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	<title>Jitendra Muchhal &#124; Jitendra Muchhal Website &#124; J Muchhal &#124; जीतेंद्र मुछाल&#187; आर्थिक मंदी</title>
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		<title>भारत में विदेशी निवेशकों के लिए सुनहरा मौका बुनियादी ढाँचे में निवेश की संभावनाएँ</title>
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		<pubDate>Wed, 15 Sep 2010 11:14:33 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[कारोबार की दुनिया]]></category>
		<category><![CDATA[आर्थिक मंदी]]></category>
		<category><![CDATA[इंडिया इन्वेस्टमेंट फोरम]]></category>
		<category><![CDATA[ऊर्जा उत्पादन]]></category>
		<category><![CDATA[परिवहन मंत्रालय]]></category>
		<category><![CDATA[भारत]]></category>
		<category><![CDATA[विदेशी निवेश]]></category>

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		<description><![CDATA[भारत में बुनियादी ढाँचे के विकास के लिए अगले पाँच वर्षों में 15 खरब डॉलर निवेश की योजना है। इसमें से 500 अरब डॉलर का निवेश निजी क्षेत्र से संभावित है। भारत की प्रगति में शरीक होने का विदेशी निवेशकों के लिए यह सुनहरा अवसर है। हाल ही में न्यूयॉर्क में आयोजित इंडिया इन्वेस्टमेंट फोरम में ये बातें भारत सरकार के कैबिनेट मंत्रियों और शीर्षस्थ अधिकारियों ने कहीं। परिवहन मंत्री कमलनाथ ने कहा कि अगले पाँच सालों तक रोजाना 20 [...]]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><img class="alignleft size-full wp-image-1744" alt="भारत में विदेशी निवेशकों के लिए सुनहरा मौका बुनियादी ढाँचे में निवेश की संभावनाएँ" src="https://www.jmuchhal.com/wp-content/uploads/2013/01/138.jpg" width="311" height="307" /><span class="dropcap">भा</span>रत में बुनियादी ढाँचे के विकास के लिए अगले पाँच वर्षों में 15 खरब डॉलर निवेश की योजना है। इसमें से 500 अरब डॉलर का निवेश निजी क्षेत्र से संभावित है। भारत की प्रगति में शरीक होने का विदेशी निवेशकों के लिए यह सुनहरा अवसर है। हाल ही में न्यूयॉर्क में आयोजित इंडिया इन्वेस्टमेंट फोरम में ये बातें भारत सरकार के कैबिनेट मंत्रियों और शीर्षस्थ अधिकारियों ने कहीं।</p>
<p>परिवहन मंत्री कमलनाथ ने कहा कि अगले पाँच सालों तक रोजाना 20 किमी सड़क बनाने की योजना है। अगर भारत में सड़क एक उत्पाद है, तो उसकी माँग के बारे में तो सोचना निरर्थक है। उनके साथ सड़क और परिवहन मंत्रालय के उच्च अधिकारियों ने भी विदेशी निवेशकों को भारत में सड़क निर्माण के बारे में अवगत कराया।</p>
<p><b>विकास की ऊर्जा : </b>ऊर्जा मंत्री सुशील कुमार शिंदे के अनुसार अगले 5 वर्षों में 80 हजार मेगावॉट ऊर्जा उत्पादन की योजना है। यानी पिछले 22 वर्षों में ऊर्जा उत्पादन को सिर्फ अगले 5 वर्षों में दोहराना है। इसके लिए परंपरागत और नए संयंत्रों का भारत में भविष्य उज्ज्वल है।</p>
<div class="simplePullQuoteRightPerpal">ऊर्जा मंत्री सुशील कुमार शिंदे के अनुसार अगले 5 वर्षों में 80 हजार मेगावॉट ऊर्जा उत्पादन की योजना है<span></span></div>
<p><b>विकास का मतलब :</b> प्रधानमंत्री के प्रमुख सचिव टीकेए नायर के अनुसार भारत में प्रगति का सबसे बड़ा मापदंड है कि वहाँ सकल विकास हो, जिसका प्रभाव और परिणाम समाज के हर तबके को महसूस हो। सिर्फ कुछ तबकों तक सीमित प्रगति और उन्नति से पूरे भारत का विकास संभव नहीं है।</p>
