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	<title>Jitendra Muchhal &#124; Jitendra Muchhal Website &#124; J Muchhal &#124; जीतेंद्र मुछाल&#187; न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज</title>
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		<title>रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून</title>
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		<pubDate>Fri, 26 Jul 2002 10:41:53 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[अमेरिकी अर्थव्यवस्था]]></category>
		<category><![CDATA[अमेरिका की अर्थव्यवस्था]]></category>
		<category><![CDATA[इंदौर]]></category>
		<category><![CDATA[डो जोंस]]></category>
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		<category><![CDATA[न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज]]></category>
		<category><![CDATA[रहिमन पानी राखिए]]></category>
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		<description><![CDATA[पानी शब्द पढ़ते ही नईदुनिया के पाठकों को वो जल याद आ जाएगा, जो नल में कभी-कभी आता है और सावन में भी बरस नहीं रहा, लेकिन आज मेरा संकेत रहीम के उस &#8216;पानी&#8216; से नहीं- जिसके बिना &#8216;मोती&#8216; और &#8216;चून&#8217; सून हो जाते हैं, वरन मनुष्य जीवन के चरित्र और ईमान के उस &#8216;पानी&#8216; से है, जिसके ओझल हो जाने से आज सारे विश्व का अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर से विश्वास &#8216;पानी-पानी&#8216; हो रहा है। एक ओर जहां इंदौर में [...]]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><img class="alignleft size-full wp-image-2113" alt="रहिमन पानी राखिए बिन पानी सब सून" src="https://www.jmuchhal.com/wp-content/uploads/2002/07/140.jpg" width="311" height="307" /><span class="dropcap">पा</span>नी शब्द पढ़ते ही नईदुनिया के पाठकों को वो जल याद आ जाएगा, जो नल में कभी-कभी आता है और सावन में भी बरस नहीं रहा, लेकिन आज मेरा संकेत रहीम के उस &#8216;<em>पानी</em>&#8216; से नहीं- जिसके बिना &#8216;<em>मोती</em>&#8216; और &#8216;चून&#8217; सून हो जाते हैं, वरन मनुष्य जीवन के चरित्र और ईमान के उस &#8216;<em>पानी</em>&#8216; से है, जिसके ओझल हो जाने से आज सारे विश्व का अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर से विश्वास &#8216;<em>पानी-पानी</em>&#8216; हो रहा है।</p>
<p>एक ओर जहां इंदौर में &#8216;<em>इंद्र</em>&#8216; की अनावृष्टि को मनाने के लिए यज्ञ-कर्म हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अमेरिका में कुछ लालची और लोभी कंपनी मालिकों की &#8216;<em>इंद्रियों</em>&#8216; की अतिवृष्टि ने निवेशकों के खरबों डॉलर की जमा पूंजी को होम करके स्वाहा-सा कर दिया।</p>
<p><b>डो जोंस को आखिर हुआ क्या है</b><b>?</b></p>
<p>10 दिनों तक लगातार गिरने के बाद कल पहली बार न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज का डो जोंस इन्डेक्स उन्मुक्त होकर 488 अंश चढ़ा है, जिससे सबकी सांस में सांस आई है। क्या यह बढ़त स्थायी है या सिर्फ चातक की स्वाति बूंद? ये तो वक्त ही बताएगा, लेकिन इसके पिछले महीनों में जो हुआ, उससे तो पूरा अमेरिका सिहर उठा है। अमेरिका की अर्थव्यवस्था तो पिछले 18 महीनों से सुस्त ही है, उस पर ओसामा के 11 सितंबर के वारों ने आग में घी का काम किया, लेकिन डॉट कॉम और आतंकवाद से ये घाव कुछ अलग हैं, क्योंकि ये अंदरूनी हैं। व्यवस्था की निष्पक्षता, सिस्टम की स्ट्रेंथ और कार्पोरेट गवर्नेंस का विश्व में पाठ पढ़ाने वाले राष्ट्र के खुद के पिछवाड़े में इतनी पोल? ऑडिटर्स, बैंकर्स, कंपनी के ऑफिसर्स और वॉल स्ट्रीट के दलालों की मिलीभगत ने मिलकर ऐसा तांडव मचाया है कि चरमराई आर्थिक परिस्थिति में &#8216;<em>विश्वासघात</em>&#8216; की दोहरी मार से अमेरिका के पूरे शेयर बाजार का मूल्यांकन मार्च 2000 के 17 ट्रिलियन डॉलर से घटकर सिर्फ 10 ट्रिलियन डॉलर रह गया है। 