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	<title>Jitendra Muchhal &#124; Jitendra Muchhal Website &#124; J Muchhal &#124; जीतेंद्र मुछाल&#187; वर्ल्ड ट्रेड सेंटर</title>
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		<title>अमेरिकी वित्त व्यवस्था के ट्वि&#8217;न टॉवर्स गिरे</title>
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		<pubDate>Tue, 16 Sep 2008 12:30:38 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[अमेरिकी अर्थव्यवस्था]]></category>
		<category><![CDATA[अमेरिकी वित्त व्यवस्था]]></category>
		<category><![CDATA[ट्वि'न टॉवर्स]]></category>
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		<category><![CDATA[लेहमैन ब्रदर्स]]></category>
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		<description><![CDATA[अमेरिकी वित्त व्यवस्था की दु:खद घटनाओं में से एक न्यूयॉर्क में ट्‍विन टॉवर्स गिराए जाने की सातवीं बरसी के कुछेक दिन बाद हुई। तेजी से बदलते घटनाक्रम में मात्र 24 घंटों के दौरान 150 वर्ष पुरानी वित्तीय संस्थाएँ, जो कि अपने आकार में अमेरिका के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर से कम नहीं थीं, लेहमैन ब्रदर्स और मेरिल लिंच सोमवार को इतिहास का एक हिस्सा बन गईं। अमेरिकी वित्त व्यवस्था में लगातार गिरावट के चलते लेहमैन ब्रदर्स के शेयरों का मूल्य अंतिम [...]]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><img class="alignleft size-full wp-image-2876" alt="अमेरिकी वित्त व्यवस्था के ट्वि'न टॉवर्स गिरे" src="https://www.jmuchhal.com/wp-content/uploads/2008/09/JM_3_Lehman.jpg" width="311" height="307" /><span class="dropcap">अ</span>मेरिकी वित्त व्यवस्था की दु:खद घटनाओं में से एक न्यूयॉर्क में ट्‍विन टॉवर्स गिराए जाने की सातवीं बरसी के कुछेक दिन बाद हुई। तेजी से बदलते घटनाक्रम में मात्र 24 घंटों के दौरान 150 वर्ष पुरानी वित्तीय संस्थाएँ, जो कि अपने आकार में अमेरिका के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर से कम नहीं थीं, लेहमैन ब्रदर्स और मेरिल लिंच सोमवार को इतिहास का एक हिस्सा बन गईं।</p>
<p>अमेरिकी वित्त व्यवस्था में लगातार गिरावट के चलते लेहमैन ब्रदर्स के शेयरों का मूल्य अंतिम सप्ताह में 3.50 डॉलर तक नीचे आ गया था जो कि एक वर्ष पहले के मूल्य की तुलना में 95 फीसदी नीचे था। इस निवेश बैंक को वित्तीय मदद की जरूरत थी और इसके लिए न्यूयॉर्क फेड ने सभी वैश्विक वित्तीय संस्थाओं- सिटी, जेपी मॉर्गन, गोल्डमैन, मेरिल, बैंक ऑफ अमेरिका और अन्य की आपात बैठक भी बुलाई थी। बैठक में अमेरिकी वित्तमंत्री हैंक पॉल्सन भी शामिल हुए थे। बैठक का उद्देश्य था कि किसी तरह लेहमैन ब्रदर्स को सुरक्षित बनाए रखा जाए, क्योंकि ऐसा नहीं होने पर अन्य वित्तीय संस्थाओं पर भी इसका बुरा असर पड़ सकता था। इससे पहले अमेरिकी सरकार ने बीयर स्टर्न्स को खरीदने में जेपी मॉर्गन की मदद की थी। पिछले माह फैनी मे और फ्रैडी मैक को सरकार से सहारा मिला था, लेकिन इस बार सरकार लेहमैन को बचाने के लिए आगे नहीं आई।</p>
<div class="simplePullQuoteRight">मेरिल के शेयर भी लगातार नीचे गिरते जा रहे थे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मेरिल के सीईओ जॉन थाइन ने खुद बैंक ऑफ अमेरिका के सीईओ से मिलकर 48 घंटों में सौदा पक्का कर लिया<span></span></div>
<p>लेहमैन ब्रदर्स को लेने के लिए बैंक ऑफ अमेरिका और बार्कलेज बैंक ने दिलचस्पी दिखाई थी, लेकिन अमेरिकी सरकार द्वारा कोई सहयोग या सहारा न देने की सूरत में वे मैदान छोड़ गए। तभी स्पष्ट हो गया कि सोमवार से लेहमैन ब्रदर्स को दिवालिया घोषित किए जाने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। मात्र एक सप्ताह के भीतर अरबों डॉलर के शेयरों का मूल्य शू्न्य हो गया।</p>
<p><b>मेरिल बिकी :</b> बैंक ऑफ अमेरिका ने लेहमैन को खरीदने में दिलचस्पी तो दिखाई, लेकिन इसने मेरिल लिंच को 29 डॉलर प्रति शेयर की दर पर खरीद लिया। कंपनी ने इसकी खरीदी के लिए 50 बिलियन डॉलर की राशि चुकाई। मेरिल के शेयर भी लगातार नीचे गिरते जा रहे थे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मेरिल के सीईओ जॉन थाइन ने खुद बैंक ऑफ अमेरिका के सीईओ से मिलकर 48 घंटों में सौदा पक्का कर लिया।</p>
