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	<title>Jitendra Muchhal &#124; Jitendra Muchhal Website &#124; J Muchhal &#124; जीतेंद्र मुछाल&#187; शेयर बाजार</title>
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		<title>&#8220;रहिमन पानी राखिए&#8230; वित्त जगत में &#8216;साख&#8217; का अभाव&#8221;</title>
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		<pubDate>Sat, 11 Oct 2008 12:16:46 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[अमेरिकी अर्थव्यवस्था]]></category>
		<category><![CDATA[21वीं शताब्दी]]></category>
		<category><![CDATA[एआईजी]]></category>
		<category><![CDATA[क्रेडिट क्राइसिस]]></category>
		<category><![CDATA[डाउ जोन्स]]></category>
		<category><![CDATA[लेहमैन]]></category>
		<category><![CDATA[शेयर बाजार]]></category>

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		<description><![CDATA[अमेरिका सहित सारी दुनिया के शेयर बाजारों में निरंतर गिरावट, पूरी अर्थव्यवस्था में हर संस्था और व्यक्ति द्वारा दूसरे की &#8216;साख&#8216; पर घोर संदेह, शताब्दियों पुराने बैंकों का चंद दिनों में पतन, इसके बाद- अब और क्या?? 21वीं शताब्दी में अमेरिका के लिए 9/11 का दिन अभी तक एक ऐसा मील का पत्थर था, जिसने पूरे रास्ते का निर्धारण किया। लेकिन इस साल 9/11 से 10/11 तक के इस माह ने ऐसा इतिहास रच दिया, जो पूरी दुनिया को हमेशा [...]]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><img class="alignleft size-full wp-image-2108" alt="&quot;रहिमन पानी राखिए... वित्त जगत में 'साख' का अभाव&quot;" src="https://www.jmuchhal.com/wp-content/uploads/2008/08/1281.jpg" width="311" height="307" /><span class="dropcap">अ</span>मेरिका सहित सारी दुनिया के शेयर बाजारों में निरंतर गिरावट, पूरी अर्थव्यवस्था में हर संस्था और व्यक्ति द्वारा दूसरे की &#8216;<em>साख</em>&#8216; पर घोर संदेह, शताब्दियों पुराने बैंकों का चंद दिनों में पतन, इसके बाद- अब और क्या??</p>
<p>21वीं शताब्दी में अमेरिका के लिए 9/11 का दिन अभी तक एक ऐसा मील का पत्थर था, जिसने पूरे रास्ते का निर्धारण किया। लेकिन इस साल 9/11 से 10/11 तक के इस माह ने ऐसा इतिहास रच दिया, जो पूरी दुनिया को हमेशा याद दिलाता रहेगा कि &#8216;<em>रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून&#8230;.</em>&#8216;</p>
<p><b>बीता मास :</b> 9/11 की बरसी को गुजरे अभी महीना भी पूरा नहीं हुआ है, पर लग रहा है मानो बरसों बीत गए। हर शुक्रवार और सप्ताहांत पर एक नई वित्त समस्या सिर उठाए खड़े रहती है, जो सभी को ध्वस्त करने जैसी लगती है। पहले लेहमैन, मेरिल, एआईजी का हादसा हुआ फिर 700 बिलियन डॉलर के बेल आउट बिल और उसकी राजनीतिक रस्साकशी को अंतिम रामबाण दवाई बताया गया।</p>
