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	<title>Jitendra Muchhal &#124; Jitendra Muchhal Website &#124; J Muchhal &#124; जीतेंद्र मुछाल&#187; मध्यप्रदेश</title>
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		<title>मप्र के डॉक्टरों का अमेरिका में सम्मेलन कैलाश विजयवर्गीय का प्रवासी डॉक्टरों को न्योता</title>
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		<pubDate>Tue, 07 Aug 2007 12:01:28 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[इंदौर और इंदौरी]]></category>
		<category><![CDATA[कैलाश विजयवर्गीय]]></category>
		<category><![CDATA[चिकित्सा क्षेत्र]]></category>
		<category><![CDATA[मध्यप्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[मध्यप्रदेश में निवेश]]></category>
		<category><![CDATA[मप्र के डॉक्टर]]></category>

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		<description><![CDATA[मध्यप्रदेश की सरकार और नागरिक आप सभी की प्रगति से गौरवान्वित है। अपनी मातृभूमि से इतने वर्षों से दूर होने के बावजूद अपने राज्य के लिए आपका प्रेम और आत्मीयता धन्य है। राज्य शासन आपका मध्यप्रदेश में हृदय से स्वागत करता है। स्वास्थ्य और चिकित्सा के क्षेत्र में मध्यप्रदेश में निवेश और विकास की असीम संभावनाएँ हैं और सरकार आपको हर संभव सुविधाएँ और सहयोग देने के लिए तत्पर है। मध्यप्रदेश के सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने न्यूजर्सी के [...]]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><img class="alignleft size-full wp-image-2106" alt="मप्र के डॉक्टरों का अमेरिका में सम्मेलन कैलाश विजयवर्गीय का प्रवासी डॉक्टरों को न्योता " src="https://www.jmuchhal.com/wp-content/uploads/2007/08/125.jpg" width="311" height="307" /><span class="dropcap">म</span>ध्यप्रदेश की सरकार और नागरिक आप सभी की प्रगति से गौरवान्वित है। अपनी मातृभूमि से इतने वर्षों से दूर होने के बावजूद अपने राज्य के लिए आपका प्रेम और आत्मीयता धन्य है। राज्य शासन आपका मध्यप्रदेश में हृदय से स्वागत करता है। स्वास्थ्य और चिकित्सा के क्षेत्र में मध्यप्रदेश में निवेश और विकास की असीम संभावनाएँ हैं और सरकार आपको हर संभव सुविधाएँ और सहयोग देने के लिए तत्पर है।</p>
<p>मध्यप्रदेश के सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने न्यूजर्सी के अटलांटिक सिटी ट्रंप प्लाजा होटल में आयोजित मध्यप्रदेश के मेडिकल कॉलेज से पढ़े डॉक्टरों के सम्मेलन में यह उद्-गार व्यक्त किए। विजयवर्गीय ने मध्यप्रदेश के सभी डॉक्टरों को आगामी अक्टूबर में होने वाले मध्यप्रदेश निवेश सम्मेलन में &#8216;<em>राज्य अतिथि</em>&#8216; के रूप में आमंत्रित किया। हर वर्ष अगस्त के पहले सप्ताहांत में अमेरिका में बसे मध्यप्रदेश के प्रवासी डॉक्टर और उनके परिवार का तीन दिवसीय सम्मेलन होता है।</p>
<div class="simplePullQuoteRight">इंग्लैंड और भारत से डॉक्टर इस आयोजन के लिए विशेष रुप से आए थे<span></span></div>
