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	<title>Jitendra Muchhal &#124; Jitendra Muchhal Website &#124; J Muchhal &#124; जीतेंद्र मुछाल&#187; हर्षद मेहता</title>
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		<title>हर्षद मेहता-हरिदास मूंदड़ा : पंछी एक डाल के?</title>
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		<pubDate>Sat, 13 Jun 1992 06:19:47 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[कारोबार की दुनिया]]></category>
		<category><![CDATA[प्रतिभूति शेयर कांड]]></category>
		<category><![CDATA[बीएसई इंडेक्स]]></category>
		<category><![CDATA[शेयर बाज़ार]]></category>
		<category><![CDATA[हरिदास मूंदड़ा]]></category>
		<category><![CDATA[हर्षद मेहता]]></category>

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		<description><![CDATA[कुछ दिनों पहले तक, जब हर्षद मेहता का सितारा बीएसई इंडेक्स के कदम से कदम मिलाकर निरंतर बुलंदी के नए क्षितिज छू रहा था, तब हर ओर हर्षद के विवरण के लिए एक ही जुमला था- &#8216;न भूतो न भविष्यति&#8216; (न कभी पहले ऐसा हुआ, न भविष्य में होगा)। दूसरे शब्दों में, हर्षद की बिजली-सी चपल किंतु &#8216;जी.जी. भाई टॉवर&#8216; से आंखें मिलाती वित्तीय सफलता की तुलना सिर्फ एक ही व्यक्ति से की जा सकती थी, खुद हर्षद से। कॉन-मैन [...]]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><a href="https://www.jmuchhal.com/harshad-mehta-haridas-moondra/521-2" rel="attachment wp-att-3741"><img src="https://www.jmuchhal.com/wp-content/uploads/1992/06/5212.jpg" alt="हर्षद मेहता-हरिदास मूंदड़ा : पंछी एक डाल के?" width="311" height="307" class="alignleft size-full wp-image-3741" /></a><span class="dropcap">कु</span>छ दिनों पहले तक, जब हर्षद मेहता का सितारा बीएसई इंडेक्स के कदम से कदम मिलाकर निरंतर बुलंदी के नए क्षितिज छू रहा था, तब हर ओर हर्षद के विवरण के लिए एक ही जुमला था- &#8216;<em>न भूतो न भविष्यति</em>&#8216; (न कभी पहले ऐसा हुआ, न भविष्य में होगा)। दूसरे शब्दों में, हर्षद की बिजली-सी चपल किंतु &#8216;<em>जी.जी. भाई टॉवर</em>&#8216; से आंखें मिलाती वित्तीय सफलता की तुलना सिर्फ एक ही व्यक्ति से की जा सकती थी, खुद हर्षद से।</p>
<h3><strong>कॉन-मैन या विजार्ड</strong></h3>
<p>परंतु जैसे ही पासे उलटे पड़ने लगे, हर्षद के सितारे धूमिल होने लगे, प्रतिभूति शेयर कांड में उनका नाम प्रमुख <em>&#8216;कर्ता-धर्ता&#8217;</em> के रूप में उछलने लगा और उन्हें &#8216;<em>फाइनेंशियल विजार्ड</em>&#8216; के बजाय <em>&#8216;कॉन-मैन&#8217;</em> कहा जाने लगा, तभी से &#8216;<em>किंग-बुल</em>&#8216; को &#8216;<em>डिस्क्राइब</em>&#8216; करने के तरीके में थोड़ा फर्क आ गया है। बदले माहौल में लोग कहने लगे हैं, &#8216;इस एच.एम. (हर्षद मेहता) ने तो 35 वर्षों पूर्व के एच.एम. (हरिदास मूंदड़ा) की यादें ताजा कर दी हैं। हां, तब मामला सिर्फ डेढ़ करोड़ रुपए का था और आज बात हजारों करोड़ रुपए की है।&#8217;</p>