<p><b>नहीं है साख की समस्या :</b> सेबी के प्रमुख सीवी भावे ने बताया कि आर्थिक मंदी के बावजूद भारत के आर्थिक बाजार में साख की समस्या कभी नहीं आई।</p>
<p><b>निजी क्षेत्र में उत्साह :</b> मुख्य आयोजक और कोटक महिंद्रा के प्रमुख उदय कोटक के अनुसार वर्ष 2005 से 2008 तक भारत में वार्षिक विकास दर 9 से 10 प्रतिशत रही। इस वर्ष यह 6 से 7 प्रतिशत रहेगी। विकास दर 9 से 10 प्रश पहुँचाने के लिए सरकार व निजी क्षेत्र को प्रयास करना होगा।</p>
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		<title>मौजूदा संकट अमेरिका के लिए सदमा</title>
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		<pubDate>Mon, 15 Sep 2008 12:28:12 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[अमेरिकी अर्थव्यवस्था]]></category>
		<category><![CDATA[आर्थिक मंदी]]></category>
		<category><![CDATA[फेडरल रिजर्व बैंक]]></category>
		<category><![CDATA[मेरिल लिंच]]></category>
		<category><![CDATA[वित्तीय गिरावट]]></category>

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		<description><![CDATA[अमेरिकी अर्थव्यवस्था में पैदा हुए ताजा गंभीर संकट से यहाँ के वित्त विश्लेषक भी हैरत में हैं। उनकी राय में अमेरिका के लिए यह सारी स्थिति सदमे की तरह है। हालाँकि अधिकतर ने तरलता के जरिये बाजार को सुधारने की सलाह दी है। पूर्व फेडरल रिजर्व चीफ एलेन ग्रीनस्पेन के मुताबिक अमेरिका सदी की सबसे बड़ी आर्थिक मंदी के दौर से गुजर रहा है। वित्त विपदाएँ इसमें &#8216;आग में घी&#8216; का काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि जब तक [...]]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><img class="alignleft size-full wp-image-2077" alt="मौजूदा संकट अमेरिका के लिए सदमा " src="https://www.jmuchhal.com/wp-content/uploads/2008/09/1301.jpg" width="311" height="307" /><span class="dropcap">अ</span>मेरिकी अर्थव्यवस्था में पैदा हुए ताजा गंभीर संकट से यहाँ के वित्त विश्लेषक भी हैरत में हैं। उनकी राय में अमेरिका के लिए यह सारी स्थिति सदमे की तरह है। हालाँकि अधिकतर ने तरलता के जरिये बाजार को सुधारने की सलाह दी है।</p>
<p>पूर्व फेडरल रिजर्व चीफ एलेन ग्रीनस्पेन के मुताबिक अमेरिका सदी की सबसे बड़ी आर्थिक मंदी के दौर से गुजर रहा है। वित्त विपदाएँ इसमें &#8216;<em>आग में घी</em>&#8216; का काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि जब तक घरेलू कीमतों में सुधार नहीं होता, इन हालात से ऐसे ही जूझना पड़ेगा। मुझे विश्वास ही नहीं हो रहा है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था इतना बुरा वक्त देख रही है।</p>
<p>एक पूर्व केंद्रीय बैंकर के अनुसार इससे बुरी स्थिति उन्होंने अपने पेशे में कभी नहीं देखी। हालाँकि उन्होंने उम्मीद जताई कि हालात जल्द ही सामान्य होने लगेंगे।</p>
<div class="simplePullQuoteRight">अमेरिकी बैंक पहले ही भयानक स्थिति का सामना कर रहे हैं। मुझे समझ में नहीं आता अमेरिकी बैंक को मेरिल लिंच को सत्तर फीसदी राशि देने की जरूरत क्या थी?<span></span></div>