<p>कोई 20 वर्षों पूर्व छोटे से रूप में इंदौर और ग्वालियर मेडिकल कॉलेज के सम्मेलन शुरू हुए थे। पिछले चार सालों से डॉ. राजेश काकानी तथा अन्य डॉक्टरों के प्रयासों से मध्यप्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों का सम्मेलन एक साथ होना शुरू हुआ । इस आयोजन ने अब स्थायी रूप ले लिया है। इस बार लगभग 200 लोग सम्मेलन में शरीक हुए, जिसमें अमेरिका, कनाडा, इंग्लैंड और भारत से डॉक्टर इस आयोजन के लिए विशेष रुप से आए थे। पारिवारिक माहौल में मनोरंजन और पारम्परिक खान-पान का सभी ने आनंद उठाया। इंदौर, ग्वालियर, भोपाल, जबलपुर, रायपुर और रीवा के मेडिकल कॉलेजों को इस वर्ष से औपचारिक तौर पर &#8216;<em>मप्र मेडिकल कॉलेजेस् अलुमनी एसोसिएशन ऑफ नार्थ अमेरिका</em>&#8216; में सम्मिलित कर लिया गया है।</p>
<p>इस वर्ष के मुख्य आयोजक (और संस्था की नामावली में &#8216;ग्रामसेवक&#8217;) थे इंदौर के डॉ. अनिल शर्मा। इंदौर के ही डॉ. मदन पटेल का योगदान भी उल्लेखनीय था। एक ओर जहाँ अमेरिका में 30-40 वर्षों से बसे मध्यप्रदेश के डॉ. राधू अग्रवाल, डॉ. पराशर, डॉ. महेश गुप्ता, डॉ. शर्मा सम्मेलन में मौजूद थे, वहीं दूसरी ओर युवा पीढ़ी की भी उपस्थिति थी। कार्यक्रम में एक दिन पूरे समय कैलाश विजयवर्गीय भी उपस्थित थे और उन्होंने सभी डॉक्टरों और उनके परिजनों के साथ समय बिताया। मनोरंजन संध्या में डॉक्टरों और उनके परिवारों ने कैलाशजी के साथ गीत-संगीत का आनंद लिया। अगले वर्ष के आयोजन के लिए कैलिफोर्निया में डिज्नी, लॉस एंजिल्स का नाम प्रस्तावित है।</p>
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		<title>अमेरिका में बताई मप्र की प्रगति</title>
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		<pubDate>Mon, 21 May 2007 11:51:31 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[इंदौर और इंदौरी]]></category>
		<category><![CDATA[अमेरिका मप्र]]></category>
		<category><![CDATA[कैलाश विजयवर्गीय]]></category>
		<category><![CDATA[ग्लोबल इन्वेस्टर्स मीट]]></category>
		<category><![CDATA[मध्यप्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[मध्यप्रदेश में निवेश]]></category>
		<category><![CDATA[शिवराजसिंह चौहान]]></category>

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		<description><![CDATA[मध्यप्रदेश में निवेश और विकास की संभावनाओं को प्रचारित करने के लिए मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान के नेतृत्व में आए मंत्री और सचिव स्तर के दल का शनिवार और रविवार को न्यूयॉर्क में अंतिम पड़ाव था। दोनों ही दिन विभिन्न आयोजनों में चौहान ने निवेशकों और अमेरिका में बसे मध्यप्रदेश के मूल निवासियों के बीच प्रदेश में चल रहे विकास कार्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला और उन्हें मध्यप्रदेश में निवेश के लिए आमंत्रित किया। चौहान के साथ पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल [...]]