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	<title>Jitendra Muchhal &#124; Jitendra Muchhal Website &#124; J Muchhal &#124; जीतेंद्र मुछाल&#187; अमिताभ बच्चन</title>
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		<title>किंग&#8217; हो कोई, &#8216;शहँशाह&#8217; वही</title>
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		<pubDate>Fri, 15 Aug 2008 12:22:01 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[बॉलीवुड]]></category>
		<category><![CDATA[अमिताभ बच्चन]]></category>
		<category><![CDATA[ऐश्वर्या बच्चन]]></category>
		<category><![CDATA[प्रीति जिंटा]]></category>
		<category><![CDATA[विशाल शेखर]]></category>
		<category><![CDATA[शहँशाह]]></category>

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		<description><![CDATA[बॉलीवुड के कलाकारों के &#8216;स्टेज कार्यक्रम&#8216; अमेरिका में सदा ही चर्चित रहे हैं। सुनहरे पर्दे के बाहर स्टेज पर अपने चहेते &#8216;स्टार्स&#8216; को नाचते-गाते देखने के लिए लोग हमेशा लालायित रहते हैं। और इन कलाकारों, आयोजकों को अच्छी कमाई भी हो जाती है। ऐसे में बॉलीवुड के प्रथम परिवार- अमिताभ, अभिषेक, ऐश्वर्या बच्चन और अन्य कलाकारों के स्टेज प्रोग्राम &#8216;अनफॉरगेटेबल टूर&#8217; के अभी तक सभी सोपान अविस्मरणीय रहे हैं। 15 अगस्त को न्यूयॉर्क में हुए कार्यक्रम को तो खुद अमिताभ [...]]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><img src="https://www.jmuchhal.com/wp-content/uploads/2008/08/JM_4_Unforgettable.jpg" alt="किंग' हो कोई, 'शहँशाह' वही" width="311" height="307" class="alignleft size-full wp-image-2878" /><span class="dropcap">बॉ</span>लीवुड के कलाकारों के &#8216;<em>स्टेज कार्यक्रम</em>&#8216; अमेरिका में सदा ही चर्चित रहे हैं। सुनहरे पर्दे के बाहर स्टेज पर अपने चहेते &#8216;<em>स्टार्स</em>&#8216; को नाचते-गाते देखने के लिए लोग हमेशा लालायित रहते हैं। और इन कलाकारों, आयोजकों को अच्छी कमाई भी हो जाती है। ऐसे में बॉलीवुड के प्रथम परिवार- अमिताभ, अभिषेक, ऐश्वर्या बच्चन और अन्य कलाकारों के स्टेज प्रोग्राम <em>&#8216;अनफॉरगेटेबल टूर&#8217;</em> के अभी तक सभी सोपान अविस्मरणीय रहे हैं। 15 अगस्त को न्यूयॉर्क में हुए कार्यक्रम को तो खुद अमिताभ ने अपने ब्लॉग पर &#8216;<em>सबसे सफल और ऐतिहासिक</em>&#8216; माना।</p>
<p><b>अनफॉरगेटेबल टूर</b></p>
