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	<title>Jitendra Muchhal &#124; Jitendra Muchhal Website &#124; J Muchhal &#124; जीतेंद्र मुछाल&#187; बराक ओबामा</title>
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		<title>ओबामा के शपथ ग्रहण समारोह की शुरुआत</title>
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		<pubDate>Sat, 17 Jan 2009 10:59:06 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[व्हाईट हाऊस]]></category>
		<category><![CDATA[44वें राष्ट्रपति]]></category>
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		<category><![CDATA[ओबामा शपथ ग्रहण समारोह]]></category>
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		<description><![CDATA[अमेरिका में बराक ओबामा के 44वें राष्ट्रपति बनने के अवसर पर आयोजित होने वाले शपथ ग्रहण समारोह के कार्यक्रम की शुरुआत शनिवार 17 जनवरी से हो जाएगी। इस समारोह के दौरान तकनीक का अधिकाधिक प्रयोग किया जाएगा और इसके दौरान जोर इस बात पर होगा कि यह आयोजन अधिक से अधिक लोगों के लिए खुला रहे। 1. ओबामा, बिडेन और उनके परिवार ‍फिलाडेल्‍फिया से वॉशिंगटन डीसी की यात्रा रेल से पूरी करेंगे। चमचमाती नीले रंग की पुरानी रेल कार इन [...]]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><img class="alignleft size-full wp-image-2873" alt="ओबामा के शपथ ग्रहण समारोह की शुरुआत" src="https://www.jmuchhal.com/wp-content/uploads/2009/01/JM_2_Obama_Inaugaration.jpg" width="311" height="307" /><span class="dropcap">अ</span>मेरिका में बराक ओबामा के 44वें राष्ट्रपति बनने के अवसर पर आयोजित होने वाले शपथ ग्रहण समारोह के कार्यक्रम की शुरुआत शनिवार 17 जनवरी से हो जाएगी। इस समारोह के दौरान तकनीक का अधिकाधिक प्रयोग किया जाएगा और इसके दौरान जोर इस बात पर होगा कि यह आयोजन अधिक से अधिक लोगों के लिए खुला रहे।</p>
<p><strong>1</strong>. ओबामा, बिडेन और उनके परिवार ‍फिलाडेल्‍फिया से वॉशिंगटन डीसी की यात्रा रेल से पूरी करेंगे। चमचमाती नीले रंग की पुरानी रेल कार इन लोगों को शनिवार को फिला‍डेल्फिया से वॉशिंगटन तक ले जाएगी जो इस बात का प्रतीक होगी कि यह उनके व्हाइट हाउस पहुँचने की यात्रा है। वर्ष 1861 में देश की राजधानी तक पहुँचने के लिए 16वें राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन को 12 दिनों की यात्रा करना पड़ी थी। यह यात्रा सोलहवें और 44वें राष्ट्रपति के बीच समानता को भी स्थापित करेगी।</p>
<p>निर्वाचित राष्ट्रपति बराक ओबामा और उनके परिवार के लोग एक निजी रेल कार &#8216;जॉर्जिया 300&#8242; में सवार होकर राजधानी पहुँचेंगे। पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज एचडब्ल्‍यू बुश और‍ बिल क्लिंटन भी इसकी सवारी कर चुके हैं, जबकि वर्ष 2004 में व्हाइट हाउस की अपनी दावेदारी के लिए सीनेटर जॉन केरी ने इसकी सवारी की थी।</p>