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><img class="alignleft size-full wp-image-2071" alt="अमेरिका में बताई मप्र की प्रगति" src="https://www.jmuchhal.com/wp-content/uploads/2007/05/123.jpg" width="311" height="307" /><span class="dropcap">म</span>ध्यप्रदेश में निवेश और विकास की संभावनाओं को प्रचारित करने के लिए मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान के नेतृत्व में आए मंत्री और सचिव स्तर के दल का शनिवार और रविवार को न्यूयॉर्क में अंतिम पड़ाव था। दोनों ही दिन विभिन्न आयोजनों में चौहान ने निवेशकों और अमेरिका में बसे मध्यप्रदेश के मूल निवासियों के बीच प्रदेश में चल रहे विकास कार्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला और उन्हें मध्यप्रदेश में निवेश के लिए आमंत्रित किया। चौहान के साथ पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर और मध्यप्रदेश के सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भी सभी सभाओं में भाग लिया। योरप और अमेरिका की इस यात्रा का आयोजन मध्यप्रदेश शासन और एफआईसीसीआई के संयुक्त प्रयासों से किया गया था।</p>
<p>चौहान ने अपने उद्-बोधन में बताया कि इस वर्ष के अंत में 26 और 27 अक्टूबर को भोपाल में मध्यप्रदेश से संबंधित &#8216;<em>ग्लोबल इन्वेस्टर्स मीट</em>&#8216; का आयोजन किया जा रहा है। इसमें भाग लेने आए सभी मेहमानों को राजकीय अतिथि का दर्जा दिया जाएगा और उनकी पूरी व्यवस्था मध्यप्रदेश सरकार करेगी।</p>
<div class="simplePullQuoteRight">25 करोड़ रुपए से ऊपर के सभी प्रोजेक्ट &#8216;मेगा प्रोजेक्ट&#8217; की श्रेणी में गिने जाएँगे और उनके ऊपर स्वयं मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में बैठक में निर्णय लिया जाएगा<span></span></div>
<p>न्यूयॉर्क के हारवर्ड क्लब में चौहान ने कहा कि राज्य में प्रतिदिन 25 किलोमीटर नई सड़क बन रही है। पिछले वर्ष 6 करोड़ पेड़ लगाए गए थे और इस वर्ष का लक्ष्य 10 करोड़ पेड़ लगाना है। उनके कार्यकाल में 3 हजार 150 मेगावॉट बिजली के उत्पादन की क्षमता बढ़ी है। 25 करोड़ रुपए से ऊपर के सभी प्रोजेक्ट &#8216;मेगा प्रोजेक्ट&#8217; की श्रेणी में गिने जाएँगे और उनके ऊपर स्वयं मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में बैठक में निर्णय लिया जाएगा।</p>
<p>मप्र बिरला समूह के चेयरमैन राजेन्द्र लोढ़ा ने भी प्रदेश में निवेश के अपने समूह के सुखद अनुभव का ब्योरा देते हुए सभी को मध्यप्रदेश में निवेश के लिए विचार करने पर जोर दिया। मध्यप्रदेश की प्रगति पर एक दृश्य-श्रव्य प्रस्तुति भी उपस्थित लोगों को काफी पसंद आयी। भोपाल के निकट एक आईटी पार्क के लिए राजीव कौल से अनुबंध पर भी हस्ताक्षर पर आदान-प्रदान हुआ। &#8216;<em>मध्यप्रदेश सेंटर</em>&#8216; के रूप में सेंट लुईस शहर में दफ्तर शुरू किया जाएगा जिसकी संभाल वहाँ के डॉ. व्यास और स्वयंसेवक करेंगे और राज्य शासन उसका दैनिक खर्च वहन करेगा।</p>
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		<title>अमेरिका में मध्यप्रदेश के डॉक्टरों का सम्मेलन</title>
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		<pubDate>Tue, 09 Aug 2005 06:45:43 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[इंदौर और इंदौरी]]></category>
		<category><![CDATA[मध्यप्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[मध्यप्रदेश के डॉक्टर]]></category>
		<category><![CDATA[महात्मा गाधी मेडिकल कॉलेज इंदौर]]></category>
		<category><![CDATA[शब-ए-मालवा]]></category>