<p><b>एआईजी और अन्य की हालत खस्ता :</b> इंश्योरेंस क्षेत्र की महाकाय कंपनी एआईजी पर भी ऐसा ही दबाव है और यह अपनी कैश पोजीशन को बनाए रखने के लिए अपनी कई परिसंपत्तियाँ बेच सकती है। वॉशिंगटन म्यूचुअल का भी यही हाल है। लेहमैन ब्रदर्स में 25 हजार से अधिक कर्मचारी काम करते हैं, जबकि मेरिल लिंच के कर्मचारियों की संख्‍या 60 हजार है। एआईजी और अन्य वित्तीय संस्थाओं में भी करीब इतने ही कर्मचारी काम करते हैं। न्यूयॉर्क क्षेत्र में हजारों की संख्या में ऊँची तनख्वाह वाले पद खत्म हो जाएँगे।</p>
<p>इससे पहले लेहमैन ब्रदर्स ने खुद को दिवालिया घोषित करने का एक आवेदन न्यूयॉर्क में दाखिल कर दिया। एक अनुमान के मुताबिक उन पर 613 बिलियन यूएस डॉलर की उधारी है। उन्होंने अपने नाम पर टोक्यो, हांगकांग, न्यूयॉर्क, सिंगापुर, ताईपे और कई अन्य बैंकों से लाखों डॉलर का ऋण ले रखा है। गौरतलब है कि दिवालिएपन के अमेरिकी इतिहास में यह अब तक का सबसे बड़ा मामला है। इसकी भरपाई वॉल स्ट्रीट फर्म द्वारा की जाएगी, जो अमेरिकी सरकार को इस पूरे मामले में विश्वास दिलाने में नाकाम रही। लेहमैन ब्रदर्स द्वारा दिवालिया घोषित किए जाने की याचिका के मुताबिक उनकी कुल संपत्ति 639 मिलियन डॉलर है।</p>
<p>अदालती टिप्पणी के मुताबिक सिटी बैंक और बैंक ऑफ न्यूयॉर्क इतनी बड़ी रकम के लिए लेहमैन ब्रदर्स को पहले ही असुरक्षित निवेशकों की सूची में डाल चुके हैं। टोक्यो का अजोरा बैंक 463 मिलियन डॉलर लोन के साथ ऋण प्रदाताओं में सबसे ऊपर है। मिजुहो कॉरपोरेट बैंक (289 मिलियन डॉलर) इस मामले में दूसरे स्थान पर है। जानकारी के मुताबिक लेहमैन ब्रदर्स सिटी बैंक से 275 मिलियन डॉलर, बीएनपी परिबास से 250 मिलियन डॉलर, जापान की शिंसेई बैंक लिमिटेड से 231 मिलियन डॉलर, जापान की ही यूएफजे बैंक से 185 मिलियन डॉलर और सुमितोमो मिश्तुबिशी बैंकिंक कॉरपोरेशन से 177 मिलियन डॉलर का ऋण अप्रतिभूति उधारी के तहत ले चुके हैं।</p>
<p>मिजुहो कॉरपोरेट बैंक, शिंकिन सेंट्रल बैंक, चुओ मिट्स्यूई ट्रस्ट और बैंकिंग समेत जापान के सभी बैंकिंग प्रतिष्ठान, नोवा स्कोशिया की सिंगापुर शाखा, न्यूयॉर्क की लॉयड बैंक, ताईपे और चीन की हुआ नेन व्यावसायिक बैंक और इसकी न्यूयॉर्क शाखा, ये सभी अप्रतिभूति ऋण अदायगी के रूप में लेहमैन ब्रदर्स को 50 मिलियन डॉलर से ज्यादा की राशि दे चुके हैं। सोमवार सुबह जब मैं ट्रेन में मैनहट्टन से न्यूजर्सी आ रहे कुछ लोगों से मिला, उनमें से एक यात्री वॉल स्ट्रीट जर्नल पढ़ रहा था, जिसका शीर्षक था- &#8216;<em>लुक लाइक 9/11</em>&#8216;। मैंने दुःखद भाव के साथ कहा-बहुत बुरा हुआ। एक अन्य यात्री जो लेहमैन ब्रदर्स के न्यूबर्गर डिवीजन में कार्यरत थे, ने बताया उनका डिवीजन बहुत अच्छी तरह काम कर रहा था। वे जल्द ही इस सिलसिले में सुबह बैठक करने की योजना बना रहे थे, मगर सब कुछ बिखर गया। उन्होंने इसे 9/11 हादसे से भी ज्यादा भयानक करार दिया।</p>
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		<title>आसमान में चमकती रोशनी से श्रद्धांजलि</title>
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		<pubDate>Wed, 13 Mar 2002 06:48:40 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[11 सितंबर]]></category>
		<category><![CDATA[आतंकवादी हमला]]></category>
		<category><![CDATA[आर्कीटेक्चरल कम्प्यूटर मॉडलिंग]]></category>
		<category><![CDATA[मेयर श्री रुडोल्फ गुलियानी]]></category>
		<category><![CDATA[वर्ल्ड ट्रेड सेंटर]]></category>

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		<description><![CDATA[वर्ल्ड ट्रेड सेंटर हादसे में मरने वालों के प्रति श्रद्धांजलि देने का यह अनोखा अंदाज है। आतंकवादी हमलों से गिरे वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के दोनों टॉवर्स के नजदीक की बैटरी पार्क सिटी में 88 ताकतवर सर्चलाइटें लगाई गई हैं। इन लाइटों की रोशनी आसमान में ऊपर तक जाती है, मानों मृतकों को आसमान में खोज रही हों। हादसे के छः माह पूरे होने पर 11 मार्च की शाम 7 बजे जब आसमान पर धुंधलका छाया था, यह तेज नीली रोशनी [...]]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><img class="alignleft size-full wp-image-2000" alt="आसमान में चमकती रोशनी से श्रद्धांजलि " src="https://www.jmuchhal.com/wp-content/uploads/2002/03/191.jpg" width="311" height="307" /><span class="dropcap">व</span>र्ल्ड ट्रेड सेंटर हादसे में मरने वालों के प्रति श्रद्धांजलि देने का यह अनोखा अंदाज है। आतंकवादी हमलों से गिरे वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के दोनों टॉवर्स के नजदीक की बैटरी पार्क सिटी में 88 ताकतवर सर्चलाइटें लगाई गई हैं।</p>