<p>बच्चन परिवार, रितेश देशमुख, प्रीति जिंटा और विशाल शेखर जैसे कलाकरों को पेश करते हुए &#8216;<em>विजक्रॉफ्ट</em>&#8216; ने &#8216;<em>अनफॉरगेटेबल टूर</em>&#8216; (अविस्मरणीय यात्रा) का पूरा कार्यक्रम बनाया। अमेरिका, कनाडा, त्रिनिदाद और फिर इंग्लैंड, जर्मनी, हॉलैंड को मिलाकर इस यात्रा में 11 स्टेज प्रोग्राम होने वाले हैं। यात्रा का सफर 18 जुलाई को टोरंटो से शुरू हुआ। अमेरिका का आखिरी कार्यक्रम 15 अगस्त की रात न्यूयॉर्क में हुआ और इस यात्रा का अंतिम पड़ाव 30 अगस्त को यूरोप में होगा। पूरे कार्यक्रम की रूपरेखा, स्टेज के सारे कलाकार और कोरियोग्राफी को अंजाम शामक डावर ने दिया। स्थानीय आकर्षण बढ़ाने के लिए टोरंटो में अक्षय कुमार, अमेरिका में माधुरी दीक्षित और लंदन में शिल्पा शेट्टी भी कार्यक्रम में शामिल हैं। सिर्फ अमेरिका में ही कोई 75-80 हजार लोगों ने इस कार्यक्रम को अलग-अलग शहरों में देखा है।</p>
<div class="simplePullQuoteRight">50 डॉलर से 500 डॉलर तक की टिकट कीमत के बावजूद हर टिकट दोगुने दाम पर खरीदने को कई लोग इंटरनेट पर तैयार थे<span></span></div>
<p>9 अगस्त को अटलांटिक सिटी में और 15 अगस्त को लांग आईलैंड में कार्यक्रम हुए। इन दो शहरों में सिर्फ 150 मील का फासला है, लेकिन न्यूयॉर्क, न्यूजर्सी में इतना बड़ा प्रवासी समुदाय है कि दोनों शो को मिलाकर लगभग 25000 लोग थे। हाल में एक भी सीट खाली नहीं थी। 50 डॉलर से 500 डॉलर तक की टिकट कीमत के बावजूद हर टिकट दोगुने दाम पर खरीदने को कई लोग इंटरनेट पर तैयार थे।</p>
<p><b>15</b><b> अगस्त को नसाऊ स्टेडियम</b><b>, </b><b>लांग आईलैंड</b><b>, </b><b>न्यूयॉर्क</b></p>
<p>न्यूयॉर्क में इन दिनों गर्मी का मौसम है। लेकिन गर्मी में जब यहाँ बारिश हो जाती है तो कम समय में भी झड़ी लग जाती है। 15 अगस्त की शाम को ऐसी ही झड़ी लग गई और कार पार्किंग से हाल में जाना भी मुश्किल हो रहा था। इस मूसलधार बारिश के बावजूद लोगों का जोश भरपूर था। रात 9 बजे कार्यक्रम शुरू होने के समय 11000 लोगों की क्षमता वाला स्टेडियम खचाखच भरा था। दृश्य-श्रव्य के बड़े उपकरण, विशाल टीवी स्क्रीन और अद्भुत स्टेज इफेक्ट, यह सभी कार्यक्रम में आकर्षण बने रहे।</p>
<p>न्यूयॉर्क के कार्यक्रम की शुरुआत हुई रितेश देशमुख से और फिर आईं प्रीति जिंटा। प्रीति की प्रसिद्ध फिल्में न्यूयॉर्क में ही फिल्माई गई हैं। फिर आए अभिषेक, जिन्होंने स्टेडियम के पीछे से दर्शकों के बीच में जोरदार &#8216;<em>इंट्री</em>&#8216; की। एक विशेष ट्रॉली में खड़े होकर अभिषेक दर्शकों के ऊपर से काफी करीब गए। अपनी चर्चित और आने वाली फिल्मों के गानों पर नाच-गाकर कलाकारों ने दर्शकों के बीच समा-सा बाँध दिया। अभिषेक ने स्टेज पर बुलाया ऐश्वर्या को और बॉलीवुड की इस चर्चित जोड़ी का स्टेज पर भरपूर अभिवादन हुआ। रितेश, अभिषेक, ऐश्वर्या और प्रीति के अकेले और एक-दूसरे के साथ नाच-गाने के सिलसिले ने पूरे हॉल में धूम मचा दी। इनके बाद विशाल-शेखर की जोशीली जोड़ी ने दर्शकों को अपने साथ मिलकर गाने और थिरकने का आह्वान किया।</p>
