में अभी तक बर्फ के दर्शन ना होने से 128 वर्षों का यह रिकॉर्ड टूट गया है<span></span></div>
<p><b>बेमौसम की धूप : </b></p>
<p>आज तो धूप इतनी तेज और खुशगवार थी, कि कोई स्वेटर या जैकेट पहनने की भी जरूरत महसूस नहीं हुई। अप्रैल के महीने में खिलने वाली &#8216;<em>चेरी ब्लॉसम</em>&#8216; के कुछ गुलाबी पुष्प अभी जनवरी के पहले सप्ताह में ही बहार पर आ गए हैं। अभी तो हिन्दुस्तान में कड़ाके की सर्दी और घने कोहरे की खबर पढ़कर देहली, ग्वालियर, रायपुर जैसे शहरों में रिश्तेदारों से बात करने पर और मौसम के हालचाल की चर्चा करते हुए एक किस्म का &#8216;<em>ग्लानि-बोध</em>&#8216; होता है कि इससे कहीं ज्यादा सर्दी की मार तो भारत में पड़ रही है।</p>
<p>मौसम के इस अजीबोगरीब खेल ने सभी को आश्चर्यचकित कर दिया है। मौसम पर इतने गहरे शोध के बावजूद सर्दी की इतनी &#8216;<em>विलंबित</em>&#8216; शुरुआत का किसी को भी अंदेशा नहीं था। कुछ मौसम विशेषज्ञों के अनुसार यह प्रशांत महासागर में &#8216;अल निनो&#8217; का प्रभाव है। कुछ इसे &#8216;ग्लोबल वार्मिंग&#8217; का दुष्परिणाम बता रहे हैं। लेकिन अभी इसका कोई ठोस कारण समझ में नहीं आया है।</p>
<p><b>अर्थव्यवस्था पर प्रभाव : </b></p>
<p>बेमौसम के इस गर्म मौसम से जहां सामान्य जनजीवन में बेशक राहत और सुकून महसूस होता है, वहीं अमेरिका में मौसम के बदलते रंगों का अर्थव्यवस्था से गहरा रिश्ता है। इस &#8216;<em>गर्म सर्दी</em>&#8216; ने सभी और अपने प्रभाव दिखाए हैं। क्रिसमस &#8211; नववर्ष के पहले अमेरिका के सबसे व्यस्त खरीददारी के मौसम में सर्दी के गर्म कपड़े की खरीदी पर बहुत बुरा असर पड़ा है। इक और जहां सर्दी में घरों को  गर्म करने के लिए होने वाली मासिक खर्च में बहुत कमी है, वहीं विश्व बाजार में &#8216;<em>तेल</em>&#8216; की कीमतों में गिरावट में इस गर्म तापमान का योगदान है। बर्फीले तूफान और बर्फ के अंबार से निपटने के लिए नागरिक प्रशासन और नागरिक- अपने-अपने स्तर पर बहुत कुछ सामान खरीदते हैं। पर बर्फ नजर तो आए?</p>
<p><b>स्कीइंग तो है</b><b>, पर मजा नहीं : </b></p>
<p>अमेरिका के पूर्वोत्तर राज्यों में सर्दी में स्कीइंग जैसे शीतकालीन क्रीड़ा से लाखों लोगों की आजीविका जुड़ी है। इस बार इन सब धंधों में मंदी है। कृत्रिम रूप से मशीनों के द्वारा बनाए &#8216;स्नो&#8217; पर स्कीइंग और &#8216;आइस स्केटिंग&#8217; हो रही है, लेकिन उसके साथ तापमान में जब कुर्की बजाने वाली ठंड ना हो, तो असली शीत क्रीड़ा का आनंद ही नहीं आता। जनवरी में भी सेंट्रल पार्क में घास पर टहलने और तालाब में नाव चलाने के लिए लोग लालायित हैं। आइसक्रीम की खूब बिक्री हो रही है। सिर्फ सर्दी में ही तैयार होने वाले कुछ खास किस्म के अंगूरों के बागों के ‍मालिक परेशान हैं, क्योंकि उनके अंगूरों में शायद ही बहार आए।</p>
<p><b>कोलाराडो में बर्फ का अंबार : </b></p>
<p>अमेरिका के पूर्वोत्तर में &#8216;<em>माइल्ड विंटर</em>&#8216; से सभी हतप्रभ हैं, वहीं कोलाराडो राज्य में बर्फ सारे ‍कीर्तिमान तोड़ गई। पिछले तीन सप्ताह में एक के बाद एक तीन भारी बर्फीले तूफानों ने पूरे कोलाराडो का जनजीवन अस्त-व्यस्त कर‍ दिया है। क्रिसमस के समय से डेन्वेर शहर कई फीट गहरी बर्फ की चादर से ढंका है।</p>
<p><b>मौसम के प्रकोप : </b></p>
<p>पिछले कुछ सालों से मौसम के प्रकोप ने अमेरिका में काफी कहर ढाया है। फ्लोरिडा में बार-बार आए समुद्री तूफान, फिर न्यू ऑर्लींस में अति‍वृष्टि का तांडव, और अब पूर्वोत्तर में ठेठ सर्दी की मौसम के बीच यह गर्मी प्रकृति और पर्यावरण के साथ हो रहे खिलवाड़ का कहीं तो असर दिखेगा ही। अभी भी सर्दी में 2-3 महीने बाकी हैं। अनुमान है कि अगले सप्ताह ही तापमान 30 डिग्री फेरेनहाइट तक गिर जाएगा। हिन्दुस्तान में इंद्र देव के रूठने पर मनाने के लिए होते हवन, पूजन, पाठ की  तरह शायद यहां भी &#8216;<em>बर्फ</em>&#8216; के देवी-देवता को मनाना पड़ेगा। सर्दी और बर्फ आएगी तो देर से, लेकिन फिर गोया ऐसी आएगी कि जाने का नाम ही नहीं लेगी। खैर, तब तक तो हम यहां जनवरी में धूप का आनंद लें। और आप अमेरिका के पूर्वोत्तर में अपने वालों से बात करते समय पूछ लीजिएगा &#8216;<em>और क्या, पिछले सप्ताह गर्मी कैसी थी?</em>&#8216;</p>
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		<title>कैटरीना तूफान से अमेरिका में 10 लाख लोग बेघर</title>
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		<pubDate>Wed, 31 Aug 2005 05:57:42 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[जनजीवन]]></category>
		<category><![CDATA[अमेरिका में तूफान]]></category>
		<category><![CDATA[कैटरीना तूफान से तबाही]]></category>
		<category><![CDATA[कैटरीना हरिकेन]]></category>
		<category><![CDATA[जलप्रलय]]></category>
		<category><![CDATA[समुद्री तूफान]]></category>