<h3><b>हरिदास-हर्षद </b></h3>
<p>तुरंत एक अत्यंत स्वाभाविक-सा सवाल उभरता है कि आखिर ये हरिदास मूंदड़ा ऐसी क्या शख्सियत थी जिनकी तुलना हर्षद मेहता से की जा रही है?</p>
<p>चूंकि यह मामला सन्‌ 1957-58 से संबंधित है, इसलिए आजाद भारत में जन्मे चुनिंदा नागरिकों को ही इसकी विस्तृत जानकारी होगी। हां, इतना जरूर है कि व्यापार-व्यवसाय-वाणिज्य से प्रत्यक्ष-परोक्ष रूप से जुड़े लोगों ने कभी न कभी तो इस नाम का जिक्र सुना ही होगा। जिनकी जानकारी सामान्य से कुछ अधिक होगी, वे यहां तक बता देंगे कि हरिदास मूंदड़ा ने एलआईसी (जीवन बीमा निगम) से शेयरों की खरीद-फरोख्त में कुछ घोटाला किया था, जिनकी जांच बंबई उच्च न्यायालय के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एम.सी. चागला ने की थी, जिसके परिणामस्वरूप हरिदास मूंदड़ा को जेल हो गई थी। किसी भी व्यक्ति की याददाश्त में इस घटना में विशिष्ट तौर पर दर्ज होने का प्रमुख कारण यह है कि जांच आयोग की सिफारिशों के फलस्वरूप तत्कालीन केंद्रीय वित्तमंत्री टी.टी. कृष्णमाचारी को इस्तीफा देना पड़ा था।</p>
<div class="simplePullQuoteRightPerpal">तुरंत एक अत्यंत स्वाभाविक-सा सवाल उभरता है कि आखिर ये हरिदास मूंदड़ा ऐसी क्या शख्सियत थी जिनकी तुलना हर्षद मेहता से की जा रही है?<span></span></div>
<p>परंतु, इससे अधिक 35 वर्षों पुराना वह मामला किसी को ध्यान हो, ऐसे बिरले ही होंगे। वर्तमान आर्थिक परिप्रेक्ष्य के चलते &#8216;<em>हरिदास मूंदड़ा कांड</em>&#8216; के विस्मृत पहलुओं को उजागर करने के दो मुख्य उद्देश्य हैं। पहला और स्वाभाविक कारण तो लोगों की हरिदास मूंदड़ा से संबद्ध मामले की विस्तृत जानकारी की जिज्ञासा को यथासंभव पूरी करना है। किंतु, दूसरा और महत्वपूर्ण मुद्दा यह है कि उस समय किन परिस्थितियों में एक व्यक्ति ने सरकार और उसके द्वारा नियंत्रित निगम को इच्छानुसार &#8216;<em>मना</em>&#8216; लिया, मामला कैसे सामने आया, उसकी जांच प्रक्रिया के दौरान किन खामियों और कमजोरियों पर प्रकाश डाला गया और क्या वे सभी आवश्यक कदम उठाए गए जिससे ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति संभव न हो। अन्य सभी सवालों का जवाब तो लेख में मिल जाएगा, किंतु अंतिम और &#8216;<em>इतिहास की पुनरावृत्ति</em>&#8216; के अहम सवाल का प्रश्नचिह्न अभी भी बरकरार है। वर्तमान प्रतिभूति कांड से यह तो स्पष्ट झलक रहा है कि &#8216;सिस्टम&#8217; पूर्णतः दोषरहित और &#8216;लीक-प्रूफ&#8217; अब भी नहीं है। अब विचारणीय पहलू यह है कि या तो हरिदास मूंदड़ा मामले के बाद भी सरकार ने प्रणाली सुधार के कारगर कदम नहीं उठाए थे, अथवा उस एच.एम. से इस एच.एम. तक के लंबे अंतराल और बदलती कार्य-शैलियों से नियंत्रण प्रणाली पिछड़ गई है।</p>
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		<title>हताश हर्षद की हवालात में जूतों के सिरहाने पहली रात</title>