<p>इन लाइटों की रोशनी आसमान में ऊपर तक जाती है, मानों मृतकों को आसमान में खोज रही हों। हादसे के छः माह पूरे होने पर 11 मार्च की शाम 7 बजे जब आसमान पर धुंधलका छाया था, यह तेज नीली रोशनी जल उठी। यह रोशनी रोजाना 13 अप्रैल तक की जाएगी। मृतकों के प्रति श्रद्धाभाव व्यक्त करने का यह अनोखा तरीका है।</p>
<div class="simplePullQuoteRight">इन लाइटों की रोशनी आसमान में ऊपर तक जाती है, मानों मृतकों को आसमान में खोज रही हों<span></span></div>
<p>न्यूयॉर्क की म्युनिसिपल आर्ट सोसाइटी की प्रोजेक्ट आर्गनाइजर सुश्री सासकाय लेवी का कहना है कि यह तेज लाइट दरअसल श्रद्धांजलि के लिए मोमबत्ती का अहसास कराती है। उन्होंने बताया कि इस विचार को मूर्तरूप देना आसान नहीं था। पर इसे करने का फैसला किया गया। इसमें करीब 48 लोगों ने कड़ी मेहनत की, तब जाकर आज यह तेज रोशनी दिखाई दे रही है। इसे कई मील दूर से देखा जा सकता है। ये सभी 88 सर्चलाइटें 50 वर्गफुट के दायरे में लगाई गई हैं। इस पूरी योजना पर खर्च आया है करीब 5 लाख डॉलर।</p>
<div>
<p>लाइट के जरिए श्रद्धांजलि देने का आइडिया सबसे पहले (19 सितंबर को) <em>आर्कीटेक्चरल कम्प्यूटर मॉडलिंग के प्राउन स्पेस स्टूडियो</em> के विशेषज्ञों को आया था। उन्होंने इस विचार को म्युनिसिपल आर्ट सोसायटी को बताया और न्यूयॉर्क के तत्कालीन मेयर श्री रुडोल्फ गुलियानी को भी पत्र लिखा। धीरे-धीरे इसमें लोगों के सुझाव जुड़ते गए और आज आसमान में यह रोशनी चमक रही है।</p>
</div>
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		<title>जो शहीद हुए हैं उनकी जरा याद करो कुर्बानी&#8230;</title>
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		<pubDate>Tue, 18 Sep 2001 06:54:20 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[11 सितंबर]]></category>
		<category><![CDATA[न्यूयॉर्क न्यूज़]]></category>
		<category><![CDATA[वर्ल्ड ट्रेड सेंटर]]></category>

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		<description><![CDATA[वर्ल्ड ट्रेड सेंटर 1 और 2 में धमाके होने के बाद सारे लोग नीचे की ओर जान बचाकर भाग रहे थे। लेकिन कई ऐसे भी थे जो अपनी जान की परवाह न करते हुए ऊपर की ओर भाग रहे थे। वर्ल्ड ट्रेड सेंटर में फंसे लोगों की जान बचाने में सबसे आगे थे न्यूयॉर्क के अग्निशमन दस्ते के जवान, जो पचास मंजिल ऊपर चढ़कर भी कोशिश में थे कि वे किसी को बचा सकें। देखते ही देखते बिना किसी पूर्वाभास [...]]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><img class="alignleft size-full wp-image-3235" title="जो शहीद हुए हैं उनकी जरा याद करो कुर्बानी..." alt="" src="https://www.jmuchhal.com/wp-content/uploads/2001/09/20.jpg" width="311" height="307" /><span class="dropcap">व</span>र्ल्ड ट्रेड सेंटर 1 और 2 में धमाके होने के बाद सारे लोग नीचे की ओर जान बचाकर भाग रहे थे। लेकिन कई ऐसे भी थे जो अपनी जान की परवाह न करते हुए ऊपर की ओर भाग रहे थे। वर्ल्ड ट्रेड सेंटर में फंसे लोगों की जान बचाने में सबसे आगे थे न्यूयॉर्क के अग्निशमन दस्ते के जवान, जो पचास मंजिल ऊपर चढ़कर भी कोशिश में थे कि वे किसी को बचा सकें।</p>
<p>देखते ही देखते बिना किसी पूर्वाभास के दोनों टॉवर भरभराकर जमीन में ध्वस्त हो गए और उसमें समा गए अग्निशमन विभाग के ये वीर। न्यूयॉर्क के अग्निशमन विभाग के 343 जवानों, अफसरों एवं चिकित्सा कर्मचारियों ने वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के मलबे में दबकर मानों मौत को गले लगा लिया और अपनी कर्तव्यनिष्ठा की सर्वोच्च स्थिति पर पहुंच गए।</p>
<p><strong>कैसा था वह भयानक मंज़र :</strong></p>