7 ट्रिलियन डॉलर का घाटा यानी भारत की सालाना जीडीपी का 16 गुना। नेस्डैक मार्च 2000 के 5000 इंडेक्स में तो लगभग 75 प्रतिशत की गिरावट आ गई है और 23 जुलाई तक सिर्फ 9 दिनों में डो इंडेक्स 18 प्रतिशत गिर गया था।</p>
<div class="simplePullQuoteRightGolden">7 ट्रिलियन डॉलर का घाटा यानी भारत की सालाना जीडीपी का 16 गुना<span></span></div>
<p>नहीं, बल्कि अमेरिका की अर्थव्यवस्था तो सुधार पर है, 2002 की पहली तिमाही में जीडीपी ने रिकॉर्ड 6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की, ब्याज दर 1.75 प्रतिशत के न्यूनतम स्तर पर है, महंगाई भी नहीं के बराबर है। जो अवयव बिगड़ गया है, वह है कंपनियों के फाइनेंशियल स्टेटमेंट्‌स और उनके सीईओ और मुख्य अधिकारियों की नीयत और अपने अंशधारकों के प्रति जवाबदेही पर से लोगों का विश्वास, जो कि एनरॉन, एंडरसन, वर्ल्डकॉम, एडेलफिया और ऐसी कई नामी-गिरामी कंपनियों के इस साल में &#8216;<em>काले चिट्ठों</em>&#8216; के एक साथ उजागर होने से हिल गया है।</p>
<p><b>पितामह ग्रीनस्पेन उवाच</b></p>
<p>हाल ही में अमेरिकी सांसदों के सामने बोलते हुए फेडरल रिजर्व बैंक के चेयरमैन और अमेरिकी अर्थव्यवस्था के &#8216;<em>पितामह भीष्म</em>&#8216; एलन ग्रीनस्पेन ने इस मद को नया नाम दिया &#8216;इन्फेक्शियस ग्रीड।&#8217; चातुर्मास में किसी संत के प्रवचन जैसे उद्‌गारों में उन्होंने कहा, &#8216;<em>हमारे अधिकांश आर्थिक समुदाय को मानो</em> &#8216;<em>लालच की महामारी</em>&#8216; ने ग्रस्त कर लिया है। ऐसा नहीं है कि आज का मानव पुरानी पीढ़ी के बजाय कुछ ज्यादा लोभी हो गया है, सच तो ये है कि आज उसकी लोभ-लालसा पूर्ति के साधन बहुत बढ़ गए हैं और इन सब साधनों की पंक्ति में सबसे मादक साबित हुए स्टॉक और स्टॉक ऑपशन्स।</p>
<p><b>कनक-कनक ते सौ गुनी</b><b>, </b><b>मादकता अधिकाय</b></p>
<p>90 के दशक में अमेरिका की आर्थिक प्रगति का सर्वोच्च परिचायक था, यहां के स्टॉक मार्केट के कुलांचे और अंशधारकों के स्टॉक्स की बढ़ती कीमत। कंपनियों के सारे मुख्य अधिकारियों के वेतन का मुख्य हिस्सा कंपनी के स्टॉक्स की प्रगति पर आधारित था और उद्देश्य बहुत साफ था। सब अधिकारी मिलकर कंपनी की प्रगति के लिए जी-जान लगाएंगे, जिससे होंगे कंपनी के अच्छे वार्षिक परिणाम और उससे बढ़ेगी स्टॉक की कीमत, जिससे अंशधारक, कर्मचारी और अधिकारी सभी लाभान्वित होंगे। 1995 से 2000 तक का ये &#8216;<em>स्वर्णिम युग</em>&#8216; तो हम सबको याद है। अधिकारियों और कर्मचारियों को तो घटे दरों से भविष्य में कंपनी के स्टॉक्स खरीदने के लिए लाखों स्टॉक ऑप्शन भी प्रदान किए जाते रहे और ये प्रचलन टेक्नालॉजी कंपनियों में सर्वाधिक था, जिसके अधिकांश प्रभाव तो काफी कारगर सिद्ध हुए।</p>
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		<title>वॉल स्ट्रीट पर लहराया तिरंगा</title>
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		<pubDate>Sat, 20 Jul 2002 06:00:11 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[अमेरिका में भारत]]></category>