<p><b>और फिर&#8230;</b></p>
<p>जिस घड़ी का सबको बड़ी बेसब्री से इंतजार था, भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े महानायक को देखने, सुनने, अपने बीच में महसूस करने का। मंच पर आते ही अपनी पहली पारी की फिल्मों के गानों पर थिरकते हुए अमिताभ बच्चन ने महसूस ही नहीं होने दिया कि वह 65 वर्षीय नानाजी हैं, जिनकी नातिन हॉल में ही बैठी थी।</p>
<p>4 घंटों से अधिक चले अनवरत कार्यक्रम का अविस्मरणीय पल था- पर्दे के अमिताभ को मंच के अमिताभ की आवाज में सुनना। आजादी की लड़ाई के लिए लिखी बच्चनजी की &#8216;<em>अग्निपथ</em>&#8216; को 15 अगस्त को समर्पित करते हुए अमिताभ ने अपनी चिर-परिचित आवाज में दोहराया। उसके बाद अपनी दिवंगत माँ को याद करते हुए अमिताभ ने फिल्म &#8216;दीवार&#8217; के मंदिर वाले प्रसिद्ध दृश्य की पंक्तियाँ दोहराईं।</p>
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		<title>अमिताभ करीब से</title>
		<link>https://www.jmuchhal.com/amitabh-kareeb-se</link>
		<comments>https://www.jmuchhal.com/amitabh-kareeb-se#comments</comments>
		<pubDate>Mon, 15 Oct 2007 11:35:02 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[बॉलीवुड]]></category>
		<category><![CDATA[अभिषेक बच्चन]]></category>
		<category><![CDATA[अमिताभ बच्चन]]></category>
		<category><![CDATA[गॉडफादर]]></category>
		<category><![CDATA[जया बच्चन]]></category>
		<category><![CDATA[टू बी ऑर नॉट बी]]></category>
		<category><![CDATA[बच्चन परिवार]]></category>

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		<description><![CDATA[पसंदीदा भोजन : भारतीय शाकाहारी पसंदीदा फूल : बेला पसंदीदा किताब : मुहम्मद अली की आत्मकथा &#8216;अली&#8217; पसंदीदा चित्रकार : सुभाष अवचट पसंदीदा पाश्चात्य पोशाक डिजाइनर : अरमानी पसंदीदा भारतीय पोशाक डिजाइनर : अबु संदीप पसंदीदा जूते : लोफर्स पसंदीदा गाड़ी : लांगिनेस पसंदीदा शौक : फोटोग्रॉफी पसंदीदा पोशाक : कुर्ता, पाजामा पसंदीदा भारतीय फिल्म : कागज के फूल पसंदीदा हॉलीवुड फिल्म : गॉडफादर पसंदीदा भारतीय गायक : शुभा मुदगल (जया बच्चन द्वारा प्रस्तुत अमिताभ की जीवन घटना “टू बी [...]]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><b><img class="alignleft size-full wp-image-1662" alt="अमिताभ करीब से" src="https://www.jmuchhal.com/wp-content/uploads/2013/01/107.jpg" width="311" height="307" />पसंदीदा भोजन : </b>भारतीय शाकाहारी</p>
<p><b>पसंदीदा फूल :</b> बेला</p>
<p><b>पसंदीदा किताब</b> : मुहम्मद अली की आत्मकथा &#8216;अली&#8217;</p>
<p><b>पसंदीदा चित्रकार : </b>सुभाष अवचट</p>
<p><b>पसंदीदा पाश्चात्य पोशाक डिजाइनर :</b> अरमानी</p>