<p>न्यूयॉर्क का अग्निशमन विभाग 136 साल पुराना है और इसमें लगभग 11000 से अधिक कर्मचारी हैं, लेकिन एक ही दिन में 343 साथियों की मौत ने फायर कमिश्नर वॉन ईसेन को जैसे पंगु कर दिया। कई तो 2-3 दशकों से इस विभाग की सेवा में थे, जिनमें 5 तो अग्निशमन विभाग के सबसे वरिष्ठ अधिकारी थे और उसी में थे अग्निशमन विभाग के अति लोकप्रिय पादरी माइकल जज, जिनकी विडंबना रही कि वे वर्ल्ड ट्रेड सेंटर परिसर में पहले धमाके के बाद मौत से जूझ रहे एक अग्निशमन कर्मी को अंतिम उपदेश सुना रहे थे और अचानक इमारतें गिरीं और मलबे में दोनों दबकर मर गए&#8230;! लेकिन अग्निशमन विभाग का काम अभी खत्म नहीं हुआ था। अभी तो थी उनकी लड़ाई उस 15 लाख टन और दस मंजिलों जितने ऊंचे और सुलगते मलबे से, जिसमें उनके साथियों सहित 6000 से अधिक लोग दबे हुए थे। और आशा की किरण हर घड़ी के साथ छोटी हो रही थी। न दिन देखा-न रात, न गर्मी-न बरसात तथा नींद और थकान से लगातार जूझते ये कर्मी लगे रहे उस मलबे के हिमालय में से खोजने जिंदा या फिर&#8230;। और आज भी लगभग 4 हफ्ते बाद वे अपने काम में लगे हुए हैं। इन सब कार्यों के चलते भी हादसे के सिर्फ 5 दिन बाद रविवार को अत्यंत मार्मिक वातावरण में अग्निशमन विभाग में प्रमोशन सेरेमनी हुई, जिसमें 168 अफसरों को पदोन्नत किया गया ताकि वे उन स्थानों का भार वहन कर सकें, जो उन्हीं के साथियों के चले जाने से रिक्त हुए थे।</p>
<div class="simplePullQuoteRightPerpal">न्यूयॉर्क के अग्निशमन विभाग के 343 जवानों, अफसरों एवं चिकित्सा कर्मचारियों ने वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के मलबे में दबकर मानों मौत को गले लगा लिया और अपनी कर्तव्यनिष्ठा की सर्वोच्च स्थिति पर पहुंच गए<span></span></div>
<p>और इस दास्तान का सबसे हृदय विदारक अंश अब भी जारी है। अग्निशमन विभाग में उनके सहकर्मियों की अंत्येष्टि बहुत ही औपचारिक और परंपरा से भरी होती है। सामान्य दिनों में किसी सहकर्मी की अंत्येष्टि में हजारों की तादाद में ये कर्मी अपनी पोशाक में शरीक होते हैं और साथ होती है स्कॉटलैंड की परंपरागत स्कर्ट और वेशभूषा। बैगपाइप और ड्रम द्वारा बैंड बिदाई की धुन बजाता है, लेकिन ये सब तब होता है जब साल में दुर्भाग्य से ऐसे चंद मौके आते हैं। लेकिन क्या आप विश्वास कर सकते हैं कि यहां शहीद हुए पूरे 343 साथियों की अंतिम यात्रा में वही परंपरा कायम है, हर अंत्येष्टि में सहकर्मी परंपरा निर्वाह कर रहे हैं और बैगपाइप और स्कर्टधारी बैंड सभी 343 अंतिम यात्रा में बिदाई धुन बजा रहे हैं।</p>
<p><strong>ये कैसे संभव है</strong>&#8230; 17 सितंबर को पांच अग्निशमन कर्मियों की अंत्येष्टि थी, 16 को भी 5 की अंतिम यात्रा थी और गुरुवार 20 सितंबर को एक दिन में सात अंत्येष्टियां थीं। इनके लिए अग्निशमन विभाग की इमराल्ड सोसायटी ऑफ पाइप्स एंड ड्रम्स के निदेशक जो मर्फी को व्यवस्था करनी थी और ये सिलसिला बिना रुके 14 सितंबर से आज भी जारी है और वह भी स्टेटन से लेकर लांग आइलैंड तक फैले न्यूयॉर्क के पूरे फैलाव में। शव और अवशेष तो लगभग 50 अग्निशमन कर्मियों के ही बरामद हुए हैं। बाकी की याद में तो चर्च में प्रार्थना सभा ही आयोजित होती है, लेकिन अग्निशमन विभाग की पूरी परंपरा का निर्वाह हर एक अंत्येष्टि में किया जा रहा है&#8230; हां, पहले के पूरे बैंड के मुकाबले अब सिर्फ 8-10 बैगपाइपर और ड्रम वाले होते हैं, क्योंकि बाकी दूसरे किसी साथी को शहर के दूसरे कोने में अलविदा कह रहे हैं और 14 सितंबर से 7 अक्टूबर के बीच यह सेरेमोनियल यूनिट अपने 110 साथियों की अंत्येष्टि में परंपरागत बिदाई का निर्वाह कर चुकी है। 56 सदस्यों की सेरेमोनियल बैंड यूनिट को 6 टुकड़ियों में बांट दिया है, जिनमें से हर एक टुकड़ी एक दिन में 2 या 3 अंत्येष्टि अटैंड कर रही है। और फिर दूर सुनाई देती है स्कर्टधारी बैगपाइप की धुन- हर एक को मानो याद दिलाती हुई कि&#8230; &#8216;<em>जो शहीद हुए हैं उनकी जरा याद करो कुर्बानी।</em>&#8216;</p>
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		<title>&#8216;ग्राउंड जीरो&#8217; की हैरतअंगेज दास्तान</title>
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		<pubDate>Sat, 15 Sep 2001 07:32:27 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[11 सितंबर]]></category>
		<category><![CDATA[इलेक्ट्रॉनिक रोबोट]]></category>
		<category><![CDATA[एफबीआई]]></category>
		<category><![CDATA[ग्राउंड जीरो]]></category>
		<category><![CDATA[वर्ल्ड ट्रेड सेंटर]]></category>

