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	<title>Jitendra Muchhal &#124; Jitendra Muchhal Website &#124; J Muchhal &#124; जीतेंद्र मुछाल&#187; बिल क्लिंटन</title>
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		<title>आठ साल की उपलब्धियों का अंबार</title>
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		<pubDate>Fri, 24 Nov 2000 10:01:53 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[व्हाईट हाऊस]]></category>
		<category><![CDATA[अमेरिका राष्ट्रपति]]></category>
		<category><![CDATA[बिल क्लिंटन]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रपति चुनाव]]></category>
		<category><![CDATA[हिलेरी क्लिंटन]]></category>

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		<description><![CDATA[अमेरिका के 43वें राष्ट्रपति का नाम अभी भी उतना ही गुमनाम है, जैसा शायद दिनों, हफ्तों या महीनों पहले था। लेकिन, 42वें राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के कार्यकाल की अंतिम सुबह 20 जनवरी बहुत नजदीक है। उनकी पत्नी हिलेरी सीनेट में चुनी जा चुकी हैं और शायद यह हिलेरी के व्यक्तिगत राजनीतिक जीवन की सिर्फ पहली पायदान है, चरम नहीं। इस पूरे राष्ट्रपति चुनाव में बिल क्लिंटन का साया दोनों उम्मीदवारों के कद से इतना बड़ा था कि अमेरिका में तीसरी [...]]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><img src="https://www.jmuchhal.com/wp-content/uploads/2000/11/jm_l_BillC_eSQ.jpg" alt="आठ साल की उपलब्धियों का अंबार" width="311" height="307" class="alignleft size-full wp-image-3091" /><span class="dropcap">अ</span>मेरिका के 43वें राष्ट्रपति का नाम अभी भी उतना ही गुमनाम है, जैसा शायद दिनों, हफ्तों या महीनों पहले था। लेकिन, 42वें राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के कार्यकाल की अंतिम सुबह 20 जनवरी बहुत नजदीक है। उनकी पत्नी हिलेरी सीनेट में चुनी जा चुकी हैं और शायद यह हिलेरी के व्यक्तिगत राजनीतिक जीवन की सिर्फ पहली पायदान है, चरम नहीं। इस पूरे राष्ट्रपति चुनाव में बिल क्लिंटन का साया दोनों उम्मीदवारों के कद से इतना बड़ा था कि अमेरिका में तीसरी बार राष्ट्रपति न बन सकने के कानून पर नागरिक कई बार दुःखी हो रहे थे।</p>
<p>गोर और बुश एक-दूसरे से नहीं, वरन क्लिंटन के कद से लड़ रहे थे। आखिर क्या गजब शख्सियत हैं बिल क्लिंटन, जिनके करिश्मे और जादुई व्यक्तित्व से कोई नहीं बच पाया। चाहे वह वियतनाम में रहने वाली एक अधेड़ महिला हो या नायला गांव की गृहिणियां, अफ्रीका के आदिवासी या चीन के उद्योगपति और या फिर हो मोनिका लुइंस्की। और कार्यकाल भी कितना प्रभावशाली- 100 सालों में सर्वाधिक रोजगार, सर्वाधिक आर्थिक प्रगति, घाटे के बजट की धरोहर से सर्वाधिक सरप्लस, उपलब्धियों की फेहरिस्त इतनी लंबी है कि कितनी छवि छोड़ जाएंगे बिल। महाभियोग आरोप के आक्रामक सवालों को निहत्था झेलता विश्व का सबसे शक्तिशाली व्यक्ति, हिलेरी क्लिंटन की जीत में पूर्णतः शरीक होकर भी कुछ-कुछ विलग से उनके पति, अमेरिका की सामान्य जनता के दिलों का सरताज नेता, दुनिया में फैले आपसी मनमुटाव को मिटाने में जूझता एक राजनयिक, पलों की मुलाकात में लोगों के साथ मानो सदियों पुराने संबंध स्थापित कर पाने की क्लिंटन की योग्यता बेजोड़ है।</p>