<p>डब्ल्यूएल रॉस एंड कंपनी के चेअरमैन और सीईओ विलबर रॉस ने कहा &#8216;<em>आने वाले महीनों में हजारों बैंक बंद होंगे। यही स्थिति निवेशकों के लिए अवसर पैदा करेगी। मुझे लगता है कई क्षेत्रीय बैंकों पर भी ताले पड़ जाएँगे। इन बैंकों ने 90 के दशक में भी बचत और ऋण से जुड़े ऐसे ही हालात पैदा किए थे।</em>&#8216;</p>
<p>रॉस एक ऐसे छोटे वित्तीय संस्थान की तलाश में हैं, जहाँ निवेश की संभावना हो। वे इसके लिए जोखिम नहीं उठाना चाहते, इसीलिए स्थिर जमापूँजी वाले स्रोत पर ध्यान दे रहे हैं, ऋण उपलब्ध कराने वाली निवेश सूची पर नहीं। पिमको के सीईओ ईआई एरैन का कहना था &#8216;<em>हमें तरलता लाना होगी और इसे पूँजी के विस्तार के लिए जल्द जुटाना होगा। मौजूदा संकट से उबरना भी इतना आसान नहीं है, क्योंकि निकाय के पास पर्याप्त पूँजी नहीं है</em>।&#8217;</p>
<p>निवेश सलाहकार मार्क फेबर की भी ऐसी ही राय थी। उन्होंने कहा कि वित्तीय गिरावट और आगे कितना जाएगी, कुछ कहा नहीं जा सकता। हमें कुछ परिवर्तन करना होंगे, क्योंकि केंद्रीय बैंक बाजार में तरलता लाएगा। नतीजतन, ब्याज दरें गिरेंगी। अमेरिकी बैंक पहले ही भयानक स्थिति का सामना कर रहे हैं। मुझे समझ में नहीं आता अमेरिकी बैंक को मेरिल लिंच को सत्तर फीसदी राशि देने की जरूरत क्या थी?</p>
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		<title>अमेरिकी मीडिया ने बुश के भाषण को सराहा</title>
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		<pubDate>Thu, 31 Jan 2002 10:14:57 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[व्हाईट हाऊस]]></category>
		<category><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति]]></category>
		<category><![CDATA[आर्थिक मंदी]]></category>
		<category><![CDATA[जॉर्ज डब्ल्यू. बुश]]></category>
		<category><![CDATA[जॉर्ज डब्ल्यू. बुश भाषण]]></category>
		<category><![CDATA[वाशिंगटन पोस्ट]]></category>

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		<description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू. बुश के अमेरिकी कांग्रेस में दिए गए भाषण को अमेरिका के मीडिया जगत में भी सराहना मिली है। देश के प्रमुख अखबारों ने इस भाषण को राष्ट्रपति की भविष्य की नीतियों से भी जोड़ा है। अखबारों के अनुसार राष्ट्रपति का भाषण तीन प्रमुख मुद्दों पर केंद्रित रहा। ये हैं आतंकवाद के खिलाफ विश्वव्यापी संघर्ष, अमेरिका की पूर्ण सुरक्षा तथा आर्थिक मंदी से मुकाबला। बुश ने 11 सितंबर के बाद विश्व में आए बदलाव का प्रमुखता से [...]]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><img class="alignleft size-full wp-image-1532" alt="अमेरिकी मीडिया ने बुश के भाषण को सराहा " src="https://www.jmuchhal.com/wp-content/uploads/2002/01/42.jpg" width="311" height="307" /><span class="dropcap">अ</span>मेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू. बुश के अमेरिकी कांग्रेस में दिए गए भाषण को अमेरिका के मीडिया जगत में भी सराहना मिली है। देश के प्रमुख अखबारों ने इस भाषण को राष्ट्रपति की भविष्य की नीतियों से भी जोड़ा है।</p>
<p>अखबारों के अनुसार राष्ट्रपति का भाषण तीन प्रमुख मुद्दों पर केंद्रित रहा। ये हैं आतंकवाद के खिलाफ विश्वव्यापी संघर्ष, अमेरिका की पूर्ण सुरक्षा तथा आर्थिक मंदी से मुकाबला। बुश ने 11 सितंबर के बाद विश्व में आए बदलाव का प्रमुखता से जिक्र किया और कहा कि अमेरिका पर हमले के बाद पूरी दुनिया का सोच बदला है।</p>