<p>ओबामा परिवार सहित शनिवार 17 जनवरी की सुबह फिला‍डेल्फिया की 30वीं स्ट्रीट से इस पर सवार होंगे और रास्ते में बिलमिंगटन, डेलवारे और बाल्टीमोर में रुकेंगे। बिलमिंगटन में ओबामा निर्वाचित उपराष्ट्रपति जोसेफ आर बिडेन और उनके परिवार को साथ लेंगे। इस रेल के 135 मील लंबे सफर के दौरान लोग रास्ते में मौजूद होंगे और भावी राष्ट्रपति का स्वागत करेंगे।</p>
<div class="simplePullQuoteRightGolden">निर्वाचित राष्ट्रपति बराक ओबामा और उनके परिवार के लोग एक निजी रेल कार &#8216;<em>जॉर्जिया 300</em>&#8216; में सवार होकर राजधानी पहुँचेंगे<span></span></div>
<p>ओबामा और बिडेन परिवारों के साथ राष्ट्रपति के शपथ ग्रहण समारोह समिति द्वारा चुने गए मेहमान भी होंगे जो विभिन्न कार्यक्रमों के दौरान राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के साथ होंगे। गाड़ी अंत में वॉशिंगटन के यूनियन स्टेशन पर रुकेगी, जहाँ ओबामा और बिडेन के शाम करीब सात बजे पहुँचने की संभावना है।</p>
<p><strong>2</strong>. रविवार 18 जनवरी को वॉशिंगटन डीसी में लिंकन मेमोरियल पर एक विशेष समारोह आयोजित किया गया है, जिसे एचबीओ ने आयोजित किया है। यह वक्ताओं और प्रसिद्ध लोगों के प्रदर्शन का कार्यक्रम होगा जो आम लोगों के लिए भी खुला होगा। इस अवसर पर टाइगर वुड्‍स, मार्टिन लूथर किंग तृतीय और हॉलीवुड की हस्तियाँ- जैक ब्लैक, टॉम हैंक्स, डेंजिल वॉशिंगटन, क्वीन लतीफा, स्टीव कैरेल, रोजारियो डॉसन और लॉरा लिनी मौजूद होंगे।</p>
<p>इस कार्यक्रम को एचबीओ केबल ऑपरेटरों के लिए नि:शुल्क प्रसारित करेगा, जिसके दौरान बेयोंस, शकीरा, यूटू, ब्रूस स्प्रिंगस्टीन, स्टीवी वॉन्डर, जोन बोन जोवी, गार्थ ब्रुक्स, रेनी फ्लेमिंग और जॉन लीजेंड अपने गायन की प्रस्तुति देंगे।</p>
<p><strong>3</strong>. सोमवार 19 जनवरी को अमेरिका में मार्टिन लूथर किंग दिवस मनाया जाता है और इस दिन सार्वजनिक अवकाश रहेगा।</p>
<p><strong>4</strong>. ओबामा का शपथ ग्रहण समारोह अब तक का सबसे खुला और सभी के लिए सहज उपलब्ध समारोह होगा। ऐसा अनुमान है कि इसमें 15 लाख से 30 लाख तक लोगों के भाग लेने की संभावना है, जिसको देखते हुए संघीय सरकार ने इसे एक राष्ट्रीय आयोजन घोषित कर दिया है। मौसम संबंधी सूचनाओं के मुताबिक आसमान में बादल छाए रहेंगे और तापमान मिड से लो 30 डिग्री फारेनहाइट तक रहने की संभावना है। लोगों की भारी भीड़ को देखते हुए लोगों से कहा गया है कि वे घर में ही रहें तो बेहतर होगा।</p>
<p><strong>5</strong>. मंगलवार 20 जनवरी को शपथ ग्रहण समारोह के कार्यक्रम इस प्रकार होंगे- सुबह प्रेयर सर्विस होगी और इसके बाद निर्वाचित राष्ट्रपति निवृत्तमान राष्ट्रपति से भेंट करने के लिए व्हाइट हाउस जाएँगे। इसके बाद दोनों शपथ ग्रहण समारोह के लिए साथ-साथ आएँगे।</p>
<p>साढ़े ग्यारह बजे सुबह अमेरिकी राजधानी के पश्चिमी हिस्से में निर्वाचित राष्ट्रपति और निर्वाचित उपराष्ट्रपति और उनके परिवार परम्परागत समारोहों और कार्यक्रमों में भाग लेंगे। इस अवसर पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित होंगे।</p>