<p>भीड़ में भी हर एक को यही लगता है कि क्लिंटन उन्हीं से बात कर रहे हैं। क्लिंटन ने पिछले दिनों चुनावों के पहले जीवन शैली पत्रिका &#8216;<em>एस्क्वायर</em>&#8216; के मिखाइल पतेरनीति के साथ लंबी अंतरंग बातचीत की और उसी के मुख्य सारांश <em>&#8216;एस्क्वायर&#8217;</em> से साभार। यह जानकारी आपको करीब लाएगी 20वीं शताब्दी के पार अपनी सुर्ख छाप छोड़ने वाले व्यक्ति के-</p>
<div class="simplePullQuoteRightPerpal">क्लिंटन का कार्यकाल अमेरिका की आर्थिक प्रगति के स्वर्णिम युग के रुप में याद किया जाएगा<span></span></div>
<p><b>सवाल : राष्ट्रपति पद ने आपको कितना बदला</b><b>? </b></p>
<p><em>क्लिंटन</em> : मैं सोचता हूं कि राष्ट्रपति पद के कार्यकाल ने मुझे बहुत कुछ बदला है। इस दौरान मैं ज्यादा काबिल बना हूं, मुझमें ज्यादा समझदारी आई है। मैं जब राष्ट्रपति कार्यालय में आया था तब मुझमें जो योग्यताएं थीं, उसके मुकाबले आज जब मैं इस कार्यालय से विदा हो रहा हूं, स्वयं को ज्यादा परिपक्व महसूस कर रहा हूं। सिर्फ राजनीतिक तौर पर ही नहीं, व्यक्तिगत रूप से भी मुझमें परिपक्वता आई है। मैं अपनी गलतियों को समझ सकता हूं और अनुभवी के तौर पर काम कर सकता हूं।</p>
<p><b>सवाल : आपने अपने कार्यकाल में क्या नया दिया है</b><b>? </b></p>
<p><em>क्लिंटन</em> : सबसे ज्यादा जरूरी तो यह है कि आपके पूर्ववर्तियों ने इस पद को क्या नया दिया है। अब आप चुनाव प्रचार को ही देखें तो अल गोर तथा जॉर्ज बुश दोनों प्रचार में लगे रहे, पर मैं एक सामान्य अमेरिकी की तरह ही इससे जुड़ा। सरकार का कामकाज सफलता से चलाना ही राष्ट्रपति की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है और इसे मैंने ठीक से निभाया। विश्व अर्थव्यवस्था में निजी संस्थानों की भागीदारी और देश में औद्योगिक युग का प्रवेश मेरे कार्यकाल में ही हुआ, नए रोजगारों का सृजन, जनता की आवाज की सुनवाई और सबसे महत्वपूर्ण यह रहा कि विश्व में अमेरिकी अर्थव्यवस्था को महसूस किया गया और अमेरिकियों ने निजी जीवन में भी इसे स्वीकारा है।</p>
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		<title>बिल, हम दिल दे चुके सनम!</title>
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		<pubDate>Sat, 25 Mar 2000 10:04:28 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[व्हाईट हाऊस]]></category>
		<category><![CDATA[बिल क्लिंटन]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रपति क्लिंटन]]></category>
		<category><![CDATA[हम दिल दे चुके सनम]]></category>

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		<description><![CDATA[इन पंक्तियों के लिखते समय राष्ट्रपति बिल क्लिंटन अपनी दक्षिण-एशिया यात्रा के अंतिम चरण, यानी इस्लामाबाद पहुंच चुके होंगे। कैसी रही क्लिंटन की भारत यात्रा? क्या इसे एक &#8216;स्वार्थभरी मैत्री&#8216; का हाथ बढ़ाना कहा जाए- या फिर बिल की &#8216;बॉडी लैंग्वेज&#8216; को ही उनकी असली भावना का परिचायक माना जाए। यात्रा के पहले तो चर्चा में सिर्फ दो ही पहलू थे- तैयारी और सुरक्षा का लवाजमा, जिसने पूरे भारत को गिरफ्त में ले लिया था; और ऐसी अद्‌भुत तैयारी की [...]]