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	<title>Jitendra Muchhal &#124; Jitendra Muchhal Website &#124; J Muchhal &#124; जीतेंद्र मुछाल&#187; अर्थव्यवस्था</title>
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		<title>अमेरिका में &#8216;आइरीन&#8217; ने दी दस्तक</title>
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		<pubDate>Sun, 28 Aug 2011 11:17:37 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[जनजीवन]]></category>
		<category><![CDATA[अमेरिका आइरीन]]></category>
		<category><![CDATA[अर्थव्यवस्था]]></category>
		<category><![CDATA[आइरीन तूफान]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रपति बराक ओबामा]]></category>

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		<description><![CDATA[अमेरिका में हाल के वर्षों में यह पहला मौका है, जब उत्तर-पूर्वी राज्यों में आपातकाल की घोषणा की गई है। यहां आइरीन तूफान आने के कारण जनजीवन पर खासा असर पड़ा है। न्यूयॉर्क में सभी ट्रेनें रद्द कर दी गई हैं, उपनगर मैनहट्टन में बिजली आपूर्ति बंद की जा सकती है। आइरीन तूफान का असर अमेरिका के 5-6 करोड़ लोगों पर पड़ेगा। न्यूयॉर्क में ट्रेनों और सब-वे परिवहन सेवा बंद होने के बाद शनिवार से क्षेत्र के सभी विमानतलों को [...]]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><img class="alignleft size-full wp-image-2085" alt="अमेरिका में 'आइरीन' ने दी दस्तक" src="https://www.jmuchhal.com/wp-content/uploads/2011/08/141.jpg" width="311" height="307" /><span class="dropcap">अ</span>मेरिका में हाल के वर्षों में यह पहला मौका है, जब उत्तर-पूर्वी राज्यों में आपातकाल की घोषणा की गई है। यहां आइरीन तूफान आने के कारण जनजीवन पर खासा असर पड़ा है। न्यूयॉर्क में सभी ट्रेनें रद्द कर दी गई हैं, उपनगर मैनहट्टन में बिजली आपूर्ति बंद की जा सकती है। आइरीन तूफान का असर अमेरिका के 5-6 करोड़ लोगों पर पड़ेगा।</p>
<p>न्यूयॉर्क में ट्रेनों और सब-वे परिवहन सेवा बंद होने के बाद शनिवार से क्षेत्र के सभी विमानतलों को बंदकर दिया गया है। 136 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तूफान ने सबसे पहले उत्तरी कैरोलिना राज्य में दस्तक दी, जो वर्जीनिया की ओर बढ़ेगा। राष्ट्रपति बराक ओबामा ने तूफान के ऐतिहासिक होने की संभावना जताई है।</p>
<p><b>आवश्यक खरीदारी :</b> तूफान सहने के लिए लोगों ने इस बार भी पानी, टार्च, जनरेटर, ब्रेड और दूध जैसी आवश्यक वस्तुओं की खरीदारी कर ली। कोई हादसा न हो इसके लिए सभी बड़े पुल और राजमार्गों पर यातायात बंद कर दिया गया है। तूफान के कारण एहतियातन प्रभावित इलाकों में 6500 उड़ानें रद्द कर दी गई हैं।</p>
<p>शनिवार देर रात से रविवार देर शाम के बीच न्यू जर्सी और न्यूयॉर्क में तूफान का ज्यादा असर होगा। तूफान के प्रभाव वाले संभावित इलाकों में लोग प्रार्थना कर रहे हैं कि यह आपदा बिना किसी नुकसान के गुजर जाए।</p>
<div class="simplePullQuoteRight">अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा कि तूफान बेहद खतरनाक और अर्थव्यवस्था के लिए महँगा साबित होगा<span></span></div>
<p><b>न्यूयॉर्क में बाढ़ का खतरा : </b>तूफान आइरीन ने भारी बारिश और तेज हवाओं के साथ न्यूयॉर्क में अपनी आमद दे दी है। इसके साथ ही यहां बाढ़ का खतरा पैदा हो गया है। शहर के बाढ़ संभावित क्षेत्रों के लगभग 3,70,000 लोगों को घर छोड़ने को कहा गया है।</p>