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		<title>अमेरिकी चुनाव: विशेष झलकियाँ</title>
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		<pubDate>Wed, 05 Nov 2008 12:32:38 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[व्हाईट हाऊस]]></category>
		<category><![CDATA[अमेरिकी चुनाव]]></category>
		<category><![CDATA[अमेरिकी चुनाव झलकियाँ]]></category>
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		<category><![CDATA[बराक ओबामा]]></category>
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		<description><![CDATA[21 महीनों से चल रहे अमेरिका के सबसे लंबे, बड़े, महँगे और वृहद चुनाव अभियान का आज पटाक्षेप बराक ओबामा की जीत के साथ हो गया। अमेरिका के 44वें राष्ट्रपति पद के लिए हुए इस चुनाव में दोनों ही पार्टियों के उम्मीदवार ऐतिहासिक थे। अश्वेत बराक ओबामा और सबसे अधिक उम्र के जॉन मैक्केन तथा पहली महिला प्रत्याशी सारा पोलिन व मतदाताओं की नजर में देश की बिगड़ी हुई अर्थव्यवस्था इस वक्त का सबसे अहम मुद्दा रही। 60 प्रतिशत से [...]]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><img class="alignleft size-full wp-image-2117" alt="अमेरिकी चुनाव: विशेष झलकियाँ" src="https://www.jmuchhal.com/wp-content/uploads/2008/11/1321.jpg" width="311" height="307" /><span class="dropcap">21</span> महीनों से चल रहे अमेरिका के सबसे लंबे, बड़े, महँगे और वृहद चुनाव अभियान का आज पटाक्षेप बराक ओबामा की जीत के साथ हो गया। अमेरिका के 44वें राष्ट्रपति पद के लिए हुए इस चुनाव में दोनों ही पार्टियों के उम्मीदवार ऐतिहासिक थे। अश्वेत बराक ओबामा और सबसे अधिक उम्र के जॉन मैक्केन तथा पहली महिला प्रत्याशी सारा पोलिन व मतदाताओं की नजर में देश की बिगड़ी हुई अर्थव्यवस्था इस वक्त का सबसे अहम मुद्दा रही। 60 प्रतिशत से अधिक लोगों ने अर्थव्यवस्था को सबसे महत्वपूर्ण पहलू बताया। जॉर्ज बुश के मुद्दे, ईराक और आतंकवाद 10 प्रतिशत लोगों के लिए महत्वपूर्ण थे।</p>
<p><b>फीका हुआ गोरे-काले का भेद</b> : अमेरिका के ठेठ रहवासियों में अभी भी रंगभेद का गहरा प्रभाव है, लेकिन इस बार आर्थिक मुद्दे और बुश प्रशासन की बिगड़ी नीतियों ने गोरे-काले के भेद को भी फीका कर दिया। रोटी, कपड़ा और मकान के सामने और कोई मुद्दा नहीं टिकता। मतदान के दिन पूरे अमेरिका में मौसम सामान्य रहा, जिससे मतदाताओं को काफी आसानी रही।</p>
<div class="simplePullQuoteRightPerpal">बराक ओबामा ने दिन में थोड़ा समय अपने प्रिय खेल बास्केटबॉल खेलने में बिताया। पूरे चुनाव अभियान के दौरान ओबामा लगभग रोजाना थोड़ा समय बास्केटबॉल कोर्ट पर गुजारते थे<span></span></div>
<p><b>मतदान के लिए लगी लंबी लाइन :</b> अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव इतिहास में इतनी भारी तादाद में मतदान ऐतिहासिक है। कई स्थानों पर लोग मतदान के लिए एक घंटे से अधिक समय तक कतार में खड़े रहे। यहाँ पर प्रचलन है कि मतदान की समय सीमा तक जो भी व्यक्ति कतार में खड़े हैं, उन्हें मतदान का अवसर मिलता ही है।</p>