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><img class="alignleft size-full wp-image-3094" title="बिल, हम दिल दे चुके सनम!" alt="" src="https://www.jmuchhal.com/wp-content/uploads/2000/03/JM_M_BillCnayla.jpg" width="311" height="307" /><span class="dropcap">इ</span>न पंक्तियों के लिखते समय राष्ट्रपति बिल क्लिंटन अपनी दक्षिण-एशिया यात्रा के अंतिम चरण, यानी इस्लामाबाद पहुंच चुके होंगे। कैसी रही क्लिंटन की भारत यात्रा? क्या इसे एक &#8216;<em>स्वार्थभरी मैत्री</em>&#8216; का हाथ बढ़ाना कहा जाए- या फिर बिल की &#8216;<em>बॉडी लैंग्वेज</em>&#8216; को ही उनकी असली भावना का परिचायक माना जाए। यात्रा के पहले तो चर्चा में सिर्फ दो ही पहलू थे- तैयारी और सुरक्षा का लवाजमा, जिसने पूरे भारत को गिरफ्त में ले लिया था; और ऐसी अद्‌भुत तैयारी की <em>&#8216;मीडिया हाइप&#8217;</em> पर छींटाकशी भी की गई मानो- राष्ट्रपति क्लिंटन नहीं वरन्‌ शहंशाह-ए-आलम क्लिंटन भारत पधार रहे हों।</p>
<p>पर नायला के गांव में थिरकती महिलाओं से रूपेन कत्याल के पिता तक; मौर्या शेरेटन में गलीचे बेचने वाले दुकानदार से संसद के हर &#8216;<em>हाथ मिला चुके</em>&#8216; सांसद तक, चंद्राबाबू नायडू से लेकर अटलबिहारी तक शायद कोई भी ऐसा नहीं है जिसके दिलो-दिमाग पर बिल क्लिंटन अपनी अमिट छाप नहीं छोड़ गए हों।</p>
<p><strong>बिल सारी दुनिया में मशहूर </strong></p>
<p>बिल सदा से ही अपने &#8216;<em>पब्लिक इंटरएक्शन</em>&#8216; में बेजोड़ रहे हैं; सामने वाले हर व्यक्ति से उसी के धरातल पर बात करना, मिलना, मुस्कुराना, हाथ मिलाना, गले लगना और उनकी उन्मुक्त भाषण शैली- ये सब उनके आकर्षक व्यक्तित्व का एक अभिन्न और सशक्त अंग हैं, जिसने बिल को सारी दुनिया में मशहूर बना रखा है। लेकिन गौरतलब यह भी है कि इन सभी इंसानी हावभाव के पीछे एक राष्ट्राध्यक्ष भी दैदीप्यमान है। और न सिर्फ &#8216;<em>सिटीजन क्लिंटन</em>&#8216; वरन &#8216;<em>प्रेसिडेंट क्लिंटन</em>&#8216; भी भारत के लोकतंत्र, प्रगति, सांस्कृतिक धरोहर, प्रौद्योगिकी, सशक्त संयम को करीब से देखकर प्रभावित हुए हैं।</p>
<div class="simplePullQuoteRight">बिल सदा से ही अपने ‘पब्लिक इंटरएक्शन‘ में बेजोड़ रहे हैं। सामने वाले हर व्यक्ति से उसी के धरातल पर बात करना, मिलना, मुस्कुराना, हाथ मिलाना, गले लगना उनके आकर्षक व्यक्तित्व का एक अभिन्न और सशक्त अंग हैं<span></span></div>
<p>यह भी निर्विवाद है कि आज के बदलते सामरिक और आर्थिक परिवेश में अमेरिका को भी भारत से अच्छे संबंधों की उतनी ही जरूरत है, जितनी हमें अमेरिका की। अमेरिका के अन्य देशों से &#8216;<em>रिश्ते</em>&#8216; सदा से ही वर्तमान और भविष्य के परिवेश के सांचे में ढले रहते हैं। पर हमारे सामने भी तो आज यह अवसर है कि अमेरिका से &#8216;पोजीशन ऑफ सेन्स&#8217; के संबंध बनाएं और बढ़ाएं, और उसका फायदा उठाएं। इस मामले में चंद्रबाबू को दाद देनी होगी जिन्होंने चंद घंटों में ही क्लिंटन और अमेरिका पर ऐसा प्रभाव छोड़ा है। चंद्रबाबू यात्रा का &#8216;फॉलो-अप&#8217; भी पुरजोर होगा।</p>