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		<description><![CDATA[4 से 7 अगस्त 2005 को मेनहटन से करीब 100 मील दूर न्यूयॉर्क राज्य के सुरम्य हडसन वैली रिसोर्ट में मानो अपना मध्यप्रदेश उतर आया था। मौका था- इंदौर, ग्वालियर, भोपाल और मध्यप्रदेश के अन्य मेडिकल कॉलेजों में पढ़े और वर्तमान में अमेरिका-कनाडा में कार्यरत डॉक्टरों और उनके परिवारों के वार्षिक सम्मेलन का। महात्मा गाधी मेडिकल कॉलेज, इंदौर और गजरा राजा मेडिकल कॉलेज, ग्वालियर से पढ़े और अमेरिका में बसे डॉक्टर्स यूं तो करीब बीस सालों से वार्षिक तौर पर [...]]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><img src="https://www.jmuchhal.com/wp-content/uploads/2005/08/172.jpg" alt="17" width="311" height="307" class="alignleft size-full wp-image-3233" /><span class="dropcap">4</span> से 7 अगस्त 2005 को मेनहटन से करीब 100 मील दूर न्यूयॉर्क राज्य के सुरम्य हडसन वैली रिसोर्ट में मानो अपना मध्यप्रदेश उतर आया था। मौका था- इंदौर, ग्वालियर, भोपाल और मध्यप्रदेश के अन्य मेडिकल कॉलेजों में पढ़े और वर्तमान में अमेरिका-कनाडा में कार्यरत डॉक्टरों और उनके परिवारों के वार्षिक सम्मेलन का।</p>
<p>महात्मा गाधी मेडिकल कॉलेज, इंदौर और गजरा राजा मेडिकल कॉलेज, ग्वालियर से पढ़े और अमेरिका में बसे डॉक्टर्स यूं तो करीब बीस सालों से वार्षिक तौर पर अमेरिका या कनाडा के विभिन्न स्थानों पर मिलते रहते हैं। ग्वालियर से पढ़े डॉ. सतीश आनंद और इंदौर से पधारे डॉ. राजेश काकानी के प्रयासों से 2003 में नियाग्रा फाल्स में पहली बार इंदौर-ग्वालियर का मिला-जुला मिलन समारोह हुआ। तब से इस वार्षिक मिलन को एक सामूहिक और वृहद रूप देकर मध्यप्रदेश के सारे मेडिकल कॉलेजों के डॉक्टर्स का पारिवारिक मिलन संयुक्त कर लिया गया है। अधिकांश की सुविधा को देखते हुए इसे अगस्त माह के पहले सप्ताहांत पर निर्धारित कर लिया गया है।</p>
<p>पूर्व छात्र-छात्रा मिलन के अलावा इस समूह की यह भी विशेषता है कि संप्रदाय, राजनीति और &#8216;<em>किस्सा कुर्सी का</em>&#8216; से दूर रहते हुए हर वर्ष यह समूह अपने आने वाले वर्षों के वार्षिक समारोह के मुख्य आयोजक मनोनीत कर लेता है। मजे की बात यह है कि मुख्य आयोजक को ऑर्गनाइजिंग सेक्रेटरी नहीं बल्कि &#8216;<em>ग्राम सेवक</em>&#8216; की उपाधि दी जाती है।</p>
<p>आने वाले वार्षिक सम्मेलन की रूप रेखा और प्रावधान इन्हीं मनोनीत प्रतिनिधियों के होते हैं। इस वर्ष के मिलन के ग्राम सेवक थे इंदौर के मूल निवासी डॉ. राजेश काकानी। उनके साथ के डॉक्टर कार्यकर्ताओं के मार्गदर्शन और सहयोग से ही ये आयोजन इतना सफल रहा।</p>
<div class="simplePullQuoteLeftRed">शब-ए-मालवा को जीवंत करने के लिए संगीत संध्या भी आयोजित थी, जिसमें इंदौर मूल के कलाकार कुमार सुनील मुंगी की संगीत निशा आयोजित की गई थी<span></span></div>
<p><strong>समागम का मुख्य उद्देश्य</strong></p>