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		<description><![CDATA[कैटरीना तूफान से अमेरिका के लूसियाना, मिसिसीपी और अल्बामा राज्य मानो जलप्रलय की-सी स्थिति में हैं। लगभग 10 लाख लोग बेघर बिजली, पानी और संचार साधनों की विपदा से जूझ रहे हैं। मरने वालों की संख्या अभी 100 के ऊपर है और इसके अधिक होने की आशंका है। अपने जीवन और अस्तित्व की लड़ाई में कई स्थानों पर दुकानों को लूटे जाने के समाचार मिले हैं। तूफान से हुई जान और माल की हानि कई बिलियन डॉलर आंकी जा रही [...]]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><img class="alignleft size-full wp-image-2094" alt="कैटरीना तूफान से अमेरिका में 10 लाख लोग बेघर" src="https://www.jmuchhal.com/wp-content/uploads/2005/08/07.jpg" width="311" height="307" /><span class="dropcap">कै</span>टरीना तूफान से अमेरिका के लूसियाना, मिसिसीपी और अल्बामा राज्य मानो जलप्रलय की-सी स्थिति में हैं। लगभग 10 लाख लोग बेघर बिजली, पानी और संचार साधनों की विपदा से जूझ रहे हैं। मरने वालों की संख्या अभी 100 के ऊपर है और इसके अधिक होने की आशंका है। अपने जीवन और अस्तित्व की लड़ाई में कई स्थानों पर दुकानों को लूटे जाने के समाचार मिले हैं। तूफान से हुई जान और माल की हानि कई बिलियन डॉलर आंकी जा रही है। लुसियाना के प्रसिद्ध पर्यटन शहर न्यू ओरलियंस में पानी का स्तर अभी भी बढ़ रहा है। अधिकांश न्यू ओरलियंस शहर समुद्र सतह से नीचे है। इसके चारों ओर पानी को छोटे बांध शहर से दूर रखते हैं। हरिकेन कैटरीना के प्रकोप से यहां कई बांध डूब चुके हैं और कई स्थानों पर पानी 20 फुट तक चढ़ चुका है। प्रशासन और सेना के इंजीनियरिंग दल बांधों के छेदों को पाटने की कोशिश में लगे हैं, लेकिन अभी तक विशेष प्रगति नहीं हुई है। आसमान से हेलिकॉप्टर के जरिए रेत के बड़े बोरों को इन छेदों को पाटने के लिए गिराया जा रहा है। मैं 2 साल पहले न्यू ओरलियंस गया हूं और वहाँ के &#8216;<em>फ्रेंच क्यूरिट्‌स</em>&#8216; नाम के इलाके की चकाचौंध और जाझ संगीत की मदहोशी अभी भी मन में ताजा है। अपने अलमस्त दिन व रंगीन रातों और &#8216;<em>मर्दी ग्रेस</em>&#8216; उत्सव के लिए मशहूर न्यू ओरलियंस इस वक्त किसी भुतहा शहर से कम नहीं है। कई बार सुपर बॉल के मेजबान रहे 70 हजार दर्शकों की क्षमता वाले न्यू ओरलियंस सुपरदाम स्टेडियम में कोई 30 हजार लोगों ने शरण ली है, लेकिन इस स्टेडियम में इस वक्त न तो चलायमान शौचालय है, न वातानुकूलन। बिजली-पानी की स्थिति भी काफी नाजुक है। परसों तेज बारिश व 150 मील प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही तूफानी हवा से सुपरदाम की छत का कुछ हिस्सा भी उड़ गया था। न्यू ओरलियंस की आबादी 5 लाख है और अब न जाने यह शहर कब इस विपदा से उबर पाएगा। शहर के कई हिस्सों में जीवन की मूलभूत जरूरतों से जूझती जनता द्वारा दुकानें लूटने और खाद्यान्न चुराने की वारदातें सुनाई दी हैं।</p>
<div class="simplePullQuoteRight">कैटरीना हरिकेन जैसी हानि पिछले कई दशकों में किसी भी हरिकेन से नहीं हुई है। हर साल छोटे-बड़े हरिकेन का नाम अंगरेजी अक्षरों ए, बी, सी से शुरू होता है<span></span></div>
<p><strong>तूफान से तबाही का तांडव</strong></p>
<p>केंद्र और राज्य सरकार के सारे अंग बचाव के प्रयासों में लगे हैं। हेलिकॉप्टर और नावों के माध्यम से सैकड़ों लोगों को मकानों की छत और अन्य स्थानों से बचाए जाने के प्रयास जारी हैं। रेडक्रॉस व अन्य समाजसेवी संस्थाएं भी बचाव कार्यों में लगी हुई हैं। मिसिसीपी, अल्बामा, लूसियाना तीनों राज्यों में ऐसी विपदा से हुई जान-माल की हानि की तुलना सुनामी या हिरोशिमा के परमाणु विध्वंस से की जा रही है। भारत के लोग मुंबई में हुए जल-तांडव से गोया तुलना कर सकते हैं। फंसे हुए लोगों तक पीने के पानी, खाद्य सामग्री और दवाइयां पहुंचाने के प्रयास अनवरत जारी हैं। चारों तरफ सिर्फ विध्वंस और तबाही का ही तांडव है। लाखों लोग बेघर हो गए हैं और उनके पास लौटने को कोई घर है भी नहीं। अमेरिका के दक्षिणी भाग में इन महीनों में हरिकेन (समुद्री तूफान) काफी आते हैं और वहाँ की जनता और प्रशासन को हरिकेन का सामना करने की आदत-सी हो गई है, लेकिन कैटरीना हरिकेन जैसी हानि पिछले कई दशकों में किसी भी हरिकेन से नहीं हुई है। हर साल छोटे-बड़े हरिकेन का नाम अंगरेजी अक्षरों ए, बी, सी से शुरू होता है। आज से कई सालों पहले अगस्त के अंत में हरिकेन एंड्रयू (ए- यानी उस मौसम का पहला) का आगमन हुआ था और इसी साल कैटरीना (यानी के- 11वां अक्षर) तक गिनती पहुंच गई है।</p>
<h3>तेल की कीमतों में एकदम तेजी</h3>
<p>अमेरिका का कोई 25 प्र.श. तेल मैक्सिको की खाड़ी के पास तेल रिफाइनरी से आता है। कैटरीना तूफान से कई रिफाइनरी बंद हो गई हैं और विदेशों से आने वाले कच्चे तेल के जहाज भी नहीं पहुंच पा रहे हैं। इसके रहते तेल की कीमत एक ही दिन में 67 डॉलर बैरल से 71 डॉलर बैरल तक पहुंच गई है। कैटरीना तूफान से हुई संपत्ति और कारोबार की हानि का अभी तो आकलन भी मुश्किल है। बीमा कंपनियों को खरबों डॉलर के &#8216;क्लेम्स&#8217; की आशंका है। वाल्मार्ट कंपनियों ने इन तीन राज्यों में अपने 130 स्टोर्स बंद कर दिए हैं। प्रभावित इलाकों से निकलना भी मुश्किल है। आवागमन के साधन पूरी तरह से कट चुके हैं और परिस्थिति कब तक सुधरेगी, किसी के लिए भी कुछ कहना मुश्किल है। स्थिति पर पूरी नजर रखने के लिए राष्ट्रपति श्री बुश अपनी छुट्टी को दो दिन कम करके कल वापस राजधानी वाशिंगटन डीसी लौट रहे हैं। वैसे तो कई इलाकों में अब बारिश थम गई है, लेकिन लोगों को अपने घरों तक लौटने में कई हफ्ते-महीने लगेंगे।</p>
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		<title>केशरिया द्वारों में सराबोर न्यूयॉर्क का सेंट्रल पार्क</title>
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		<pubDate>Mon, 21 Feb 2005 10:26:53 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[जनजीवन]]></category>
		<category><![CDATA[क्रिस्टो]]></category>
		<category><![CDATA[जीनी क्लाउड]]></category>
		<category><![CDATA[द गेट्‍स प्रदर्शनी]]></category>
		<category><![CDATA[न्यूयॉर्क सेंट्रल पार्क]]></category>