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		<description><![CDATA[कल तक था दुनिया के सबसे महंगे और महत्वपूर्ण स्थानों में से एक, आज है सिर्फ ग्राउंड जीरो। कल तक जो जिप कोड 10048 एक शान थी, आज तो मानो वह एक श्मशान है। यानी मैनहटन के निचले छोर का वह इलाका, जहां वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के दोनों टावर और पूरे परिसर के अवशेष उठाने का काम चल रहा है और शब्द इस &#8216;हरक्युलिन टास्क&#8216; को बयां कर ही नहीं सकते। एक के बाद एक करके ध्वस्त हुए वर्ल्ड ट्रेड [...]]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><a href="https://www.jmuchhal.com/ground-zero-ki-hairatangez-dastaan/wtc_dogsearch" rel="attachment wp-att-3707"><img src="https://www.jmuchhal.com/wp-content/uploads/2001/09/WTC_DogSearch.jpg" alt="WTC_DogSearch" width="311" height="307" class="alignleft size-full wp-image-3707" /></a><span class="dropcap">क</span>ल तक था दुनिया के सबसे महंगे और महत्वपूर्ण स्थानों में से एक, आज है सिर्फ <em>ग्राउंड जीरो</em>। कल तक जो जिप कोड 10048 एक शान थी, आज तो मानो वह एक श्मशान है।</p>
<p>यानी मैनहटन के निचले छोर का वह इलाका, जहां वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के दोनों टावर और पूरे परिसर के अवशेष उठाने का काम चल रहा है और शब्द इस &#8216;<em>हरक्युलिन टास्क</em>&#8216; को बयां कर ही नहीं सकते। एक के बाद एक करके ध्वस्त हुए वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के दोनों टावर में सबसे पहले और सर्वोपरि थी तलाश किसी भी तरह किसी भी जगह जिन्दा लोगों की, जो शायद मलबे के 10 मंजिली पहाड़ के नीचे कहीं भी दबे हों, और इसके कई कारण भी थे। पूर्व में भी हादसों में लोगों के कई हफ्तों बाद बचकर जिंदा मिल जाने के अपवाद रहे हैं। इतने बड़े मलबे के ढेर में कहीं भी &#8216;<em>एयर पॉकेट्‌स</em>&#8216; होने की पूरी संभावना थी, जिसके रहते बिल्ली कई दिनों तक बिना भोजन-पानी के बच सकती है, अगर वह जिंदा हो तो। और इस सबसे बढ़कर एक आशा कि कहीं तो कुछ &#8216;<em>मिसिंग</em>&#8216; लोग जीवित मिल ही जाएंगे, इसीलिए हादसे के दो हफ्ते बाद तक इसे बचाव कार्य ही कहा और माना जा रहा था, जिसके रहते कोई भारी क्रेन आदि से मलबे को हटाने के बजाय हाथों से ही कार्य ज्यादा हो रहा था और राहतकर्मियों का दे रहे थे साथ <em>&#8216;वफादार कुत्ते&#8217;</em> और इलेक्ट्रॉनिक रोबोट्‌स।</p>
<p><b>सबसे वफादार</b></p>
<p>अब तक के कुत्तों की सबसे बड़ी मुहिम के अंतर्गत लगभग 350 प्रशिक्षित कुत्ते वर्ल्ड ट्रेड सेंटर हादसे के शुरुआती दिनों में वहां जुटे थे, क्योंकि दबे हुए जिंदा लोगों और मानव अवशेषों को सूंघकर पहचानने में इनकी महारत है। रोजाना 12 घंटे की ड्‌यूटी पर लगे डच, टफ, सेली, मैक्स, काउबॉय और ऐसे ही नाम वाले कुत्तों को पूरा प्रशिक्षण था कि कैसे मलबे में घुसकर इंसान को सूंघकर ढूंढा जाए। और वे ऐसे छोटे स्थानों में भी घुस सकते थे, जहां राहतकर्मी नहीं पहुंच सकते। इन कुत्तों के पांवों में टेप बांधकर उन्हें जूते पहना दिए जाते थे। इन खोजी कुत्तों को भी अलग-अलग भांति की ट्रेनिंग दी गई थी। कुछ कुत्ते थे जो ज्वलनशील पदार्थों की गंध दूर से पहचान लेते हैं। पेट्रोल, अन्य रसायन आदि तक राहतकर्मी उस इलाके में घुसने के पहले सावधान रहे। कुछ कुत्तों की महारत जीवित इंसानों को सूंघकर ढूंढ निकालने में थी और कुछ सिर्फ मानव अवशेष ढूंढने में माहिर थे। इनमें से एक कुत्ता पॉर्कचॉप ने तो सिर्फ परिवारजनों द्वारा गुमशुदा व्यक्ति के फोटो, पर्स आदि की गंध लेकर आधा दर्जन व्यक्तियों के अवशेष ढूंढ निकाले थे।</p>
<div class="simplePullQuoteRightGreen">आधुनिक टेक्नोलॉजी का फायदा लेकर पहली बार किसी बचाव और राहत अभियान में छोटे लेकिन अत्यंत कारगर इलेक्ट्रॉनिक रोबोट्‌स का भी उपयोग किया गया<span></span></div>
<p><b>मलबे की सफाई</b></p>
<p>लगभग एक हजार कर्मी रोज सुबह से जुट जाते हैं इस मलबे की सफाई और धुलाई में। काम बहुत ही दुर्दांत है। करीब 15 लाख टन मलबा वहां पर जमा है, जिसमें छोटे टुकड़ों के साथ स्टील के लंबे-चौड़े गर्डर भी हैं। इस कार्य में करीब 400 करोड़ रुपए (100 मिलियन डॉलर) प्रति हफ्ते का खर्च हो रहा है और शायद एक से डेढ़ साल तक इसके चलने की संभावना है। रोज एक विशेष वायुयान घटनास्थल के ऊपर से उड़ान भरता है, जिसमें लगे यंत्र उस पूरे मलबे से भरे इलाके के हर वर्ग का तापमान आकलन करते हैं। इससे मलबे उठाने वालों को गरम स्थानों का पता चल जाता है, जहां शायद कोई चिंगारी या ज्वलनशील पदार्थ अभी भी सुलग रहे हैं।</p>
