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	<title>Jitendra Muchhal &#124; Jitendra Muchhal Website &#124; J Muchhal &#124; जीतेंद्र मुछाल&#187; राष्ट्रपति चुनाव</title>
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		<title>हिलैरी क्लिंटन को भारतीय समुदाय का समर्थन</title>
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		<pubDate>Mon, 25 Jun 2007 11:53:21 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[अमेरिका में भारत]]></category>
		<category><![CDATA[अमेरिका]]></category>
		<category><![CDATA[डेमोक्रेटिक पार्टी]]></category>
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		<category><![CDATA[राष्ट्रपति चुनाव]]></category>
		<category><![CDATA[हिलैरी क्लिंटन]]></category>

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		<description><![CDATA[रविवार की रात न्यूयॉर्क के आलीशान शेरटन होटल के बॉल रूम में अमेरिका में बसे भारतीय समुदाय के प्रमुख व्यवसायी, डॉक्टर और गणमान्य नागरिकों ने डेमोक्रेटिक पार्टी के टिकट पर राष्ट्रपति पद की दावेदार हिलैरी क्लिंटन के समर्थन में आयोजित भोज में हिस्सा लिया। अपने उद्‍बोधन में हिलैरी क्लिंटन ने अमेरिका में भारतीय समुदाय के योगदान और भारत-अमेरिका के बहुआयामी रिश्तों पर जोर दिया। इस कार्यक्रम के मुख्‍य आयोजक थे होटल व्यवसायी और क्लिंटन परिवार के घनिष्ठ मित्र संतसिंह चटवाल। [...]]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><img class="alignleft size-full wp-image-1702" alt="हिलैरी क्लिंटन को भारतीय समुदाय का समर्थन" src="https://www.jmuchhal.com/wp-content/uploads/2007/06/123.jpg" width="311" height="307" /><span class="dropcap">र</span>विवार की रात न्यूयॉर्क के आलीशान शेरटन होटल के बॉल रूम में अमेरिका में बसे भारतीय समुदाय के प्रमुख व्यवसायी, डॉक्टर और गणमान्य नागरिकों ने डेमोक्रेटिक पार्टी के टिकट पर राष्ट्रपति पद की दावेदार हिलैरी क्लिंटन के समर्थन में आयोजित भोज में हिस्सा लिया।</p>
<p>अपने उद्‍बोधन में हिलैरी क्लिंटन ने अमेरिका में भारतीय समुदाय के योगदान और भारत-अमेरिका के बहुआयामी रिश्तों पर जोर दिया। इस कार्यक्रम के मुख्‍य आयोजक थे होटल व्यवसायी और क्लिंटन परिवार के घनिष्ठ मित्र संतसिंह चटवाल। हालाँकि बिल क्लिंटन कार्यक्रम में मौजूद नहीं थे।</p>
<p>अपने गरिमापूर्ण भाषण में हिलैरी ने अमेरिका के मुख्‍य आंतरिक विषय स्वास्थ्य सेवा, अर्थव्यवस्था और जनता के लिए प्रतिबद्ध शासन की चर्चा की। वहीं दूसरी ओर उन्होंने अमेरिका की विश्व में एक मित्र और मददगार राष्ट्र के रूप में छवि को वापस स्थापित करने के लिए अपना संकल्प दोहराया। उन्होंने भारत की महिला राष्ट्रपति बनने की संभावना का उल्लेख और स्वागत किया।</p>
<div class="simplePullQuoteRightGolden">कार्यक्रम में डेमोक्रेटिक पार्टी के कई प्रमुख नेता भी मौजूद थे। भारतीय अमेरिका समुदाय में दीपक चोपड़ा और डॉ. राणावत भी उपस्थित थे<span></span></div>
<p>हिलैरी के भाषण के शुरू और अंत में 1250 से अधिक भारतीय समुदाय के लोगों ने खड़े होकर उनका अभिवादन किया और भारत के नाम के उल्लेख पर बार-बार तालियों से स्वागत किया। हिलैरी रोधम क्लिंटन का स्वागत करते हुए संतसिंह चटवाल ने कहा कि क्लिंटन परिवार और भारतीय समुदाय तथा भारत के रिश्ते बहुत पुराने और गहरे हैं। किसी भी चुनाव प्रत्याशी के लिए भारतीय समुदाय की ओर से यह पहला और अपने आप में सबसे बड़ा आयोजन था।</p>