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		<description><![CDATA[भारत से पहली बार अमेरिका आकर कोई इन दिनों सीधा सेंट्रल पार्क चला आया तो कुछ हतप्रभ रह जाएगा। हिंदुत्व का दम भरने वाली सभी संस्थाओं का परिचायक के‍शरिया रंग के हजारों ‘स्वागत-द्वार’ वह भी मैनहट्‍टन में?? कोई पार्टी, नेता, दल का नाम नहीं, किसी रैली या चुनाव चिह्न या किसी कंपनी के विज्ञापन का कोई नामोनिशान नहीं; फिर भी देखने वालों की उमड़ती भीड़। आखिर माजरा क्या है? ‘द गेट्‍स’ (द्वार) के नाम से यह अपनेआप में एक अनूठी [...]]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><img class="alignleft size-full wp-image-1682" alt="केशरिया द्वारों में सराबोर न्यूयॉर्क का सेंट्रल पार्क" src="https://www.jmuchhal.com/wp-content/uploads/2005/02/113.jpg" width="311" height="307" /><span class="dropcap">भा</span>रत से पहली बार अमेरिका आकर कोई इन दिनों सीधा सेंट्रल पार्क चला आया तो कुछ हतप्रभ रह जाएगा। हिंदुत्व का दम भरने वाली सभी संस्थाओं का परिचायक के‍शरिया रंग के हजारों ‘<em>स्वागत-द्वार</em>’ वह भी मैनहट्‍टन में?? कोई पार्टी, नेता, दल का नाम नहीं, किसी रैली या चुनाव चिह्न या किसी कंपनी के विज्ञापन का कोई नामोनिशान नहीं; फिर भी देखने वालों की उमड़ती भीड़। आखिर माजरा क्या है?</p>
<p>‘<em>द गेट्‍स</em>’ (द्वार) के नाम से यह अपनेआप में एक अनूठी प्रदर्शनी है, जिसमें मैनहट्‍टन के बीच सेंट्रल पार्क की परिक्रमा करते हुए 37 किलोमीटर की पगडंडियों के ऊपर कोई 7500 द्वार लगाए गए हैं। 16 फीट ऊंचे इन द्वारों की चौड़ाई 5.5 फीट से लेकर 18 फीट तक है। स्टील के खंभों के ऊपर सिर्फ केशरिया रंग का नायलोन कपड़ा, जो मुक्त हवा में लहराता है। दो दरवाजों के बीच 12 फीट का फासला, जिससे लहराता हुआ कपड़ा आपस में टकराए नहीं, बल्कि एक बहती हुई धारा का सा आभास दे। यह बनाने के लिए कोई पांच हजार टन स्टील और एक लाख वर्गमीटर नायलोन कपड़ा उपयोग में आया, और कोई 600-700 लोगों को न्यूयॉर्क में टेम्पररी रोजगार भी मिलेगा यह सब लगाने और उतारने में।</p>
<p><strong>क्या है इस द गेट्‍स प्रदर्शनी के पीछे के भावना और उद्देश्य?</strong> और कौन है इसका प्रणेता? यह सृजन है दो सामान्य नागरिकों क्रिस्टो और उनकी पत्नी जीनी क्लाउड का। पेशे और शौक से यह दोनों का कलाकार हैं; और इस तरह पश्चिमी दुनिया के कई कोनों में प्रकृति को इस तरह ‘<em>कपड़े</em>’ से सजाने, ढंकने और एक नई आभास देने के प्रयास में तत्पर हैं। इसके लिए ना तो वह किसी सरकार, ना ही किसी कंपनी से कोई अनुदान लेते हैं, ना ही वह किसी संस्थान से जुड़े हैं। अपनी खुद ही की कलाकृतियां बेचकर एकत्रित जाम पूंजी को वह ऐसे अनूठे अभियान में लगाते हैं।</p>
<div class="simplePullQuoteRightPerpal">यह ‘केशरिया बहती नदी’ चारों तरफ नजर आ रही है। सेंट्रल पार्क के आसपास ऊंची इमारतों से यह दृश्य बहुत लुभावना है<span></span></div>
<p>सेंट्रल पार्क में उनका यह प्रयास सिर्फ 16 दिन तक लोगों को लुभाता रहेगा। देखने वालों के लिए एक मुफ्त मुक्त अनुभव, जो इनके सारे प्रयासों की विशेषता है। सेंट्रल पार्क में इस वक्त पतझड़ के बाद पेड़-पत्तियों से विहीन हैं, इसलिए यह ‘<em>केशरिया बहती नदी</em>’ चारों तरफ नजर आ रही है। सेंट्रल पार्क के आसपास ऊंची इमारतों से यह दृश्य बहुत लुभावना है। क्या यह पैसे, कपड़े, स्टील का दुरुपयोग नहीं? क्या मिलता है इससे क्रिस्टो और जीनी और उस शहर को – हर किसी की इस विषय में अपनी राय हो सकती है और के विरोधी भी हैं। लेकिन कल रविवार को तेज धूप और कड़ी सर्दी के बीच मुझे तो हजारों हजार लोग नजर आए, जो इन गेट्‍स के नजारे का आनंद ले रहे थे, अपने कैमरे में इसकी यादों को कई डकार रहे थे।</p>
<p>इन दोनों कलाकारों को 26 वर्षों के प्रयास के बाद न्यूयॉर्क ने इस प्रदर्शनी की अनुमति दी है; इससे पहले उन्होंने अम्ब्रेला (छत्रियों) के नाम से जापान, रेप्ड माउंटेन (ढंके हुए पर्वत) के नाम से अमेरिका सहित 25 अलग देशों में विराट प्रदर्शनियां लगाई हैं, हर बार कपड़े की किसी रूप और गहरे रंग (पीला, गुलाबी, नीला आदि) इनके परिचय चिह्न हैं। इन कलाकारों के बारे में और जानकारी इनकी वेबसाइट पर है &#8211; <a href="https://www.christojeanneclaude.net/">www.christojeanneclaude.net</a></p>
<p>इस सप्ताह को इस प्रदर्शनी का आखरी सप्ताह है और  इसी सप्ताह में अंतरराष्ट्रीय ओलिम्पिक समिति के प्रतिनिधि शहर के दौरे पर हैं, जिसमें 2012 के ओलिम्पिक्स के लिए न्यूयॉर्क की दावेदारी का आकलन किया जाएगा; फैसला होगा 5 जुलाई को। ‘द गेट्‍स’ भी मानो उन्हीं के स्वागत में लगे द्वार हैं।</p>
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		<title>न्यूयॉर्क में रिपब्लिकन पार्टी का महाकुंभ</title>
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		<pubDate>Wed, 01 Sep 2004 12:23:43 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[जनजीवन]]></category>
		<category><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव]]></category>
		<category><![CDATA[जॉर्ज बुश]]></category>
		<category><![CDATA[न्यू जर्सी]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रपति]]></category>
		<category><![CDATA[रिपब्लिकन अधिवेशन]]></category>
		<category><![CDATA[रिपब्लिकन पार्टी]]></category>