<p>मेयर माइकल ब्लूमबर्ग ने कहा कि तूफान अंतत: हम तक पहुंच ही गया है। दूर जाने का समय अब बीत गया है। उन्होंने कहा कि अगर आप कहीं और नहीं गए हैं, तो हमारा सुझाव है कि आप अब जहां हैं, वहीं रहें। प्रकृति हमसे कहीं ज्यादा बलशाली है।</p>
<p><b>आठ लोगों की मौत : </b>लगभग 140 किमी प्रति घंटे की गति से चल रही हवाओं के साथ आइरीन अब तक के सबसे खतरनाक तूफानों में से एक है। तूफान में अब तक 11 साल के एक बच्चे समेत कम से कम आठ लोगों की मौत हो चुकी है। आइरीन के कारण लगभग 10 लाख लोगों को बिजली नहीं मिल रही, लगभग 8,000 उड़ानों को भी निरस्त किया गया है और लगभग 20 लाख लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया है।</p>
<p><b>दुनिया भर से खैरियत :</b> अमेरिका में तूफान आना नई बात तो नहीं है फिर भी लोग चिंतित और डरे हुए हैं। अमेरिकियों को उनके दुनिया भर में रह रहे रिश्तेदारों के फोन कॉल और ई-मेल संदेश मिल रहे हैं। इनमें सभी रिश्तेदार खैरियत पूछ रहे हैं। ताजा जानकारी के लिए लोग ट्विटर जैसी अन्य सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट का सहारा ले रहे हैं। उत्तर-पूर्वी इलाकों में रहने वाले ज्यादातर लोगों का तूफान या बाढ़ से होने वाले नुकसान का बीमा नहीं है।</p>
<p><b>बेहद खतरनाक :</b> अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा कि तूफान बेहद खतरनाक और अर्थव्यवस्था के लिए महँगा साबित होगा। यह तूफान ऐसे समय आ रहा है जब देश वर्ष 2005 में कैटरीना तूफान के जख्मों से उबर ही रहा है।</p>
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		<title>ऐसा रहा ओवल ऑफिस में जार्ज बुश का पहला साल</title>
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		<pubDate>Tue, 15 Jan 2002 10:12:52 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[व्हाईट हाऊस]]></category>
		<category><![CDATA[अर्थव्यवस्था]]></category>
		<category><![CDATA[कोंडेलिजा राइस]]></category>
		<category><![CDATA[क्लिंटन]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रपति जॉर्ज बुश]]></category>
		<category><![CDATA[व्हाइट हाउस]]></category>

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		<description><![CDATA[सुबह के अभी सात भी नहीं बजे हैं और व्हाइट हाउस के &#8216;वेस्ट विंग&#8216; में चहल-पहल पुरजोर है। राष्ट्रपति जॉर्ज बुश का अपने व्हाइट हाउस के रहवासी ओवल ऑफिस में आने का समय हो गया है। ठीक सात बजे तो श्री बुश के हर दिन के पहले बैठक। सीआईए के निदेशक जॉर्ज टेनेट द्वारा अमेरिका की सुरक्षा पर ब्रीफिंग, जिसमें श्री बुश के साथ श्री डिक चैनी और सुरक्षा सलाहकार सुश्री कोंडेलिजा राइस भी उपस्थित होती हैं। और फिर शुरू [...]]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><img class="alignleft size-full wp-image-1530" alt="ऐसा रहा ओवल ऑफिस में जार्ज बुश का पहला साल " src="https://www.jmuchhal.com/wp-content/uploads/2012/12/41.jpg" width="311" height="307" />सुबह के अभी सात भी नहीं बजे हैं और व्हाइट हाउस के &#8216;<em>वेस्ट विंग</em>&#8216; में चहल-पहल पुरजोर है। राष्ट्रपति जॉर्ज बुश का अपने व्हाइट हाउस के रहवासी ओवल ऑफिस में आने का समय हो गया है। ठीक सात बजे तो श्री बुश के हर दिन के पहले बैठक। सीआईए के निदेशक जॉर्ज टेनेट द्वारा अमेरिका की सुरक्षा पर ब्रीफिंग, जिसमें श्री बुश के साथ श्री डिक चैनी और सुरक्षा सलाहकार सुश्री कोंडेलिजा राइस भी उपस्थित होती हैं। और फिर शुरू हो जाता है प्रतिदिन का सिलसिला, जो सुबह पांच बजे से शुरू होकर रात में दस बजे थमता है।</p>
