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	<title>Jitendra Muchhal &#124; Jitendra Muchhal Website &#124; J Muchhal &#124; जीतेंद्र मुछाल &#187; व्हाईट हाऊस | अमेरिका की राजनीति के बारे में</title>
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		<title>तुम आशा, विश्वास हमारे…</title>
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		<pubDate>Tue, 20 Jan 2009 11:03:10 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[व्हाईट हाऊस]]></category>
		<category><![CDATA[अमेरिका ड्रीम]]></category>
		<category><![CDATA[पायलट ओबामा]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रपति ओबामा]]></category>
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		<description><![CDATA[अमेरिका के राष्ट्रपति पद की शपथ में सामान्यत: अंतिम चार शब्द होते हैं &#8216;सो हेल्प मी गॉड&#8216;! 20 जनवरी को यह शब्द कहने के साथ ही बराक ओबामा अमेरिका के 44वें राष्ट्रपति बन गए। व्हाइट हाउस में पहले अश्वेत राष्ट्रपति ओबामा के पहुँचने से &#8216;अमेरिका ड्रीम&#8216; का यह शिखर अब हर आम और खास को अपना-सा लगने लगा है। उनके शपथ ग्रहण से जुड़े हर पहलू के लिए लोगों में गजब का उत्साह देखने को मिला। लाखों की तादाद में [...]]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><img class="alignleft size-full wp-image-2870" alt="तुम आशा, विश्वास हमारे…" src="https://www.jmuchhal.com/wp-content/uploads/2009/01/JM_1_Obama_Hope.jpg" width="311" height="307" /><span class="dropcap">अ</span>मेरिका के राष्ट्रपति पद की शपथ में सामान्यत: अंतिम चार शब्द होते हैं &#8216;<em>सो हेल्प मी गॉड</em>&#8216;! 20 जनवरी को यह शब्द कहने के साथ ही बराक ओबामा अमेरिका के 44वें राष्ट्रपति बन गए। व्हाइट हाउस में पहले अश्वेत राष्ट्रपति ओबामा के पहुँचने से &#8216;<em>अमेरिका ड्रीम</em>&#8216; का यह शिखर अब हर आम और खास को अपना-सा लगने लगा है।</p>
<p>उनके शपथ ग्रहण से जुड़े हर पहलू के लिए लोगों में गजब का उत्साह देखने को मिला। लाखों की तादाद में लोग लोकतंत्र के इस महाकुंभ में शामिल होने के लिए वॉशिंगटन पहुँचे। और इसी ऐतिहासिक समारोह के नैपथ्य में छाई है मंदी, चरमराती अर्थव्यवस्था, बढ़ती बेरोजगारी, ध्वस्त होते बैंक, बंद होती कंपनियाँ, भविष्य के प्रति इतनी &#8216;<em>अनसर्टेनिटी</em>&#8216; अमेरिका ने तो कई दशकों में नहीं महसूस की। इसी अंधकार में आशा और विश्वास के पुंज बराक ओबामा का हार्दिक स्वागत है।</p>
<p><b>दुष्कर चुनौतियाँ : </b>अमेरिका सहित दुनिया में गंभीर आर्थिक समस्याएँ हैं। सारी सरकारें परिस्थिति से निबटने के लिए हरसंभव, असंभव प्रयास कर रही हैं, लेकिन अभी तो सब मंदी के होम में &#8216;स्वाह&#8217; हो रहे हैं। गहराती आर्थिक मंदी कहीं 1930 जैसी &#8216;<em>इकोनॉमिक डिप्रेशन</em>&#8216; के गर्त में न डूब जाए। क्या आने वाला कल आज से बेहतर होगा? मेरा कारोबार, नौकरी रहेगी? कीमतें कब तक गिरती रहेंगी? कितनी कंपनियाँ, बैंकें और डूबेंगी? ओबामा और उनके प्रशासन की सबसे बड़ी चुनौती है इनसान के नैसर्गिक &#8216;<em>विश्वास</em>&#8216; और &#8216;<em>आशा</em>&#8216; को जीवंत रखना। सिर्फ अमेरिका नहीं, पूरी दुनिया की उम्मीदें ओबामा पर लगी हैं।</p>
<div class="simplePullQuoteRight">&#8216;सो हेल्प मी गॉड&#8217;! 20 जनवरी को यह शब्द कहने के साथ ही बराक ओबामा अमेरिका के 44वें राष्ट्रपति बन गए।<span></span></div>
<p><b>और अभूतपूर्व जनमत&#8230; :</b> ओबामा के पास सबसे बड़ी पूँजी है उनकी &#8216;<em>सर्वभौमिक लोकप्रियता</em>&#8216;। हमेशा से दुनिया अमेरिका की आर्थिक-सामरिक सत्ता और डॉलर के प्रभुत्व को मानती रही है, लेकिन अमेरिकी प्रशासन की दुनिया में लोकप्रियता कम ही रहती है। आज अमेरिका की आर्थिक-सामरिक सत्ता पर तो प्रश्नचिह्न है ही डॉलर की एकछत्र प्रभुता खतरे में है, लेकिन अमेरिका का भावी राष्ट्रपति पद ग्रहण के पहले ही दुनिया का चहेता और आशा का प्रति‍बिंब बन गया है।</p>
<p>सरल सम्मोहन में लिप्त उनका व्यक्तित्व, जैसे अपने आप उनकी ओर आकर्षित करता है। मानो इस व्यक्ति में &#8216;<em>कोई बात है</em>&#8216;, गोया इसकी बात पर भरोसा कर सकते हैं कि कल आज से अच्छा होगा। पूरी दुनिया में बुरी खबरों के बीच जैसे सिर्फ एक ही खुशखबरी है, जो आशा बनाए रख रही है- &#8216;<em>ओबामा</em>&#8216;! वह खुद भी जानते हैं कि उनके तरकश में उनकी यह &#8216;<em>ग्लोबल एक्सेप्टेशन</em>&#8216; उनका ब्रह्मास्त्र है- जिसकी मदद से उन्हें अमेरिका सहित पूरी दुनिया में समस्याओं से जूझना है। अमेरिका में किए गए एक विस्तृत जनमत सर्वेक्षण के अनुसार राष्ट्रपति ओबामा की लोक‍‍प्रियता 79% है। (बुश की रेटिंग सिर्फ 22% है) पिछले पाँच राष्ट्रपतियों में से किसी को भी कार्यकाल के प्रारंभ में ऐसी लोकप्रियता नहीं मिली। यही नहीं, अधिकांश अमेरिकी लोगों का मानना है कि ओबामा के कार्यकाल में परिस्थितियाँ आज से बेहतर होंगी, ओबामा कोई जादू नहीं कर सकते और अमेरिका के आर्थिक उबार में लगभग 2 वर्षों का समय लगेगा। कार्यकाल शुरू होने से पहले ही उनकी गिनती या चर्चा लिंकन, रूज़वेल्ट, कैनेडी जैसे प्रसिद्ध राष्ट्रपतियों के साथ होने लगी है।</p>
<p>ओबामा इस लोकप्रियता में छिपी उम्मीदों को पहचानते हैं, इसलिए वे बार-बार कह रहे हैं कि समस्याओं से निबटने में वक्त लगेगा, और पीड़ा अभी बाकी है। कार्यकाल शुरू होने के पहले ही ओबामा ने अपनी पूरी कैबिनेट तैयार कर ली है, शपथ लेते ही वे देश और दुनिया की समस्याओं का सामना करने को कटिबद्ध हैं और सामान्य नागरिक के रोजमर्रा की पीड़ा और अड़चनों से वह बखूबी जुड़े हुए हैं।</p>
<p><b>चमत्कार में </b><b>&#8216;</b><b>पग फेरा</b><b>&#8216; : </b>अपने यहाँ परिवारों में नए सदस्य के आगमन के साथ होने वाले शुभ को &#8216;<em>अच्छा पग फेरा</em>&#8216; कहते हैं। घटनाएँ तो विलग हैं, लेकिन मुझे ऐसा लगा जैसे 155 यात्रियों से भरे प्लेन का पानी में उतरने के बावजूद किसी का बाल भी बाँका नहीं होने का &#8216;<em>चमत्कार</em>&#8216; कहीं तो इस देश में आने वाले दिनों में मनने वाली खुशियों और उनके &#8216;<em>पग फेरे</em>&#8216; से जुड़ा है। गौर से देखें, यूएस एयरवेज के प्लेन के दोनों इंजन क्षतिग्रस्त होने से उसे आपात स्थिति में पानी पर उतारना पड़ा, लेकिन होनहार चालक की सूझबूझ और ऊपर वाले की कृपा से चमत्कार हो गया। यूएस के खचाखच भरे प्लेन के इंजन भी खराब हो गए हैं, आपात स्थिति है, हम सबको &#8216;<em>आशा और विश्वास</em>&#8216; है कि <em>&#8216;पायलट ओबामा&#8217;</em> जहाज और यात्रियों को अंतत: डूबने से बचा पाएँगे। &#8216;<em>सो हेल्प हिम गॉड!</em>&#8216;</p>
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		<title>ओबामा के शपथ ग्रहण समारोह की शुरुआत</title>
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		<pubDate>Sat, 17 Jan 2009 10:59:06 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[व्हाईट हाऊस]]></category>
		<category><![CDATA[44वें राष्ट्रपति]]></category>
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		<category><![CDATA[ओबामा शपथ ग्रहण समारोह]]></category>