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		<description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति के चुनाव (मंगलवार 2 नवंबर) से ठीक 60 दिन पहले सारे देश के रिपब्लिकन राजनीतिक न्यूयॉर्क में उतर आए हैं। अवसर है, चुनाव पूर्व पार्टी के परंपरागत 4 वर्षीय अधिवेशन का। न्यूयॉर्क सिटी (मैनहट्‍टन), जो डेमोक्रेट्‍स का ‘गढ़’ है, और पांच बार डेमोक्रेटिक अधिवेशन का मेजबान रह चुका है। वहां रिपब्लिकन पार्टी का ‘कनवेंशन’ पहली बार हो रहा है। रिपब्लिकन पार्टी के राष्ट्रपति-उपराष्ट्रपति के लिए चुनाव टिकट पर जॉर्ज बुश और डिक चेनी की दोबारा उम्मीदवारी की औपचारिक [...]]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><img class="alignleft size-full wp-image-1688" alt="न्यूयॉर्क में रिपब्लिकन पार्टी का महाकुंभ" src="https://www.jmuchhal.com/wp-content/uploads/2004/09/115.jpg" width="311" height="307" /><span class="dropcap">अ</span>मेरिकी राष्ट्रपति के चुनाव (मंगलवार 2 नवंबर) से ठीक 60 दिन पहले सारे देश के रिपब्लिकन राजनीतिक न्यूयॉर्क में उतर आए हैं। अवसर है, चुनाव पूर्व पार्टी के परंपरागत 4 वर्षीय अधिवेशन का। न्यूयॉर्क सिटी (मैनहट्‍टन), जो डेमोक्रेट्‍स का ‘<em>गढ़</em>’ है, और पांच बार डेमोक्रेटिक अधिवेशन का मेजबान रह चुका है। वहां रिपब्लिकन पार्टी का ‘<em>कनवेंशन</em>’ पहली बार हो रहा है। रिपब्लिकन पार्टी के राष्ट्रपति-उपराष्ट्रपति के लिए चुनाव टिकट पर जॉर्ज बुश और डिक चेनी की दोबारा उम्मीदवारी की औपचारिक घोषणा भी इसी अधिवेशन में की जाएगी। इस बार न्यूयॉर्क चुने जाने के कई कारण थे; लेकिन शायद सर्वोपरि था सितंबर 11 के बाद इस शहर और शहरवासियों से जुड़ी संवेदना। राष्ट्रपति जॉर्ज बुश के कार्यकाल का गोया मकसद ‘<em>आतंकवाद का सफाया और अमेरिका की स्वतंत्रता की पूर्ण रक्षा</em>’ के लिए भी न्यूयॉर्क से ज्यादा परिचायक शहर कोई और नहीं था। फिर इस बार तो न्यूयॉर्क के राज्यपाल पतकी, महापौर ब्लूमबर्ग और पूर्व महापौर गुलियानी सभी रिपब्लिकन हैं।</p>
<p><b>अधिवेशन की रूपरेखा :</b></p>
<p>30 अगस्त से 2 सितंबर तक चलने वाले इस 4 दिवसीय अधिवेशन का मुख्य कार्यक्रम तो हर दिन शाम को ही होता है। मैडिसन स्क्वायर गार्डन हॉल में रिपब्लिकन पार्टी के देशभर से आए पांच हजार से अधिक चुनिंदा ‘<em>डे‍लिगेट्‍स</em>’ के सामने पार्टी के राष्ट्रीय नेता पार्टी और राष्ट्रपति की उपलब्धियों पर अपने विचार रखते हैं। पहली संध्या को रुडी गुलियानी ने सितंबर 11 के बाद के अमेरिका में बुश के योगदान और नेतृत्व का जबरदस्त समर्थन करते हुए उन्हें आतंकवाद से लड़ाई जारी रखने के लिए 4 साल और चुने जाने का आह्वान किया। वहीं दूसरी शाम कैलिफोर्निया के <em>‘स्टार</em>’ राज्यपाल अर्नोल्ड और बुश की पत्नी लौरा बुश ने जॉर्ज बुश के व्यक्तित्व को भावनात्मक रूप से पेश किया। पार्टी ने माहौल बनाने के लिए ‍जार्जिया के डेमोक्रेटिक सीनेटर का भी भाषण रखा है, जो बुश की नीतियों का समर्थन करते हैं (मानो कांग्रेस के अधिवेशन में सोनियाजी की तारीफ में प्रमोद महाजन का भाषण!!) 1 सितंबर की शाम उपराष्ट्रपति चेनी और उनकी पत्नी का मुख्य भाषण होगा और अधिवेशन के अंतिम दिन 2 सितंबर को ही जॉर्ज बुश का यहां आगमन होगा और वह मुख्य उद्‍बोधन के जरिए पार्टी का नामांकन स्वीकार करेंगे। ऐसा ही सब कुछ 2 माह पहले डेमोक्रेटिक अधिवेशन में बोस्टन में हो चुका है, जब जॉन केरी और जॉन एडवर्ड्स को उनकी पार्टी ने उम्मीदवार घोषित किया।</p>
<div class="simplePullQuoteRightGreen">चुनाव पूर्व किसी भी आतंकवादी गड़बड़ी की आशंका के बीच रिपब्लिकन अधिवेशन की सुरक्षा व्यवस्था अभूतपूर्व है<span></span></div>
<p><b>मैडिसन स्क्वायर गार्डन जैसे फौज की छावनी :</b></p>
<p>अधिवेशन का मुख्य हॉल मैडिसन स्क्वायर गार्डन मैनहट्टन के मध्य और अत्यंत व्यस्त क्षेत्र में स्थित है। इस हॉल के ठीक नीचे न्यूयॉर्क का मेन रेलवे स्टेशन है; जहां से न्यू जर्सी, लॉग आयलैंड की ट्रेंस आती-जाती हैं और लाखों लोग वहां से दिन में गुजरते हैं। चुनाव पूर्व किसी भी आतंकवादी गड़बड़ी की आशंका के बीच रिपब्लिकन अधिवेशन की सुरक्षा व्यवस्था अभूतपूर्व है। न्यूयॉर्क शहर के पूरे 37,000 पुलिस कर्मी और उसके साथ न्यू जर्सी पुलिस, सेना और खुफिया पुलिस के हजारों लोग अधिवेशन की सुरक्षा में जुटे हैं। अधिवेशन स्थल की ‍ओर जाने वाले हर मार्ग और सब-वे के अंदर पुलिस की गहन चौकसी है। पेन स्टेशन से आने-जाने वाली हर ट्रेन की तलाशी ली जा रही है। इस सभी की आशंका से इस सप्ताह मैनहट्टन में काम करने वालों की संख्या बहुत कम नजर आ रही है, लेकिन फिर भी यह मानना पड़ेगा कि मुझ जैसे हजारों लोग सब-वे के जरिए अपने कार्यालय तक आसानी से आ-जा रहे हैं। सुरक्षा की इस तैयारी में कितने महीने और कितने करोड़ों डॉलर लगेंगे, अंदाज लगाना मुश्किल है। हां, 3 सितंबर तक सब कुछ ठीक ठाक समाप्त हो जाने पर यहां के सभी अधिकारी चैन की लंबी सांस ले सकेंगे।</p>
<p><b>अधिवेशन के लिए शहर में आए 50,000 लोग : </b></p>