<p><b>इलेक्ट्रॉनिक रोबोट</b></p>
<p>आधुनिक टेक्नोलॉजी का फायदा लेकर पहली बार किसी बचाव और राहत अभियान में छोटे लेकिन अत्यंत कारगर इलेक्ट्रॉनिक रोबोट्‌स का भी उपयोग किया गया। ये वे बचावकर्मी थे, जिन्हें धूल, मलबे, थकान और भावनाएं कुछ भी नहीं प्रभावित करते। इंसानों द्वारा दूर से चलित ये जूते के डिब्बे की साइज के रोबोट मलबे में अंदर तक घुस सकते थे और उनमें लगे लाइट, वीडियो कैमरा और सेंसर द्वारा इंसानों और अवशेषों की खोज की जा रही थी। इस रोबोट दस्ते के निदेशक कर्नल जॉन ब्लिच के अनुसार- जिन्होंने भी इन रोबोट्‌स को काम करते देखा, वे उन्हें देखकर दंग रह गए और फायर डिपार्टमेंट वाले तो इनके उपयोग से बहुत खुश थे। 12 सितंबर को माइक्रोटेक नामक रोबोट ने मलबे के नीचे दबे हुए कुछ कमरे ढूंढ निकाले, जहां बाद में राहतकर्मी पहुंचे और कई इंसानों को वहां से निकाला।</p>
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		<title>गगनचुम्बी इमारत के रईस किरदार</title>
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		<pubDate>Thu, 13 Sep 2001 10:07:21 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[11 सितंबर]]></category>
		<category><![CDATA[किंगकांग]]></category>
		<category><![CDATA[पेंटागन]]></category>
		<category><![CDATA[वर्ल्ड ट्रेड सेंटर]]></category>
		<category><![CDATA[विन्डो टू वर्ल्ड]]></category>
		<category><![CDATA[विश्व व्यापार केंद्र]]></category>

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		<description><![CDATA[न्यूयॉर्क का मैनहटन स्थित वर्ल्ड ट्रेड सेंटर (विश्व व्यापार केंद्र) सन्‌ 1972 में बनकर तैयार हुआ था। 1362 फुट ऊंची इस 110 मंजिला इमारत में कार्यालयीन उपयोग के लिए लगभग एक करो़ड़ पांच लाख वर्गफुट क्षेत्रफल की जगह उपलब्ध थी। भवन के दो समीपस्थ टावर मिलकर इसे दुनिया की सबसे ऊंची इमारतों में शुमार करते रहे। दुनिया की इस वाणिज्य हृदयस्थली में विस्फोट के वक्त 50,000 से अधिक कर्मचारी कार्यरत थे। 70 स्वचालित सीढ़ियों (एस्केलेटर) से युक्त इस भवन की [...]]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><a href="https://www.jmuchhal.com/gaganchumbi-imarat-ke-rais-kirdar/manhattan" rel="attachment wp-att-3709"><img src="https://www.jmuchhal.com/wp-content/uploads/2001/09/Manhattan.jpg" alt="गगनचुम्बी इमारत के रईस किरदार" width="311" height="307" class="alignleft size-full wp-image-3709" /></a>न्यूयॉर्क का मैनहटन स्थित वर्ल्ड ट्रेड सेंटर (विश्व व्यापार केंद्र) सन्‌ 1972 में बनकर तैयार हुआ था। 1362 फुट ऊंची इस 110 मंजिला इमारत में कार्यालयीन उपयोग के लिए लगभग एक करो़ड़ पांच लाख वर्गफुट क्षेत्रफल की जगह उपलब्ध थी। भवन के दो समीपस्थ टावर मिलकर इसे दुनिया की सबसे ऊंची इमारतों में शुमार करते रहे। दुनिया की इस वाणिज्य हृदयस्थली में विस्फोट के वक्त 50,000 से अधिक कर्मचारी कार्यरत थे।</p>
<p>70 स्वचालित सीढ़ियों (एस्केलेटर) से युक्त इस भवन की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए 24 वीडियो मॉनीटर (प्रदर्शक) लगाए गए थे। विश्व व्यापार केंद्र में तीन छविगृहों के अलावा एक सब-वे (रेलवे स्टेशन) की सुविधा भी थी। प्रतिदिन यहां लगभग 1 लाख 50 हजार लोगों का आवागमन होता था। इस इमारत की छत पर स्थित अवलोकन कक्ष में प्रवेश के लिए शुल्क प्रति व्यक्ति दस डॉलर था। बच्चों से प्रवेश शुल्क के बतौर 5 डॉलर लिए जाते थे। प्रतिवर्ष 18-20 लाख पर्यटक इसे देखने आते रहे।</p>