<p>&#8216;<strong>वाशिंगटन पोस्ट</strong>&#8216; ने अपने संपादकीय में राष्ट्रपति के भाषण को युद्धकाल का भाषण निरूपित करते हुए लिखा है कि उनके बयानों से स्पष्ट होता है कि वे आतंकवाद के प्रति विश्वव्यापी संघर्ष छेड़ने के लिए कृत संकल्पित हैं, खासकर इराक, ईरान और उत्तरी कोरिया के खिलाफ जो आतंकवाद की धुरी बने हुए हैं। बुश ने कहा कि हम प्रायोजित आतंकवाद और हथियारों की अवैध खरीद-फरोख्त के जाल को भी नष्ट करना चाहते हैं।</p>
<div class="simplePullQuoteRightPerpal">आतंकवाद के अलावा घरेलू मोर्चे और आर्थिक मंदी के बारे में भी उन्होंने कई वादे किए, पर विश्वास नहीं होता कि वे यह सब कर पाएंगे<span></span></div>
<p>&#8216;<strong>द यूएसए टुडे</strong>&#8216; के अनुसार राष्ट्रपति इस संबोधन के दौरान संभवतः अपने राष्ट्रपतिकाल के सबसे आत्मविश्वासी दौर में रहे जबकि उपराष्ट्रपति चैनी उनके ठीक पीछे बैठे थे। आतंकवादी हमले के बाद बुश ने जिस कुशल नेतृत्व का परिचय दिया, यह भाषण उसी का एक नजारा भी रहा। आतंकवाद के अलावा घरेलू मोर्चे और आर्थिक मंदी के बारे में भी उन्होंने कई वादे किए, पर विश्वास नहीं होता कि वे यह सब कर पाएंगे।</p>
<div>
<p>&#8216;<strong>न्यूयॉर्क टाइम्स</strong>&#8216; ने भी अपने संपादकीय में बुश के संबोधन की सराहना करते हुए रक्षा खर्च पर टिप्पणी की है। अखबार ने लिखा है कि राष्ट्रपति ने दो दशकों के बाद रक्षा खर्च में बड़ी वृद्धि की है जो भविष्य में अच्छे नतीजों के साथ सामने आएगी। इस क्षेत्र में खर्च बढ़ाने पर राष्ट्रपति को बुद्धिमत्ता से काम लेना होगा, पर आर्थिक क्षेत्र के मामले में बुश ने निराश ही किया। इस भाषण की उल्लेखनीय बातों में पाकिस्तान के राष्ट्रपति मुशर्रफ की तारीफ करना और &#8216;<em>एनरॉन</em>&#8216; का कोई उल्लेख न करना है।</p>
</div>
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		<title>अमेरिकन मंदी ने 10 लाख रोजगार खाए</title>
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		<pubDate>Wed, 25 Jul 2001 11:04:48 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[अमेरिकी अर्थव्यवस्था]]></category>
		<category><![CDATA[अमेरिकी मंदी]]></category>
		<category><![CDATA[अमेरिकी वित्तमंत्री]]></category>
		<category><![CDATA[आर्थिक मंदी]]></category>
		<category><![CDATA[चीन की अर्थव्यवस्था]]></category>
		<category><![CDATA[शेयर बाजार]]></category>

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		<description><![CDATA[अमेरिका में नास्दाक शेयर बाजार में आई गिरावट के बाद शुरू हुई मंदी थमने का नाम नहीं ले रही है। हाल ही में प्रकाशित आंकड़ों से यह बात ज्ञात हुई है कि दिसंबर 2000 से शुरू हुई मंदी अभी तक 10 लाख लोगों को विदा कर चुकी है। मंदी का प्रभाव केवल टेक्नोलॉजी क्षेत्र तथा आईटी कंपनियों पर ही नहीं, जैसा कि विशेषकर भारत में प्रचारित किया जा रहा है, बल्कि इसकी चपेट में ऑटोमोबाइल, भारी उद्‌योग, उत्पादन इकाइयों से [...]]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><img class="alignleft size-full wp-image-3247" title="अमेरिकन मंदी ने 10 लाख रोजगार खाए" alt="" src="https://www.jmuchhal.com/wp-content/uploads/2001/07/341.jpg" width="311" height="307" />अमेरिका में नास्दाक शेयर बाजार में आई गिरावट के बाद शुरू हुई मंदी थमने का नाम नहीं ले रही है। हाल ही में प्रकाशित आंकड़ों से यह बात ज्ञात हुई है कि दिसंबर 2000 से शुरू हुई मंदी अभी तक 10 लाख लोगों को विदा कर चुकी है।</p>