		<category><![CDATA[अमेरिका में तिरंगा]]></category>
		<category><![CDATA[आईसीआईसीआई बैंक]]></category>
		<category><![CDATA[कारोबार]]></category>
		<category><![CDATA[न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज]]></category>
		<category><![CDATA[भारतीय तिरंगा]]></category>
		<category><![CDATA[वॉल स्ट्रीट]]></category>

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		<description><![CDATA[मंगलवार शाम को जब मैं आईसीआईसीआई बैंक के एनवायएसई (न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज) पर लिस्टिंग होने के उपलक्ष्य में आयोजित समारोह में जा रहा था, जो कि न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज के एतिहासिक ट्रेडिंग फ्लोर पर ही ट्रेडिंग समाप्त होने के बाद सायं 6 बजे रखा गया था, तो एनवायएसई की इमारत के बाहर आईसीआईसीआई बैंक और भारत के तिरंगे को लहराते हुए देखकर मन में बहुत गौरव की अनुभूति हुई। इंडिया इज दि फ्लेवर ऑफ दि मंथ एण्ड कुड वेल बिकम [...]]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><img class="alignleft size-full wp-image-1992" alt="वॉल स्ट्रीट पर लहराया तिरंगा" src="https://www.jmuchhal.com/wp-content/uploads/2002/07/09.jpg" width="311" height="307" /><span class="dropcap">मं</span>गलवार शाम को जब मैं आईसीआईसीआई बैंक के एनवायएसई (न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज) पर लिस्टिंग होने के उपलक्ष्य में आयोजित समारोह में जा रहा था, जो कि न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज के एतिहासिक ट्रेडिंग फ्लोर पर ही ट्रेडिंग समाप्त होने के बाद सायं 6 बजे रखा गया था, तो एनवायएसई की इमारत के बाहर आईसीआईसीआई बैंक और भारत के तिरंगे को लहराते हुए देखकर मन में बहुत गौरव की अनुभूति हुई।</p>
<p><em>इंडिया इज दि फ्लेवर ऑफ दि मंथ एण्ड कुड वेल बिकम दि फ्लेवर ऑफ दि ईयर</em> (भारत इस महीने जुबान पर छाया हुआ है और शायद यह साल भारतवर्षमय हो जाएगा)। ये उद्‌गार व्यक्त किए एनवायएसई के अध्यक्ष जॉस्टन ने। सिर्फ 68 दिनों की तैयारी में आईसीआईसीआई बैंक के एडीआर मंगलवार सुबह से न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज पर सूचीबद्ध हो गए हैं। 175 मिलियन अमेरिकी डॉलर का इश्यू बुक हुआ पर बिल्डिंग के आधार पर लगभग 10 गुना ओवर-सब्स्क्राइब हुआ। हालांकि बैंक ने 175 मिलियन अमेरिकी डॉलर ही अपने पास रखने का फैसला किया है।</p>
<div class="simplePullQuoteRightPerpal">इंडिया इज दि फ्लेवर ऑफ दि मंथ एण्ड कुड वेल बिकम दि फ्लेवर ऑफ दि ईयर<span></span></div>
<p><strong>आईसीआईसीआई की अंतर्राष्ट्रीय बाजार में अपनी पहचान</strong></p>
<p>न्यूयॉर्क के वित्तीय राजनयिक और भारतीय अतिथियों के बीच रात्रिभोज पर अपने उद्‌बोधन में अत्यंत प्रसन्न लग रहे बैंक के कर्णधार मुख्य कार्यकारी अधिकारी के.वी. कामथ ने कहा कि आईसीआईसीआई दुनिया के बाजार में अपनी पहचान बना चुका है और हर भारतीय की जरूरत पूरी करना इसका लक्ष्य है। श्री कामथ के कथन को आगे बढ़ाते हुए बैंक के प्रबंध निदेशक एच.एन. शिनोर ने कहा कि बैंक चार मुख्य कैपिटल (संपत्तियों) के दोहन से आगे बढ़ रही है- मस्तिष्क पूंजी, धन पूंजी, तकनीक पूंजी और द्रुत गति की पूंजी।</p>