<p>आत्मीयता और प्रेम से सराबोर इस समागम में सभी का मुख्य उद्देश्य था- एक दूसरे से परिवार सहित मिलना, हाल-चाल जानना और अपने बीते दिनों की सुनहरी यादों में खो जाना। और जहां इंदौरी और मध्यप्रदेश वालों का कोई मिलन हो, तो फिर भला गाना-बजाना और इंदौरी खाना दूर कैसे रह सकता है। इस सुदूर होटल में भी दाल-बाटी से लेकर मालपुआ और पोहे-सेंव जैसे सारे परम्परागत इंदौरी भोज का तीन दिनों तक मानो सुरुचिपूर्ण &#8216;<em>फूड फेस्टीवल</em>&#8216; चल रहा था, जिसका सभी ने तबीयत से आनंद उठाया। शब-ए-मालवा को जीवंत करने के लिए संगीत संध्या भी आयोजित थी, जिसमें इंदौर मूल के कलाकार कुमार सुनील मुंगी की संगीत निशा आयोजित की गई थी। आनंद और उल्लास के माहौल में देर रात तक गाने बजाने के बावजूद इन्हीं डॉक्टर्स ने मिलन समारोह की एक सुबह चिकित्सा में हो रहे नए शोध के &#8216;<em>कंटीन्यूइंग एजुकेशन</em>&#8216; में बिताई।</p>
<p>अनुमान है कि सिर्फ इंदौर से पढ़े हुए ही शायद अमेरिका में 400 से अधिक डॉक्टर्स होना चाहिए, फिर ग्वालियर, भोपाल और राज्य के दूसरे कॉलेजों से और। सम्मेलन की पुस्तिका में मध्यप्रदेश के अमेरिका में बसे जिन भी डॉक्टर्स की सूचना उपलब्ध थी, उनकी डायरेक्टरी भी प्रकाशित की गई। मूलतः मध्यप्रदेश से आने वाले डॉक्टर्स गोया 1950 या उससे कुछ पहले के दशक से अमेरिका में आ रहे हैं। 1960 और 1970 के दशकों में यह अपने चरम पर था। 1990 के मध्य तक आते-आते अमेरिका के निवासी कानून में परिवर्तन और बेहत सख्ती के कारण मध्यप्रदेश और भारत से डॉक्टर्स का आना कुछ कम हो गया है।</p>
<p>सम्मेलन में 1960 के दशक से भी कुछ डॉक्टर्स थे और सबसे &#8216;<em>कनिष्ठ</em>&#8216; डॉक्टर्स 1994-95 के आसपास के थे। इनमें से अधिकांश डॉक्टर्स ने अपने कार्यक्षेत्रों में बहुत नाम और समृद्धि कमाई है। और ये डॉक्टर्स अपनी मेहनत, समर्पण और काबिलियत से अमेरिका के चिकित्सा जगत में शीर्ष स्थानों तक पहुंचे हैं। आर्थिक और पेशेवर प्रगति के चरम पर होने और इतने वर्षों में अमेरिका में रहने के बावजूद इनकी सादगी, मिलनसारिता और इंदौरी अपनापन पूरी तरह बरकरार है, जो वाकई काबिले तारीफ है। कुल मिलाकर कोई 80 डॉक्टर्स के परिजनों सहित कोई 225 लोग इस मिलन में अमेरिका और कनाडा के सभी प्रांतों से शरीक हुए। इनमें बहुमत इंदौर और उसके बाद ग्वालियर मेडिकल कॉलेज के पूर्व छात्रा-छात्राओं का था। इनमें से तीन डॉक्टर्स तो पहले 17 वर्षों से अनवरत्‌ अमेरिका में ग्वालियर मेडिकल कॉलेज के मिलन समारोह में शरीक हो रहे हैं।</p>
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		<title>इस धूल को तरसते हैं हम !</title>
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		<pubDate>Wed, 01 Dec 1999 06:11:27 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[इंदौर और इंदौरी]]></category>
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		<description><![CDATA[धुआं उगलते टेम्पो, सड़क के नाम पर सिर्फ एक रास्ता, गड्‌ढों और &#8216;दचकों&#8217; भरा सफर (यानी सफर तय करना हो हिंदी में लेकिन यात्रा के अंत तक सफर हो अंग्रेजी का)। इंदौर और मध्यप्रदेश के क्या हाल हो गए हैं। &#8216;सड़क&#8216; तो जैसे भूगोल की किताब में मीलों तय करने के बजाय सीधे इतिहास की किताबों के पन्ने में खंडहरों की तरह दफन हो गई है। अभी तक तो सिर्फ दोपहिया वाहन चालक ही मुंह पर अंतरिक्षमय, जैन साधुसम कुछ [...]]