<p>भारी मतभेद के बावजूद बिल पास हुए, लेकिन सारे बाजार पर उसका असर रहा। गरम तवे पर पानी की चंद बूँदों सा। वारेन बफेट ने गोल्डमैन और जीई में भारी निवेश घोषित किया, उसका प्रभाव भी टिका नहीं। सरकार ने बैंकों में जमा पूँजी की सुरक्षा सीमा बढ़ा दी और 2.0 प्रतिशत की न्यूनतम दर से भी घटाकर ब्याज दर 1.5 प्रतिशत कर दी, लेकिन ये आर्थिक सुनामी ऐसे थमती नहीं लगती। जॉर्ज बुश और वित्त मंत्री पाउलसन तो प्रायः रोज ही टीवी पर आकर जनता को संबल देने का भरसक प्रयास कर रहे हैं, लेकिन कोई असर नहीं।</p>
<div class="simplePullQuoteRightGolden">21वीं शताब्दी में दुनिया ने ग्लोबलाइजेशन (वैश्वीकरण) से बढ़ती हुई प्रगति और व्यापार का सिर्फ &#8216;सुंदरम्‌&#8217; पक्ष देखा था, अब उसी का &#8216;सत्यम्‌&#8217; पक्ष भी देखना होगा<span></span></div>
<p><b>बीता सप्ताह :</b> इस सप्ताह ने तो मानो ऐसा डर पैदा कर दिया कि मानो इस रात की कोई सुबह नहीं। डाउ जोन्स सूचकांक के 112 वर्षीय इतिहास में इन 5 दिनों में ये सर्वाधिक 18 प्रतिशत गिर गया। गुरुवार को सिर्फ आखिरी एक घंटे के कारोबार में डाउ 679 अंक गिरा। शुक्रवार को पुनः डाउ के इतिहास में पहली बार एक ही दिन में इंडेक्स ने 1000 अंकों का &#8216;<em>ज्वार-भाटा</em>&#8216; दिखा दिया। सुबह खुलते ही बाजार 697 अंकों तक गिरा और डाउ 8000 के भी नीचे गिर गया। दिनभर बाजार 500-600 अंक नीचे रहा, आखिरी एक घंटे में बाजार 322 अंकों तक चढ़ा और आखिरी कुछ पलों में फिर गिरकर अंत में 128 अंक नीचे 8451 पर बंद हुआ। सिर्फ एक सप्ताह ने जैसे पूरी दुनिया के बाजारों और सरकारों को हिला दिया है और दिग्गजों-विशेषज्ञों की समझ के परे है कि ये कहाँ थमेगा? विडम्बना है कि ठीक एक साल पहले 9 अक्टूबर 2007 को डाउ ने 14164 अंक का कीर्तिमान बनाया था। डाउ सूचकांक एक वर्ष में 40 प्रतिशत से अधिक गिर चुका है। ये ही हाल एस एंड पी 500 और नेस्देक का भी है।</p>
<p><b>अब मूल मजारा क्या है</b><b>? :</b> वैसे तो समस्या इतनी विकराल और एक दूसरे में गुत्थम-गुत्था है कि संक्षिप्त में इसका विवेचन असंभव है, लेकिन आज आर्थिक और मॉर्टगेज, सब प्राइम समस्या से भी बढ़कर चुनौती <em>&#8216;साख&#8217;</em> की है, यानी &#8216;<em>क्रेडिट क्राइसिस</em>&#8216;। साख अथवा क्रेडिट अथवा विश्वास को पूँजी की तरलता से सौ गुना साकार संबल तो दिया जा सकता है, लेकिन उसका मूलाधार निर्गुण, निराकार है।</p>
<p>एक बैंक या संस्था दूसरे बैंक या संस्था को कर्ज देने और उसके साथ कोई भी लेन-देन करने में डर रही है। क्या पता दूसरे बैंक के पास इतनी पूँजी है भी कि नहीं या &#8216;<em>कल हो न हो</em>&#8216;। विगत में लेहमैन और एआईजी और कई बैंकों ने भी बार-बार उद्घोषणा की थी कि सब एकदम ठोस है, उनके पास अथाह वित्तीय जमा पूँजी है, लेकिन उन्हें ध्वस्त होने में ताश के पत्तों के महल से ज्यादा वक्त नहीं लगा।</p>