<p>1993 में एक आतंकवादी हमले के दौरान भवन को हुई मामूली क्षति के बाद यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या कुछ कम जरूर हुई, लेकिन विश्व की सर्वाधिक चर्चित इमारत के बतौर इसका रुतबा कम नहीं हुआ। इस वाणिज्य संकुल का स्वामित्व मूलतः न्यूयॉर्क बंदरगाह समिति के पास था, जिसने इसे 32.5 खरब डॉलर की कीमत पर 99 वर्ष की लीज के लिए दे दिया। 1976 में निर्मित फिल्म &#8216;<em>किंगकांग</em>&#8216; का अतिकाय जीव इसी इमारत के एक हिस्से को चकनाचूर करता है। विश्व व्यापार केंद्र वाणिज्यिक गतिविधियों से ज्यादा अपनी भवन निर्माण विशेषताओं के लिए चर्चित रहा। 325 डॉलर प्रति वर्गफुट के मूल्य से कार्यालयीन उपयोग के लिए दी जाने वाली इस भवन की जमीन बेशकीमती मानी गई। विश्व के धनिकतम व्यक्तियों की यह कार्यस्थली आतंक की भेंट चढ़ चुकी है। दो जुड़वां टावर वाली विश्व व्यापार केंद्र की इमारत महज ईंट-पत्थरों का घेरा नहीं था, यहां डाकखाने से लेकर रेलवे स्टेशन तक एक पूरी बसाहट मौजूद थी। इमारत की 107वीं मंजिल पर मौजूद &#8216;<em>विन्डो टू वर्ल्ड</em>&#8216; (जगत खिड़की) अब खुल नहीं सकेगी।</p>
<div class="simplePullQuoteRightGolden">विश्व व्यापार केंद्र में तीन छविगृहों के अलावा एक सब-वे (रेलवे स्टेशन) की सुविधा भी थी। प्रतिदिन यहां लगभग 1 लाख 50 हजार लोगों का आवागमन होता था<span></span></div>
<p><b>यह है पेंटागन</b></p>
<p>अमेरिकी रक्षा प्रतिष्ठान &#8216;<em>पेंटागन</em>&#8216; वॉशिंगटन के करीब ऑर्लिंगटन में स्थित एक पंचकोणीय बहुमंजिला इमारत है। वास्तुकार जॉर्ज एडविन बर्गस्टॉम द्वारा अभिकल्पित रूपरेखा के आधार पर इसका निर्माण सन्‌ 1941-43 में किया गया था। 34 एकड़ के क्षेत्रफल में फैली इस इमारत में स्थित कार्यालयों का कुल क्षेत्रफल है, 3,707,745 वर्गफुट। यहां अमेरिकी रक्षा सेनाओं के तीनों अंगों से जुड़े 25,000 कर्मचारी काम करते हैं। इसकी गिनती विश्व के विशालतम कार्यालयीन भवनों में होती है।</p>
<p><b>जो ढहीं</b><b>, </b><b>वे इमारतें भर नहीं थीं</b></p>
<p>विश्व व्यापार केंद्र के दो टावर सिर्फ दो गगनचुंबी इमारतें भर नहीं थीं। ये दो टावर आधुनिक अमेरिका की प्रगति के प्रतीक थे, जो कि पूंजीवाद और पश्चिमी सभ्यता के परिचायक शहर न्यूयॉर्क के आकाश पर छाए हुए थे। इन्हीं के इर्द-गिर्द वॉल स्ट्रीट, शेयर बाजार और वित्त की दुनिया बसी हुई है। वहीं दूसरी ओर पेंटागन अमेरिका की सुरक्षा व्यवस्था का हृदय है, जहां से सारे विश्व पर अमेरिका की नजर रहती आई है।</p>
<p>इन प्रतीकों पर हमला अमेरिका के नाभि कुंड में हमला है&#8230; जिसने पूरे अमेरिका को झकझोर दिया है। हजारों जानों और अरबों-खरबों के वित्त की हानि तो न्यूनतम है। जो भी कभी न्यूयॉर्क के विश्व व्यापार केंद्र गया है वह जानता है कि पूरा इलाका बहुत ही घना बसा हुआ है&#8230; और अब यह इमारत इतिहास के पन्नों में खून से दर्ज हो गई।</p>
<p>पूरा अमेरिका शर्म, दुख और आक्रोश से भरा हुआ है। राष्ट्रपति बुश के लिए भी यह परीक्षा की घड़ी है। एक ओर जहां अमेरिका &#8216;<em>राष्ट्रीय प्रक्षेपास्त्र सुरक्षा प्रणाली</em>&#8216; से अपनी सीमाएं सुरक्षित करना चाहता था, वहीं आतंकवादियों ने अमेरिका के अंदर ही से वार करके देश की पूरी सुरक्षा व्यवस्था पर ही प्रश्नचिह्न लगा दिया है।</p>
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		<title>क्या यही न्यूयॉर्क है&#8230;</title>
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		<pubDate>Wed, 12 Sep 2001 10:07:46 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[11 सितंबर]]></category>
		<category><![CDATA[न्यूयॉर्क शहर]]></category>
		<category><![CDATA[मैनहट्‌टन]]></category>
		<category><![CDATA[वर्ल्ड ट्रेड सेंटर]]></category>

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		<description><![CDATA[अमेरिका में बसों पर लदे और ट्रक के पीछे लटके हुए लोगों की कोई कल्पना भी नहीं कर सकता, लेकिन आज न्यूयॉर्क शहर में हर ओर यही नजारा था। मैनहट्‌टन में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के ध्वस्त होने के बाद पूरा शहर सकते में आ गया था। कहीं भी भगदड़ नहीं थी, पर चिंता और आशंका का ही माहौल था। टी.वी. के सामने लोगों की भीड़ थी। टेलीफोन और इंटरनेट ने तो लगभग काम बंद कर दिया था। मैनहट्‌टन में वर्ल्ड [...]]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><img class="alignleft size-full wp-image-3073" title="क्या यही न्यूयॉर्क है..." alt="" src="https://www.jmuchhal.com/wp-content/uploads/2001/09/241.jpg" width="311" height="307" /><span class="dropcap">अ</span>मेरिका में बसों पर लदे और ट्रक के पीछे लटके हुए लोगों की कोई कल्पना भी नहीं कर सकता, लेकिन आज न्यूयॉर्क शहर में हर ओर यही नजारा था।</p>