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		<description><![CDATA[अमेरिका में बराक ओबामा के 44वें राष्ट्रपति बनने के अवसर पर आयोजित होने वाले शपथ ग्रहण समारोह के कार्यक्रम की शुरुआत शनिवार 17 जनवरी से हो जाएगी। इस समारोह के दौरान तकनीक का अधिकाधिक प्रयोग किया जाएगा और इसके दौरान जोर इस बात पर होगा कि यह आयोजन अधिक से अधिक लोगों के लिए खुला रहे। 1. ओबामा, बिडेन और उनके परिवार ‍फिलाडेल्‍फिया से वॉशिंगटन डीसी की यात्रा रेल से पूरी करेंगे। चमचमाती नीले रंग की पुरानी रेल कार इन [...]]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><img class="alignleft size-full wp-image-2873" alt="ओबामा के शपथ ग्रहण समारोह की शुरुआत" src="https://www.jmuchhal.com/wp-content/uploads/2009/01/JM_2_Obama_Inaugaration.jpg" width="311" height="307" /><span class="dropcap">अ</span>मेरिका में बराक ओबामा के 44वें राष्ट्रपति बनने के अवसर पर आयोजित होने वाले शपथ ग्रहण समारोह के कार्यक्रम की शुरुआत शनिवार 17 जनवरी से हो जाएगी। इस समारोह के दौरान तकनीक का अधिकाधिक प्रयोग किया जाएगा और इसके दौरान जोर इस बात पर होगा कि यह आयोजन अधिक से अधिक लोगों के लिए खुला रहे।</p>
<p><strong>1</strong>. ओबामा, बिडेन और उनके परिवार ‍फिलाडेल्‍फिया से वॉशिंगटन डीसी की यात्रा रेल से पूरी करेंगे। चमचमाती नीले रंग की पुरानी रेल कार इन लोगों को शनिवार को फिला‍डेल्फिया से वॉशिंगटन तक ले जाएगी जो इस बात का प्रतीक होगी कि यह उनके व्हाइट हाउस पहुँचने की यात्रा है। वर्ष 1861 में देश की राजधानी तक पहुँचने के लिए 16वें राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन को 12 दिनों की यात्रा करना पड़ी थी। यह यात्रा सोलहवें और 44वें राष्ट्रपति के बीच समानता को भी स्थापित करेगी।</p>
<p>निर्वाचित राष्ट्रपति बराक ओबामा और उनके परिवार के लोग एक निजी रेल कार &#8216;जॉर्जिया 300&#8242; में सवार होकर राजधानी पहुँचेंगे। पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज एचडब्ल्‍यू बुश और‍ बिल क्लिंटन भी इसकी सवारी कर चुके हैं, जबकि वर्ष 2004 में व्हाइट हाउस की अपनी दावेदारी के लिए सीनेटर जॉन केरी ने इसकी सवारी की थी।</p>
<p>ओबामा परिवार सहित शनिवार 17 जनवरी की सुबह फिला‍डेल्फिया की 30वीं स्ट्रीट से इस पर सवार होंगे और रास्ते में बिलमिंगटन, डेलवारे और बाल्टीमोर में रुकेंगे। बिलमिंगटन में ओबामा निर्वाचित उपराष्ट्रपति जोसेफ आर बिडेन और उनके परिवार को साथ लेंगे। इस रेल के 135 मील लंबे सफर के दौरान लोग रास्ते में मौजूद होंगे और भावी राष्ट्रपति का स्वागत करेंगे।</p>
<div class="simplePullQuoteRightGolden">निर्वाचित राष्ट्रपति बराक ओबामा और उनके परिवार के लोग एक निजी रेल कार &#8216;<em>जॉर्जिया 300</em>&#8216; में सवार होकर राजधानी पहुँचेंगे<span></span></div>
<p>ओबामा और बिडेन परिवारों के साथ राष्ट्रपति के शपथ ग्रहण समारोह समिति द्वारा चुने गए मेहमान भी होंगे जो विभिन्न कार्यक्रमों के दौरान राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के साथ होंगे। गाड़ी अंत में वॉशिंगटन के यूनियन स्टेशन पर रुकेगी, जहाँ ओबामा और बिडेन के शाम करीब सात बजे पहुँचने की संभावना है।</p>
<p><strong>2</strong>. रविवार 18 जनवरी को वॉशिंगटन डीसी में लिंकन मेमोरियल पर एक विशेष समारोह आयोजित किया गया है, जिसे एचबीओ ने आयोजित किया है। यह वक्ताओं और प्रसिद्ध लोगों के प्रदर्शन का कार्यक्रम होगा जो आम लोगों के लिए भी खुला होगा। इस अवसर पर टाइगर वुड्‍स, मार्टिन लूथर किंग तृतीय और हॉलीवुड की हस्तियाँ- जैक ब्लैक, टॉम हैंक्स, डेंजिल वॉशिंगटन, क्वीन लतीफा, स्टीव कैरेल, रोजारियो डॉसन और लॉरा लिनी मौजूद होंगे।</p>
<p>इस कार्यक्रम को एचबीओ केबल ऑपरेटरों के लिए नि:शुल्क प्रसारित करेगा, जिसके दौरान बेयोंस, शकीरा, यूटू, ब्रूस स्प्रिंगस्टीन, स्टीवी वॉन्डर, जोन बोन जोवी, गार्थ ब्रुक्स, रेनी फ्लेमिंग और जॉन लीजेंड अपने गायन की प्रस्तुति देंगे।</p>
<p><strong>3</strong>. सोमवार 19 जनवरी को अमेरिका में मार्टिन लूथर किंग दिवस मनाया जाता है और इस दिन सार्वजनिक अवकाश रहेगा।</p>
<p><strong>4</strong>. ओबामा का शपथ ग्रहण समारोह अब तक का सबसे खुला और सभी के लिए सहज उपलब्ध समारोह होगा। ऐसा अनुमान है कि इसमें 15 लाख से 30 लाख तक लोगों के भाग लेने की संभावना है, जिसको देखते हुए संघीय सरकार ने इसे एक राष्ट्रीय आयोजन घोषित कर दिया है। मौसम संबंधी सूचनाओं के मुताबिक आसमान में बादल छाए रहेंगे और तापमान मिड से लो 30 डिग्री फारेनहाइट तक रहने की संभावना है। लोगों की भारी भीड़ को देखते हुए लोगों से कहा गया है कि वे घर में ही रहें तो बेहतर होगा।</p>
<p><strong>5</strong>. मंगलवार 20 जनवरी को शपथ ग्रहण समारोह के कार्यक्रम इस प्रकार होंगे- सुबह प्रेयर सर्विस होगी और इसके बाद निर्वाचित राष्ट्रपति निवृत्तमान राष्ट्रपति से भेंट करने के लिए व्हाइट हाउस जाएँगे। इसके बाद दोनों शपथ ग्रहण समारोह के लिए साथ-साथ आएँगे।</p>
<p>साढ़े ग्यारह बजे सुबह अमेरिकी राजधानी के पश्चिमी हिस्से में निर्वाचित राष्ट्रपति और निर्वाचित उपराष्ट्रपति और उनके परिवार परम्परागत समारोहों और कार्यक्रमों में भाग लेंगे। इस अवसर पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित होंगे।</p>
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		<title>अमेरिकी चुनाव: विशेष झलकियाँ</title>
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		<pubDate>Wed, 05 Nov 2008 12:32:38 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[व्हाईट हाऊस]]></category>
		<category><![CDATA[अमेरिकी चुनाव]]></category>
		<category><![CDATA[अमेरिकी चुनाव झलकियाँ]]></category>
		<category><![CDATA[टाइम्स स्क्वेयर]]></category>
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		<category><![CDATA[बराक ओबामा]]></category>
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		<description><![CDATA[21 महीनों से चल रहे अमेरिका के सबसे लंबे, बड़े, महँगे और वृहद चुनाव अभियान का आज पटाक्षेप बराक ओबामा की जीत के साथ हो गया। अमेरिका के 44वें राष्ट्रपति पद के लिए हुए इस चुनाव में दोनों ही पार्टियों के उम्मीदवार ऐतिहासिक थे। अश्वेत बराक ओबामा और सबसे अधिक उम्र के जॉन मैक्केन तथा पहली महिला प्रत्याशी सारा पोलिन व मतदाताओं की नजर में देश की बिगड़ी हुई अर्थव्यवस्था इस वक्त का सबसे अहम मुद्दा रही। 60 प्रतिशत से [...]]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><img class="alignleft size-full wp-image-2117" alt="अमेरिकी चुनाव: विशेष झलकियाँ" src="https://www.jmuchhal.com/wp-content/uploads/2008/11/1321.jpg" width="311" height="307" /><span class="dropcap">21</span> महीनों से चल रहे अमेरिका के सबसे लंबे, बड़े, महँगे और वृहद चुनाव अभियान का आज पटाक्षेप बराक ओबामा की जीत के साथ हो गया। अमेरिका के 44वें राष्ट्रपति पद के लिए हुए इस चुनाव में दोनों ही पार्टियों के उम्मीदवार ऐतिहासिक थे। अश्वेत बराक ओबामा और सबसे अधिक उम्र के जॉन मैक्केन तथा पहली महिला प्रत्याशी सारा पोलिन व मतदाताओं की नजर में देश की बिगड़ी हुई अर्थव्यवस्था इस वक्त का सबसे अहम मुद्दा रही। 60 प्रतिशत से अधिक लोगों ने अर्थव्यवस्था को सबसे महत्वपूर्ण पहलू बताया। जॉर्ज बुश के मुद्दे, ईराक और आतंकवाद 10 प्रतिशत लोगों के लिए महत्वपूर्ण थे।</p>