<p>हिलैरी क्लिंटन का परिचय चटवाल के पुत्र विक्रम चटवाल ने दिया। पूरे अमेरिका से भारतीय इस कार्यक्रम के लिए आए थे। भारत से भी हिलैरी और क्लिंटन समर्थक गणमान्य व्यक्ति कार्यक्रम में शरीक थे। उनमें प्रमुख थे जी समूह के सुभाष चंद्रा, हिंदुजा और केन्द्रीय मंत्री प्रफुल्ल पटेल। पटेल कार्यक्रम के कुछ पहले निकल गए थे। कार्यक्रम में डेमोक्रेटिक पार्टी के कई प्रमुख नेता भी मौजूद थे। भारतीय अमेरिका समुदाय में दीपक चोपड़ा और डॉ. राणावत भी उपस्थित थे।</p>
<p>पीले रंग की पोषाक और गले में बड़े मोतियों की माला पहने हिलैरी हर एक व्यक्ति से काफी आत्मीयता से हाथ मिला रही थीं और उनके समर्थन के लिए धन्यवाद व्यक्त कर रही थीं। बीच-बीच में संत चटवाल ‘<em>खास</em>’ मित्रों का हिलैरी को थोड़ा लंबा परिचय दे रहे थे। जिन चुनिंदा व्यक्तियों को हिलैरी क्लिंटन के साथ हाथ मिलाने और व्यक्तिगत तस्वरी खिंचवाने का भी अनूठा अवसर मिला, उस कतार में खड़े होकर बहुत करीब से हिलैरी क्लिंटन को चंद पलों के लिए देखने का अवसर मिला। अमेरिका में चुनाव प्रक्रिया के दौरान इस तरह के ‘<em>डोनेशन डिनर</em>’ का काफी प्रचलन है। कल रात के भोज में प्रति सीट 1000 डॉलर के अनुमान से भारतीय समुदाय के हिलैरी क्लिंटन के समर्थकों ने अपना ‘योगदान’ दिया था। आयोजन में लगभग 10 से 15 लाख डॉलर (4 से 5 करोड़ रुपए) हिलैरी क्लिंटन के चुनाव फंड के लिए जमा हुए।</p>
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		<title>आठ साल की उपलब्धियों का अंबार</title>
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		<pubDate>Fri, 24 Nov 2000 10:01:53 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[व्हाईट हाऊस]]></category>
		<category><![CDATA[अमेरिका राष्ट्रपति]]></category>
		<category><![CDATA[बिल क्लिंटन]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रपति चुनाव]]></category>
		<category><![CDATA[हिलेरी क्लिंटन]]></category>

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		<description><![CDATA[अमेरिका के 43वें राष्ट्रपति का नाम अभी भी उतना ही गुमनाम है, जैसा शायद दिनों, हफ्तों या महीनों पहले था। लेकिन, 42वें राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के कार्यकाल की अंतिम सुबह 20 जनवरी बहुत नजदीक है। उनकी पत्नी हिलेरी सीनेट में चुनी जा चुकी हैं और शायद यह हिलेरी के व्यक्तिगत राजनीतिक जीवन की सिर्फ पहली पायदान है, चरम नहीं। इस पूरे राष्ट्रपति चुनाव में बिल क्लिंटन का साया दोनों उम्मीदवारों के कद से इतना बड़ा था कि अमेरिका में तीसरी [...]]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><img src="https://www.jmuchhal.com/wp-content/uploads/2000/11/jm_l_BillC_eSQ.jpg" alt="आठ साल की उपलब्धियों का अंबार" width="311" height="307" class="alignleft size-full wp-image-3091" /><span class="dropcap">अ</span>मेरिका के 43वें राष्ट्रपति का नाम अभी भी उतना ही गुमनाम है, जैसा शायद दिनों, हफ्तों या महीनों पहले था। लेकिन, 42वें राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के कार्यकाल की अंतिम सुबह 20 जनवरी बहुत नजदीक है। उनकी पत्नी हिलेरी सीनेट में चुनी जा चुकी हैं और शायद यह हिलेरी के व्यक्तिगत राजनीतिक जीवन की सिर्फ पहली पायदान है, चरम नहीं। इस पूरे राष्ट्रपति चुनाव में बिल क्लिंटन का साया दोनों उम्मीदवारों के कद से इतना बड़ा था कि अमेरिका में तीसरी बार राष्ट्रपति न बन सकने के कानून पर नागरिक कई बार दुःखी हो रहे थे।</p>