<p>आयोजकों का ऐसा अनुमान है कि अधिवेशन के माध्यम से करीब 50,000 यात्री मैनहट्‍टन में आए हैं। इनमें से करीब 5000 तो देश के हर राज्य से आए रि‍पब्लिकन पार्टी के कार्यकर्ता हैं। देश-विदेश के करीब 15000 संवाददाता इस अधिवेशन को कवरेज करने यहां आए हैं। उनके लिए मैडिसन स्क्वायर गार्डन से ठीक ‍पीछे न्यूयॉर्क के मुख्य डाकघर में सूचना केंद्र की व्यवस्था की गई है। शहर में करीब 40,000 होटल के कमरे रिपब्लिकन अधिवेशन में आए मेहमानों के लिए आरक्षित किए गए हैं। चूंकि अधिवेशन की मुख्य गतिविधि तो सिर्फ शाम को ही है; तो चारों दिनों को क्रमश: न्यूयॉर्क में खरीदी, क्रीड़ा, संस्कृति और इतिहास दिवस के रूप में मेहमानों के लिए विशेष आकर्षणों की तैयारी भी की गई है। न्यूयॉर्क में सत्ता पक्ष का अधिवेशन हो और यहां के बड़े व्यापारी मेजबानी में पीछे कैसे रहें; न्यूयॉर्क और अमेरिका की मुख्य कंपनियों ने अधिवेशन को सफल बनाने में मुक्त-हस्त से अपना समर्थन दिया है। सभी ‘<em>डेलिगेट्‍स</em>’ को दिए जाने वाले <em>‘फ्री गिफ्ट बैग’</em> में और वस्तुएं के अलावा एक ‍डिजिटल कैमरा भी है, जिससे वे अधिवेशन की अपनी यादें सदा के लिए कैमरे में कैद कर सकें।</p>
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		<title>अमेरिका अंधेरे में डूबा, लोगों ने शांति की मिसाल कायम की</title>
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		<pubDate>Fri, 15 Aug 2003 11:01:51 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[जनजीवन]]></category>
		<category><![CDATA[अमेरिका अंधेरे में डूबा]]></category>
		<category><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति जार्ज बुश]]></category>
		<category><![CDATA[बिजली व्यवस्था]]></category>

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		<description><![CDATA[न्यूयॉर्क सहित अमेरिका के अधिकांश शहरों की बिजली गुम हो जाने से ये शहर अंधेरे में डूब गए हैं। यहां बिजली गुरुवार 4.30 बजे गई थी और अभी 12 घंटे से ज्यादा हो चुके हैं, लेकिन बिजली व्यवस्था पुनः चालू होने के कोई ठोस संकेत नहीं मिले हैं। लोग इस कठिन समय में भी बिना किसी भगदड़ के एक-दूसरे की मदद कर रहे हैं। चारों ओर शांति से एक-दूसरे की मदद करते हुए लोग इस विपत्ति से जूझ रहे हैं। [...]]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><img class="alignleft size-full wp-image-1511" alt="अमेरिका अंधेरे में डूबा, लोगों ने शांति की मिसाल कायम की  " src="https://www.jmuchhal.com/wp-content/uploads/2003/08/32.jpg" width="311" height="307" />न्यूयॉर्क सहित अमेरिका के अधिकांश शहरों की बिजली गुम हो जाने से ये शहर अंधेरे में डूब गए हैं। यहां बिजली गुरुवार 4.30 बजे गई थी और अभी 12 घंटे से ज्यादा हो चुके हैं, लेकिन बिजली व्यवस्था पुनः चालू होने के कोई ठोस संकेत नहीं मिले हैं। लोग इस कठिन समय में भी बिना किसी भगदड़ के एक-दूसरे की मदद कर रहे हैं। चारों ओर शांति से एक-दूसरे की मदद करते हुए लोग इस विपत्ति से जूझ रहे हैं।</p>
<p><strong>बिजली गायब होने से नुकसान :</strong></p>
<p>अमेरिकी राष्ट्रपति जार्ज बुश ने इस घटना में किसी आतंकवादी हाथ होने से साफ इंकार किया। इससे पहले अमेरिका में इतने बड़े पैमाने पर बिजली की आपूर्ति वर्ष 1956 और सन्‌ 1977 में ही बंद हुई थी। बिजली गायब होने से करीब 600 रेलगाड़ियां बीच में ही खड़ी रह गई हैं तथा अनुमान लगाया जा सकता है कि बड़ी संख्या में लोग भूमिगत रेलगाड़ियों में भी फंसे हुए होंगे। मैं पिछले 12 घंटे से 14 मंजिल पर अपने निवास की खिड़की से आकाश, धरती और चारों ओर घुप अंधेरा देख रहा हूं।</p>
<div class="simplePullQuoteRight">घरों में पानी, दूध तथा अन्य सभी जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति भी बिजली व्यवस्था पर ही निर्भर है<span></span></div>
<p>यदि समय रहते बिजली बहाल नहीं हुई तो समस्या और भी ज्यादा बढ़ सकती है, क्योंकि यहां गर्मी का मौसम है और लोगों के पास बिजली व्यवस्था बहाल करने के वैकल्पिक साधन जैसे इनवर्टर, जनरेटर आदि नहीं होते हैं, जैसा कि हम भारत में देखते हैं। घरों में पानी, दूध तथा अन्य सभी जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति भी बिजली व्यवस्था पर ही निर्भर है। बिजली गुम होने के समय शहर में अंधेरा नहीं था, इसलिए लोग अपने-अपने ऑफिसों से बिना लिफ्ट की मदद के स्वयं चलकर उतर आए थे। लेकिन लोगों को अपने घरों तक जाने के लिए कई किलोमीटर का रास्ता पैदल ही तय करना पड़ रहा है।</p>
<p>न्यूयॉर्क के मैनहट्‌टन क्षेत्र में तो लाखों लोगों की भीड़ नजर आ रही है। यहां लोग पैदल ही अपने-अपने घरों की ओर रवाना हो रहे हैं। यहां इंसानी जीवन की लगभग हर गतिविधि में बिजली की भूमिका होने से सारे कार्य ठप पड़ गए हैं। घरों तथा ज्यादातर ऑफिसों में बैक अप सिस्टम नहीं होने से लोगों की परेशानी बढ़ गई है। लिफ्ट में फंसे लोगों को निकाला जा रहा है। बैंकों में कार्य बंद है, क्रेडिट कार्ड मशीनें भी ठप पड़ी हैं। आज शुक्रवार की सुबह लोगों का ऑफिस जाना असंभव ही दिखाई दे रहा है। पिछले 12 घंटों से बिजली गुम होने के बाद भी किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली है। बताया जा रहा है कि कनाडा के कुछ भाग भी अंधेरे में डूबे हुए हैं।</p>
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		<title>इराक और युद्ध के बीच सिर्फ चंद लम्हे</title>
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		<pubDate>Mon, 17 Mar 2003 13:27:26 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[जनजीवन]]></category>
		<category><![CDATA[आर्ट ऑफ द इम्पॉसिबल]]></category>
		<category><![CDATA[इराक युद्ध]]></category>
		<category><![CDATA[ओसामा बिन लादेन]]></category>
		<category><![CDATA[जॉर्ज बुश]]></category>
		<category><![CDATA[पाकिस्तान]]></category>
		<category><![CDATA[सद्‌दाम]]></category>