<p>अमेरिका के 43वें राष्ट्रपति के पद पर जॉर्ज बुश के कार्यकाल का ठीक एक साल अभी पूरा हुआ है। इस दौरान देश-विदेश में अपने चुनाव को सही स्थापित करते हुए श्री बुश को विरासत में एक अर्थव्यवस्था मिली, जो वर्षों की रफ्तार के बाद सुस्त हो गई थी। उनके नेपथ्य में उनके पिता और राष्ट्रपति का साया था, जिससे वे अपनी अलग पहचान बनाना चाहते थे। सन्‌ 2001 के अगस्त तक के कार्यकाल में अपना समय चटि्‌टयान और टैक्सास में अपने रेच पर गुजारने के लिए ज्यादा चर्चा में रहे श्री बुश के लिए 11 सितंबर का हादसा मानो एक सीमाचिह्न बनकर आ गया। उन्होंने अपने प्रशासन और देश को एकसूत्र में पिरो लिया और कमांडर-इन-चीफ बुश तो आज अमेरिका में 85 प्रतिशत से अधिक जनता में लोकप्रिय हैं।</p>
<p><b>क्या है बुश की कार्यशैली</b><b>, </b><b>उनके सहयोगी</b><b>, </b><b>उनकी दिनचर्या- पूर्व राष्ट्रपति क्लिंटन से उनकी तुलना</b><b>? </b></p>
<p>यह शायद मेरी टैक्सॉस की धरोहर है, पर मुझे स्पष्ट बताना, कहना और सुनना पसंद है। श्री बुश ने कहा है। उनके कुछ लफ्जों से तो उनकी पत्नी लारा भी हतप्रभ रह जाती हैं, लेकिन यही उनकी शैली है। ओसामा को ढूंढ निकालेंगे जिंदा या मुर्दा और कर नहीं बढ़ने देंगे, मेरे जीते जी नहीं। श्री बुश की यही स्पष्टवादिता उनकी परिचायक भी है। श्री बुश को पसंद है अपने सहयोग के लिए एकदम उम्दा साथियों का चुनाव, उन सबको अपने विचारों तथा स्ट्रेटजी से ठीक से वाकिफ कराकर फिर कार्य करने के लिए पूरी आजादी, कोई हस्तक्षेप नहीं और अपने साथियों को पूरा समर्थन। यहां तक कि अफगान आक्रमण में भी उन्होंने कहा- &#8216;<em>मेरा उद्देश्य तो हमारे अंतिम लक्ष्य से सबको अवगत कराना है, लड़ाई को लड़ना तो रम्सफील्ड और जनरल मेयर्स की भूमिका है।</em>&#8216;</p>
<div class="simplePullQuoteRightGolden">कई पिज्जा पार्टी होती थी। राष्ट्रीय सुरक्षा की रोजाना ब्रीफिंग भी क्लिंटन मीटिंग की बजाय फाइल से लेना पसंद करते थे<span></span></div>
<p>श्री बुश के जिक्र के साथ उनके पहले के राष्ट्रपति बिल क्लिंटन का विषय निकलना स्वाभाविक है। दोनों कई मायनों में तो पूरब-पश्चिम हैं और यह जीवनशैली से कार्यशैली तथा विचारधारा तक सही है। डेमोक्रेट श्री क्लिंटन का सबसे बड़ा ब्रह्मास्त्र था अपने व्यक्तित्व से एक प्रकार का जन-सम्मोहन और अपने संपर्क में आने वाले हर आम-खास पर गहरा प्रभाव। इसी के रहते उन्हें राजनीति और जीवन की सतरंगी बिसात में कई बार शह होने के बाद कभी मात का मुंह नहीं देखना पड़ा। लेकिन उनके वेस्ट विंग (व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति के प्रशासनिक कार्यालय वाला भाग ओवल ऑफिस भी इसी का अंग है) में दिन देर से शुरू होता था। वे खुद तो कई बार सुबह 10 बजे तक ऑफिस में आते थे। रात में देर तक उन्हें दोस्तों और सहयोगियों से फोन पर लंबी बात करना पसंद था। ओवल ऑफिस में मोनिका कांड हुआ। बिल व हिलेरी के संबंध में लिप्त &#8216;<em>स्वार्थ</em>&#8216; और बिल-हिलेरी-गोर की निजी राजनीतिक महत्वाकांक्षा की टकराहट। वेस्ट विंग में जींस और टी शर्ट भी चलते थे और उनकी मीटिंग कभी भी समय पर ना तो शुरू होती थी, ना खत्म। व्हाइट