<p>मंदी का प्रभाव केवल टेक्नोलॉजी क्षेत्र तथा आईटी कंपनियों पर ही नहीं, जैसा कि विशेषकर भारत में प्रचारित किया जा रहा है, बल्कि इसकी चपेट में ऑटोमोबाइल, भारी उद्‌योग, उत्पादन इकाइयों से लेकर उपभोक्ता सामग्री बनाने वाली कंपनियां, बड़े-बड़े डिपार्टमेंटल स्टोर्स भी आ गए हैं। किसी न किसी बड़ी कंपनी द्वारा हजारों की संख्या में छंटनी की खबर आना यहां आम बात हो गई है। एक आंकड़े के अनुसार नास्दाक शेयर बाजार में सूचीबद्ध आईटी की कपंनियों ने इस गिरावट में 3 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर का नुकसान उठाया है। कई डॉट कॉम कंपनियों के शेयर, एक समय जिनका भाव 200 डॉलर तक पहुंच चुका था, आज 1 डॉलर में बिक रहे हैं।</p>
<p><b>किसने कितनों को अलविदा कहा</b></p>
<p>न्यूयॉर्क में हाल ही में अमेरिका की बड़ी कंपनियों द्वारा अपने कर्मचारियों की छंटनी की सूची जारी की गई है। इस सूची में कंपनी का नाम तथा कोष्ठक में उनके द्वारा निकाले गए कर्मचारियों की संख्या को देखकर स्थिति की गंभीरता का पता चलता है।</p>
<div class="simplePullQuoteRight">उन्होंने आशान्वित करने वाली एक ही बात कही है कि अब स्थिति और अधिक खराब नहीं होगी<span></span></div>
<p><b>आईटी कंपनियों में छंटनी एक नजर में</b></p>
<p>नॉर्टेल नेटवर्क (30,000), मोटोरोला (26,000), सोलेक्ट्रॉन (20,850), वर्ल्डकॉम (11,550), लुसेंट टेक्नोलॉजी (10,000), कम्पॉक कम्प्यूटर (9000), इरिक्सॅन (9000), सिस्को सिस्टम्स (8,500), फिलिप्स इलेक्ट्रॉनिक्स (7,000), कॉर्निंग (6,125), डेल कम्प्यूटर (5,700) व सीमेन्स (5,500)।</p>
<p><b>उत्पादन कंपनियों में छंटनी</b></p>
<p>जनरल इलेक्ट्रिक (75,000), हनीवेल (50,000), डेमलर क्रिसलर्स जनरल मोटर्स (15,000), डेल्फी ऑटोमोटिव (11,500), प्रॉक्टर्स एंड गेम्बल (9, 600), मित्सुबिशी (9,500), बोइंग (8,600), यूनीलीवर (8,000)।</p>
<p><b>ग्रीनस्पान अचंभे में</b></p>
<p>अमेरिकी फेडरल रिजर्व के प्रमुख (अमेरिकी वित्तमंत्री) एलन ग्रीनस्पान को भी देश को मंदी से उबारने का रास्ता नजर नहीं आ रहा है। तीन बार ब्याज की दरों को कम करने के बाद भी वे अमेरिका को मंदी से उबारने में सफल नहीं हो पाए हैं। अमेरिकी सरकार ने उपभोक्ता मांग में तेजी लाने के उद्‌देश्य से देश की जनता को करीब 1 ट्रिलियन डॉलर से ज्याद टैक्स में कटौती की घोषणा की है।</p>
<p>हाल ही में फेडरल रिजर्व के कर्ताधर्ता ग्रीनस्पान ने निकट भविष्य में मंदी छंट जाने का कोई ठोस आश्वासन देने से इंकार कर दिया। उन्होंने आशान्वित करने वाली एक ही बात कही है कि अब स्थिति और अधिक खराब नहीं होगी। शुभ संकेत के रूप में यह भी देखा जा सकता है कि अमेरिका में उपभोक्ता की व्यय शक्ति बढ़ी है। जाहिर है कि मांग बढ़ने से कंपनियों की स्थिति में सुधार आएगा। दूसरी ओर अमेरिकी मंदी का असर अब यूरोप की ओर भी बढ़ रहा है। जापान भी मंदी की चपेट में है और चीन की अर्थव्यवस्था के विकास को झटका लगने की खबर है। इस चिंताजनक हालात में सुधार की उम्मीद पर टिकी है व्यापार की दुनिया।</p>
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