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><img class="alignleft size-full wp-image-1996" alt="इस धूल को तरसते हैं हम ! " src="https://www.jmuchhal.com/wp-content/uploads/1999/12/15.jpg" width="311" height="307" /><span class="dropcap">धु</span>आं उगलते टेम्पो, सड़क के नाम पर सिर्फ एक रास्ता, गड्‌ढों और <em>&#8216;दचकों&#8217;</em> भरा सफर (यानी सफर तय करना हो हिंदी में लेकिन यात्रा के अंत तक सफर हो अंग्रेजी का)। इंदौर और मध्यप्रदेश के क्या हाल हो गए हैं। &#8216;<em>सड़क</em>&#8216; तो जैसे भूगोल की किताब में मीलों तय करने के बजाय सीधे इतिहास की किताबों के पन्ने में खंडहरों की तरह दफन हो गई है। अभी तक तो सिर्फ दोपहिया वाहन चालक ही मुंह पर अंतरिक्षमय, जैन साधुसम कुछ लगा कर रखते थे, परंतु यहां तो मैंने पलासिया चौराहे पर ट्रैफिक पुलिस मैन को भी वह पहने हुए देखा। तो अब जनता ही नहीं, वरन्‌ प्रशासन के अंग भी इसे अपनी नियति मानकर स्वीकार कर चुके हैं। और तो और, अपने मित्र जे.पी. से मिला, पांच मिनट की मुलाकात में ढेरों बार खांसी। पूछने पर हताश होकर बोला, ये तो यार अब इंदौर में रहने वाले हर व्यक्ति, जो स्कूटर-साइकिल पर घूमता हो, उसको होना तय है।</p>
<p>सिर्फ दो ही इलाज हैं। या तो दिनभर ऑफिस के बाहर निकलो नहीं या फिर सिर्फ एयरकंडीशंड गाड़ी में घूमो, अमूमन यह नामुमकिन है। यह तो रहा रहवासी होने के दुःख-दर्द का नजारा। वहीं अमेरिका के &#8216;<em>स्वस्थ</em>&#8216; माहौल से आते ही परिवार सहित शादी के चल समारोह में मैं जब शरीक हुआ, तो बरात और घोड़ी और &#8216;<em>राष्ट्रीय नौशाद</em>&#8216; बैंड के साथ-साथ &#8216;थिरकने&#8217; का भी अवसर प्राप्त हुआ- &#8216;<em>मेरे देश की धरती सोना उगले&#8217;, &#8216;होहोऽऽ&#8230;.निंबुड़ा निंबुड़ा</em>&#8216; और फिर तोरण द्वार पर बजने वाला वो गीत, जिसका कॉपीराइट पूरे भारत के हर बैण्ड के पास है- &#8216;<em>बहारों फूल बरसाओ</em>&#8216;- इन धुनों को सुन कर जो दिल को ठंडक पहुंचती है, उसका अंदाजा सिर्फ अनिवासी ही लगा सकते हैं, जिन्हें ये बैंड, बरात, घोड़ी नसीब ही नहीं होते।</p>
<div class="simplePullQuoteLeftOrange">न्यूयॉर्क में महीने में सिर्फ एक बार औपचारिकतावश जूते साफ करने की आदत से मेरे मुंह से अनायास ही निकल गया। जीजाजी शायद समझ नहीं पाएंगे। पर ‘इस धूल को कितना तरसते हैं हम।’<span></span></div>
<p><strong>इस धूल को कितना तरसते हैं हम !</strong></p>
<p>अपने भाई, जीजी-जीजाजी के साथ बरात चलने के पहले आधा-पौन घंटा <em>&#8216;डांस&#8217;</em> और &#8216;<em>फुगड़ी</em>&#8216; करने के बाद जब औरों की तरह मैंने भी अपने जूतों को देखा, जो श्यामवर्ण होकर भी धूल-मिट्टी की परत से श्वेतमय हो चले थे तो अनायास ही दूसरों के मुंह से निकल पड़ा &#8216;<em>उफ</em>&#8216; कितनी धूल उड़ती है यहां पर, जूते की पॉलिश खराब हो गई। वहीं न्यूयॉर्क में महीने में सिर्फ एक बार औपचारिकतावश जूते साफ करने की आदत से मेरे मुंह से अनायास ही निकल गया। जीजाजी शायद समझ नहीं पाएंगे। पर &#8216;<em>इस धूल को कितना तरसते हैं हम।</em>&#8216;</p>