<p>गोर और बुश एक-दूसरे से नहीं, वरन क्लिंटन के कद से लड़ रहे थे। आखिर क्या गजब शख्सियत हैं बिल क्लिंटन, जिनके करिश्मे और जादुई व्यक्तित्व से कोई नहीं बच पाया। चाहे वह वियतनाम में रहने वाली एक अधेड़ महिला हो या नायला गांव की गृहिणियां, अफ्रीका के आदिवासी या चीन के उद्योगपति और या फिर हो मोनिका लुइंस्की। और कार्यकाल भी कितना प्रभावशाली- 100 सालों में सर्वाधिक रोजगार, सर्वाधिक आर्थिक प्रगति, घाटे के बजट की धरोहर से सर्वाधिक सरप्लस, उपलब्धियों की फेहरिस्त इतनी लंबी है कि कितनी छवि छोड़ जाएंगे बिल। महाभियोग आरोप के आक्रामक सवालों को निहत्था झेलता विश्व का सबसे शक्तिशाली व्यक्ति, हिलेरी क्लिंटन की जीत में पूर्णतः शरीक होकर भी कुछ-कुछ विलग से उनके पति, अमेरिका की सामान्य जनता के दिलों का सरताज नेता, दुनिया में फैले आपसी मनमुटाव को मिटाने में जूझता एक राजनयिक, पलों की मुलाकात में लोगों के साथ मानो सदियों पुराने संबंध स्थापित कर पाने की क्लिंटन की योग्यता बेजोड़ है।</p>
<p>भीड़ में भी हर एक को यही लगता है कि क्लिंटन उन्हीं से बात कर रहे हैं। क्लिंटन ने पिछले दिनों चुनावों के पहले जीवन शैली पत्रिका &#8216;<em>एस्क्वायर</em>&#8216; के मिखाइल पतेरनीति के साथ लंबी अंतरंग बातचीत की और उसी के मुख्य सारांश <em>&#8216;एस्क्वायर&#8217;</em> से साभार। यह जानकारी आपको करीब लाएगी 20वीं शताब्दी के पार अपनी सुर्ख छाप छोड़ने वाले व्यक्ति के-</p>
<div class="simplePullQuoteRightPerpal">क्लिंटन का कार्यकाल अमेरिका की आर्थिक प्रगति के स्वर्णिम युग के रुप में याद किया जाएगा<span></span></div>
<p><b>सवाल : राष्ट्रपति पद ने आपको कितना बदला</b><b>? </b></p>
<p><em>क्लिंटन</em> : मैं सोचता हूं कि राष्ट्रपति पद के कार्यकाल ने मुझे बहुत कुछ बदला है। इस दौरान मैं ज्यादा काबिल बना हूं, मुझमें ज्यादा समझदारी आई है। मैं जब राष्ट्रपति कार्यालय में आया था तब मुझमें जो योग्यताएं थीं, उसके मुकाबले आज जब मैं इस कार्यालय से विदा हो रहा हूं, स्वयं को ज्यादा परिपक्व महसूस कर रहा हूं। सिर्फ राजनीतिक तौर पर ही नहीं, व्यक्तिगत रूप से भी मुझमें परिपक्वता आई है। मैं अपनी गलतियों को समझ सकता हूं और अनुभवी के तौर पर काम कर सकता हूं।</p>
<p><b>सवाल : आपने अपने कार्यकाल में क्या नया दिया है</b><b>? </b></p>
<p><em>क्लिंटन</em> : सबसे ज्यादा जरूरी तो यह है कि आपके पूर्ववर्तियों ने इस पद को क्या नया दिया है। अब आप चुनाव प्रचार को ही देखें तो अल गोर तथा जॉर्ज बुश दोनों प्रचार में लगे रहे, पर मैं एक सामान्य अमेरिकी की तरह ही इससे जुड़ा। सरकार का कामकाज सफलता से चलाना ही राष्ट्रपति की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है और इसे मैंने ठीक से निभाया। विश्व अर्थव्यवस्था में निजी संस्थानों की भागीदारी और देश में औद्योगिक युग का प्रवेश मेरे कार्यकाल में ही हुआ, नए रोजगारों का सृजन, जनता की आवाज की सुनवाई और सबसे महत्वपूर्ण यह रहा कि विश्व में अमेरिकी अर्थव्यवस्था को महसूस किया गया और अमेरिकियों ने निजी जीवन में भी इसे स्वीकारा है।</p>