<p>श्री कामथ से मैंने पूछा कि एनवायएसई में निवेशक आईसीआईसीआई और आईसीआईसीआई बैंक दोनों के शेयर्स में क्या मूलभूत फर्क करेगा? तो उन्होंने कहा &#8216;जहां आईसीआईसीआई पितृ संस्थान है और एक वित्तीय कंपनी है, वहीं आईसीआईसीआई बैंक एक बैंक के रूप में पहचाना जाएगा। आईसीआईसीआई बैंक इस पूंजी को अपने कारोबार को बढ़ाने और कुछ कंपनियों का अधिग्रहण करने के उपयोग में लेगा। आईबीएन के चिह्न के तहत कारोबार की शुरुआत में भाव 11 अमेरिकी डॉलर पर खुले। एडीआर का भाव दिन में 14.50 डॉलर तक पहुंच गया था। ट्रेडिंग समाप्ति पर यह भाव 14.25 पर था। एक एडीआर शेयर आईसीआईसीआई बैंक के भारत के दो शेयर्स के बराबर है। लिस्टिंग के पहले दिन ही 40 लाख शेयर्स का कारोबार हुआ। ज्ञातव्य है कि आईसीआईसीआई भी छह महीनों पहले ही न्यूयॉर्क में सूचीबद्ध हुआ था और इसके भाव नौ अमेरिकी डॉलर से 42 डॉलर तक जाकर अभी 28 अमेरिकी डॉलर के आसपास हैं। यह देखने लायक था कि 4.30 बजे तक जिस ट्रेडिंग फ्लोर पर गतिविधियों और कागज के कचरे का अम्बार लगा रहता है, वहीं 6.15 बजे एकदम सफाई और शांति थी। पीछे सीएनबीसी के सीधे प्रसारण की रिकॉर्डिंग भी चल रही थी।</p>
<div class="simplePullQuoteLeftOrange">मस्तिष्क पूंजी, धन पूंजी, तकनीक पूंजी और द्रुत गति की पूंजी<span></span></div>
<p>एनवायएसई ट्रेडिंग फ्लोर पर पनीर टिक्का और वैजिटेबल सींक-कबाब का नाश्ता- काफी अजीबोगरीब, लेकिन अच्छा लग रहा था। एनवायएसई के अधिकारियों ने बताया कि इस वर्ष भारत की कई कंपनियों के एनवायएसई में लिस्टिंग की संभावना है। एनवायएसई के अध्यक्ष रिचर्ड ग्रासो भी कुछ समय बाद भारत की यात्रा का कार्यक्रम बना रहे हैं। न्यूयॉर्क में भारत की उच्चायुक्त सुश्री शशि त्रिपाठी भी राष्ट्रपति श्री क्लिंटन की सफल भारत यात्रा से बहुत खुश थीं। उन्होंने मुझसे कहा कि अब तो हम इस यात्रा के बाद भारत की छवि को अमेरिका में बदलने के लिए जी-तोड़ मेहनत करेंगे।</p>
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		<title>&#8216;एनरॉन&#8217; के दिवाले से लाखों की जमा पूंजी नष्ट</title>
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		<pubDate>Sun, 25 Nov 2001 10:24:23 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[अमेरिकी अर्थव्यवस्था]]></category>
		<category><![CDATA[एनरॉन कंपनी]]></category>
		<category><![CDATA[एनरॉन कॉर्पोरेशन]]></category>
		<category><![CDATA[न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज]]></category>
		<category><![CDATA[पॉवर और ऊर्जा कंपनी]]></category>

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		<description><![CDATA[एशिया में ही अमेरिका की 7वीं सबसे बड़ी कंपनी एनरॉन कॉर्पोरेशन चंद महीनों में ही &#8216;बहुत अच्छी कमाई&#8216; से सीधे दिवाला घोषित करने पर मजबूर हो गई। पिछले साल 80 डॉलर तक हुआ एनरॉन का शेयर न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज से असूचीबद्ध कर दिया गया। एनरॉन कंपनी राष्ट्रपति श्री बुश और रिपब्लिकन पार्टी की बहुत बड़ी समर्थक रही है और &#8216;पार्टी फंड&#8216; में उसने लाखों डॉलर दिए हैं। एनरॉन के साथ-साथ उसके ऑडिटर्स ऑर्थर एंडरसन भी कांग्रेस की जांच के घेरे [...]]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><img class="alignleft size-full wp-image-1501" alt="'एनरॉन' के दिवाले से लाखों की जमा पूंजी नष्ट " src="https://www.jmuchhal.com/wp-content/uploads/2012/12/27.jpg" width="311" height="307" />एशिया में ही अमेरिका की 7वीं सबसे बड़ी कंपनी एनरॉन कॉर्पोरेशन चंद महीनों में ही &#8216;<em>बहुत अच्छी कमाई</em>&#8216; से सीधे दिवाला घोषित करने पर मजबूर हो गई। पिछले साल 80 डॉलर तक हुआ एनरॉन का शेयर न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज से असूचीबद्ध कर दिया गया।</p>