<p><b>पसंदीदा भारतीय पोशाक डिजाइनर :</b> अबु संदीप</p>
<p><b>पसंदीदा जूते :</b> लोफर्स</p>
<p><b>पसंदीदा गाड़ी :</b> लांगिनेस</p>
<p><b>पसंदीदा शौक : </b>फोटोग्रॉफी</p>
<p><b>पसंदीदा पोशाक :</b> कुर्ता, पाजामा</p>
<p><b>पसंदीदा भारतीय फिल्म : </b>कागज के फूल</p>
<p><b>पसंदीदा हॉलीवुड फिल्म : </b>गॉडफादर</p>
<p><b>पसंदीदा भारतीय गायक :</b> शुभा मुदगल</p>
<p style="text-align: center;" align="right">(जया बच्चन द्वारा प्रस्तुत अमिताभ की जीवन घटना “<em>टू बी ऑर नॉट बी</em>” पुस्तक से साभार)</p>
<p align="center"><b>एक सच्चे कलाकार की प्रतिबद्धता</b></p>
<p><b>शराबी :</b></p>
<p>1983 में दिवाली मनाते हुए दिल्ली में एक पटाखा मेरे बाएं हाथ में फट गया था। पूरी हथेली जल गई थी और चमड़ी में बहुत जलन थी। इसलिए मुझे शराबी की शूटिंग के दौरान काफी समय अपने बाएं हाथ को पेंट की जेब में मजबूरन रखना पड़ा था। &#8216;<em>मुझे नौलखा मंगा दे</em>&#8216; में पूरे समय नुकीले घुंघरू को अपने हाथ पर बजाना था, जो बहुत दर्दनाक था। उस गाने में मेरे हाथों से निकलता खून एकदम असली था- खुद मेरा।</p>
<p><b>डॉन : </b></p>
<p>उन दिनों मैं 2 शिफ्ट कर रहा था। सुबह <b>नास्तिक</b> और फिर दोपहर 1 से रात 10 बजे तक <b>डॉन</b>। इसके कारण दोनों पावों में छाले पड़ गए थे। मुझे &#8216;<em>खई के पान बनारस…</em>&#8216; के लिए नंगे पांव शूटिंग करनी थी और मैं तो ठीक से चल भी नहीं पा रहा था। डॉक्टरों को बुलाना पड़ा। और उन्होंने मुझे पांव की एड़ी को सुन्न करने के इंजेक्शन दिए। उसके बाद मैं वह डांस कर पाया।</p>
<p><b>कभी खुशी कभी गम : </b></p>
<p>&#8216;<em>शावा शावा</em>&#8216; वाला डांस के लिए करण जौहर ने मुझे बहुत आग्रह किया। लेकिन मैं बहुत अशक्त महसूस कर रहा था। मेरी कमर में उस समय असहनीय दर्द था। लेकिन फिर भी फराह खान के साथ मैंने कई बार रिहर्सल की। वह मेरे दर्द से हो रही खामियों को नजरअंदाज करती रहीं। शाहरुख तो कुछ पल में ही सारे कदम समझ गए। लेकिन मुझे तो बहुत रिहर्सल करनी पड़ी। मुझे बहुत सारी दर्द निवारक गोलियां खानी पड़ी &#8216;शावा शावा&#8217; के लिए।</p>
<p><b>अमिताभ की जिंदगानी</b><b>, बच्चन परिवार की जुबानी&#8230;</b></p>
<p><b>अभिषेक : </b></p>
<p>&#8216;हमेशा दूर रहने के बावजूद पा हमेशा मेरे पास ही थे। उन्होंने कभी भी घर पर हमें उनकी कमी महसूस नहीं होने दी। कुछ समय पहले तक उन्हें मुझे चिट्‍ठियां लिखने का बड़ा शौक था &#8211; हर जगह से, आउटडोर शूटिंग, प्लेन के सफर, विदेशों से और मैं भी कोशिश करता था, उनके जवाब देने के लिए। वह बाहर इतने बड़े कलाकार थे, लेकिन घर में वह सिर्फ हमारा पा थे। किसी भी विषय पर पा मुझे बहुत गहराई से अपना दृष्टिकोण समझाते हैं, लेकिन मुझे अपना फैसला खुद करने के लिए प्रोत्साहन देते हैं। पा आज भी मानते हैं कि वह तो एक साधारण कलाकार हैं, लेकिन मेरी और दुनिया की नजर में वे शायद कुछ और हैं&#8217;</p>