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		<description><![CDATA[राजनीति का दूसरा नाम ही है &#8216;आर्ट ऑफ द इम्पॉसिबल&#8216; जिसमें सब कुछ संभव है। अत्यंत जटिल मसलों का भी समय कोई हल निकाल देता है लेकिन जॉर्ज बुश और अमेरिकी नेतृत्व में खाड़ी क्षेत्र में तैयार 2 लाख 75 हजार सैनिकों के पास अब सद्‌दाम को देने के लिए और समय नहीं है। इन पंक्तियों को लिखने और आपके पढ़ने के घंटों के बीच भी इराक पर आक्रमण का शंखनाद हो सकता है। रविवार को पुर्तगाल के एक द्वीप [...]]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><img src="https://www.jmuchhal.com/wp-content/uploads/2003/03/jm_p_AirCarrier.jpg" alt="इराक और युद्ध के बीच सिर्फ चंद लम्हे" width="311" height="307" class="alignleft size-full wp-image-3105" /><span class="dropcap">रा</span>जनीति का दूसरा नाम ही है &#8216;<em>आर्ट ऑफ द इम्पॉसिबल</em>&#8216; जिसमें सब कुछ संभव है। अत्यंत जटिल मसलों का भी समय कोई हल निकाल देता है लेकिन जॉर्ज बुश और अमेरिकी नेतृत्व में खाड़ी क्षेत्र में तैयार 2 लाख 75 हजार सैनिकों के पास अब सद्‌दाम को देने के लिए और समय नहीं है। इन पंक्तियों को लिखने और आपके पढ़ने के घंटों के बीच भी इराक पर आक्रमण का शंखनाद हो सकता है। रविवार को पुर्तगाल के एक द्वीप पर हुई &#8216;<em>एक घंटे</em>&#8216; की अनूठी शीर्ष वार्ता और उसी दिन चेनी-पावेल के वक्तव्यों ने स्पष्ट कर दिया है कि अब इराक और उसका शासन &#8216;<em>तुरंत</em>&#8216; त्यागने के अलावा सद्‌दाम के लिए युद्ध का सामना अवश्यंभावी है। यह संदेश सिर्फ सद्दाम के लिए नहीं, बल्कि सुरक्षा परिषद के 15 सदस्य राष्ट्र और विश्व के सभी देशों को भी था कि सद्‌दाम-इराक के विषय में चर्चाओं और समीकरण के दौर अब &#8216;<em>अंतिम चौराहे</em>&#8216; पर हैं।</p>
<p><b>बीते कुछ दिन</b></p>
<p>अमेरिकी प्रशासन ने तो यह बार-बार कह दिया कि उन्हें सद्‌दाम पर सामरिक कार्रवाई करने के लिए सुरक्षा परिषद में दोबारा बहुमत की कोई आवश्यकता नहीं है, अमेरिका के लिए अनुमोदन 1441 ही काफी है। वह तो सिर्फ अपने घनिष्ठ सहयोगी और अंतरराष्ट्रीय राजनीति में दबे स्वरों में अब &#8216;<em>बुश के पालतू</em>&#8216; कहलाने वाले टोनी ब्लेयर को उनके देश इंग्लैंड में हो रहे भारी विरोध से जूझने के लिए सुरक्षा परिषद में नए अनुमोदन को पारित करवाने के भरसक प्रयास कर रहा था लेकिन 15 में से 9 का बहुमत भी उन्हें नजर नहीं आया। इसलिए पिछले सप्ताह तक दोबारा वोट पर अडिग बुश ने भी अपना विचार बदल लिया, क्योंकि वे भी सुरक्षा परिषद में परास्त अनुमोदन की अवहेलना करके और अधिक कूटनीतिक सख्ती नहीं चाहते। फ्रांस, जर्मनी तो इतनी जल्दी सैनिक कार्रवाई के विरोध में खुलकर थे, बुश के पिछले सालों के नए मित्र रशिया के पुतिन और पाकिस्तान के मुशर्रफ ने भी अमेरिका के साम और &#8216;<em>दाम</em>&#8216; के खुले आश्वासन के बावजूद सहमति व्यक्त नहीं की।</p>
<p>तुर्की के भरोसे इराक के उत्तरी भाग से जमीन और हवाई आक्रमण की सारी योजना तुर्की की संसद के विरोध से धरी रह गई। किए गए सर्वेक्षण के अनुसार अमेरिका की जनता अभी भी सद्‌दाम हुसैन को इराक से हटाने को सही मानती है, हालांकि अधिकांश की यह भी इच्छा है कि सैनिक कार्रवाई संयुक्त राष्ट्र के अनुमोदन से होना चाहिए और महीनों से मीडिया पर छाई इराक-लड़ाई की चर्चा और उससे उत्पन्न अनिश्चितता ने पहले से ही नरम अर्थव्यवस्था को पुनः मंदी के कगार पर ला खड़ा किया है। तेल की कीमत पिछले महीनों में दोगुनी हो गई है।</p>
<div class="simplePullQuoteLeftRed">इराक से सद्‌दाम को निर्णायक रूप से हटाने के लिए अमेरिका के लगभग 2 लाख 25 हजार से अधिक सैनिक, सैकड़ों वायुयान, कई विमान वाहक युद्धपोत, खाड़ी क्षेत्र में जमा हैं<span></span></div>
<p>अब अमेरिका के जनमत का तो मानना है कि अगर लड़ाई होनी ही है, तो वह फिर परसों के बजाय कल ही हो जाए ताकि अनिश्चितता की दौड़ से तो आगे बढ़ सकें। पिछले दिनों अल कायदा के सरगना खालिद शेखमोहम्मद के पाकिस्तान में पकड़े जाने के बाद ओसामा बिन लादेन को जिंदा या मुर्दा पकड़ने के अमेरिकी प्रयासों में बहुत तेजी आ गई है क्योंकि अगर इन्हीं दिनों में किसी तरह भी बिन लादेन अगर पकड़ा गया तो आतंकवाद के खिलाफ बुश की जेहाद को सारी दुनिया का समर्थन मिल जाएगा और इराक के खिलाफ सैनिक कार्रवाई का विरोध एकदम ठंडा पड़ सकता है।</p>
<p><b>कैसा होगा यह इराक युद्ध</b><b>?</b></p>
<p>अमेरिका ने अपनी सैन्य शक्ति का पूरा बल खाड़ी क्षेत्र में लगा दिया है। इराक से सद्‌दाम को निर्णायक रूप से हटाने के लिए अमेरिका के लगभग 2 लाख 25 हजार से अधिक सैनिक (इंग्लैंड के 40 हजार इसके अलावा हैं), सैकड़ों वायुयान, कई विमान वाहक युद्धपोत, खाड़ी क्षेत्र में जमा हैं। उस इलाके में सहयोगी राष्ट्र कम होने से कुवैत, कतर आदि में ही जमीनी सेना ने अपने डेरे जमा रखे हैं और अधिकांश उड़ानें अमेरिका के विमान वाहक युद्धपोत से ही होंगी। इस युद्ध की कमान होगी जनरल टॉमीफ्रेंक के हाथ, जिनका पूरा मुख्यालय फ्लोरिडा से उठकर कतर में स्थानांतरित हो गया है। राष्ट्रपति बुश के सिर्फ आदेश की देरी है, अमेरिका सेना ने पहले 48 घंटे में ही इराक पर इतनी भीषण हवाई गोलाबारी की योजना बनाई है कि उससे सद्‌दाम का पूरा प्रशासन और रक्षातंत्र नष्ट हो जाएगा। उसके तुरंत बाद जमीनी सेना और टैंक कुवैत के मार्ग से बगदाद की ओर कूच करेंगे। सामरिक कार्रवाई की मुख्य आधारशिला है कि सद्‌दाम और उनकी सेना पर इतने कम समय में इतना भारी आक्रमण कि इराक की सेना खुद ही हथियार डाल दे।</p>
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		<title>रूडी गुलियानी : एक मेयर, जो अपने कर्म से महान बन गया</title>