<p>स्वाभाविक है, जब उन जैसे महारथियों का कोई भरोसा नहीं, तो फिर किसी और का कैसे? उनकी ऐसी दयनीय हालत की बुनियाद थे मकानों को दिए गए बेतहाशा कर्ज और उस खोखली नींव के ऊपर खड़े अरबों-खरबों के वित्तीय सौदे, ऊँची इमारतें। जब तक &#8216;<em>क्रेडिट क्राइसिस</em>&#8216; की पूरी जकड़न का वित्तीय और सरकारी मालिश से इलाज नहीं होता, दुनियाभर के स्टॉक मार्केट को स्थायी राहत नहीं मिलेगी। 21वीं शताब्दी में दुनिया ने ग्लोबलाइजेशन (वैश्वीकरण) से बढ़ती हुई प्रगति और व्यापार का सिर्फ &#8216;<em>सुंदरम्‌</em>&#8216; पक्ष देखा था, अब उसी का &#8216;<em>सत्यम्‌</em>&#8216; पक्ष भी देखना होगा कि दुनिया के एक भाग की परेशानी से दूसरा अछूता नहीं रह सकता और फिर इस सर्वव्याप्त गरल के कड़वे घूँट को &#8216;<em>शिवम्‌</em>&#8216; की तरह सारी दुनिया को पीना पड़ेगा। सारे प्रमुख देशों के वित्तमंत्री इस समय वाशिंगटन में इसी चर्चा के लिए मिल रहे हैं, सारी दुनिया की आँखें उन पर टिकी हैं कि कुछ ऐसे सामूहिक निर्णय लिए जाएँ, जो सभी को मान्य हों और जिससे इस &#8216;<em>क्रेडिट क्राइसिस</em>&#8216; से निपटा जा सके। प्रबल आशा है कि कुछ साहसिक निर्णय लिए जाएँगे, जिनका प्रभाव विश्वव्यापी होगा।</p>
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		<title>अमेरिकन मंदी ने 10 लाख रोजगार खाए</title>
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		<pubDate>Wed, 25 Jul 2001 11:04:48 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[अमेरिकी अर्थव्यवस्था]]></category>
		<category><![CDATA[अमेरिकी मंदी]]></category>
		<category><![CDATA[अमेरिकी वित्तमंत्री]]></category>
		<category><![CDATA[आर्थिक मंदी]]></category>
		<category><![CDATA[चीन की अर्थव्यवस्था]]></category>
		<category><![CDATA[शेयर बाजार]]></category>

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		<description><![CDATA[अमेरिका में नास्दाक शेयर बाजार में आई गिरावट के बाद शुरू हुई मंदी थमने का नाम नहीं ले रही है। हाल ही में प्रकाशित आंकड़ों से यह बात ज्ञात हुई है कि दिसंबर 2000 से शुरू हुई मंदी अभी तक 10 लाख लोगों को विदा कर चुकी है। मंदी का प्रभाव केवल टेक्नोलॉजी क्षेत्र तथा आईटी कंपनियों पर ही नहीं, जैसा कि विशेषकर भारत में प्रचारित किया जा रहा है, बल्कि इसकी चपेट में ऑटोमोबाइल, भारी उद्‌योग, उत्पादन इकाइयों से [...]]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><img class="alignleft size-full wp-image-3247" title="अमेरिकन मंदी ने 10 लाख रोजगार खाए" alt="" src="https://www.jmuchhal.com/wp-content/uploads/2001/07/341.jpg" width="311" height="307" />अमेरिका में नास्दाक शेयर बाजार में आई गिरावट के बाद शुरू हुई मंदी थमने का नाम नहीं ले रही है। हाल ही में प्रकाशित आंकड़ों से यह बात ज्ञात हुई है कि दिसंबर 2000 से शुरू हुई मंदी अभी तक 10 लाख लोगों को विदा कर चुकी है।</p>
<p>मंदी का प्रभाव केवल टेक्नोलॉजी क्षेत्र तथा आईटी कंपनियों पर ही नहीं, जैसा कि विशेषकर भारत में प्रचारित किया जा रहा है, बल्कि इसकी चपेट में ऑटोमोबाइल, भारी उद्‌योग, उत्पादन इकाइयों से लेकर उपभोक्ता सामग्री बनाने वाली कंपनियां, बड़े-बड़े डिपार्टमेंटल स्टोर्स भी आ गए हैं। किसी न किसी बड़ी कंपनी द्वारा हजारों की संख्या में छंटनी की खबर आना यहां आम बात हो गई है। एक आंकड़े के अनुसार नास्दाक शेयर बाजार में सूचीबद्ध आईटी की कपंनियों ने इस गिरावट में 3 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर का नुकसान उठाया है। कई डॉट कॉम कंपनियों के शेयर, एक समय जिनका भाव 200 डॉलर तक पहुंच चुका था, आज 1 डॉलर में बिक रहे हैं।</p>