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		<title>कौन बनेगा अमेरिका का राष्ट्रपति</title>
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		<pubDate>Tue, 19 Sep 2000 11:09:32 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[व्हाईट हाऊस]]></category>
		<category><![CDATA[अमेरिका का राष्ट्रपति]]></category>
		<category><![CDATA[अल गोर]]></category>
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		<category><![CDATA[राष्ट्रपति चुनाव]]></category>
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		<description><![CDATA[2000 में अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव में जॉर्ज बुश और अल गोर के बीच कांटे की टक्कर थी। चुनाव प्रचार के अंतिम दिनों तक यह कह पाना मुश्किल था कि आगे कौन था-रिपब्लिकन जार्ज बुश-जो अपने पिता के बाद पुनः एक बुश को व्हाइट हाउस में पहुंचाना चाहते थे- या फिर उपराष्ट्रपति अल गोर, जो अब &#8216;उप&#8216; से पूरे राष्ट्रपति बनने के दावेदार हैं। अब, जबकि अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव के मतदान की घड़ी (7 नवंबर) करीब आ रही है, [...]]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><img src="https://www.jmuchhal.com/wp-content/uploads/2000/09/jm_k_BushGore2000.jpg" alt="कौन बनेगा अमेरिका का राष्ट्रपति" width="311" height="307" class="alignleft size-full wp-image-3088" /><span class="dropcap">2</span>000 में अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव में जॉर्ज बुश और अल गोर के बीच कांटे की टक्कर थी। चुनाव प्रचार के अंतिम दिनों तक यह कह पाना मुश्किल था कि आगे कौन था-रिपब्लिकन जार्ज बुश-जो अपने पिता के बाद पुनः एक बुश को व्हाइट हाउस में पहुंचाना चाहते थे- या फिर उपराष्ट्रपति अल गोर, जो अब &#8216;<em>उप</em>&#8216; से पूरे राष्ट्रपति बनने के दावेदार हैं।</p>
<p>अब, जबकि अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव के मतदान की घड़ी (7 नवंबर) करीब आ रही है, दोनों उम्मीदवारों ने सभी मायनों में अपना तन-मन-धन दांव पर लगा दिया है। रिपब्लिकन पार्टी के अधिवेशन के बाद जॉर्ज बुश का पलड़ा काफी भारी था। डिक चैनी के रूप में अपने उपराष्ट्रपति पद के साथी को चुनकर बुश ने उन खबरों को दरकिनार कर दिया, जिसमें बुश को &#8216;<em>कम अनुभवी</em>&#8216; और &#8216;<em>विदेश नीति में उतने निपुण नहीं</em>&#8216; करार दिया जाता था। डिक चैनी अमेरिकी प्रशासन में काफी महत्वपूर्ण पद पहले ही संभाल चुके हैं, जिनमें तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज बुश के राष्ट्रपति काल का समय भी शामिल है। डेमोक्रेटिक पार्टी के लॉस एंजिल्स अधिवेशन के पहले तक अल गोर की दुविधा बरकरार थी कि वे 8 वर्षों तक क्लिंटन प्रशासन की सफलता का लाभ लेते हुए श्री बिल क्लिंटन की व्यक्तिगत खामियों से अपने को अलग रहना चाहते थे।</p>
<p><strong>कुछ थी उम्मीदें :</strong></p>