<p><b>फीका हुआ गोरे-काले का भेद</b> : अमेरिका के ठेठ रहवासियों में अभी भी रंगभेद का गहरा प्रभाव है, लेकिन इस बार आर्थिक मुद्दे और बुश प्रशासन की बिगड़ी नीतियों ने गोरे-काले के भेद को भी फीका कर दिया। रोटी, कपड़ा और मकान के सामने और कोई मुद्दा नहीं टिकता। मतदान के दिन पूरे अमेरिका में मौसम सामान्य रहा, जिससे मतदाताओं को काफी आसानी रही।</p>
<div class="simplePullQuoteRightPerpal">बराक ओबामा ने दिन में थोड़ा समय अपने प्रिय खेल बास्केटबॉल खेलने में बिताया। पूरे चुनाव अभियान के दौरान ओबामा लगभग रोजाना थोड़ा समय बास्केटबॉल कोर्ट पर गुजारते थे<span></span></div>
<p><b>मतदान के लिए लगी लंबी लाइन :</b> अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव इतिहास में इतनी भारी तादाद में मतदान ऐतिहासिक है। कई स्थानों पर लोग मतदान के लिए एक घंटे से अधिक समय तक कतार में खड़े रहे। यहाँ पर प्रचलन है कि मतदान की समय सीमा तक जो भी व्यक्ति कतार में खड़े हैं, उन्हें मतदान का अवसर मिलता ही है।</p>
<p><b>चुनाव की पूर्व संध्या पर घर में गमी :</b> चुनाव में एक मार्मिक मोड़ कल रहा, जब ओबामा की 86 वर्षीय नानी मैडेलिन का ठीक चुनाव की पूर्व संध्या पर देहांत हो गया। ओबामा की नानी हवाई में रहती थीं और उनकी बिगड़ती तबीयत के चलते ओबामा 10 दिन पहले अपने चुनाव प्रचार के दौरान समय निकालकर उनसे मिलने हवाई गए थे। ओबामा ने बचपन का काफी समय अपने नाना-नानी के साथ गुज़ारा था। उनकी नानी इस ऐतिहासिक क्षण को तो नहीं देख पाईं, लेकिन डाक से भेजा गया उनका मतदान मान्य रहेगा। बराक ओबामा ने दिन में थोड़ा समय अपने प्रिय खेल बास्केटबॉल खेलने में बिताया। पूरे चुनाव अभियान के दौरान ओबामा लगभग रोजाना थोड़ा समय बास्केटबॉल कोर्ट पर गुजारते थे।</p>
<p><b>टाइम्स स्क्वेयर पर भारी भीड़ :</b> अमेरिका के कई राज्यों में निर्धारित तिथि से पहले वैधानिक रूप से मतदान शुरू हो जाता है। इस बार कई लोगों ने इस व्यवस्था का लाभ उठाया। स्थानीय समयानुसार शाम को जब नतीजों की घोषणा शुरू हो रही थी, तब टाइम्स स्क्वेयर पर भारी भीड़ जमा थी। चारों ओर बड़े टीवी परदों पर सभी प्रमुख टीवी चैनल्स के प्रसारण चल रहे थे, जैसे इंदौर में राजवाड़ा का माहौल हो।</p>
<p><b>डेमोक्रेटिक पार्टी सीनेट में बहुमत के कयास में :</b> राष्ट्रपति चुनाव के साथ अमेरिकी सीनेट के चुनाव भी महत्वपूर्ण हैं। डेमोक्रेटिक पार्टी सीनेट में बहुमत के कयास में है, जिससे व्हाइट हाउस और कांग्रेस दोनों पर उनकी सत्ता हो जाएगी।</p>
<p><b>&#8216;</b><b>वेस्ट विंग</b><b>&#8216; </b><b>के अंश हुए जीवंत :</b> कुछ वर्षों पूर्व अमेरिका के राष्ट्रपति पर आधारित एक चर्चित टीवी सीरियल &#8216;<em>वेस्ट विंग</em>&#8216; के आखिरी अंश मानो इस बार के चुनाव में जीवंत हो गए। वेस्ट विंग में डेमोक्रेटिक पार्टी के और रिपब्लिकन पार्टी के वरिष्ठ दिग्गज मैक्सिकन उम्मीदवार स्नेटर को हराकर राष्ट्रपति चुन लिया जाता है। अंत और भी रोचक है, जब नवनिर्वाचित राष्ट्रपति पार्टियों में सामंजस्य के लिए अपने चुनाव विरोधी को ही देश का विदेशमंत्री मनोनीत कर देता है। क्या ओबामा शासन में अनुभवी मैक्केन को कोई स्थान मिलेगा, वक्त ही बताएगा।</p>
<p><b>बुश- डिक ने बनाई दूरियाँ :</b> राष्ट्रपति बुश और डिक चैनी तो कई दिनों से टीवी और अखबारों से गायब ही हैं। न सिर्फ डेमोक्रेट वरन उनकी रिपब्लिकन पार्टी के ही मैक्केन भी उनसे दूरी बनाए रखना चाहते थे।</p>
<p><b>युवा समुदाय पर छोड़ी छाप :</b> ओबामा ने अपने चुनाव अभियान के लिए रिकॉर्ड 600 बिलियन डॉलर एकत्रित किए। खास बात यह है कि यह राशि उन्होंने चंद धनपतियों और कंपनियों के बजाय 30 लाख लोगों से छोटी-छोटी मात्रा में  जुटाई। ओबामा ने चुनाव अभियान में इंटरनेट का कारगर उपयोग करके युवा समुदाय में अपनी गहरी पहचान बना ली।</p>
<p><b>हनुमानजी ने बेड़ा पार लगाया :</b> ओबामा अपनी जेब में कुछ &#8216;टोटके&#8217; रखते हैं, जिनमें एक छोटे आकार की हनुमान की मू‍‍र्ति भी है। हनुमानजी के मंगलवार के दिन हुए चुनाव ओबामा के लिए सार्थक सिद्ध हुए।</p>
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		<title>बराक ओबामा के लिए आर्थिक एजेंडा</title>
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		<pubDate>Wed, 05 Nov 2008 10:54:00 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[व्हाईट हाऊस]]></category>
		<category><![CDATA[अमेरिका में वित्तीय संकट]]></category>
		<category><![CDATA[आर्थिक एजेंडा]]></category>
		<category><![CDATA[इंदिरा नूई]]></category>
		<category><![CDATA[ओबामा]]></category>
		<category><![CDATA[बराक ओबामा]]></category>

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		<description><![CDATA[सितम्बर की शुरुआत में जब अमेरिका में वित्तीय संकट के चलते एक के बाद एक बड़े बैंक धराशायी होते जा रहे थे तब जॉन मैक्केन ने घोषणा की थी कि वे चाहेंगे कि राष्ट्रपति पद के प्रचार के दौरान होने वाली पहली बहस को निलंबित कर दिया जाए और वॉशिंगटन डीसी लौट जाया जाए। तब उनके पास पूछने के लिए कोई स्पष्ट सवाल या संकट को सुलझाने के लिए कोई योजना नहीं थी। उस समय ओबामा के पास भी इस [...]]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><img class="alignleft size-full wp-image-1720" alt="बराक ओबामा के लिए आर्थिक एजेंडा" src="https://www.jmuchhal.com/wp-content/uploads/2008/11/132.jpg" width="311" height="307" /><span class="dropcap">सि</span>तम्बर की शुरुआत में जब अमेरिका में वित्तीय संकट के चलते एक के बाद एक बड़े बैंक धराशायी होते जा रहे थे तब जॉन मैक्केन ने घोषणा की थी कि वे चाहेंगे कि राष्ट्रपति पद के प्रचार के दौरान होने वाली पहली बहस को निलंबित कर दिया जाए और वॉशिंगटन डीसी लौट जाया जाए। तब उनके पास पूछने के लिए कोई स्पष्ट सवाल या संकट को सुलझाने के लिए कोई योजना नहीं थी। उस समय ओबामा के पास भी इस संकट से बाहर निकलने के लिए कोई स्पष्ट नीति नहीं थी लेकिन तब भी उन्होंने पूरी गंभीरता और धैर्य के साथ बहस में हिस्सा लिया था और पूरे देश पर अपनी छाप छोड़ी थी। इसके बाद ओबामा ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और आर्थिक मुद्‍दों पर उनके प्रचार की बढ़त लगातार बढ़ती रही। उस समय केवल चुनाव प्रचार था और कुछ भी नहीं लेकिन तब भी 60 फीसदी से अधिक मतदाता आर्थिक चुनौतियों और वित्तीय मंदी को देश के सामने सबसे बड़ी चुनौती मानते थे। उस समय भी न केवल अमेरिका वरन सारी दुनिया को ओबामा से उम्मीद थी कि वे वित्तीय व्यवस्था को सामान्य बनाकर लोगों में विश्वास बहाल करेंगे।</p>
<p><strong>वित्तीय क्षेत्र की दशा सुधारने का काम</strong></p>