<p><b>किसने कितनों को अलविदा कहा</b></p>
<p>न्यूयॉर्क में हाल ही में अमेरिका की बड़ी कंपनियों द्वारा अपने कर्मचारियों की छंटनी की सूची जारी की गई है। इस सूची में कंपनी का नाम तथा कोष्ठक में उनके द्वारा निकाले गए कर्मचारियों की संख्या को देखकर स्थिति की गंभीरता का पता चलता है।</p>
<div class="simplePullQuoteRight">उन्होंने आशान्वित करने वाली एक ही बात कही है कि अब स्थिति और अधिक खराब नहीं होगी<span></span></div>
<p><b>आईटी कंपनियों में छंटनी एक नजर में</b></p>
<p>नॉर्टेल नेटवर्क (30,000), मोटोरोला (26,000), सोलेक्ट्रॉन (20,850), वर्ल्डकॉम (11,550), लुसेंट टेक्नोलॉजी (10,000), कम्पॉक कम्प्यूटर (9000), इरिक्सॅन (9000), सिस्को सिस्टम्स (8,500), फिलिप्स इलेक्ट्रॉनिक्स (7,000), कॉर्निंग (6,125), डेल कम्प्यूटर (5,700) व सीमेन्स (5,500)।</p>
<p><b>उत्पादन कंपनियों में छंटनी</b></p>
<p>जनरल इलेक्ट्रिक (75,000), हनीवेल (50,000), डेमलर क्रिसलर्स जनरल मोटर्स (15,000), डेल्फी ऑटोमोटिव (11,500), प्रॉक्टर्स एंड गेम्बल (9, 600), मित्सुबिशी (9,500), बोइंग (8,600), यूनीलीवर (8,000)।</p>
<p><b>ग्रीनस्पान अचंभे में</b></p>
<p>अमेरिकी फेडरल रिजर्व के प्रमुख (अमेरिकी वित्तमंत्री) एलन ग्रीनस्पान को भी देश को मंदी से उबारने का रास्ता नजर नहीं आ रहा है। तीन बार ब्याज की दरों को कम करने के बाद भी वे अमेरिका को मंदी से उबारने में सफल नहीं हो पाए हैं। अमेरिकी सरकार ने उपभोक्ता मांग में तेजी लाने के उद्‌देश्य से देश की जनता को करीब 1 ट्रिलियन डॉलर से ज्याद टैक्स में कटौती की घोषणा की है।</p>
<p>हाल ही में फेडरल रिजर्व के कर्ताधर्ता ग्रीनस्पान ने निकट भविष्य में मंदी छंट जाने का कोई ठोस आश्वासन देने से इंकार कर दिया। उन्होंने आशान्वित करने वाली एक ही बात कही है कि अब स्थिति और अधिक खराब नहीं होगी। शुभ संकेत के रूप में यह भी देखा जा सकता है कि अमेरिका में उपभोक्ता की व्यय शक्ति बढ़ी है। जाहिर है कि मांग बढ़ने से कंपनियों की स्थिति में सुधार आएगा। दूसरी ओर अमेरिकी मंदी का असर अब यूरोप की ओर भी बढ़ रहा है। जापान भी मंदी की चपेट में है और चीन की अर्थव्यवस्था के विकास को झटका लगने की खबर है। इस चिंताजनक हालात में सुधार की उम्मीद पर टिकी है व्यापार की दुनिया।</p>
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		<title>बजट बाद बीएसई इंडेक्स 3000 पार कर जाएगा?</title>
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		<comments>https://www.jmuchhal.com/budget-baad-bse-index-3000-paar-kar-jayega#comments</comments>
		<pubDate>Thu, 27 Feb 1992 07:33:21 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[कारोबार की दुनिया]]></category>