<div class="simplePullQuoteRight">भारत की दृष्टि से दोनों ही प्रशासन में रुख मित्रवत होने की आशा है<span></span></div>
<p>अधिवेशन तक यह भी उम्मीद थी कि क्लिंटन प्रशासन के आखिरी दिनों और श्रीमती हिलेरी क्लिंटन द्वारा प्रचार की उम्मीद से पूरा अधिवेशन कहीं बिल-हिलेरी क्लिंटन का यश-गान होकर न रह जाए। श्री अल गोर को भारी कूटनीतिक फायदा मिला, वयस्क सीनेटर और कट्‌टर &#8216;<em>परंपरावादी</em>&#8216; श्री लिबेरमन को अपना साथी उम्मीदवार चुनकर।<br />
लिबेरमन की छवि एकदम &#8216;<em>धार्मिक</em>&#8216; और &#8216;<em>मूल्यों की मर्यादा</em>&#8216; मानने वाले व्यक्ति की है और डेमोक्रेट होते हुए भी मोनिका कांड के समय उन्होंने बिल क्लिंटन के चरित्र की सार्वजनिक निंदा की थी। डेमोक्रेट अधिवेशन की अंतिम शाम पार्टी की अपनी उम्मीदवारी को औपचारिक रूप से स्वीकारते हुए अल गोर ने काफी जोर देकर कहा, &#8216;<em>आई एम माई ऑन मैन</em>&#8216;। श्री क्लिंटन से गहरी मित्रता के बावजूद वे श्री क्लिंटन की महज परछाई नहीं हैं।</p>
<p>हर बार होता है कि अधिवेशन के बाद संबंधित पार्टी के उम्मीदवार का पलड़ा भारी हो जाता है और इस बार भी ऐसा ही हुआ। लेकिन, पिछले कुछ दिनों से सारे मीडिया और जनता में लगने लगा है जैसे श्री अल गोर की बढ़त उन्हें विजयश्री तक पहुंचा देगी। बुश पर भी अपने पिता और पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज बुश का &#8216;<em>अत्यधिक प्रभाव</em>&#8216; होने की कहानियां प्रेस में लगातार छपती रहती हैं। हालांकि कहते हैं कि सहस्राब्दी सम्मेलन के दौरान जॉर्ज बुश ने विशेष रूप से अटलजी और जसवंतसिंह को फोन लगाकर उनसे बात की और भारत के प्रति अपना समर्थन जताया। भारत की दृष्टि से दोनों ही प्रशासन में रुख मित्रवत होने की आशा है, शायद अल गोर में अधिक। अटलजी की वॉशिंगटन यात्रा के दौरान उनके सम्मान में अल गोर ने दोपहर के भोजन का आयोजन किया। बुश और अल गोर में अमेरिका के आंतरिक विषयों पर भी काफी बहस छिड़ी हुई है, जिसमें मेडिकल इंश्योरेंस की बढ़ती दरें, टैक्स कम करने से लेकर प्रारंभिक शिक्षा जैसे मुद्दे शामिल हैं।</p>
<p><strong>कुछ मतभेद :</strong></p>
<p>पिछले दिनों एक नया मतभेद उभरकर आया है, जिसके रहते श्री बुश की छवि को थोड़ा धक्का लगा है। अमेरिका में प्रथा है कि राष्ट्रपति पद के दोनों उम्मीदवार टी.वी. पर आमने-सामने 90 मिनट का वाद-विवाद करते हैं, जिससे पूरी जनता को उन्हें करीब से और दोनों को आमने-सामने देखने-सुनने व परखने का अवसर मिल जाता है। इसे स्वतंत्र परिषद आयोजित करती है और अमेरिका से सभी प्रमुख टी.वी. नेटवर्क इसे प्रसारित करते हैं।</p>
<p>आंकड़ों के अनुसार पिछले चुनाव के दौरान एक ऐसी &#8216;<em>परिचर्चा</em>&#8216; को अमेरिका की 25 करोड़ की आबादी में से लगभग 10 करोड़ लोगों ने &#8216;<em>लाइव</em>&#8216; देखा था। इस बार भी हर बार की तरह तीन अलग-अलग शहरों में इस &#8216;<em>बहस</em>&#8216; का आयोजन तय किया गया था, जिन्हें अल गोर चुनाव प्रचार समिति ने स्वीकार कर लिया। लेकिन, श्री बुश ने श्री गोर को ललकारते हुए कहा कि ऐसी तीन डिबेट्‌स (बहस) के बजाय वे श्री गोर से &#8216;<em>टोरी किंग लाइव</em>&#8216; जैसे टॉक शो में भी बात करना चाहेंगे।</p>
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