<p>राष्ट्रपति पद के लिए चुने जाने के कुछेक दिनों बाद ही ओबामा को विश्व के 20 शीर्ष देशों की 20 नवंबर को राष्ट्रपति जॉर्ज बुश द्वारा बुलाई गई वित्तीय शिखर बैठक में भाग लेने का मौका मिलेगा। चूँकि इस समय वित्तीय क्षेत्र की दशा सुधारने का काम जोरों पर है ऐसे में अपने वित्त मंत्री की नियुक्ति संबंधी घोषणा उनकी पहली महत्वपूर्ण घोषणा हो सकती है। हालाँकि अपने प्रचार के दौरान वे वारेन बफे जैसी दिग्गज वित्तीय हस्तियों से सलाह लेते रहे हैं।</p>
<div class="simplePullQuoteRightGreen">भारतीयों ने पूरे दिलोदिमाग और सभी तरह से ओबामा के प्रचार में मदद की है और उन्होंने भी अमेरिका में भारतीयों के योगदान को बारम्बार स्वीकार‍ किया<span></span></div>
<p>अपनी नीतिगत घोषणाओं के जरिए ओबामा को निम्न और मध्यम वर्ग की अधिसंख्‍यक जनता के कर कम करने के प्रबल समर्थक के रूप में जाना जाता है। संपन्न तबके के लिए वे अधिक करों के पक्षधर रहे हैं लेकिन समय बताएगा कि वे आगे क्या करेंगे। इराक से फौजों की नियोजित लेकिन चरणबद्ध वापसी के हिमायती ओबामा इसे अंजाम देकर प्रत्येक महीने 10 अरब डॉलर से अधिक खर्च पर अंकुश लगा सकते हैं। अमेरिका के आवासीय क्षेत्र में वर्तमान संकट की जड़ें होने का कारण ओबामा समझते हैं कि अर्थव्यवस्था को फिर से पटरी पर लाने के लिए आवासीय क्षेत्र में विश्वास बहाल करना होगा। अब तक ओबामा ने यह दर्शाया है कि वे आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ नहीं हैं लेकिन वे समर्थ हैं कि ऐसे मामलों पर वे अपने पास ऐसे विशेषज्ञ लोगों को रख सकते हैं जो कि उन्हें बहुमूल्य सलाह दे सकते हैं।</p>
<p>वे बढ़ती हुई ऊर्जा स्वतंत्रता के पक्षधर रहे हैं और अमेरिका में वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों में निवेश को बढ़ा सकते हैं। यह भी उम्मीद की जाती है कि वे देश के बुनियादी ढाँचे में भी निवेश को बढ़ावा दे सकते हैं। इन सब बातों में समय लगेगा और यह सब रातोरात नहीं हो सकता है। पर चूँकि अब सीनेट में भी डेमोक्रेटिक पार्टी का बहुमत है, इसलिए उम्मीद की जाती है कि ओबामा इस अपूर्व अवसर और ऐतिहासिक जनादेश का उपयोग अमेरिका को आर्थिक शक्ति के रूप में स्थापित करने और संपन्नता को बढ़ाने में करेंगे। भारतीयों ने पूरे दिलोदिमाग और सभी तरह से ओबामा के प्रचार में मदद की है और उन्होंने भी अमेरिका में भारतीयों के योगदान को बारम्बार स्वीकार‍ किया और माना कि भारत अमेरिकी व्यावसायिक संबंधों में उनकी अहम भूमिका रही है। पेप्सिको की इंदिरा नूई उनकी करीबी कारोबारी सलाहकार रही हैं और वे खुद भी परमाणु करार के प्रबल समर्थक रहे हैं जिससे दोनों देशों को लाभ होगा। हालाँकि इसके साथ ही ओबामा अपने चुनाव प्रचार के दौरान करों में कमी के साथ अमेरिका में नौकरी के अवसर पैदा करने, कड़े कराधान कानूनों के जरिये आउटसोर्सिंग नौकरियों पर रोक लगाने की बात करते रहे हैं। इन पर कितना अमल होगा और किस हद तक तथा इससे भारतीय आउटसोर्सिंग उद्योग पर कितना असर पड़ेगा, यह तो भविष्य के गर्भ में है। पर हाल में भारत समेत सभी वैश्विक शेयर बाजारों द्वारा बेहतरी प्रदर्शित करने से स्पष्ट है कि नए प्रशासन और नई नीतियों का असर दिखने लगा है। यह भी उम्मीद की जाती है कि रिपब्लिकन प्रशासन में तेल-ऊर्जा लॉबी की मजबूत पकड़ कमजोर होगी और निकट भविष्य में हमें फिर एक बार तेल प्रति बैरल 150 डॉलर तक के स्तर पर देखने को नहीं मिलेगा।</p>
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		<title>अमेरिकी मीडिया ने बुश के भाषण को सराहा</title>
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		<pubDate>Thu, 31 Jan 2002 10:14:57 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[व्हाईट हाऊस]]></category>
		<category><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति]]></category>
		<category><![CDATA[आर्थिक मंदी]]></category>
		<category><![CDATA[जॉर्ज डब्ल्यू. बुश]]></category>
		<category><![CDATA[जॉर्ज डब्ल्यू. बुश भाषण]]></category>
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		<description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू. बुश के अमेरिकी कांग्रेस में दिए गए भाषण को अमेरिका के मीडिया जगत में भी सराहना मिली है। देश के प्रमुख अखबारों ने इस भाषण को राष्ट्रपति की भविष्य की नीतियों से भी जोड़ा है। अखबारों के अनुसार राष्ट्रपति का भाषण तीन प्रमुख मुद्दों पर केंद्रित रहा। ये हैं आतंकवाद के खिलाफ विश्वव्यापी संघर्ष, अमेरिका की पूर्ण सुरक्षा तथा आर्थिक मंदी से मुकाबला। बुश ने 11 सितंबर के बाद विश्व में आए बदलाव का प्रमुखता से [...]]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><img class="alignleft size-full wp-image-1532" alt="अमेरिकी मीडिया ने बुश के भाषण को सराहा " src="https://www.jmuchhal.com/wp-content/uploads/2002/01/42.jpg" width="311" height="307" /><span class="dropcap">अ</span>मेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू. बुश के अमेरिकी कांग्रेस में दिए गए भाषण को अमेरिका के मीडिया जगत में भी सराहना मिली है। देश के प्रमुख अखबारों ने इस भाषण को राष्ट्रपति की भविष्य की नीतियों से भी जोड़ा है।</p>
<p>अखबारों के अनुसार राष्ट्रपति का भाषण तीन प्रमुख मुद्दों पर केंद्रित रहा। ये हैं आतंकवाद के खिलाफ विश्वव्यापी संघर्ष, अमेरिका की पूर्ण सुरक्षा तथा आर्थिक मंदी से मुकाबला। बुश ने 11 सितंबर के बाद विश्व में आए बदलाव का प्रमुखता से जिक्र किया और कहा कि अमेरिका पर हमले के बाद पूरी दुनिया का सोच बदला है।</p>
<p>&#8216;<strong>वाशिंगटन पोस्ट</strong>&#8216; ने अपने संपादकीय में राष्ट्रपति के भाषण को युद्धकाल का भाषण निरूपित करते हुए लिखा है कि उनके बयानों से स्पष्ट होता है कि वे आतंकवाद के प्रति विश्वव्यापी संघर्ष छेड़ने के लिए कृत संकल्पित हैं, खासकर इराक, ईरान और उत्तरी कोरिया के खिलाफ जो आतंकवाद की धुरी बने हुए हैं। बुश ने कहा कि हम प्रायोजित आतंकवाद और हथियारों की अवैध खरीद-फरोख्त के जाल को भी नष्ट करना चाहते हैं।</p>
<div class="simplePullQuoteRightPerpal">आतंकवाद के अलावा घरेलू मोर्चे और आर्थिक मंदी के बारे में भी उन्होंने कई वादे किए, पर विश्वास नहीं होता कि वे यह सब कर पाएंगे<span></span></div>
<p>&#8216;<strong>द यूएसए टुडे</strong>&#8216; के अनुसार राष्ट्रपति इस संबोधन के दौरान संभवतः अपने राष्ट्रपतिकाल के सबसे आत्मविश्वासी दौर में रहे जबकि उपराष्ट्रपति चैनी उनके ठीक पीछे बैठे थे। आतंकवादी हमले के बाद बुश ने जिस कुशल नेतृत्व का परिचय दिया, यह भाषण उसी का एक नजारा भी रहा। आतंकवाद के अलावा घरेलू मोर्चे और आर्थिक मंदी के बारे में भी उन्होंने कई वादे किए, पर विश्वास नहीं होता कि वे यह सब कर पाएंगे।</p>
<div>
<p>&#8216;<strong>न्यूयॉर्क टाइम्स</strong>&#8216; ने भी अपने संपादकीय में बुश के संबोधन की सराहना करते हुए रक्षा खर्च पर टिप्पणी की है। अखबार ने लिखा है कि राष्ट्रपति ने दो दशकों के बाद रक्षा खर्च में बड़ी वृद्धि की है जो भविष्य में अच्छे नतीजों के साथ सामने आएगी। इस क्षेत्र में खर्च बढ़ाने पर राष्ट्रपति को बुद्धिमत्ता से काम लेना होगा, पर आर्थिक क्षेत्र के मामले में बुश ने निराश ही किया। इस भाषण की उल्लेखनीय बातों में पाकिस्तान के राष्ट्रपति मुशर्रफ की तारीफ करना और &#8216;<em>एनरॉन</em>&#8216; का कोई उल्लेख न करना है।</p>