<p>मैनहट्‌टन में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के ध्वस्त होने के बाद पूरा शहर सकते में आ गया था। कहीं भी भगदड़ नहीं थी, पर चिंता और आशंका का ही माहौल था। टी.वी. के सामने लोगों की भीड़ थी। टेलीफोन और इंटरनेट ने तो लगभग काम बंद कर दिया था।</p>
<div class="simplePullQuoteRightGolden">मैनहट्‌टन में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के ध्वस्त होने के बाद पूरा शहर सकते में आ गया था<span></span></div>
<p>मैनहट्‌टन एक टापू है जिसमें आने और बाहर जाने के लिए सुरंग या पुल का ही सहारा लेना पड़ता है। दिन में मैनहट्‌टन में लगभग 80 लाख लोग काम करते हैं जिनमें से 70 लाख रोज बसों, ट्रेनों और सब-वे से मैनहट्‌टन में आते हैं। आप अंदाज लगाएं कि इन सारी व्यवस्थाओं में से जब 95 प्रतिशत बंद हों और लोग शहर के बाहर जाना चाहें, तो कैसे?</p>
<p>मैं और मेरे साथी मैनहट्‌टन के मध्य भाग मिडटाउन से लाखों लोगों के साथ मीलों पैदल चलकर क्वीन्स ब्रिज पार करके रहवासी इलाके क्वीन्स पहुंचे और यही हाल उन लाखों लोगों का है। और जो वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के आसपास के इलाके हैं जो कि सुबह काफी जल्दी शुरू हो जाते हैं, वहां का तो अंदाज लगाना भी मुश्किल है।</p>
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		<title>पूरा न्यूयॉर्क शहर दहशत के घेरे में</title>
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		<pubDate>Tue, 11 Sep 2001 06:47:07 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[11 सितंबर]]></category>
		<category><![CDATA[अमेरिकी एयरलाइंस]]></category>
		<category><![CDATA[न्यूयॉर्क सिटी]]></category>
		<category><![CDATA[मेयर पद चुनाव]]></category>
		<category><![CDATA[वर्ल्ड ट्रेड सेंटर]]></category>
		<category><![CDATA[विमान अपहरण]]></category>

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		<description><![CDATA[शहर में आज मेयर पद के लिए प्राथमिक चुनाव होना था। यहां आतंकवादी हमलों के बाद जबर्दस्त दहशत और भय का माहौल है। हर व्यक्ति डरा हुआ है। अफवाहों का बाजार गर्म है तथा खबर है कि कुल मिलाकर 8 विमानों का अपहरण हुआ था। वर्ल्ड ट्रेड सेंटर अब इतिहास बन कर रह गया है। यहां करीब 1.5 लाख लोग कार्य करने आते थे। जिस समय अपहृत विमानों द्वारा हमला किया गया, अमेरिकी समय के अनुसार सुबह के 9 बजे [...]]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><img class="alignleft size-full wp-image-1481" alt="पूरा न्यूयॉर्क शहर दहशत के घेरे में " src="https://www.jmuchhal.com/wp-content/uploads/2001/09/18.jpg" width="311" height="307" /><span class="dropcap">श</span>हर में आज मेयर पद के लिए प्राथमिक चुनाव होना था। यहां आतंकवादी हमलों के बाद जबर्दस्त दहशत और भय का माहौल है। हर व्यक्ति डरा हुआ है। अफवाहों का बाजार गर्म है तथा खबर है कि कुल मिलाकर 8 विमानों का अपहरण हुआ था।</p>
<p>वर्ल्ड ट्रेड सेंटर अब इतिहास बन कर रह गया है। यहां करीब 1.5 लाख लोग कार्य करने आते थे। जिस समय अपहृत विमानों द्वारा हमला किया गया, अमेरिकी समय के अनुसार सुबह के 9 बजे थे तथा माना जा सकता है कि वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के दोनों टॉवरों में एक तिहाई के करीब लोग आ चुके होंगे। लेकिन उम्मीद की जा रही है कि इनमें से काफी लोग हमलों से बचकर बाहर निकल गए थे।</p>
<div class="simplePullQuoteRightPerpal">वर्ल्ड ट्रेड सेंटर अब इतिहास बन कर रह गया है। आतंकवादी हमलों के बाद न्यूयॉर्क शहर में पूरी तरह से उथल-पुथल है<span></span></div>
<p>न्यूयॉर्क सिटी में आसपास के शहरों से भी करीब 70 लाख लोग कार्य करने आते हैं। इस समय सभी टनल्स, पुल तथा अन्य रास्ते जाम हैं। मेनहट्‌टन उपनगर को खाली करा लिया गया है।</p>
<div>
<p>शहर के दूरदराज के इलाकों से भी वर्ल्ड ट्रेड सेंटर से उड़ते धुएं को देखा जा सकता है। इसी बीच अमेरिकी एयरलाइंस ने भी इन समाचारों की पुष्टि की है कि उसकी फ्लाइट्‌स 767 बोस्टन शहर से अपहृत हुई थी। आतंकवादी हमलों के बाद न्यूयॉर्क शहर में पूरी तरह से उथल-पुथल है।</p>
</div>
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