		<category><![CDATA[केपिटल मार्केट]]></category>
		<category><![CDATA[डॉ. मनमोहनसिंह]]></category>
		<category><![CDATA[बीएसई इंडेक्स]]></category>
		<category><![CDATA[शेयर बाजार]]></category>
		<category><![CDATA[सेंसेक्स]]></category>

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		<description><![CDATA[चौंकिए नहीं- क्या आप दो वर्ष पूर्व यह कल्पना भी कर सकते थे कि विश्व की महाशक्ति सोवियत संघ निकट भविष्य में अस्तित्वहीन हो जाएगी? या फिर बीसवीं शताब्दी के सबसे महत्वपूर्ण राजनयिक के रूप में पहचाने जाने वाले गोर्बाचेव विश्व पटल से पूर्णतः ओझल हो जाएंगे? इसी तर्ज में भारतीय मानस में सदा ही से &#8216;डर&#8216; और &#8216;खौफ&#8217; की दृष्टि से देखे जाने वाले वार्षिक बजट से शेयर बाजार जैसे संवेदनशील व्यवसाय में और तेजी आएगी, इस कल्पना का [...]]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><img class="alignleft size-full wp-image-1562" alt="बजट बाद बीएसई इंडेक्स 3000 पार कर जाएगा?" src="https://www.jmuchhal.com/wp-content/uploads/1992/02/56.jpg" width="311" height="307" /><strong><span class="dropcap">चौं</span>किए नहीं</strong>- क्या आप दो वर्ष पूर्व यह कल्पना भी कर सकते थे कि विश्व की महाशक्ति सोवियत संघ निकट भविष्य में अस्तित्वहीन हो जाएगी? या फिर बीसवीं शताब्दी के सबसे महत्वपूर्ण राजनयिक के रूप में पहचाने जाने वाले गोर्बाचेव विश्व पटल से पूर्णतः ओझल हो जाएंगे? इसी तर्ज में भारतीय मानस में सदा ही से &#8216;<em>डर</em>&#8216; और &#8216;खौफ&#8217; की दृष्टि से देखे जाने वाले वार्षिक बजट से शेयर बाजार जैसे संवेदनशील व्यवसाय में और तेजी आएगी, इस कल्पना का प्रस्फुटित होना ही अपने आप में एक घटना है।</p>
<p>किंतु पूर्वाग्रहों से परे होकर अगर हम वर्तमान सरकार और उसके द्वारा निरंतर किए जा रहे आर्थिक परिवर्तनों को ध्यान में रखते हुए भविष्य का अंदाज लगाने का प्रयास करें, तो शेयर बाजार में तेजड़ियों की मजबूत गिरफ्त में कोई ढील अभी कहीं नजर नहीं आती है। लगता है कि इंडेक्स के 3000 पर पहुंचने की भूमिका तैयार है।</p>
<p>नरसिंहराव सरकार के सत्ता संभालने के बाद बीएसई इंडेक्स लगभग 1000 बिंदु ऊंचा हुआ है। जनवरी 92 में एक ही महीने में इंडेक्स में लगभग 400 बिंदुओं की तेजी आई है और वर्तमान 2500 का स्तर संभावित 3000 से सिर्फ 500 बिंदु ही दूर है। आज जब युवा वर्ग के &#8216;<em>हीरो</em>&#8216; गावसकर-कपिल देव या अनिल कपूर-सलमान खान से हटकर हर्षद मेहता-निमेष शाह हो गए हैं, तब तो लगता है कि इस वर्ष इंडेक्स चढ़ाई 3000 अंतिम लक्ष्य नहीं, वरन 3500 तक की यात्रा में एक उल्लेखनीय पड़ाव पर सिद्ध हो सकता है। पिछली 24 जुलाई को जब डॉ. मनमोहनसिंह का बजट आया था, तब बीएसई इंडेक्स 1500 के लगभग था। इस बजट के समय इंडेक्स 1000 पाइंट बढ़कर 2500 के इर्दगिर्द पहुंच गया है।</p>
<div class="simplePullQuoteRightGolden">उस दिन हुई महत्वपूर्ण घटना/घोषणा; महत्वपूर्ण भावों सहित उस दिन का सेन्सेक्स उच्चांक; (विगत बंद सूचकांक से उच्चांक का फर्क)<span></span></div>