<p><b>श्वेता : </b></p>
<p>अमिताभ बच्चन की बेटी होना कैसा लगता है। मैं आज भी इस सवाल का जवाब नहीं जानती। क्योंकि मुझे तो उनके साथ हमेशा एक पिता का ही रिश्ता मालूम है, एक &#8216;<em>स्टार</em>&#8216; का नहीं। शाम को शूटिंग से घर लौटने के बाद पापा दिन भर की कोई बात नहीं करते थे। शूटिंग अच्छी रही या नहीं, उनका दिन अच्छा रहा या नहीं, हमें वह दिन भर की फिल्मी दुनिया के माया जाल से हमेशा चाह कर अलग ही रखते थे। एबीसीएल और बोफोर्स के दिन उनके जीवन के सबसे विषम दिन थे। वे किसी से कोई बात नहीं करते थे। हमें इंतजार रहता था दिल्ली से अमर सिंहजी के आने का। जिनसे पापा खुलकर अपनी पीड़ा जाहिर कर पाते थे। और फिर &#8216;<em>कौन बनेगा करोड़पति</em>&#8216; के बाद उनका सितारा फिर बुलंद होने लगा।&#8217;</p>
<p><b>जया : </b></p>
<p>&#8216;सिलसिला में मेरे पात्र को लेकर कई चर्चे थे। मैं खुद भी यश चोपड़ाजी के ऑफर पर दो मन में थी &#8211; हां करूं या नहीं। फिर मैंने निर्णय किया, क्या फर्क पड़ता है। मुझे उस वक्त फिल्मों में रोल किए 4 साल हो गए थे। और कैमरा के सामने लौटने का यह अच्छा अवसर था। और मुझे कोई अफसोस नहीं है वह रोल करके। और उस फिल्म के दो सबसे चहेते सीन थे &#8211; एक जब वो मुझे कहकर घर छोड़कर जा रहे थे कि वह दूसरी औरत से प्यार करते हैं, और दूसरा अस्पताल में संजीव कुमार के साथ&#8230; आज अमितजी एक कलाकार के रूप में बहुत ही अलग मुकाम पर हैं। वे तरह-तरह के रोल और सिनेमा करने को तैयार हैं, तत्पर हैं। फैशन शो के कैटवॉक पर चढ़ने में भी वे बहुत उत्साहित नजर आ रहे थे। ऐसा लगता है कि उन्हें भी अनदेखे रोल और नई चुनौतियों में काम करने में आनंद आ रहा है।&#8217;</p>
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		<title>‘सरकार’, जन्मदिन मुबारक हो !!!</title>
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		<pubDate>Tue, 11 Oct 2005 07:42:26 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[बॉलीवुड]]></category>
		<category><![CDATA[अग्निपथ]]></category>
		<category><![CDATA[अमिताभ बच्चन]]></category>
		<category><![CDATA[अमिताभ बच्चन जन्मदिन]]></category>
		<category><![CDATA[‘सरकार’]]></category>