</div>
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		<title>ऐसा रहा ओवल ऑफिस में जार्ज बुश का पहला साल</title>
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		<pubDate>Tue, 15 Jan 2002 10:12:52 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[व्हाईट हाऊस]]></category>
		<category><![CDATA[अर्थव्यवस्था]]></category>
		<category><![CDATA[कोंडेलिजा राइस]]></category>
		<category><![CDATA[क्लिंटन]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रपति जॉर्ज बुश]]></category>
		<category><![CDATA[व्हाइट हाउस]]></category>

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		<description><![CDATA[सुबह के अभी सात भी नहीं बजे हैं और व्हाइट हाउस के &#8216;वेस्ट विंग&#8216; में चहल-पहल पुरजोर है। राष्ट्रपति जॉर्ज बुश का अपने व्हाइट हाउस के रहवासी ओवल ऑफिस में आने का समय हो गया है। ठीक सात बजे तो श्री बुश के हर दिन के पहले बैठक। सीआईए के निदेशक जॉर्ज टेनेट द्वारा अमेरिका की सुरक्षा पर ब्रीफिंग, जिसमें श्री बुश के साथ श्री डिक चैनी और सुरक्षा सलाहकार सुश्री कोंडेलिजा राइस भी उपस्थित होती हैं। और फिर शुरू [...]]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><img class="alignleft size-full wp-image-1530" alt="ऐसा रहा ओवल ऑफिस में जार्ज बुश का पहला साल " src="https://www.jmuchhal.com/wp-content/uploads/2012/12/41.jpg" width="311" height="307" />सुबह के अभी सात भी नहीं बजे हैं और व्हाइट हाउस के &#8216;<em>वेस्ट विंग</em>&#8216; में चहल-पहल पुरजोर है। राष्ट्रपति जॉर्ज बुश का अपने व्हाइट हाउस के रहवासी ओवल ऑफिस में आने का समय हो गया है। ठीक सात बजे तो श्री बुश के हर दिन के पहले बैठक। सीआईए के निदेशक जॉर्ज टेनेट द्वारा अमेरिका की सुरक्षा पर ब्रीफिंग, जिसमें श्री बुश के साथ श्री डिक चैनी और सुरक्षा सलाहकार सुश्री कोंडेलिजा राइस भी उपस्थित होती हैं। और फिर शुरू हो जाता है प्रतिदिन का सिलसिला, जो सुबह पांच बजे से शुरू होकर रात में दस बजे थमता है।</p>
<p>अमेरिका के 43वें राष्ट्रपति के पद पर जॉर्ज बुश के कार्यकाल का ठीक एक साल अभी पूरा हुआ है। इस दौरान देश-विदेश में अपने चुनाव को सही स्थापित करते हुए श्री बुश को विरासत में एक अर्थव्यवस्था मिली, जो वर्षों की रफ्तार के बाद सुस्त हो गई थी। उनके नेपथ्य में उनके पिता और राष्ट्रपति का साया था, जिससे वे अपनी अलग पहचान बनाना चाहते थे। सन्‌ 2001 के अगस्त तक के कार्यकाल में अपना समय चटि्‌टयान और टैक्सास में अपने रेच पर गुजारने के लिए ज्यादा चर्चा में रहे श्री बुश के लिए 11 सितंबर का हादसा मानो एक सीमाचिह्न बनकर आ गया। उन्होंने अपने प्रशासन और देश को एकसूत्र में पिरो लिया और कमांडर-इन-चीफ बुश तो आज अमेरिका में 85 प्रतिशत से अधिक जनता में लोकप्रिय हैं।</p>
<p><b>क्या है बुश की कार्यशैली</b><b>, </b><b>उनके सहयोगी</b><b>, </b><b>उनकी दिनचर्या- पूर्व राष्ट्रपति क्लिंटन से उनकी तुलना</b><b>? </b></p>
<p>यह शायद मेरी टैक्सॉस की धरोहर है, पर मुझे स्पष्ट बताना, कहना और सुनना पसंद है। श्री बुश ने कहा है। उनके कुछ लफ्जों से तो उनकी पत्नी लारा भी हतप्रभ रह जाती हैं, लेकिन यही उनकी शैली है। ओसामा को ढूंढ निकालेंगे जिंदा या मुर्दा और कर नहीं बढ़ने देंगे, मेरे जीते जी नहीं। श्री बुश की यही स्पष्टवादिता उनकी परिचायक भी है। श्री बुश को पसंद है अपने सहयोग के लिए एकदम उम्दा साथियों का चुनाव, उन सबको अपने विचारों तथा स्ट्रेटजी से ठीक से वाकिफ कराकर फिर कार्य करने के लिए पूरी आजादी, कोई हस्तक्षेप नहीं और अपने साथियों को पूरा समर्थन। यहां तक कि अफगान आक्रमण में भी उन्होंने कहा- &#8216;<em>मेरा उद्देश्य तो हमारे अंतिम लक्ष्य से सबको अवगत कराना है, लड़ाई को लड़ना तो रम्सफील्ड और जनरल मेयर्स की भूमिका है।</em>&#8216;</p>
<div class="simplePullQuoteRightGolden">कई पिज्जा पार्टी होती थी। राष्ट्रीय सुरक्षा की रोजाना ब्रीफिंग भी क्लिंटन मीटिंग की बजाय फाइल से लेना पसंद करते थे<span></span></div>
<p>श्री बुश के जिक्र के साथ उनके पहले के राष्ट्रपति बिल क्लिंटन का विषय निकलना स्वाभाविक है। दोनों कई मायनों में तो पूरब-पश्चिम हैं और यह जीवनशैली से कार्यशैली तथा विचारधारा तक सही है। डेमोक्रेट श्री क्लिंटन का सबसे बड़ा ब्रह्मास्त्र था अपने व्यक्तित्व से एक प्रकार का जन-सम्मोहन और अपने संपर्क में आने वाले हर आम-खास पर गहरा प्रभाव। इसी के रहते उन्हें राजनीति और जीवन की सतरंगी बिसात में कई बार शह होने के बाद कभी मात का मुंह नहीं देखना पड़ा। लेकिन उनके वेस्ट विंग (व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति के प्रशासनिक कार्यालय वाला भाग ओवल ऑफिस भी इसी का अंग है) में दिन देर से शुरू होता था। वे खुद तो कई बार सुबह 10 बजे तक ऑफिस में आते थे। रात में देर तक उन्हें दोस्तों और सहयोगियों से फोन पर लंबी बात करना पसंद था। ओवल ऑफिस में मोनिका कांड हुआ। बिल व हिलेरी के संबंध में लिप्त &#8216;<em>स्वार्थ</em>&#8216; और बिल-हिलेरी-गोर की निजी राजनीतिक महत्वाकांक्षा की टकराहट। वेस्ट विंग में जींस और टी शर्ट भी चलते थे और उनकी मीटिंग कभी भी समय पर ना तो शुरू होती थी, ना खत्म। व्हाइट हाउस में पार्टी रात-रातभर चलती रहती थी। कई पिज्जा पार्टी होती थी। राष्ट्रीय सुरक्षा की रोजाना ब्रीफिंग भी क्लिंटन मीटिंग की बजाय फाइल से लेना पसंद करते थे। &#8230;लेकिन फिर भी क्लिंटन-राज में ग्रीनस्पीन-रुबिन के आर्थिक नेतृत्व के तले अमेरिका की अर्थव्यवस्था कुलांचे भर रही थी और टेक्नॉलॉजी के रथ पर बैठकर अमेरिका ने 1990 के दशक में गजब की प्रगति की। दूसरी तरफ श्री बुश के लिए ओवल ऑफिस अमेरिकी इतिहास की एक गौरवशाली धरोहर है। वेस्ट विंग में कभी भी कोई भी पुरुष सूट-टाई के बिना नहीं होता। मीटिंग सुई की नोक पर समय से शुरू होती है और समाप्त भी। दिन की शुरुआत सुबह बहुत जल्दी होती है और शाम 6.30 से 7 बजे तक वेस्ट विंग में रोशनियां बंद हो जाती हैं। श्री बुश खुद 5 बजे उठ जाते हैं और उनके घर में शाम के भोजन पर आए मेहमान भी 9 बजे तक विदा हो चुके होते हैं। वेस्ट विंग में अब कोई मिडनाइट पार्टियां नहीं होतीं। अपनी सेहत के लिए पूरी तरह सजग श्री बुश रोजाना मध्याह्न में एक घंटे 4 से 6 मील दौड़ते हैं और वर्जिश करते हैं। इससे उनकी नाड़ी की रफ्तार है सिर्फ 65।</p>
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		<title>अटलजी दे सकते हैं श्री बुश को कुछ भीष्म उपदेश</title>
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		<pubDate>Sat, 16 Dec 2000 10:07:00 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
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		<category><![CDATA[अटल बिहारी वाजपेयी]]></category>
		<category><![CDATA[अटलजी]]></category>
		<category><![CDATA[जॉर्ज बुश]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रपति श्री जॉर्ज बुश]]></category>