<p>बजट के बाद भी सरकार इंडेक्स को और सुदृढ़ देखना चाहेगी, इसका सीधा अंदाज इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले बजट में इस बजट तक की अवधि में लगभग हर हफ्ते अर्थव्यवस्था के सुधार और उदारीकरण के हेतु सरकार कोई न कोई ऐसी घोषणा करती रही, जिससे कि बाजार का रुख अनुकूल बना रहा। इससे साफ जाहिर होता है कि वर्तमान सरकार केपिटल मार्केट को अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण स्थान देना चाहती है, जिसके लिए अत्यावश्यक है कि सेंसेक्स ठोस बना रहे।</p>
<p>यह तथ्य तीन आंकड़ों से और भी स्पष्ट हो जाता है। पहला, 1992 में अब तक सेंसेक्स में लगभग 500 पाइंट की वृद्धि हो चुकी है। दूसरा, पिछले बजट से इस बजट की समयावधि में ऐसा 12 बार हुआ है कि बी.एस.ई. इंडेक्स में विगत दिन में बंद सूचकांक से 5 प्रतिशत से भी अधिक की वृद्धि अगले दिन आई है। दूसरे शब्दों में जुलाई से अब तक ऐसा लगभग 20 बार हुआ है कि सेंसेक्स में किसी दिन के उच्चांक और पिछले बंद सूचकांक में 40 से अधिक पाइंट की उल्लेखनीय तेजी आई हो। ये बढ़त एक्सचेंज अधिकारियों द्वारा समय-समय पर लगाई गई कड़ी पाबंदियों और शर्तों, म्युचुअल फंड व वित्तीय संस्थाओं द्वारा भारी बेचान, &#8216;प्राफिट बुकिंग&#8217; और &#8216;<em>टेक्नीकल करेक्शन</em>&#8216; के बाद भी अनवरत बनी रही है, यही इसकी सुदृढ़ता का सबसे बड़ा परिचायक है।</p>
<p>नीचे क्रमानुगत पिछले बजट से अभी तक सेन्सेक्स की चुनिंदा छलांगों का वर्णन दिया हुआ है, जो कि इस प्रकार है : दिनांक उस दिन हुई महत्वपूर्ण घटना/घोषणा; महत्वपूर्ण भावों सहित उस दिन का सेन्सेक्स उच्चांक; (विगत बंद सूचकांक से उच्चांक का फर्क)।</p>
<p><strong>19 जुलाई 91</strong> : अवमूल्यन का अंतिम दौर व बैंक ऑफ इंग्लैंड को गिरवी रखे सोने की चौथी और अंतिम खेप रवाना; एसीसी 2580, एल.एंडटी. 110, टिस्को 214, 1455.75 (+13.22)</p>
<p><strong>24 जुलाई</strong> : 7719 करोड़ के घाटे का बजट पेश एवं नई औद्योगिक नीति के अंतर्गत लाइसेंस राज का अंत; 1561.08 ( 75.32)</p>
<p><strong>26 जुलाई</strong> : सरकार द्वारा कंपनियों में निवेश हेतु विदेशी पूंजी की अंश सीमा ५१ प्रतिशत तक बढ़ा देने का विचार; 1630.27 ( 74.74)</p>
<p><strong>29 जुलाई</strong> : बजट के बाद स्टॉक एक्सचेंज में भारी तेजी; एसीसी 3200, अपोलो टॉयर 105, 1679.95 ( 79.79)</p>
]]></content:encoded>
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		<title>हर्षद मेहता : बी.एस.ई. के दलालों में सरताज</title>
		<link>https://www.jmuchhal.com/harshad-mehta-bse-ke-dalalo-mein-sarataj</link>
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		<pubDate>Tue, 04 Feb 1992 06:17:44 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[कारोबार की दुनिया]]></category>
		<category><![CDATA[बंबई स्टॉक एक्सचेंज]]></category>
		<category><![CDATA[बी.एस.ई. के दलाल]]></category>
		<category><![CDATA[शेयर दलाल]]></category>