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		<pubDate>Thu, 03 Jan 2002 13:30:04 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[जनजीवन]]></category>
		<category><![CDATA[गुलियानी]]></category>
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		<category><![CDATA[मेयर रूडी गुलियानी]]></category>

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		<description><![CDATA[न्यूयॉर्क अगर दुनिया की राजधानी है, तो उसे इस शिखर पर पहुंचाने में यहां के मेयर रूडी गुलियानी का उल्लेखनीय योगदान है। विवादास्पद किंतु कारगर गुलियानी के 8 साल के मेयर कार्यकाल में तो न्यूयॉर्क शहर का कायाकल्प हो गया। 9/11 के हमले के बाद के न्यूयॉर्क के पुनरुत्थान की लड़ाई के जीवंत प्रणेता थे रूडी गुलियानी। 11 सितंबर के हादसे को हुए 18 घंटे बीत चुके थे और उन पूरे 18 घंटे के हर पल न्यूयॉर्क के मेयर रूडी [...]]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><img src="https://www.jmuchhal.com/wp-content/uploads/2002/01/jm_t_RudyG.jpg" alt="रूडी गुलियानी : एक मेयर, जो अपने कर्म से महान बन गया" width="311" height="307" class="alignleft size-full wp-image-3108" />न्यूयॉर्क अगर दुनिया की राजधानी है, तो उसे इस शिखर पर पहुंचाने में यहां के मेयर रूडी गुलियानी का उल्लेखनीय योगदान है। विवादास्पद किंतु कारगर गुलियानी के 8 साल के मेयर कार्यकाल में तो न्यूयॉर्क शहर का कायाकल्प हो गया। 9/11 के हमले के बाद के न्यूयॉर्क के पुनरुत्थान की लड़ाई के जीवंत प्रणेता थे रूडी गुलियानी।</p>
<p>11 सितंबर के हादसे को हुए 18 घंटे बीत चुके थे और उन पूरे 18 घंटे के हर पल न्यूयॉर्क के मेयर रूडी गुलियानी विपदा से लड़ने वालों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े थे और उन्हें ढांढस बंधा रहे थे। रात को ढाई बजे श्री गुलियानी अपने मित्र हॉवर्ड कोपेल के अपने एक बेडरूम के घर लौटे (जून महीने से अपनी पत्नी से मतभेद बढ़ने के बाद श्री गुलियानी अपनी दोस्त के फ्लैट में ही रहते हैं और न्यूयॉर्क के मेयर के सरकारी निवास &#8216;<em>ग्रेसी मेंशन</em>&#8216; में अब सिर्फ उनकी पत्नी डोना रहती थीं)। उन्होंने दिन में पहली बार टीवी पर वह भयानक दृश्य देखा और वे थककर चूर होने के बाद भी सोए नहीं।</p>
<p>उन्होंने सिरहाने रखी विंस्टन चर्चिल की जीवनी के पन्ने पलटने शुरू कर दिए- &#8216;<em>मैं सोच रहा था कि ऐसे विनाश के बाद भी मैं न्यूयॉर्कवासियों की आशा व विश्वास बनाए रखूं और इसके लिए चर्चिल का ध्यान आया। 1940 में हिटलर द्वारा लंदन को नेस्तनाबूद करने के बाद जब सब कुछ खत्म-सा हो गया था, फिर भी उन्होंने लंदनवासियों की आशा जिंदा रखी थी। वही मेरी भी आवाज बनी।</em>&#8216; याद करते हैं 2002 में 8 साल के कार्यकाल के बाद न्यूयॉर्क के मेयर पद से निवृत्त रूडी गुलियानी।</p>
<p><strong>रूडी गुलियानी का पर्सन ऑफ द ईयर</strong></p>
<p>न्यूयॉर्क व अमेरिका की आवाज और विश्वास बनाने के लिए &#8216;<em>टाइम</em>&#8216; पत्रिका ने श्री रूडी गुलियानी को 2001 का &#8216;<em>पर्सन ऑफ द ईयर</em>&#8216; नवाजा। श्री गुलियानी ने वही कर दिखाया, जो सब कुछ नष्ट होने के बाद भी चर्चिल ने किया था। उन्होंने इस दिवास्वप्न पर लोगों को भरोसा दिला दिया कि अंत में विजय हमारी ही होगी और यही उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि थी। 4 साल के दो कार्यकाल के बाद श्री रूडी गुलियानी अब न्यूयॉर्क के एक्स-मेयर हैं, लेकिन 107 मेयर की श्रृंखला में रूडी गुलियानी शायद न्यूयॉर्क के सबसे कामयाब मेयर के रूप में याद किए जाएंगे। इसमें 11 सितंबर और बाद के दिनों का अधिक योगदान है। 10 सितंबर तक श्री गुलियानी का कार्यकाल उल्लेखनीय था, लेकिन उसके बाद तो वे अविस्मरणीय हो गए। इस सफर की नींव में हमें देखना होगा 1994- जब गुलियानी ने न्यूयॉर्क के मेयर का कार्यभार संभाला था। उन दिनों टाइम पत्रिका ने ही &#8216;<em>बिग एपल</em>&#8216; कहलाने वाले न्यूयॉर्क के बदतर हाल पर आवरण कथा लिखी थी- <em>&#8216;द रोटन एप्पल&#8217;</em> शहर में अपराध अपने चरम पर था।</p>
<div class="simplePullQuoteRight">यह आरोप कि न्यूयॉर्क को सुधारा नहीं जा सकता, और यह शहर अब बर्बाद है, मैं इसे गलत साबित करके दिखा दूंगा<span></span></div>
<p>रात में न्यूयॉर्क की सड़कों और सब-वे में सफर करना खतरे से खाली नहीं था। शहर की दीवारें <em>&#8216;ग्रैफिटी&#8217;</em> से पुती हुई थीं। तब 75 लाख (और अब 80 लाख) की आबादी के शहर में 11 प्रतिशत बेरोजगारी थी। रोजाना लगभग 5 कत्ल की वारदातें होती थीं। न्यूयॉर्क के नए मेयर ने अपने स्वागत भाषण में ऐलान किया था- &#8216;<em>यह आरोप कि न्यूयॉर्क को सुधारा नहीं जा सकता, और यह शहर अब बर्बाद है, मैं इसे गलत साबित करके दिखा दूंगा।</em>&#8216;</p>
<p>कैसे किया उनके प्रशासन ने यह सब न्यूयॉर्क जैसे महानगर में, गुलियानी प्रशासन की सफलता नागरिक प्रशासन के इतिहास में एक पाठ की तरह अध्ययन की जानी चाहिए। सबसे पहला बीड़ा उठाया उन्होंने शहर के अपराध-बोध को हटाने का, नागरिकों और पर्यटकों में शहर में सुरक्षा की भावना पैदा करने का। उन्होंने पुलिस में काफी वृद्धि की और सुरक्षा का पूरा नक्शा ही बदल दिया। श्री गुलियानी ने शहर को चलाया एक कंपनी के प्रबंधक की तरह और उनसे कई नाराज थे। इनमें हिस्पेनिक और काले शामिल थे, क्योंकि पुलिस कभी अति पर भी उतर आती थी। लेकिन श्री गुलियानी ने हमेशा पुलिस और प्रशासन का ही साथ दिया। इन आठ सालों में अमेरिका की अर्थव्यवस्था में तेजी होने का भी बड़ा सहारा है, जिससे शहर में आमदनी व व्यवसाय बढ़े और न्यूयॉर्क वापस से &#8216;<em>कैपिटल ऑफ द वर्ल्ड</em>&#8216; बन गया। लेकिन इस सपने को साकार करने में श्री गुलियानी हमेशा लगे रहे। टाइम्स स्क्वेयर के इलाके को उन्होंने पर्यटकों का चमन बना दिया।</p>