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		<description><![CDATA[और अब मेरे ही शब्दों में, वक्त आ गया है कि मुझे चलना चाहिए, धन्यवाद और शुभरात्रि। इन लफ्जों के साथ श्री अल गोर ने कल रात राष्ट्र के नाम संदेश में अपनी हार औपचारिक रूप से स्वीकार कर श्री जॉर्ज बुश को अमेरिका के 43वें राष्ट्रपति बनने की बधाई दी। यहां यह कहना पड़ेगा कि न सिर्फ अमेरिका की चुनाव प्रणाली, वरन यहां की पार्टी व्यवस्था में भी देश को आगे ले जाने की कला में भारतीय प्रधानमंत्री अटलजी [...]]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><img class="alignleft size-full wp-image-1528" alt="अटलजी दे सकते हैं श्री बुश को कुछ भीष्म उपदेश  " src="https://www.jmuchhal.com/wp-content/uploads/2000/12/40.jpg" width="311" height="307" /><span class="dropcap">औ</span>र अब मेरे ही शब्दों में, वक्त आ गया है कि मुझे चलना चाहिए, धन्यवाद और शुभरात्रि। इन लफ्जों के साथ श्री अल गोर ने कल रात राष्ट्र के नाम संदेश में अपनी हार औपचारिक रूप से स्वीकार कर श्री जॉर्ज बुश को अमेरिका के 43वें राष्ट्रपति बनने की बधाई दी। यहां यह कहना पड़ेगा कि न सिर्फ अमेरिका की चुनाव प्रणाली, वरन यहां की पार्टी व्यवस्था में भी देश को आगे ले जाने की कला में भारतीय प्रधानमंत्री अटलजी श्री बुश को जरूर कुछ भीष्म उपदेश दे सकते हैं।</p>
<p><strong>&#8220;श्री बुश को यह ताज बड़े बोझ के साथ मिला है&#8221;</strong> ये ही शब्द श्री गोर ने ठीक आठ साल पहले पूर्व राष्ट्रपति श्री जॉर्ज बुश के लिए कहे थे कि अब समय आ गया है और उन्हें चले जाना चाहिए। विडंबना और कीर्तिमानों की फेहरिस्त तो इस राष्ट्रपति चुनाव में बहुत लंबी है।<br />
<strong>(1)</strong> 271 वोट पाकर सिर्फ एक वोट से निर्वाचक मंडल में जीतकर राष्ट्रपति बनने वाले श्री जॉर्ज बुश पहले व्यक्ति हैं।<br />
<strong>(2)</strong> इतिहास में चौथी और इस शताब्दी में पहली बार बगैर जनमत हासिल किए भी 54 वर्षीय श्री जॉर्ज बुश राष्ट्रपति बन रहे हैं।<br />
<strong>(3)</strong> 1824 में जॉन क्विंसी एडम्स की तरह वे अमेरिकी इतिहास में दूसरे पुत्र हैं, जो पिता के बाद राष्ट्रपति बन रहे हैं। जॉन क्विंसी एडम्स भी जनमत हारकर जीते थे।<br />
<strong>(4)</strong> श्री गोर की तरह उन्होंने भी टेनिसी के नागरिक को ही हराया था।<br />
<strong>(5)</strong> शताब्दी में पहली बार कैलिफोर्निया के चुनाव हारकर भी कोई राष्ट्रपति बना है।<br />
<strong>(6)</strong> सुप्रीम कोर्ट के फैसले से राष्ट्रपति बनने वाले भी श्री जॉर्ज बुश 1876 के बाद पहले राष्ट्रपति हैं।</p>
<p>परसों रात को 10 बजे सुप्रीम कोर्ट के 5-4 वोट से फ्लोरिडा में पुनर्गणना रोकने के बाद यह तय था कि पिछले 36 दिनों की चुनावी रामायण का उत्तरकांड आ गया है। अमेरिकावासी भी कुछ-कुछ ऊब से गए थे, इस कभी न खत्म होने वाले मैच से। यह वह देश है जहां कुछ घंटे से ज्यादा तो कोई खेल स्पर्धा भी नहीं चलती। रात 9 बजे, आठ मिनट के अपने संदेश में श्री अल गोर ने ये स्पष्ट कहा कि वे सुप्रीम कोर्ट के फैसले से सहमत नहीं हैं, पर उसका सम्मान और आदर करेंगे और श्री जॉर्ज बुश के राष्ट्रपति काल में उन्हें पूर्ण सहयोग देंगे। इसके बाद वे क्या करेंगे, उन्होंने नहीं सोचा, अपने गृह राज्य टेनिसी जाकर पुराने रिश्तों को ठीक-ठाक करेंगे। ज्ञात रहे कि श्री अल गोर अपने गृहराज्य में भी जीते नहीं। सबसे पहले उन्होंने श्री बुश को बधाई संदेश का फोन किया और यह भी कहा कि मैं आज आपको दोबारा फोन करके बधाई वापस नहीं लूंगा। सोचिए श्री गोर क्या महसूस कर रहे होंगे जब वे 17 महीनों से दिन-रात के इतने प्रचार के बाद और सिर्फ निर्वाचक मंडल में एक मत से सुप्रीम कोर्ट के फैसले से चुनाव हार गए। 24 वर्षों से लोकसेवा में रहे श्री गोर, जिस कुर्सी के आठ साल बहुत करीब रहे, परंतु वह उनके हाथ से दूर चली गई, तब उन्हें कैसा लगा होगा। हालांकि उन्होंने यह पन्ना खुला छोड़ दिया है कि वे फिर से चुनाव लड़ेंगे या नहीं।</p>
<div class="simplePullQuoteRight">श्री बुश के नेतृत्व की परीक्षा रहेगी कि वे सारे देश को कैसे साथ लेकर चलते हैं। भारत के प्रति श्री बुश का रुख भी मैत्रीपूर्ण ही होना चाहिए<span></span></div>
<p>श्री बुश को यह ताज बड़े बोझ के साथ मिला है। सीनेट में बिलकुल 50-50 सदस्यों की बराबरी है और वीटो का वोट हमेशा उपराष्ट्रपति डिक चैनी को डालना पड़ेगा। आठ सालों से बढ़ती आर्थिक व्यवस्था और पूंजी बाजार भी कुछ थमते नजर आ रहे हैं। श्री गोर के भाषण के ठीक एक घंटे बाद अपने उद्‌बोधन में श्री बुश ने देश से यह वादा किया कि वे पार्टियों से ऊपर उठकर देश के हित में काम करेंगे। श्री बुश के साथ सकारात्मक पक्ष यह भी है कि उनके अधिकांश मंत्रिमंडलीय सदस्य उन्हें धरोहर में मिले हैं। सर्वश्री डिक चैनी, एन्ड्रयू कॉर्ड, जनरल कॉलिन पॉवेल (<strong>जिन्हें विदेश मंत्री बनाने की प्रबल संभावनाएं हैं</strong>) आदि सभी उनके पिता के साथ थे। ये सब अनुभवी हैं, लेकिन शीतयुद्ध से लेकर आज का विश्व और अमेरिका की राजनीति काफी अलग है।</p>
<p><strong>अमेरिकी क्या सोचते हैं श्री बुश के बारे में-और वह भी ऐसी स्थितियों में चुने जाने पर-</strong></p>
<p>काफी मिश्रित प्रतिक्रिया है। कुछ का मानना है कि ये ठीक हुआ, कुछ कहते हैं, बड़ा बुरा हुआ। निष्कर्ष में यह कि अब श्री बुश के नेतृत्व की परीक्षा रहेगी कि वे सारे देश को कैसे साथ लेकर चलते हैं। भारत के प्रति श्री बुश का रुख भी मैत्रीपूर्ण ही होना चाहिए। अंत में अवलोकन करते हुए यह लगता है कि श्री गोर ने अपने पार्टी के ब्रह्मास्त्र यानी श्री क्लिंटन का चुनाव प्रचार में उपयोग न करने की शायद कीमत चुकाई है। श्री क्लिंटन के व्यक्तिगत चरित्र के बाद भी श्रीमती क्लिंटन ने उनसे प्रचार कराया और जीती भीं। क्या श्रीमती हिलेरी तेज थीं और श्री गोर अति आदर्शवान और भावुक। ऐसा जवाब तो अब तारीख ही देगी। तो करिए इंतजार 20 जनवरी की सुबह का, जब श्री बुश का राज्याभिषेक होगा।</p>
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		<title>चौराहे पर खड़ी चुनाव प्रणाली</title>
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		<pubDate>Fri, 15 Dec 2000 13:31:39 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव]]></category>
		<category><![CDATA[इलेक्टोरल वोट]]></category>
		<category><![CDATA[कैलाश विजयवर्गीय]]></category>
		<category><![CDATA[चुनाव प्रणाली]]></category>
		<category><![CDATA[चुनाव व्यवस्था]]></category>