<p>सामरिक दृष्टि से अब अमेरिका में &#8216;<em>भारत-पाकिस्तान</em>&#8216; कभी भी एक सांस में नहीं बोले जाएंगे। क्लिंटन सीटीबीटी के प्रवर्तक के रूप में आए जरूर थे, पर हालात को भली-भांति समझकर अपने सामने ही कश्मीर में नृशंस हत्याकांड देखकर वो भी भारत के &#8216;<em>स्टांस</em>&#8216; का कारण समझ गए हैं। तभी तो संसद का उनका भाषण एक सलाहकार के शब्दों में ज्यादा था, और &#8216;<em>प्रेशराइजर</em>&#8216; कम। क्लिंटन आज पाक में मुशर्रफ से क्या कहेंगे, और आने वाले दिनों में अमेरिका, भारत, पाकिस्तान के रुख क्या रहेंगे, अभी कहा नहीं जा सकता। पर इसके पहले क्लिंटन की भारत यात्रा को मैं तो सिर्फ अटलजी के शब्दों में &#8216;<em>समराइज</em>&#8216; करता हूं कि &#8216;<em>हम तो आपको याद रखेंगे ही, आशा है आप भी हमें याद रखेंगे।</em>&#8216;</p>
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		<title>लागा चुनरी में दाग</title>
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		<pubDate>Mon, 15 Feb 1999 10:16:55 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[व्हाईट हाऊस]]></category>
		<category><![CDATA[कैथलीन विली]]></category>
		<category><![CDATA[पोला जोन्स]]></category>
		<category><![CDATA[बिल क्लिंटन]]></category>
		<category><![CDATA[बिल-हिलेरी]]></category>
		<category><![CDATA[मोनिका लेविंस्की]]></category>

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		<description><![CDATA[एक ओर जहां बिल क्लिंटन जैसा लोकप्रिय नेता और प्रभावी राष्ट्रपति अमेरिका में दशकों बाद आया था, लेकिन वहीं क्लिंटन के रूमानी अंदाज ने उनका नाम कई महिलाओं के साथ जोड़ दिया है। जब-जब क्लिंटन का नाम लिया जाएगा, ये नाम भी साथ में जुड़े रहेंगे। आज विश्व के सर्वाधिक शक्तिशाली देश के राष्ट्राध्यक्ष होने के बावजूद बिल क्लिंटन की गरिमा का दामन उनके चरित्र के धब्बों से मलिन है। और ऐसा भी नहीं है कि क्लिंटन पर ये &#8216;आरोप&#8216; [...]]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><img src="https://www.jmuchhal.com/wp-content/uploads/1999/02/jm_n_bill_monica.jpg" alt="लागा चुनरी में दाग" width="311" height="307" class="alignleft size-full wp-image-3099" /><span class="dropcap">ए</span>क ओर जहां बिल क्लिंटन जैसा लोकप्रिय नेता और प्रभावी राष्ट्रपति अमेरिका में दशकों बाद आया था, लेकिन वहीं क्लिंटन के रूमानी अंदाज ने उनका नाम कई महिलाओं के साथ जोड़ दिया है। जब-जब क्लिंटन का नाम लिया जाएगा, ये नाम भी साथ में जुड़े रहेंगे। आज विश्व के सर्वाधिक शक्तिशाली देश के राष्ट्राध्यक्ष होने के बावजूद बिल क्लिंटन की गरिमा का दामन उनके चरित्र के धब्बों से मलिन है। और ऐसा भी नहीं है कि क्लिंटन पर ये &#8216;<em>आरोप</em>&#8216; उनके राष्ट्रपति बनने के बाद से शुरू हुए। क्लिंटन तो अपने अरकंसास में गवर्नर के चुनाव वाले समय से ही &#8216;<em>छेड़छाड़</em>&#8216; की चर्चा में बने रहे हैं।</p>
<p>कुछ लोग कहते हैं कि क्या ये पश्चिमी सभ्यता में आम बात नहीं है? और फिर क्या ये सब बिल-हिलेरी का निजी मामला नहीं है? सार्वजनिक पद पर आसीन व्यक्तियों से अनुकरणीय आचार की आशा तो हर समाज करता है। पश्चिम में बात ढंकी रहने तक लोग इस ओर ध्यान नहीं देते, लेकिन कैनेडी-मर्लिन मोनरो की तरह क्लिंटन के &#8216;<em>किस्से</em>&#8216; सिर्फ खुसर-पुसर न रहकर कई बार क्लिंटन को विवादों और आरोपों के कठघरे में खड़ा कर देते हैं। लेकिन मजे की बात तो यह है कि सब कुछ जगजाहिर होने के बावजूद क्लिंटन आज भी अपने पद पर आसीन हैं। ये कमाल है, उनकी व्यक्तित्व वाचालता का, अमेरिका की जोरदार वित्तीय स्थिति का, जिसके रहते कोई राष्ट्रपति नहीं बदलना चाहता, फिर भले ही राष्ट्रपति ने कितना ही संगीन अपराध क्यों न किया हो! और अमेरिका में क्लिंटन के व्यक्तिगत जीवन की गतिविधियों से ज्यादा शोर सार्वजनिक तौर पर क्लिंटन के झूठ बोलने और जनता को गुमराह करने का है।</p>