<p><b>चुनाव की पूर्व संध्या पर घर में गमी :</b> चुनाव में एक मार्मिक मोड़ कल रहा, जब ओबामा की 86 वर्षीय नानी मैडेलिन का ठीक चुनाव की पूर्व संध्या पर देहांत हो गया। ओबामा की नानी हवाई में रहती थीं और उनकी बिगड़ती तबीयत के चलते ओबामा 10 दिन पहले अपने चुनाव प्रचार के दौरान समय निकालकर उनसे मिलने हवाई गए थे। ओबामा ने बचपन का काफी समय अपने नाना-नानी के साथ गुज़ारा था। उनकी नानी इस ऐतिहासिक क्षण को तो नहीं देख पाईं, लेकिन डाक से भेजा गया उनका मतदान मान्य रहेगा। बराक ओबामा ने दिन में थोड़ा समय अपने प्रिय खेल बास्केटबॉल खेलने में बिताया। पूरे चुनाव अभियान के दौरान ओबामा लगभग रोजाना थोड़ा समय बास्केटबॉल कोर्ट पर गुजारते थे।</p>
<p><b>टाइम्स स्क्वेयर पर भारी भीड़ :</b> अमेरिका के कई राज्यों में निर्धारित तिथि से पहले वैधानिक रूप से मतदान शुरू हो जाता है। इस बार कई लोगों ने इस व्यवस्था का लाभ उठाया। स्थानीय समयानुसार शाम को जब नतीजों की घोषणा शुरू हो रही थी, तब टाइम्स स्क्वेयर पर भारी भीड़ जमा थी। चारों ओर बड़े टीवी परदों पर सभी प्रमुख टीवी चैनल्स के प्रसारण चल रहे थे, जैसे इंदौर में राजवाड़ा का माहौल हो।</p>
<p><b>डेमोक्रेटिक पार्टी सीनेट में बहुमत के कयास में :</b> राष्ट्रपति चुनाव के साथ अमेरिकी सीनेट के चुनाव भी महत्वपूर्ण हैं। डेमोक्रेटिक पार्टी सीनेट में बहुमत के कयास में है, जिससे व्हाइट हाउस और कांग्रेस दोनों पर उनकी सत्ता हो जाएगी।</p>
<p><b>&#8216;</b><b>वेस्ट विंग</b><b>&#8216; </b><b>के अंश हुए जीवंत :</b> कुछ वर्षों पूर्व अमेरिका के राष्ट्रपति पर आधारित एक चर्चित टीवी सीरियल &#8216;<em>वेस्ट विंग</em>&#8216; के आखिरी अंश मानो इस बार के चुनाव में जीवंत हो गए। वेस्ट विंग में डेमोक्रेटिक पार्टी के और रिपब्लिकन पार्टी के वरिष्ठ दिग्गज मैक्सिकन उम्मीदवार स्नेटर को हराकर राष्ट्रपति चुन लिया जाता है। अंत और भी रोचक है, जब नवनिर्वाचित राष्ट्रपति पार्टियों में सामंजस्य के लिए अपने चुनाव विरोधी को ही देश का विदेशमंत्री मनोनीत कर देता है। क्या ओबामा शासन में अनुभवी मैक्केन को कोई स्थान मिलेगा, वक्त ही बताएगा।</p>
<p><b>बुश- डिक ने बनाई दूरियाँ :</b> राष्ट्रपति बुश और डिक चैनी तो कई दिनों से टीवी और अखबारों से गायब ही हैं। न सिर्फ डेमोक्रेट वरन उनकी रिपब्लिकन पार्टी के ही मैक्केन भी उनसे दूरी बनाए रखना चाहते थे।</p>
<p><b>युवा समुदाय पर छोड़ी छाप :</b> ओबामा ने अपने चुनाव अभियान के लिए रिकॉर्ड 600 बिलियन डॉलर एकत्रित किए। खास बात यह है कि यह राशि उन्होंने चंद धनपतियों और कंपनियों के बजाय 30 लाख लोगों से छोटी-छोटी मात्रा में  जुटाई। ओबामा ने चुनाव अभियान में इंटरनेट का कारगर उपयोग करके युवा समुदाय में अपनी गहरी पहचान बना ली।</p>
<p><b>हनुमानजी ने बेड़ा पार लगाया :</b> ओबामा अपनी जेब में कुछ &#8216;टोटके&#8217; रखते हैं, जिनमें एक छोटे आकार की हनुमान की मू‍‍र्ति भी है। हनुमानजी के मंगलवार के दिन हुए चुनाव ओबामा के लिए सार्थक सिद्ध हुए।</p>