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		<description><![CDATA[अभी कुछ ही दिनों पहले इंदौर के महापौर कैलाश विजयवर्गीय न्यूयॉर्क आए थे। हम उन्हें यहां की आधुनिक सड़क, यातायात, बिजली, सब-वे, सफाई आदि व्यवस्था बता रहे थे कि कैलाश बोल पड़े, इतनी अच्छी व्यवस्थाओं के बीच यहां की चुनाव व्यवस्था इतनी गड़बड़ क्यों है? हिन्दुस्तान में तो लाखों वोट हाथ से 24-36 घंटे में गिन लिए जाते हैं, बगैर सोने, खाने, पीने के लिए रुके। इस बार के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव ने वाकई यह सवाल अनुत्तरित छोड़ दिया है [...]]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><a href="https://www.jmuchhal.com/chourahe-par-khadi-chunav-pranali/florida_elections" rel="attachment wp-att-3714"><img src="https://www.jmuchhal.com/wp-content/uploads/2000/12/Florida_Elections.jpg" alt="चौराहे पर खड़ी चुनाव प्रणाली" width="311" height="307" class="alignleft size-full wp-image-3714" /></a><span class="dropcap">अ</span>भी कुछ ही दिनों पहले इंदौर के महापौर कैलाश विजयवर्गीय न्यूयॉर्क आए थे। हम उन्हें यहां की आधुनिक सड़क, यातायात, बिजली, सब-वे, सफाई आदि व्यवस्था बता रहे थे कि कैलाश बोल पड़े, इतनी अच्छी व्यवस्थाओं के बीच यहां की चुनाव व्यवस्था इतनी गड़बड़ क्यों है? हिन्दुस्तान में तो लाखों वोट हाथ से 24-36 घंटे में गिन लिए जाते हैं, बगैर सोने, खाने, पीने के लिए रुके। इस बार के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव ने वाकई यह सवाल अनुत्तरित छोड़ दिया है कि व्यवस्था के पर्याय देश में इतनी कमजोर व्यवस्था? यहां की राष्ट्रपति चुनाव प्रणाली के मूल में है कि एक राज्य के विजेता को उस राज्य में बहुमत प्राप्त कर लेने पर राज्य के सभी इलेक्टोरल कॉलेज वोट प्राप्त माने जाएंगे। ऐसा इसलिए कि इस विशाल देश की लगभग 75 प्रतिशत आबादी पूर्व और पश्चिम के 15 राज्यों में है, इसलिए उम्मीदवार सारे देश की ओर ध्यान दे।</p>
<p>200 वर्ष पूर्व ये प्रणाली बनाई गई, जिसके तहत आबादी में कम राज्यों को अधिक इलेक्टोरल वोट दिए। उदाहरण के तौर पर न्यूयॉर्क राज्य में अगर एक करोड़ मतदाता पर 32 वोट हैं (यानी लगभग तीन लाख मतदाता पर एक इलेक्टोरल कॉलेज सीट), तो किसी छोटे राज्य में शायद एक लाख मतदाता पर ही एक इलेक्टोरल कॉलेज वोट हो सकता है। और इस बार के चुनाव में भी यही हुआ। बुश ने जीते 38 राज्य, गोर ने सिर्फ एक दर्जन और इलेक्टोरल वोट, दोनों के लगभग बराबर।</p>
<div class="simplePullQuoteRightPerpal">इस बार के चुनाव में भी यही हुआ। बुश ने जीते 38 राज्य, गोर ने सिर्फ एक दर्जन और इलेक्टोरल वोट, दोनों के लगभग बराबर<span></span></div>
<p>इतिहास में इस चुनाव को मिलाकर चार बार इलेक्टोरल वोट से राष्ट्रपति तो कोई और बना और जनमत के वोट अधिक मिले किसी और को, क्या ये सही है? ये तो रही एक समस्या। दूसरी समस्या है वोट डालने की प्रणाली और वोटों की गिनती की, इसमें कोई मानक नहीं। हर काउंटी ने अपनी इच्छा से मत पत्र छपवाए और भिन्न-भिन्न प्रकार से वोटिंग हुई, ये बड़ा आश्चर्यजनक लगा और यहां कोई निष्पक्ष चीफ इलेक्शन कमिश्नर जैसा विभाग भी नजर नहीं आया जो इस सारी प्रक्रिया का निर्णायक हो, तभी तो बात सीधे अदालतों में पहुंच गई। सिस्टम तो पहले से यही चला आ रहा है, इस बार मुकाबला बिलकुल सूई की नोक के बराबर था तो हर खामी उभरकर आ गई। अमेरिका को जैसा मैं समझ पाया हूं, यहां पर अगर किसी प्रणाली में त्रुटि नजर आ जाए, तो यहां के लोग उसका पूरा तोड़ निकाल लेंगे, बशर्ते उनका ध्यान उस ओर जाए। पिछले 36 दिनों में देश की इतनी बदनामी हुई है कि अमेरिकावासी उसका हल जरूर निकालेंगे, पर कांग्रेस में चुनाव प्रणाली में परिवर्तन का बिल पास कराना मुश्किल ही रहेगा।</p>
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		<title>आठ साल की उपलब्धियों का अंबार</title>
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		<pubDate>Fri, 24 Nov 2000 10:01:53 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[व्हाईट हाऊस]]></category>
		<category><![CDATA[अमेरिका राष्ट्रपति]]></category>
		<category><![CDATA[बिल क्लिंटन]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रपति चुनाव]]></category>
		<category><![CDATA[हिलेरी क्लिंटन]]></category>

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		<description><![CDATA[अमेरिका के 43वें राष्ट्रपति का नाम अभी भी उतना ही गुमनाम है, जैसा शायद दिनों, हफ्तों या महीनों पहले था। लेकिन, 42वें राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के कार्यकाल की अंतिम सुबह 20 जनवरी बहुत नजदीक है। उनकी पत्नी हिलेरी सीनेट में चुनी जा चुकी हैं और शायद यह हिलेरी के व्यक्तिगत राजनीतिक जीवन की सिर्फ पहली पायदान है, चरम नहीं। इस पूरे राष्ट्रपति चुनाव में बिल क्लिंटन का साया दोनों उम्मीदवारों के कद से इतना बड़ा था कि अमेरिका में तीसरी [...]]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><img src="https://www.jmuchhal.com/wp-content/uploads/2000/11/jm_l_BillC_eSQ.jpg" alt="आठ साल की उपलब्धियों का अंबार" width="311" height="307" class="alignleft size-full wp-image-3091" /><span class="dropcap">अ</span>मेरिका के 43वें राष्ट्रपति का नाम अभी भी उतना ही गुमनाम है, जैसा शायद दिनों, हफ्तों या महीनों पहले था। लेकिन, 42वें राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के कार्यकाल की अंतिम सुबह 20 जनवरी बहुत नजदीक है। उनकी पत्नी हिलेरी सीनेट में चुनी जा चुकी हैं और शायद यह हिलेरी के व्यक्तिगत राजनीतिक जीवन की सिर्फ पहली पायदान है, चरम नहीं। इस पूरे राष्ट्रपति चुनाव में बिल क्लिंटन का साया दोनों उम्मीदवारों के कद से इतना बड़ा था कि अमेरिका में तीसरी बार राष्ट्रपति न बन सकने के कानून पर नागरिक कई बार दुःखी हो रहे थे।</p>
<p>गोर और बुश एक-दूसरे से नहीं, वरन क्लिंटन के कद से लड़ रहे थे। आखिर क्या गजब शख्सियत हैं बिल क्लिंटन, जिनके करिश्मे और जादुई व्यक्तित्व से कोई नहीं बच पाया। चाहे वह वियतनाम में रहने वाली एक अधेड़ महिला हो या नायला गांव की गृहिणियां, अफ्रीका के आदिवासी या चीन के उद्योगपति और या फिर हो मोनिका लुइंस्की। और कार्यकाल भी कितना प्रभावशाली- 100 सालों में सर्वाधिक रोजगार, सर्वाधिक आर्थिक प्रगति, घाटे के बजट की धरोहर से सर्वाधिक सरप्लस, उपलब्धियों की फेहरिस्त इतनी लंबी है कि कितनी छवि छोड़ जाएंगे बिल। महाभियोग आरोप के आक्रामक सवालों को निहत्था झेलता विश्व का सबसे शक्तिशाली व्यक्ति, हिलेरी क्लिंटन की जीत में पूर्णतः शरीक होकर भी कुछ-कुछ विलग से उनके पति, अमेरिका की सामान्य जनता के दिलों का सरताज नेता, दुनिया में फैले आपसी मनमुटाव को मिटाने में जूझता एक राजनयिक, पलों की मुलाकात में लोगों के साथ मानो सदियों पुराने संबंध स्थापित कर पाने की क्लिंटन की योग्यता बेजोड़ है।</p>
<p>भीड़ में भी हर एक को यही लगता है कि क्लिंटन उन्हीं से बात कर रहे हैं। क्लिंटन ने पिछले दिनों चुनावों के पहले जीवन शैली पत्रिका &#8216;<em>एस्क्वायर</em>&#8216; के मिखाइल पतेरनीति के साथ लंबी अंतरंग बातचीत की और उसी के मुख्य सारांश <em>&#8216;एस्क्वायर&#8217;</em> से साभार। यह जानकारी आपको करीब लाएगी 20वीं शताब्दी के पार अपनी सुर्ख छाप छोड़ने वाले व्यक्ति के-</p>
<div class="simplePullQuoteRightPerpal">क्लिंटन का कार्यकाल अमेरिका की आर्थिक प्रगति के स्वर्णिम युग के रुप में याद किया जाएगा<span></span></div>
<p><b>सवाल : राष्ट्रपति पद ने आपको कितना बदला</b><b>? </b></p>
<p><em>क्लिंटन</em> : मैं सोचता हूं कि राष्ट्रपति पद के कार्यकाल ने मुझे बहुत कुछ बदला है। इस दौरान मैं ज्यादा काबिल बना हूं, मुझमें ज्यादा समझदारी आई है। मैं जब राष्ट्रपति कार्यालय में आया था तब मुझमें जो योग्यताएं थीं, उसके मुकाबले आज जब मैं इस कार्यालय से विदा हो रहा हूं, स्वयं को ज्यादा परिपक्व महसूस कर रहा हूं। सिर्फ राजनीतिक तौर पर ही नहीं, व्यक्तिगत रूप से भी मुझमें परिपक्वता आई है। मैं अपनी गलतियों को समझ सकता हूं और अनुभवी के तौर पर काम कर सकता हूं।</p>