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		<title>9/11 के बाद : बढ़ा आतंकवाद, बढ़ी दूरियाँ</title>
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		<pubDate>Fri, 21 Sep 2001 11:21:12 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[जनजीवन]]></category>
		<category><![CDATA[9/11 आतंकवाद]]></category>
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		<category><![CDATA[पेंटागन]]></category>
		<category><![CDATA[विश्व व्यापार केंद्र]]></category>

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		<description><![CDATA[पेंटागन : दुनिया का विशालतम दफ्तर अमेरिकी रक्षा प्रतिष्ठान &#8216;पेंटागन&#8216; वॉशिंगटन के करीब ऑर्लिंगटन में स्थित एक पंचकोणीय बहुमंजिला इमारत है। वास्तुकार जॉर्ज एडविन बर्गस्टॉम द्वारा अभिकल्पित रूपरेखा के आधार पर इसका निर्माण सन्‌ 1941-43 में किया गया था। 34 एकड़ के क्षेत्रफल में फैली इस इमारत में स्थित कार्यालयों का कुल क्षेत्रफल 3,707,745 वर्गफुट है। यहाँ अमेरिकी रक्षा सेनाओं के तीनों अंगों से जुड़े 25 हजार कर्मचारी काम करते हैं। इसकी गिनती विश्व के विशालतम कार्यालयीन भवनों में होती [...]]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><b><img class="alignleft size-full wp-image-1751" alt="9/11 के बाद : बढ़ा आतंकवाद, बढ़ी दूरियां" src="https://www.jmuchhal.com/wp-content/uploads/2011/09/141.jpg" width="311" height="307" />पेंटागन :</b> दुनिया का विशालतम दफ्तर अमेरिकी रक्षा प्रतिष्ठान &#8216;<em>पेंटागन</em>&#8216; वॉशिंगटन के करीब ऑर्लिंगटन में स्थित एक पंचकोणीय बहुमंजिला इमारत है। वास्तुकार जॉर्ज एडविन बर्गस्टॉम द्वारा अभिकल्पित रूपरेखा के आधार पर इसका निर्माण सन्‌ 1941-43 में किया गया था। 34 एकड़ के क्षेत्रफल में फैली इस इमारत में स्थित कार्यालयों का कुल क्षेत्रफल 3,707,745 वर्गफुट है। यहाँ अमेरिकी रक्षा सेनाओं के तीनों अंगों से जुड़े 25 हजार कर्मचारी काम करते हैं। इसकी गिनती विश्व के विशालतम कार्यालयीन भवनों में होती है।</p>
<p><b>सबसे वफादार :</b> अब तक के कुत्तों की सबसे बड़ी मु्हिम के अंतर्गत 350 प्रशिक्षित कुत्ते वर्ल्ड ट्रेड सेंटर हादसे के शुरुआती दिनों में वहां जुटे थे। क्योंकि दबे हुए जिंदा लोगों और मानव अवशेषों को सूंघकर पहचानने में इनकी महारत है। रोजाना 12 घंटे की ड्यूटी पर लगे डच, टफ, सेली, मैक्स और काउबॉय और ऐसे ही नाम वाले कुत्तों को पूरा प्रशिक्षण था कि कैसे मलबे में घूसकर इंसान को सूंघकर ढूंढा जाए। वे ऐसे छोटे स्थानों में भी घूस सकते थे, जहां राहतकर्मी नहीं पहुंच सकते थे।</p>
<p><b>इलेक्ट्रॉनिक रोबोट :</b> आधुनिक टेक्नोलॉजी का फायदा लेकर पहली बार किसी बचाव और राहत अभियान में छोटे लेकिन अत्यंत कारगर इलेक्ट्रॉनिक रोबोट्स का उपयोग किया गया। इंसानों द्वारा दूर से चालित ये जूते के डिब्बे की साइज के रोबोट मलबे में अंदर तक घूस सकते थे। इसमें लगी लाइट, वीडियो कैमरा और सेंसर द्वारा इंसानों और अवशेषों की खोज की जा रही थी। 12 सितंबर को माइक्रोटेक नामक रोबोट ने मलबे के नीचे दबे हुए कुछ कमरे ढूंढ निकाले, जहां बाद में राहतकर्मी पहुंचे और कई इंसानों को वहां से निकाला।</p>
<div class="simplePullQuoteRightPerpal">जो भी कभी न्यूयॉर्क के विश्व व्यापार केंद्र गया है वह जानता है कि पूरा इलाका बहुत ही घना बसा हुआ है<span></span></div>
<p><b>जो ढही</b><b>, </b><b>वे इमारतें भर नहीं थीं :</b> घटना के बाद सभी दूर से प्रतिक्रिया आई परंतु यह प्रतिक्रिया सही मायने में प्रत्येक अमेरिकी के दिल की बात थी। &#8216;विश्व व्यापार केंद्र के दो टॉवर सिर्फ दो गगनचुंबी इमारतें भर नहीं थीं। ये दो टॉवर आधुनिक अमेरिका की प्रगति के प्रतीक थे, जो कि पूँजीवाद और पश्चिमी सभ्यता के परिचायक शहर न्यूयॉर्क के आकाश पर छाए हुए थे। इन्हीं के इर्द-गिर्द वॉल स्ट्रीट, शेयर बाजार और वित्त की दुनिया बसी हुई है।</p>
<p>वहीं दूसरी ओर पेंटागन अमेरिका की सुरक्षा व्यवस्था का हृदय है, जहाँ से सारे विश्व पर अमेरिका की नजर रहती आई है। इन प्रतीकों पर हमला अमेरिका के नाभि कुंड में हमला है &#8230; जिसने पूरे अमेरिका को झकझोर दिया है। हजारों जानों और अरबों-खरबों के वित्त की हानि तो न्यूनतम है। जो भी कभी न्यूयॉर्क के विश्व व्यापार केंद्र गया है वह जानता है कि पूरा इलाका बहुत ही घना बसा हुआ है &#8230; और अब यह इमारत इतिहास के पन्नो में खून से दर्ज हो गई है। पूरा अमेरिका शर्म, दुःख और आक्रोश से भरा हुआ है। राष्ट्रपति बुश के लिए भी यह परीक्षा की घड़ी है। एक ओर जहाँ अमेरिका &#8216;<em>राष्ट्रीय प्रक्षेपास्त्र सुरक्षा प्रणाली</em>&#8216; से अपनी सीमाएँ सुरक्षित करना चाहता था, वहीं आतंकवादियों ने अमेरिका के अंदर ही से वार करके देश की पूरी सुरक्षा व्यवस्था पर ही प्रश्नचिह्न लगा दिया है। इस वार से उबरने में, पहले ही से आर्थिक मंदी का सामना कर रहे अमेरिका को काफी समय लगेगा और दरकार होगी उच्चतम स्तर की नेतृत्व क्षमता की।&#8217;</p>
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