<p>एनरॉन कंपनी राष्ट्रपति श्री बुश और रिपब्लिकन पार्टी की बहुत बड़ी समर्थक रही है और &#8216;<em>पार्टी फंड</em>&#8216; में उसने लाखों डॉलर दिए हैं। एनरॉन के साथ-साथ उसके ऑडिटर्स ऑर्थर एंडरसन भी कांग्रेस की जांच के घेरे में आ गए हैं, क्योंकि उन पर ऑडिटर के रूप में अपने &#8216;<em>कर्तव्यों</em>&#8216; का पालन तो दूर, उनको ताक पर रख देने के आरोप है&#8230;। आज पूरे अमेरिका में ओसामा से ज्यादा एनरॉन छाया हुआ है।</p>
<p>भारतवासियों को एनरॉन नाम से काफी परिचय है, क्योंकि एनरॉन कंपनी ने महाराष्ट्र में दाभोल परियोजना के नाम से एक विशाल पॉवर प्लांट लगाया, जो कि भारत में एक प्रोजेक्ट में सर्वाधिक विदेशी निवेश की मिसाल रहा। प्लांट लगाने के पहले से कानून और राजनीतिक विवादों में लिप्त रही एनरॉन की रिबेका मार्क भारत में विदेशी निवेशकों की पहचान बन गईं और प्लांट लगाने के बाद उसकी बिजली की दर और भुगतान का बखेड़ा खड़ा है, लेकिन पिछले महीनों में अमेरिका में जिस तरह एनरॉन जैसी &#8216;<em>ठोस</em>&#8216; कंपनी भी ताश के ढेर के समान ढह गई, उससे तो भारत के हर्षद काल के दिन याद आ गए&#8230;।</p>
<p><b>क्या थी एनरॉन</b><b>?</b></p>
<p>पिछले साल &#8216;एनरॉन&#8217; फॉर्च्यून पत्रिका द्वारा अमेरिका की सबसे बड़ी कंपनियों की सूची फॉर्च्यून-500 में 7वें नंबर पर थी। एनरॉन का वार्षिक कारोबार 100 बिलियन डॉलर का था और उसका मार्केट कॉम्पीटिशन भी 50 बिलियन डॉलर था। टेक्सॉस में ह्यूस्टन शहर में बसी एनरॉन मुख्य एनर्जी (ऊर्जा) से संबंधित कारोबारों में संलग्न थी जिसमें प्राकृतिक गैस, तेल और बिजली का जनरेशन और डिस्ट्रीब्यूशन मुख्य था। एनरॉन के चेयरमैन केनेथ ले काफी पहुंच वाले व्यक्ति थे। 1992 में पहले बुश के चुनाव के समय भी उन्होंने और एनरॉन ने मुक्तहस्त से डोनेशन दिए थे। वैसे भी टेक्सास और एनर्जी व्यवस्था सदा से ही रिपब्लिकन पार्टी के &#8216;करीब&#8217; रहा है।</p>
<div class="simplePullQuoteRightGolden">पिछले महीनों में अमेरिका में जिस तरह एनरॉन जैसी &#8216;<em>ठोस</em>&#8216; कंपनी भी ताश के ढेर के समान ढह गई, उससे तो भारत के हर्षद काल के दिन याद आ गए&#8230;।<span></span></div>
<p>लेकिन कुछ समय से एनरॉन इनके आगे निकल गई थी। उसने ऊर्जा में फ्यूचर्स कॉन्ट्रेक्ट्‌स के बिचौलिए के रूप में भी जोर-शोर से काम करना शुरू कर दिया था। यहां तक कि सन्‌ 2000 में तो अमेरिका की ऊर्जा के सारे वायदे सौदे में से 25 प्रतिशत एनरॉन के जरिये ही थे। इंटरनेट का एनरॉन ने जमकर इस्तेमाल किया और वह दुनिया की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी कहलाने लगी। अब तो ऊर्जा से आगे बढ़कर एनरॉन ने हर तरह के वायदे सौदे शुरू कर दिए, फिर वह चाहे पानी, इस्पात, कागज यहां तक कि मीडिया में एडवरटाइजिंग, स्पेस और इंटरनेट की बैंड-विड्‌थ के भी वह वायदे सौदे करवा रही थी। धंधा जोरों पर था और एनरॉन ह्यूस्टन शहर के मुकुट का ताज था। एनरॉन के 20 हजार से भी अधिक कर्मचारी खुश थे। उनके रिटायरमेंट फंड में भी सर्वाधिक एनरॉन के ही शेयर थे। एनरॉन की ऑडिटर कंपनी थी-आर्थर एंडरसन, जो कि अकाउंटिंग पेशे में &#8216;बिग फाइव&#8217; में से एक है। 85 देशों में उनके 9 बिलियन डॉलर से सालाना बिलिंग में एनरॉन विश्व में उनका दूसरा सबसे बड़ा क्लाइंट था, जो कि ऑडिटिंग के अलावा &#8216;बिजनेस कंसल्टिंग&#8217; के लिए भी एंडरसन के लिए &#8216;सोने के अंडे वाली मुर्गी&#8217; थी।</p>
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