हाउस में पार्टी रात-रातभर चलती रहती थी। कई पिज्जा पार्टी होती थी। राष्ट्रीय सुरक्षा की रोजाना ब्रीफिंग भी क्लिंटन मीटिंग की बजाय फाइल से लेना पसंद करते थे। &#8230;लेकिन फिर भी क्लिंटन-राज में ग्रीनस्पीन-रुबिन के आर्थिक नेतृत्व के तले अमेरिका की अर्थव्यवस्था कुलांचे भर रही थी और टेक्नॉलॉजी के रथ पर बैठकर अमेरिका ने 1990 के दशक में गजब की प्रगति की। दूसरी तरफ श्री बुश के लिए ओवल ऑफिस अमेरिकी इतिहास की एक गौरवशाली धरोहर है। वेस्ट विंग में कभी भी कोई भी पुरुष सूट-टाई के बिना नहीं होता। मीटिंग सुई की नोक पर समय से शुरू होती है और समाप्त भी। दिन की शुरुआत सुबह बहुत जल्दी होती है और शाम 6.30 से 7 बजे तक वेस्ट विंग में रोशनियां बंद हो जाती हैं। श्री बुश खुद 5 बजे उठ जाते हैं और उनके घर में शाम के भोजन पर आए मेहमान भी 9 बजे तक विदा हो चुके होते हैं। वेस्ट विंग में अब कोई मिडनाइट पार्टियां नहीं होतीं। अपनी सेहत के लिए पूरी तरह सजग श्री बुश रोजाना मध्याह्न में एक घंटे 4 से 6 मील दौड़ते हैं और वर्जिश करते हैं। इससे उनकी नाड़ी की रफ्तार है सिर्फ 65।</p>
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		<title>क्या खतरा मात्र आर्थिक शक्ति बढ़ने से है?</title>
		<link>https://www.jmuchhal.com/kya-khatra-matra-aarthik-shakti-badhne-se-hai</link>
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		<pubDate>Wed, 29 Jul 1992 08:39:42 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[जे आर डी टाटा]]></category>
		<category><![CDATA[अर्थव्यवस्था]]></category>
		<category><![CDATA[जमशेदजी टाटा]]></category>
		<category><![CDATA[जे.आर.डी.टाटा]]></category>
		<category><![CDATA[दादाभाई नौरोजी]]></category>
		<category><![CDATA[रतन टाटा]]></category>

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		<description><![CDATA[हमारे देश के सामने समाजवादी अर्थव्यवस्था का ढांचा रखा गया है। अगर समाजवाद का अर्थ सभी को समान अधिकार और मौके, दलितों के ऊपर उठने के उचित अवसर और न्यायप्रिय वैधानिक समाज व्यवस्था से है, तो मैं उस समाजवाद का पक्षधर हूं, परंतु अगर उस समाजवाद का तात्पर्य व्यक्तिगत प्रयत्नों पर पाबंदी, उद्योगों पर सरकार के नियंत्रण और निजी इच्छा के विपरीत सरकार द्वारा निर्धारित मापदंडों के अनुसार जीवन-यापन से है, तो मैं ऐसे समाजवाद के सख्त खिलाफ हूं। किसी [...]]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><img src="https://www.jmuchhal.com/wp-content/uploads/1992/07/jm_jrd5_profile_pic.jpg" alt="jm_jrd5_profile_pic" width="311" height="307" class="alignleft size-full wp-image-3132" /><span class="dropcap">ह</span>मारे देश के सामने समाजवादी अर्थव्यवस्था का ढांचा रखा गया है। अगर समाजवाद का अर्थ सभी को समान अधिकार और मौके, दलितों के ऊपर उठने के उचित अवसर और न्यायप्रिय वैधानिक समाज व्यवस्था से है, तो मैं उस समाजवाद का पक्षधर हूं, परंतु अगर उस समाजवाद का तात्पर्य व्यक्तिगत प्रयत्नों पर पाबंदी, उद्योगों पर सरकार के नियंत्रण और निजी इच्छा के विपरीत सरकार द्वारा निर्धारित मापदंडों के अनुसार जीवन-यापन से है, तो मैं ऐसे समाजवाद के सख्त खिलाफ हूं। किसी भी व्यक्ति को अपनी निजी और पारिवारिक जरूरतों का पूरा करने के मार्ग में निर्धारित बनकर बैठने वाली व्यवस्था कैसे प्रशंसनीय हो सकती है?&#8217;</p>