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		<description><![CDATA[सिर्फ भारत ही नहीं, वरन् पूरी दुनिया के फिल्म इतिहास में ऐसा दूसरा उदाहरण नहीं मिलेगा कि किसी कलाकार ने अपनी उमर के 63वें साल में उस साल के चार सफलतम फिल्मों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई हो। बॉलीवुड में 2005 की सर्वाधिक ‘हिट’ रही चार फिल्मों- बंटी और बबली, ब्लैक, वक्त और सरकार, चारों ही में अमिताभ बच्चन के किरदार ने सदा की तरह अपनी अमिट छाप छोड़ दी है। आज 11 अक्टूबर को अपने बाबूजी का ‘अमित’, कुछ करीबी [...]]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><img class="alignleft size-full wp-image-2059" alt="‘सरकार’, जन्मदिन मुबारक हो!!!" src="https://www.jmuchhal.com/wp-content/uploads/2013/01/112.jpg" width="311" height="307" /><span class="dropcap">सि</span>र्फ भारत ही नहीं, वरन् पूरी दुनिया के फिल्म इतिहास में ऐसा दूसरा उदाहरण नहीं मिलेगा कि किसी कलाकार ने अपनी उमर के 63वें साल में उस साल के चार सफलतम फिल्मों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई हो। बॉलीवुड में 2005 की सर्वाधिक ‘<em>हिट</em>’ रही चार फिल्मों- बंटी और बबली, ब्लैक, वक्त और सरकार, चारों ही में अमिताभ बच्चन के किरदार ने सदा की तरह अपनी अमिट छाप छोड़ दी है। आज 11 अक्टूबर को अपने बाबूजी का ‘<em>अमित</em>’, कुछ करीबी रिश्तों के लिए ‘<em>अमितजी</em>’ और करोड़ों चाहने वालों के लिए सिर्फ अमिताभ या ‘<em>बीग बी</em>’ अपने जीवन के 64वें वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं। जन्मदिन तो हर साल आता है, और विशिष्ट लोगों का हर जन्मदिन ‘<em>खास</em>’ ही होता है, लेकिन आज अमिताभ बच्चन के जन्मदिन पर दुआएं और बधाइयां देने का एक खास मकसद है- पिछले 365 दिनों में – चाहे वह विज्ञापन का होर्डिंग हो, या सिनेमा का बड़ा पर्दा, या फिर टीवी का छोटा परदा और मोबाइल फोन के छोटा सा झरोखा- अमिताभ ने अपने हर रूप और रोल में पूरी दुनिया में बसे भारतवासियों के दिलों को बार-बार छुआ है। और यह झंकार सिर्फ एक कलाकार की बेजोड़ कला पर नहीं है, यह तालियां सिर्फ उस गहरी आवाज और विलक्षण व्यक्तित्व तक सीमित नहीं है; अपितु यह अभिवादन है हमारे उन अक्षुण्ण मूल्यों का, जो अमिताभ ने अपने व्यक्तित्व और कृतित्व में जीवंत कर दिया है। यह आदर है पिता हरिवंश राय बच्चन के लिखे ‘अग्निपथ का, जिसे अमिताभ ने हर पल जिया है मानो ‘<em>तू ना रूकेगा कभी, तू ना थमेगा कभी, तू ना थकेगा कभी, कर शपथ!!!</em>’</p>
<p>प्रौढ़ावस्था में भी अपनी कुर्सी या काम से ‘<em>चिपके</em>’ रहने की परेशानी तो बहुतों को होती हैं और फिल्म जगत में तो विशेषकर। वहीं दूसरी ओर 1970 से शुरू हुए अपने 36 वर्षीय फिल्मी सफर में गोया अमिताभ ने सिर्फ पिछले 36 महीने ही गुजारे होते, तो भी वह कलाकार के रूप में अपनी अमित छाप छोड़ देते।</p>
<div class="simplePullQuoteRight">अमिताभ ने हर पल जिया है मानो ‘तू ना रूकेगा कभी, तू ना थमेगा कभी, तू ना थकेगा कभी, कर शपथ!!!’<span></span></div>