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		<title>बराक ओबामा के लिए आर्थिक एजेंडा</title>
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		<pubDate>Wed, 05 Nov 2008 10:54:00 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
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		<category><![CDATA[अमेरिका में वित्तीय संकट]]></category>
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		<description><![CDATA[सितम्बर की शुरुआत में जब अमेरिका में वित्तीय संकट के चलते एक के बाद एक बड़े बैंक धराशायी होते जा रहे थे तब जॉन मैक्केन ने घोषणा की थी कि वे चाहेंगे कि राष्ट्रपति पद के प्रचार के दौरान होने वाली पहली बहस को निलंबित कर दिया जाए और वॉशिंगटन डीसी लौट जाया जाए। तब उनके पास पूछने के लिए कोई स्पष्ट सवाल या संकट को सुलझाने के लिए कोई योजना नहीं थी। उस समय ओबामा के पास भी इस [...]]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><img class="alignleft size-full wp-image-1720" alt="बराक ओबामा के लिए आर्थिक एजेंडा" src="https://www.jmuchhal.com/wp-content/uploads/2008/11/132.jpg" width="311" height="307" /><span class="dropcap">सि</span>तम्बर की शुरुआत में जब अमेरिका में वित्तीय संकट के चलते एक के बाद एक बड़े बैंक धराशायी होते जा रहे थे तब जॉन मैक्केन ने घोषणा की थी कि वे चाहेंगे कि राष्ट्रपति पद के प्रचार के दौरान होने वाली पहली बहस को निलंबित कर दिया जाए और वॉशिंगटन डीसी लौट जाया जाए। तब उनके पास पूछने के लिए कोई स्पष्ट सवाल या संकट को सुलझाने के लिए कोई योजना नहीं थी। उस समय ओबामा के पास भी इस संकट से बाहर निकलने के लिए कोई स्पष्ट नीति नहीं थी लेकिन तब भी उन्होंने पूरी गंभीरता और धैर्य के साथ बहस में हिस्सा लिया था और पूरे देश पर अपनी छाप छोड़ी थी। इसके बाद ओबामा ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और आर्थिक मुद्‍दों पर उनके प्रचार की बढ़त लगातार बढ़ती रही। उस समय केवल चुनाव प्रचार था और कुछ भी नहीं लेकिन तब भी 60 फीसदी से अधिक मतदाता आर्थिक चुनौतियों और वित्तीय मंदी को देश के सामने सबसे बड़ी चुनौती मानते थे। उस समय भी न केवल अमेरिका वरन सारी दुनिया को ओबामा से उम्मीद थी कि वे वित्तीय व्यवस्था को सामान्य बनाकर लोगों में विश्वास बहाल करेंगे।</p>
<p><strong>वित्तीय क्षेत्र की दशा सुधारने का काम</strong></p>
<p>राष्ट्रपति पद के लिए चुने जाने के कुछेक दिनों बाद ही ओबामा को विश्व के 20 शीर्ष देशों की 20 नवंबर को राष्ट्रपति जॉर्ज बुश द्वारा बुलाई गई वित्तीय शिखर बैठक में भाग लेने का मौका मिलेगा। चूँकि इस समय वित्तीय क्षेत्र की दशा सुधारने का काम जोरों पर है ऐसे में अपने वित्त मंत्री की नियुक्ति संबंधी घोषणा उनकी पहली महत्वपूर्ण घोषणा हो सकती है। हालाँकि अपने प्रचार के दौरान वे वारेन बफे जैसी दिग्गज वित्तीय हस्तियों से सलाह लेते रहे हैं।</p>