<p><b>जैनिफर फ्लाअरस</b></p>
<p>लिटिल रॉक, अरकंसास में एक बैंड ऑर्केस्ट्रा की सदस्य कॉनी हामज़े ने पहली बार बिल पर आरोप लगाया था कि नवंबर 1991 में अरकंसास के गवर्नर बिल क्लिंटन ने उनसे छेड़छाड़ की थी। ये मामला तो रफा-दफा हो गया था, पर इसके ठीक बाद &#8216;<em>स्टॉर</em>&#8216; अखबार ने 16 जनवरी, 1992 को ये खबर प्रकाशित की- अरकंसास की पांच महिलाओं ने बिल क्लिंटन पर &#8216;<em>संबंधों</em>&#8216; का आरोप लगाया, जिसमें से एक जैनिफर फ्लाअरस भी थी। जैनिफर ने क्लिंटन के साथ एक रात बिताने का रहस्योद्‌घाटन किया था। मामला काफी समय तक गरम रहा, पर निष्कर्ष कुछ नहीं निकला। हां, आने वाले हर किस्से में पुराने किस्सों का जिक्र जुड़ता रहा।</p>
<p><b>पोला जोन्स</b></p>
<p>8 मई, 1991 में लिटिल रॉक, अरकंसास के होटल एक्सेलसियर की लॉबी में पोला जोन्स किसी सम्मेलन के सदस्यों को &#8216;<em>नेम-टेग</em>&#8216; बांट रही थीं। वहां गवर्नर बिल क्लिंटन ने उन्हें देखा और एक सुरक्षा कर्मचारी को पोला को अपने कमरे में बुलाने को कहा। कमरे में बिल ने पोला को तथाकथित तौर पर &#8216;<em>ओरल सेक्स</em>&#8216; के लिए अश्लील आमंत्रण दिया। ये ही मानहानि का आरोप लगाया पोला जोन्स ने जिसे कि कोर्ट ने तो उनके खिलाफ फैसला सुनाकर उनकी याचिका खारिज कर दी पर बिल क्लिंटन ने बगैर अपनी कोई गलती स्वीकारे या मांफी मांगे &#8211; 8,50,000 डॉलर में पोला जोन्स से मामला <em>&#8216;सेटल&#8217;</em> कर लिया। पोला ने अपनी शिकायत वापस ले ली और बिल ने उन्हें <em>&#8216;आय एम सॉरी&#8217;</em> नहीं कहा।</p>
<div class="simplePullQuoteRight">क्लिंटन के विवादित चरित्र में कैथलीन विली की कहानी की भी अहम भूमिका है<span></span></div>
<p><b>कैथलीन विली</b></p>
<p>क्लिंटन के विवादित चरित्र में कैथलीन विली की कहानी की भी अहम भूमिका है। 51 वर्षीय विली व्हाइट हाउस की पूर्व स्वैच्छिक कर्मचारी का नाम उस समय सुर्खियों में आया जब पोला जोन्स ने क्लिंटन पर अपने आरोपों को मजबूत करने के लिए कहा था कि उसने विली को एक दिन ओवल ऑफिस (अमेरिकी राष्ट्रपति का कार्यालय) से अत्यधिक खुशी की मुद्रा में बाहर आते हुए देखा था। पोला जोन्स मामले में अपनी 29 नवंबर, 1993 को अपनी गवाही देते हुए विली ने कहा कि जब वह राष्ट्रपति के ऑफिस में व्हाइट हाउस में वैतनिक नौकरी मांगने गई तो उसे राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने अचानक अपनी बांहों में भर लिया तथा उसका चुम्बन ले लिया। इसके बाद वे उसके हाथों को अपने गुप्तांगों पर ले गए।</p>
<p>बाद में विली ने ग्रांड जूरी के समक्ष भी अपने बयान दर्ज कराए। मार्च 15 को विली ने एक टीवी चैनल को दिए गए साक्षात्कार के दौरान राष्ट्रपति क्लिंटन के ऊपर लगाए गए आरोपों को सार्वजनिक किया। क्लिंटन ने विली के आरोपों को कभी स्वीकार नहीं किया। व्हाइट हाउस ने तमाम दस्तावेज भी पेश किए जिसमें विली के आरोपों को झूठा तथा मनगढ़ंत सिद्ध करने के लिए प्रयास किए गए।</p>
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