		<category><![CDATA[शेयर बाजार]]></category>
		<category><![CDATA[स्टॉक एक्सचेंज]]></category>
		<category><![CDATA[हर्षद मेहता]]></category>

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		<description><![CDATA[वर्ष 1991-92 के लिए 26 करोड़ का एडवांस इन्कम टैक्स जमा करवाने वाले हर्षद मेहता का आखिर इतिहास क्या है? इतनी कम समयावधि में यह व्यक्ति शीर्ष तक कैसे पहुंचा, यह सवाल सभी के मन में कौंध रहा है? दिनांक 10 फरवरी की सुबह राष्ट्र के प्रमुख वित्तीय अखबारों में आधे पृष्ठ का एक ध्यानाकर्षक विज्ञापन प्रकाशित हुआ था। विज्ञापन का शीर्षक था, &#8216;हर्षद मेहता झूठ बोलता है।&#8217; हर्षद मेहता की ही कंपनी ग्रोमोर रिसर्च एंड एसेट्‌स मैनेजमेंट लि. द्वारा [...]]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><img class="alignleft size-full wp-image-1557" alt="हर्षद मेहता : बी.एस.ई. के दलालों में सरताज" src="https://www.jmuchhal.com/wp-content/uploads/1992/02/54.jpg" width="311" height="307" /><span class="dropcap">व</span>र्ष 1991-92 के लिए 26 करोड़ का एडवांस इन्कम टैक्स जमा करवाने वाले हर्षद मेहता का आखिर इतिहास क्या है? इतनी कम समयावधि में यह व्यक्ति शीर्ष तक कैसे पहुंचा, यह सवाल सभी के मन में कौंध रहा है? दिनांक 10 फरवरी की सुबह राष्ट्र के प्रमुख वित्तीय अखबारों में आधे पृष्ठ का एक ध्यानाकर्षक विज्ञापन प्रकाशित हुआ था। विज्ञापन का शीर्षक था, &#8216;<em>हर्षद मेहता झूठ बोलता है</em>।&#8217; हर्षद मेहता की ही कंपनी ग्रोमोर रिसर्च एंड एसेट्‌स मैनेजमेंट लि. द्वारा जारी इस विज्ञापन में विगत कुछ महीनों से चर्चित शेयर दलाल, हर्षद मेहता के कार्यकलापों का विस्तृत बयान दिया गया। इसी के साथ अब तक सिर्फ &#8216;<em>लीडिंग बुल</em>&#8216; या &#8216;<em>बिग बुल</em>&#8216; के नाम से पहचाने जाने वाले व्यक्ति से सभी परिचित हो गए। और वह व्यक्ति है- हर्षद मेहता। शेयर बाजार के प्रति बढ़ते आकर्षण और इसमें छुपी द्रुतगामी कमाई ने असंख्य लोगों को इस ओर आकृष्ट किया है। इस बढ़ती हुई रुचि का सबसे अधिक फायदा स्टॉक एक्सचेंज के सदस्य, शेयर दलालों को मिला।</p>
<p>इसकी सीधा-सा उदाहरण यह है कि आज एक मोटे अनुमान से सिर्फ बंबई स्टॉक एक्सचेंज में प्रतिदिन औसतन 500 करोड़ रुपए का कामकाज होता है। एक प्रतिशत की दलाली के हिसाब से रोजाना सिर्फ बीएसई के दलाल 5 करोड़ रुपए की कमाई कर लेते हैं। परंतु सभी दलालों की दिलचस्पी महज दलाली से नहीं होती। कुछेक ऐसे भी हैं, जो दूसरों का नाम भर लेकर वास्तव में खुद ही के लिए व्यवसाय करने लगते हैं। विगत वर्ष में तेजी में आया एक ऐसा नाम उभरा था 29 वर्षीय निमेष शाह का, जिसने सेंचुरी और हेक्स्ट के शेयरों की करोड़ों की खरीद की थी और उसका नाम भारत के सर्वोच्च व्यक्तिगत आयकरदाता के रूप में प्रसिद्ध हो गया था।</p>
<p><strong>दलालों में सरताज&#8230;</strong></p>
<div class="simplePullQuoteRight">एक प्रतिशत की दलाली के हिसाब से रोजाना सिर्फ बीएसई के दलाल 5 करोड़ रुपए की कमाई कर लेते हैं<span></span></div>