<p><strong>सिर्फ पलभर के लिए आंखें मूंदकर अपने सामने गुजरने दीजिए-</strong> ‘<em>बागबान</em>’ के राज मल्होत्रा का माँ-बाप और आज की पीढ़ी को पहचान बताने वाले आत्सम्मान से भरे मार्मिक विचार, ‘<em>सरकार</em>’ में पूरी फिल्म में चुनिंदा संवाद बोलकर भी चाय की प्याली में से उनकी बोलती हुई निगाहें, ‘<em>वीर जारा</em>’ और ‘<em>पहेली</em>’ में छोटी सी गेस्ट एपियरेंस लेकिन सशक्त। वहीं दूसरी और ‘<em>विरूद्ध</em>’, ‘देव’ और ‘खाकी’ जैसी फिल्मों में लड़ाई और मुकाबला करने और सच साबित करने के संघर्ष में एक आंतरिक शक्ति। और सिर्फ अभिनय नहीं, लेकिन डांसेज में भी अमिताभ आज की पीढ़ी से कदम से कदम मिला कर थिरक रहे हैं। ‘<em>वक्त</em>’ और ‘<em>बागबान</em>’ में उनके जोशीले डांसेज के बाद ‘<em>कजरारे</em>’ में तो उन्होंने कमाल ही कर दिया। ‘<em>आइटम नंबर</em>’ जैसे ही एक देसी गाने में अपने बेटे और ऐश्वर्या राय के साथ उन्होंने होश में रहते हुए भी जिस मदहोशी को परदे पर उतारा, वह जादू सारे हिंदुस्तान के मोबाइल्स की रिंगटोन पर सुनाई दे रहा है। लेकिन अमिताभ-2 का अधिकांश रोल अपने आप में बेमिसाल है। और फिर है ‘<em>ब्लैक</em>’ – जो खुद अमिताभ भी अपने जीवन के सर्वश्रेष्ठ रोल में गिनाते हैं। सिनेमा जगत की दूसरी विभूति लताजी ‘<em>ब्लैक</em>’ देखकर इतनी प्रभावित हुईं कि उन्होंने अमिताभ को ‘<em>ब्लैक</em>’ में उनके अभिनय पर बधाई देते हुए एक पत्र लिखा।</p>
<p><strong>अमिताभ के करियर को तीन भागों में देखा जा सकता है -</strong> ‘<em>स्टार</em>’ से ‘सुपरस्टार’ बनते हुए ‘एंग्री यंगमैन’ के रूप में अमिताभ; जिस तक सिर्फ सलीम-जावेद, मनमोहन देसाई, प्रकाश मेहरा और यश चोपड़ा जैसे चुनिंदा फिल्मकार ही पहुंच सकते थे, और उसकी ‘<em>स्टारडम</em>’ में इनका भी बड़ा योगदान था। फिर आया दौर बीमारी, बोफोर्स और एबीसीएल का, जिसने अमिताभ जैसे हर दिल अजीज के घर को भी नीलामी की कगार तक पहुंचा दिया। यह दिन अमिताभ के जीवन के सबसे विषम दिन थे। अमिताभ चाहते तो उन सब जिम्मेदारियों से अपने आपको बड़े आराम से विलग कर सकते थे, दुनिया में अधिकांश लोग वैसा ही करते हैं, और उसके बावजूद फिल्म और इतिहास में उनका नाम सदा के लिए दर्ज तो हो चुका था। लेकिन यह अमिताभ के लिए काफी नहीं था। अपने कुल और पिता हरिवंश राय बच्चन के नाम और प्रतिष्ठा पर लगा एक भी संदेह या दाग अमिताभ को चैन से जीने नहीं दे रहा था। सौ साल बाद भी कोई बच्चन नाम के साथ किसी विवाद का भी जिक्र करे, यह उन्हें बर्दाश्त नहीं था। यही थे उनकी खानदानी गुण। मूल्य और ‘<em>संस्कार</em>’ जिन्होंने उनके जीवन के तीसरे और अविस्मर्णीय सोपान को जन्म दिया ‘<em>कौन बनेगा करोड़पति</em>’ और अपनी सुनहरी फ्रेंच कट ‘<em>दाढ़ी</em>’ के द्वारा। इसी अग्निपरीक्षा में उत्तीर्ण होकर अमिताभ मानव से महामानव और भारत के असली रत्न बन गए।</p>
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