<p>ये वो धूल-मिट्टी है, जिसने अमेरिका में साफ मोजे-जूते पहनने वाले मेरे पांवों से पिछले साल सीधे न्यूयॉर्क के प्लेन से उतरकर ब्रज-वृंदावन में पांच-सात कोस की गिरिराज परिक्रमा लगवा दी, जबकि पूरा मार्ग कंकड़, कीचड़, गोबर और धूल-मिट्टी से सराबोर था। एक नजर में वही धूल-मिट्टी है जो पांव में छाले और फेफड़े में दमा कर देती है और दूसरी नजर में वही ब्रज रज और मातृभूमि की मिट्टी आस्था और श्रद्धाभरे पांवों को कोमल मरहम-सा सहला देती है। शायद फर्क इसीलिए है कि &#8216;<em>इस धूल को बहुत तरसते हैं हम।</em>&#8216; सहस्राब्दी की ढलान पर खड़े हुए कभी-कभी डर भी लगता है कि कहीं यह मिट्टी गरीबी और गड़बड़ी की &#8216;<em>गर्द</em>&#8216; में न बदल जाए। वैसे, अपने राग और रस को बरकरार रख पाए तो इस &#8216;<em>रज</em>&#8216; को, सारी दुनिया को अपने बस में करने की अद्‌भुत क्षमता है। तभी तो हम जैसे गृहविरही अनिवासी पुलक और श्रद्धा से यह कह पाते हैं कि &#8216;<em>इस धूल को बहुत तरसते हैं हम!</em>&#8216;</p>
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		<title>एक स्कूल के नब्बे साल</title>
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		<pubDate>Sun, 01 Nov 1987 06:38:06 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
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		<category><![CDATA[मध्यप्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[श्री माधवराव सिंधिया]]></category>
		<category><![CDATA[संस्कृत श्लोक]]></category>
		<category><![CDATA[सिंधिया पब्लिक स्कूल]]></category>
		<category><![CDATA[सिंधिया स्कूल]]></category>

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		<description><![CDATA[ऋषि गालब की तपस्थली पर, बसे हुए अविराम, पुण्य तीर्थ, हे ज्ञान तीर्थ, हे विद्या के धाम, तुमको विनत्‌ प्रणाम।&#8217; विशाल सभागार में पियानो के साथ एक स्वर होकर प्राचार्य, शिक्षकगण और सभी छात्र पहले संस्कृत श्लोक, फिर अंगरेजी प्रार्थना और फिर हिंदी में वंदन गीत के साथ हर दिन के विद्योपार्जन की शुरुआत करते हैं। सभागार के बीचोंबीच दीवार पर विद्यालय का चिह्न-सूर्य और शेषनाग अंकित हैं। उसके ठीक नीचे लिखा है विद्यालय का ध्रुववाक्य &#8216;सा विद्या या विमुक्तये।&#8217; [...]]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: center;"><img class="alignleft size-full wp-image-2053" alt="एक स्कूल के नब्बे साल " src="https://www.jmuchhal.com/wp-content/uploads/1992/10/105.jpg" width="311" height="307" />ऋषि गालब की तपस्थली पर,</p>
<p style="text-align: center;">बसे हुए अविराम,</p>
<p style="text-align: center;">पुण्य तीर्थ, हे ज्ञान तीर्थ,</p>
<p style="text-align: center;">हे विद्या के धाम,</p>
<p style="text-align: center;">तुमको विनत्‌ प्रणाम।&#8217;</p>
<p>विशाल सभागार में पियानो के साथ एक स्वर होकर प्राचार्य, शिक्षकगण और सभी छात्र पहले संस्कृत श्लोक, फिर अंगरेजी प्रार्थना और फिर हिंदी में वंदन गीत के साथ हर दिन के विद्योपार्जन की शुरुआत करते हैं। सभागार के बीचोंबीच दीवार पर विद्यालय का चिह्न-सूर्य और शेषनाग अंकित हैं। उसके ठीक नीचे लिखा है विद्यालय का ध्रुववाक्य &#8216;सा विद्या या विमुक्तये।&#8217;</p>