<p>गत वर्ष के प्रमुख तेजड़िए अगर निमेष शाह थे, तो इस साल वह निस्संदेह हर्षद मेहता हैं। इनकी नजरें जा टिकीं एसीसी और अपोलो टायर के शेयरों पर और फिर जो राष्ट्रव्यापी खरीद शुरू हुई कि 12 दिसंबर 91 से 2 जनवरी 92 तक की सेटलमेंट अवधि में एसीसी के भाव 2955 से 3300 और अपोलो टायर के भाव 111 से 174 तक पहुंच गए। यह लेख लिखे जाने के दिन एसीसी 4110 और अपोलो टायर 212 के शीर्ष पर पहुंच चुका है और अभी भी तेजी सभी प्रतिबंधों के बावजूद अविरल जारी है। तेज भाव वृद्धि को देखते हुए हर स्टॉक एक्सचेंज में दलालों ने जमकर एसीसी-अपोलो टायरों को <em>&#8216;माथे मार दिया&#8217;</em>। (शार्ट सेल किया-बिना डिलीवरी का माल बेचना इस आशा से कि भाव घटने पर खरीद कर लेंगे)। परंतु उन दलालों को शायद यह ज्ञात नहीं था कि यह तेजड़िया वाकई <em>&#8216;तेज&#8217;</em> है। 3 जनवरी को &#8216;<em>पटावत</em>&#8216; (सेटलमेंट) के दिन हर्षद मेहता ने जब दोनों शेयरों की डिलीवरी मांगी, तो सभी स्तंभित रह गए। सभी को आशा थी कि भारी खरीदी का भुगतान न कर पाने की स्थिति में हर्षद मेहता सौदों का &#8216;<em>बदला</em>&#8216; देकर उन्हें अगले सेटलमेंट पर &#8216;<em>केरी-ओवर</em>&#8216; कर देगा। परंतु हुआ इसका ठीक विपरीत। हर्षद मेहता ने दलालों और बीएसई अधिकारियों के &#8216;<em>सट्‌टात्मक खरीद</em>&#8216; के आरोप को गलत सिद्ध करते हुए अपनी पूरी खरीद का एक चेक से भुगतान कर एसीसी और अपोलो टायर के लाखों शेयरों की डिलीवरी मांग ली। इस पर दोनों ही शेयरों में बेचवाल दलालों को &#8216;ऊंधा बदला&#8217; या &#8216;<em>बेकवर्डेशन चार्ज</em>&#8216; जमा करना पड़ा, जिसकी नौबत स्टॉक एक्सचेंज में बहुत कम आती है।</p>
<p>&#8216;<em>सट्‌टे</em>&#8216; के आरोप के अलावा मेहता पर यह भी आरोप लगाया गया कि एक ओर तो उन्होंने लाखों शेयरों की डिलीवरी मांगी, दूसरी ओर &#8216;<em>शॉर्ट सेल</em>&#8216; वाले दलालों को &#8216;<em>ऊंधा बदला</em>&#8216; भरने के लिए रुपए भी उन्होंने ने ही दिए। इसके अलावा एसीसी में ग्रोमोर की &#8216;<em>होल्डिंग</em>&#8216; 5.4 प्रतिशत और अपोलो टायर में 5 प्र.श. के लगभग हो गई, जिससे इन कंपनियों के टेक ओवर की आशंका व्यक्त की जाने लगी है। इन्हीं विवादों का स्पष्टीकरण करने के लिए ग्रोमोर ने 10 जनवरी के अपने विज्ञापन में लिखा कि &#8216;हर्षद मेहता और ग्रोमोर की एसीसी और अपोलो टायर में रुचि सिर्फ आकर्षक वित्तीय निवेश हेतु है, न कि कंपनी हथियाने के लिए। ग्रोमोर के सभी निवेश गहन अध्ययन और विश्लेषण पर आधारित रहते हैं और 90 प्र.श. खरीद का डिलीवरी लेकर भुगतान किया जाता है। ग्रोमोर की एसीसी पर नजर अगस्त 89 में 300 के भाव से और अपोलो टायर पर सितंबर 89 में 62 के भाव से है। ग्रोमोर का अगर कंपनी टेक ओवर का इरादा हो, तो वह संबंधित मैनेजमेंट की पूर्ण जानकारी में रहता है, जैसा कि मजदा इंडस्ट्री और मजदा पैकेजिंग के मामले में हुआ है। इन दोनों कंपनियों का ग्रोमोर ने अधिग्रहण कर लिया है।</p>
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