<p><b>कन्सनट्रेशन ऑफ इकोनोमिक पावर</b></p>
<p>&#8216;हमारे नेताओं के भाषण सुनकर तो ऐसा लगने लगा है, मानो हमारे देश को बढ़ती हुई आबादी, सांप्रदायिकता, गरीबी, बेरोजगारी आदि किसी से भी नहीं, बल्कि सिर्फ आर्थिक शक्ति के एकत्रित होने से खतरा है। अगर निजी हाथों में आर्थिक शक्ति है, तो उसका सीधा तात्पर्य उपयुक्त स्थानों पर मनचाहे उद्योग लगाने की स्वतंत्रता, बाजार से आवश्यकतानुसार पैसा उधार अथवा अंशों के जरिये एकत्रित करने की आजादी और मनचाही शर्तों पर कर्मचारियों को नियुक्त करने की खुली छूट से है। परंतु इनमें से ऐसी कोई भी चीज नहीं है, जो हमारे देश का उद्योगपति स्वेच्छा से कर सकता है। तो फिर उसकी आर्थिक शक्ति का क्या फायदा। सही मायनों मे तो &#8216;<em>कन्सनट्रेशन ऑफ इकोनोमिक पॉवर हमारे सरकारी अफसरों और मंत्रियों के पास है, जिससे कि देश की प्रगति को वास्तविक खतरा है।</em>&#8216;</p>
<p>(उपरोक्त विचार वर्तमान आर्थिक परिवर्तनों के पूर्व व्यक्त किए गए हैं।)</p>
<p><b>मूल्य एवं आस्था</b></p>
<p>&#8216;दुःख का विषय है कि मूल्य आधारित सभ्यता अब समाप्त हो गई है। मैं जिन मूल्यों व स्तर का अनुसरण करने का प्रयास करता हूं, वह मुझे जमशेदजी टाटा से मिले हैं और मैं उनका सम्मान करता हूं। स्वतंत्रता के बाद अधिक काला धन बनाने के साथ मूल्यों का ह्रास अधिक हुआ है। आज मोटे तौर पर मूल्यों में तो बहुत बदलाव नहीं आया है। हां, हमारे द्वारा उन्हें दिए जाने वाले महत्व में आमूल परिवर्तन हो गया है।</p>
<div class="simplePullQuoteRight">वह मेरी जिंदगी का पहला अवसर था, जब मेरे पास करोड़ रुपए अथवा कई लाख रुपए निजी संपदा के रूप में आए थे<span></span></div>
<p>मूल्यों में आई गिरावट के मेरे मान से प्रमुख कारण कुछ इस प्रकार हैं। पहला, विज्ञान और प्रौद्योगिकी की प्रगति ने धर्म पर से हमारी आस्था को डिगा दिया है, जो कि पुरातन समय में हमारे नैतिक आचरण का सबसे बड़ा संबल थी। दूसरा, यथार्थवाद और आर्थिक उपलब्धि की अंधी दौड़ ने मनुष्य को इतना स्वार्थी बना दिया है कि उसे अपने हितों के आगे कुछ दिखाई नहीं देता। तीसरा, हमारे देश में सरकारी कर्मचारियों को दी जाने वाली &#8216;<em>शर्मनाक</em>&#8216; तनख्वाह और उसके साथ उनके हाथों में लाइसेंस-परमिट देने का मनमाना अधिकार। अगर हमें मूल्यों को वहीं उनके उचित स्थान और गौरव पर लौटाना है तो इन सब मुश्किलों के उपाय तो ढूंढने ही पड़ेंगे।&#8217;</p>
<p><b>पुरस्कार और सम्मान</b></p>
<p>&#8216;मुझे देश-विदेश में कई पुरस्कार मिले हैं, हालांकि मेरी उनके लिए पात्रता कदापि नहीं थी। परंतु अपने जीवन में मुझे सबसे ज्यादा खुशी दादाभाई नौरोजी सम्मान पाकर हुई। वह इसलिए कि यह वह व्यक्ति था, जिसने सही मायनों में समाज सुधार का बीड़ा उठाया था। उनकी शिक्षा पूर्ण होने के बाद जब उन्हें ज्ञात हुआ कि कॉलेज का अधिकांश खर्च सरकार की ओर से मिलता है, जो उसे गरीबों से लिए गए कर में से देती है। बस, तभी उन्हें लग गया कि उनकी शिक्षा का खर्च तो उन गरीबों ने उठाया है, जिन्हें खुद पढ़ना भी नहीं आता।</p>
<p>दादाभाई घर-घर जाते थे और लोगों के घरों के द्वार के समीप ही बैठकर उनके बच्चों को पढ़ना-लिखना सिखाते थे। मुझे तो यह सब आश्चर्यजनक लगता है। इसीलिए, मुझे दादाभाई नौरोजी सम्मान मिलने पर जो आनंद की अनुभूति हुई, वह &#8216;भारत रत्न&#8217; मिलने पर भी नहीं हुई।&#8217;</p>
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