<div class="simplePullQuoteRightGreen">भारतीयों ने पूरे दिलोदिमाग और सभी तरह से ओबामा के प्रचार में मदद की है और उन्होंने भी अमेरिका में भारतीयों के योगदान को बारम्बार स्वीकार‍ किया<span></span></div>
<p>अपनी नीतिगत घोषणाओं के जरिए ओबामा को निम्न और मध्यम वर्ग की अधिसंख्‍यक जनता के कर कम करने के प्रबल समर्थक के रूप में जाना जाता है। संपन्न तबके के लिए वे अधिक करों के पक्षधर रहे हैं लेकिन समय बताएगा कि वे आगे क्या करेंगे। इराक से फौजों की नियोजित लेकिन चरणबद्ध वापसी के हिमायती ओबामा इसे अंजाम देकर प्रत्येक महीने 10 अरब डॉलर से अधिक खर्च पर अंकुश लगा सकते हैं। अमेरिका के आवासीय क्षेत्र में वर्तमान संकट की जड़ें होने का कारण ओबामा समझते हैं कि अर्थव्यवस्था को फिर से पटरी पर लाने के लिए आवासीय क्षेत्र में विश्वास बहाल करना होगा। अब तक ओबामा ने यह दर्शाया है कि वे आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ नहीं हैं लेकिन वे समर्थ हैं कि ऐसे मामलों पर वे अपने पास ऐसे विशेषज्ञ लोगों को रख सकते हैं जो कि उन्हें बहुमूल्य सलाह दे सकते हैं।</p>
<p>वे बढ़ती हुई ऊर्जा स्वतंत्रता के पक्षधर रहे हैं और अमेरिका में वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों में निवेश को बढ़ा सकते हैं। यह भी उम्मीद की जाती है कि वे देश के बुनियादी ढाँचे में भी निवेश को बढ़ावा दे सकते हैं। इन सब बातों में समय लगेगा और यह सब रातोरात नहीं हो सकता है। पर चूँकि अब सीनेट में भी डेमोक्रेटिक पार्टी का बहुमत है, इसलिए उम्मीद की जाती है कि ओबामा इस अपूर्व अवसर और ऐतिहासिक जनादेश का उपयोग अमेरिका को आर्थिक शक्ति के रूप में स्थापित करने और संपन्नता को बढ़ाने में करेंगे। भारतीयों ने पूरे दिलोदिमाग और सभी तरह से ओबामा के प्रचार में मदद की है और उन्होंने भी अमेरिका में भारतीयों के योगदान को बारम्बार स्वीकार‍ किया और माना कि भारत अमेरिकी व्यावसायिक संबंधों में उनकी अहम भूमिका रही है। पेप्सिको की इंदिरा नूई उनकी करीबी कारोबारी सलाहकार रही हैं और वे खुद भी परमाणु करार के प्रबल समर्थक रहे हैं जिससे दोनों देशों को लाभ होगा। हालाँकि इसके साथ ही ओबामा अपने चुनाव प्रचार के दौरान करों में कमी के साथ अमेरिका में नौकरी के अवसर पैदा करने, कड़े कराधान कानूनों के जरिये आउटसोर्सिंग नौकरियों पर रोक लगाने की बात करते रहे हैं। इन पर कितना अमल होगा और किस हद तक तथा इससे भारतीय आउटसोर्सिंग उद्योग पर कितना असर पड़ेगा, यह तो भविष्य के गर्भ में है। पर हाल में भारत समेत सभी वैश्विक शेयर बाजारों द्वारा बेहतरी प्रदर्शित करने से स्पष्ट है कि नए प्रशासन और नई नीतियों का असर दिखने लगा है। यह भी उम्मीद की जाती है कि रिपब्लिकन प्रशासन में तेल-ऊर्जा लॉबी की मजबूत पकड़ कमजोर होगी और निकट भविष्य में हमें फिर एक बार तेल प्रति बैरल 150 डॉलर तक के स्तर पर देखने को नहीं मिलेगा।</p>
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