<p>मध्यप्रदेश ही नहीं, वरन्‌ समूचे भारत में विद्यालयीन शिक्षा के सर्वश्रेष्ठ संस्थानों में ग्वालियर के सिंधिया स्कूल का नाम अग्रगण्य है। पब्लिक स्कूल पद्धति पर आधारित लड़कों का यह विद्यालय 1 नवंबर 1987 को अपनी स्थापना की 90वीं जयती उपराष्ट्रपति डॉ. शंकरदयाल शर्मा के मुख्य आतिथ्य में मना रहा है।</p>
<div class="simplePullQuoteRightPerpal">मध्यप्रदेश ही नहीं, वरन्‌ समूचे भारत में विद्यालयीन शिक्षा के सर्वश्रेष्ठ संस्थानों में ग्वालियर के सिंधिया स्कूल का नाम अग्रगण्य है<span></span></div>
<p>ग्वालियर के ऐतिहासिक दुर्ग पर लगभग 110 एकड़ के क्षेत्र में बसे इस विद्यालय की स्थापना के प्रेरक ग्वालियर राज्य के तत्कालीन शासक स्वर्गीय महाराजा माधवराव सिंधिया थे। सन्‌ 1897 में यह विद्यालय &#8216;<em>सरदार स्कूल</em>&#8216; के नाम से शुरू किया गया था, राजाओं, सरदारों ओर जागीरदारों के पुत्रों के लिए ताकि वे किशोरावस्था में ही अनुशासन और पाबंदी का जीवन व्यतीत करना सीख सकें। यह विद्यालय सिंधिया एज्युकेशन सोसायटी के तत्वावधान में शुरू किया गया था। उसी समिति द्वारा ग्वालियर शहर में &#8216;<em>सिंधिया कन्या विद्यालय</em>&#8216; नामक लड़कियों का भी एक आवासीय विद्यालय संचालित किया है।</p>
<p>सन्‌ 1933 में समिति ने यह निर्णय लिया कि विद्यालय को सार्वजनिक स्वरूप दिया जाए- तब इसका नाम सरदार स्कूल से बदलकर &#8216;सिंधिया स्कूल&#8217; रखा गया। शहर में लगभग 300 फुट की ऊंचाई पर बसे ग्वालियर दुर्ग के ऐतिहासिक अवशेषों की देखरेख और मरम्मत के बाद उन्हें छात्रावास और विद्यालय परिसर का प्रारूप दिया गया। विद्यालय में पढ़ रहे देश-विदेश के लगभग 750 छात्र, समस्त शिक्षक और उनके परिवार और अन्य कर्मचारियों को मिलाकर सिंधिया स्कूल के लगभग 2 हजार लोगों का एक परिवार दुर्गपर आवास करता है।</p>
<p>सिंधिया स्कूल में तीसरी कक्षा से लेकर बारहवीं तक शिक्षा प्रदान की जाती है। विद्यालय में दाखिले के लिए एक परीक्षा होती है। सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकंडरी एज्युकेशन, नई दिल्ली द्वारा निर्देशित पाठ्‌यक्रम का विद्यालय में पालन किया जाता है। पब्लिक स्कूल प्रणाली में किताबी शिक्षा के अलावा अन्य गतिविधियों में छात्र के संपूर्ण विकास पर बल दिया जाता है। सिंधिया स्कूल में छात्र कई खेल व क्रीड़ाएं जैसे तैराकी, घुड़सवारी, क्रिकेट, फुटबॉल, हॉकी, टेनिस, स्क्वैश, जिमनास्टिक्स, गोल्फ, मुक्केबाजी, योग, एथलेटिक्स, टेबल टेनिस, बॉस्केटबॉल आदि खेलने के अवसर प्राप्त करता है।</p>
<p>लगभग 750 विद्यार्थियों का स्वाभाविक तौर पर वर्गीकरण करना आवश्यक है। इसलिए छात्रों को शिक्षा और आवास की दृष्टि से दो वर्गों में बांटा गया है। कक्षा तीसरी से छठी तक जूनियर वर्ग और कक्षा सातवीं से बारहवीं का समावेश सीनियर वर्ग में किया गया है। जूनियर वर्ग के छात्र तीन छात्रावासों में रहते हैं- जनकोजी, दत्ताजी व कनेरखेड़। उसी प्रकार सीनियर वर्ग के छात्रों को 9 छात्रावासों में बांटा गया है- जयाजी, रणोजी, महादजी, जीवाजी, शिवाजी, माधव, जयप्पा, ज्योतिबा व दौलत। सभी छात्रावासों के नाम सिंधिया राजवंश से संबंधित व्यक्तियों पर रखे गए हैं। सिंधिया स्कूल का &#8216;अस्ताचल&#8217;, खुला नाट्‌य मंच और वहां कर कम्प्यूटर सेंटर इसके विशिष्ट आकर्षण हैं।</p>
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