<p><b>सवाल : आपने अपने कार्यकाल में क्या नया दिया है</b><b>? </b></p>
<p><em>क्लिंटन</em> : सबसे ज्यादा जरूरी तो यह है कि आपके पूर्ववर्तियों ने इस पद को क्या नया दिया है। अब आप चुनाव प्रचार को ही देखें तो अल गोर तथा जॉर्ज बुश दोनों प्रचार में लगे रहे, पर मैं एक सामान्य अमेरिकी की तरह ही इससे जुड़ा। सरकार का कामकाज सफलता से चलाना ही राष्ट्रपति की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है और इसे मैंने ठीक से निभाया। विश्व अर्थव्यवस्था में निजी संस्थानों की भागीदारी और देश में औद्योगिक युग का प्रवेश मेरे कार्यकाल में ही हुआ, नए रोजगारों का सृजन, जनता की आवाज की सुनवाई और सबसे महत्वपूर्ण यह रहा कि विश्व में अमेरिकी अर्थव्यवस्था को महसूस किया गया और अमेरिकियों ने निजी जीवन में भी इसे स्वीकारा है।</p>
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		<title>सवालों के अंबार पर बैठी अमेरिकी निर्वाचन प्रणाली</title>
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		<pubDate>Fri, 10 Nov 2000 09:53:52 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[व्हाईट हाऊस]]></category>
		<category><![CDATA[अमेरिकी निर्वाचन प्रणाली]]></category>
		<category><![CDATA[जॉर्ज बुश]]></category>
		<category><![CDATA[प्रेसिडेंट]]></category>
		<category><![CDATA[वाइस प्रेसिडेंट गोर]]></category>
		<category><![CDATA[विश्व इतिहास]]></category>

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		<description><![CDATA[गवर्नर बुश, पिछले 45 मिनट में घटनाक्रम काफी बदल गया है और फ्लोरिडा में स्वतः ही पुनर्गणना होने वाली है, इसलिए मैं आपको दी हुई बधाई वापस लेता हूं।&#8217; &#8216;वाइस प्रेसिडेंट महोदय, तो क्या आप मुझे कहना चाहते हैं कि आप अपनी पराजय की स्वीकृति वापस लेना चाहते हैं।&#8216; &#8216;गवर्नर, आप इस पर इतना बौखलाइए मत। बड़े अजीब हालात हो रहे हैं।&#8217; &#8216;पर फ्लोरिडा के गवर्नर तो मेरे भाई जैब बुश हैं और उन्होंने मुझे अभी बताया है कि फ्लोरिडा [...]]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><img class="alignleft size-full wp-image-1522" alt="सवालों के अंबार पर बैठी अमेरिकी निर्वाचन प्रणाली  " src="https://www.jmuchhal.com/wp-content/uploads/2002/07/37.jpg" width="311" height="307" /><span class="dropcap">ग</span>वर्नर बुश, पिछले 45 मिनट में घटनाक्रम काफी बदल गया है और फ्लोरिडा में स्वतः ही पुनर्गणना होने वाली है, इसलिए मैं आपको दी हुई बधाई वापस लेता हूं।&#8217;</p>
<ul>
<li>&#8216;वाइस प्रेसिडेंट महोदय, तो क्या आप मुझे कहना चाहते हैं कि आप अपनी पराजय की स्वीकृति वापस लेना चाहते हैं।<strong>&#8216;</strong></li>
<li>&#8216;गवर्नर, आप इस पर इतना बौखलाइए मत। बड़े अजीब हालात हो रहे हैं।&#8217;</li>
<li>&#8216;पर फ्लोरिडा के गवर्नर तो मेरे भाई जैब बुश हैं और उन्होंने मुझे अभी बताया है कि फ्लोरिडा में हम विजयी हुए हैं।&#8217;</li>
<li>&#8216;गवर्नर साहब, आपके छोटे भाई फ्लोरिडा के चुनाव के अंतिम निर्णायक नहीं हैं, धन्यवाद और शुभरात्रि।&#8217;</li>
</ul>
<p>यह किसी फिल्म के सनसनीखेज संवाद नहीं वरन वह फोन वार्तालाप है जो अब विश्व इतिहास में दर्ज हो गया है। यह फोन वार्तालाप था वाइस प्रेसिडेंट गोर और गवर्नर बुश के बीच, कल रात लगभग ढाई बजे का जब गोर ने बुश को सिर्फ चंद मिनटों पहले स्वयं ही ने दी विजय की औपचारिक बधाई वापस ले ली। अमेरिका इस वक्त उन सवालों के अंबार पर बैठा है, जिसके बारे में शायद इन्होंने कभी सोचा ही नहीं था। सारा विश्व देख रहा है अचंभे से, आश्चर्य से कि दुनिया का सर्वाधिक शक्तिशाली और साधन संपन्न राष्ट्र अपने चुनाव भी ठीक से नहीं करवा सकता।</p>
<p>फ्लोरिडा में तो गुत्थियां ही गुत्थियां हैं। वेस्ट पाम बीच क्षेत्र में कई मतदाताओं का आरोप है कि बेलेट पत्र कुछ ऐसे गलत छपे थे कि वे वोट डालना चाहते थे गोर को, लेकिन वोट डल गया निर्दलीय उम्मीदवार बुकनेन को। तीन मतदाताओं ने तो कोर्ट में याचिका भी दाखिल कर दी है।</p>
<div class="simplePullQuoteRight">अमेरिका इस वक्त उन सवालों के अंबार पर बैठा है, जिसके बारे में शायद इन्होंने कभी सोचा ही नहीं था<span></span></div>
<p>बुश यदि फ्लोरिडा को थोड़े-बहुत अंतर से जीत भी जाते हैं तो उनकी विजय का आधार जनमत का बहुमत न होकर इलेक्टोरल में विजय रहेगी। तो क्या वे देश और विदेश का विश्वास जीत पाएंगे? अल गोर ने इस बात पर अपनी स्पष्ट राय देते हुए कहा कि वे संविधान द्वारा स्थापित इलेक्टोरल को ही मान्यता देंगे और उसका आदर करेंगे।</p>
<p><strong>सवाल अभी भी बाकी हैं&#8230;</strong></p>
<p>अभी डाक से आए मतपत्रों के सवाल भी बाकी हैं और फ्लोरिडा के गवर्नर और जॉर्ज बुश के छोटे भाई जैब बुश ने नैतिकता के आधार पर अपने आपको फ्लोरिडा की पुनर्गणना से अलग कर लिया है। वहीं दूसरी ओर सारे मीडिया जगत में बखेड़ा है कि एक रात में चंद घंटों के फैसले में एक नहीं दो बार गलत घोषणा और वो भी हर बड़े नेटवर्क द्वारा। पहले गोर के फ्लोरिडा जीतने की ओर फिर बुश के फ्लोरिडा और चुनाव जीतने की जबकि सवाल अभी भी बाकी हैं।</p>
<p>कई बड़े अखबारों के हेडलाइन पर बुश के विजयी होने के समाचार छप चुके थे और अखबार बंट भी गए। नेटवर्क्स की वेबसाइट्‌स पर रात ढाई बजे से लगभग आधे घंटे तक &#8216;बुश अमेरिका के 43वें राष्ट्रपति&#8217; सुर्खियां चलती रहीं। आखिर यहां कॉम्पीटिशन इतनी ज्यादा है कि ऐसे मौके पर होड़ में गलती की संभावना हो जाती है। सारे मीडिया में गहन आत्मावलोकन शुरू हो गया है और अब तो सवाल ये भी उठ रहा है कि अगर बुश जीते, लेकिन जनमत गोर के पास है तो क्या इलेक्टोरल प्रथा पर ही प्रश्नचिह्न नहीं लग जाता? और ये उस देश में जहां असंख्य परमाणु अस्त्र इंसान के एक छोटे से निर्णय से और अंगुली दबाते ही पृथ्वी नष्ट कर सकते है, वहां इतनी ढील-पोल?</p>
<p>भारत में चुनावों को लेकर इतना असंमजस कभी नहीं होता, जबकि वहां इससे कहीं ज्यादा पिछड़े मसले उभरते हैं। वहां राष्ट्रपति और गवर्नर के पास पालकीवाला, सोराबजी जैसे कई संविधान के पंडित सलाह देने के लिए होते हैं, लेकिन यहां तो कोई संविधानविद्‌ नजर नहीं आ रहा, यहां तक कि फ्लोरिडा की पुनर्गणना में अपने कानून पर्यवेक्षक के रूप में दोनों पक्षों ने भूतपूर्व सेक्रेटरी ऑफ स्टेट वारेन क्रिस्टोफर (डेमोक्रेट) और जेम्स बाकर (रिपब्लिकन) को भेजा है क्योंकि और तो कोई है ही नहीं। समस्या का मूल यह है कि यह देश जब किसी घटना के बारे में विचारता है तब उसके आगे- पीछे, संभव-असंभव सब सोच लेता है, लेकिन चुनाव प्रक्रिया में ऐसा घटनाक्रम तो इन्होंने कभी सोचा भी नहीं होगा। इसलिए उसकी तैयारी भी नहीं है। और मजा देखिए। कल शाम 6 बजे गिनती रोक दी गई कि सुबह 9 बजे फिर चालू करेंगे। एक ओर तो उम्मीदवार बिना खाए, सोए महीनों तक प्रचार करते रहे और अब गणना के बीच में विश्राम, बड़ा अजीब लगता है यह सब। नतीजा चाहे जो कुछ भी रहे। दोनों पक्ष काफी संतुलन भरे वक्तव्य दे रहे हैं। पर ये चुनाव जवाबों के बजाय सवाल अधिक छोड़ जाएगा।</p>
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