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		<pubDate>Sun, 07 Jun 1992 13:41:43 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[कारोबार की दुनिया]]></category>
		<category><![CDATA[बंबई]]></category>
		<category><![CDATA[बंबई शेयर सूचकांक]]></category>
		<category><![CDATA[शेयर घोटाला]]></category>
		<category><![CDATA[शेयर मार्केट]]></category>
		<category><![CDATA[सीबीआई]]></category>
		<category><![CDATA[हर्षद मेहता]]></category>

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		<description><![CDATA[समय बड़ा बलवान रे भैया, समय बड़ा बलवान&#8217;। दो दिन पहले तक जो हर्षद मेहता &#8216;तथाकथित&#8216; रूप से भारत का सर्वोच्च आयकरदाता था, जिसकी अरबों रुपए की निजी संपदा और आलीशान बंगला, गाड़ी हर ओर चर्चा का विषय था और जो लाखों बच्चे-बूढ़े-जवानों का &#8216;आदर्श&#8216; बन चुका था, वही हर्षद मेहता 4-5 जून की रात बंबई के आजाद मैदान पुलिस थाने के लॉक-अप की अंधियारी कोठरी में अपने जूतों को &#8216;सिरहाने का तकिया&#8216; बनाकर पथरीली, कठोर फर्श पर कोने में [...]]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><img class="alignleft size-full wp-image-1555" alt="हताश हर्षद की हवालात में जूतों के सिरहाने पहली रात  " src="https://www.jmuchhal.com/wp-content/uploads/1992/06/53.jpg" width="311" height="307" /><span class="dropcap">स</span>मय बड़ा बलवान रे भैया, समय बड़ा बलवान&#8217;। दो दिन पहले तक जो हर्षद मेहता &#8216;<em>तथाकथित</em>&#8216; रूप से भारत का सर्वोच्च आयकरदाता था, जिसकी अरबों रुपए की निजी संपदा और आलीशान बंगला, गाड़ी हर ओर चर्चा का विषय था और जो लाखों बच्चे-बूढ़े-जवानों का &#8216;<em>आदर्श</em>&#8216; बन चुका था, वही हर्षद मेहता 4-5 जून की रात बंबई के आजाद मैदान पुलिस थाने के लॉक-अप की अंधियारी कोठरी में अपने जूतों को &#8216;<em>सिरहाने का तकिया</em>&#8216; बनाकर पथरीली, कठोर फर्श पर कोने में दुबका सो रहा था।</p>
<h3><b>निर्देश कुछ और ही थे!</b></h3>
<p>हर्षद की कहानी का पटाक्षेप इतना त्वरित हो जाएगा- इसका किसी को सपने में भी गुमान नहीं था। अकेले अपनी &#8216;<em>वित्तीय चपलताओं</em>&#8216; के दम पर बंबई शेयर सूचकांक को 4500 की ऊंचाइयों तक ले जाने वाले इस &#8216;<em>अजूबे</em>&#8216; के विषय में हर कोई कह रहा था कि भले ही प्रतिभूति शेयर घोटाला कितना ही बड़ा और पेचीदा क्यों न हो, हर्षद खुद को साफ बचा निकाल ले जाएगा। किंतु शायद के. माधवन के नेतृत्व में सीबीआई जांच दल को &#8216;<em>निर्देश</em>&#8216; कुछ और ही थे।</p>
<h3><b>किताब-महल की वह रात</b></h3>
<p>4 जून को तड़के हर्षद मेहता और उससे संबंधित सभी व्यक्तियों के घरों, दफ्तरों पर सीबीआई ने छापा मारकर भारी मात्रा में दस्तावेज आदि जब्त कर लिए थे। 4 जून को ही देर रात हर्षद और 7 अन्य व्यक्तियों को पूछताछ के लिए <em>&#8216;किताब-महल&#8217;</em> स्थित सीबीआई की आर्थिक अपराध शाखा ले जाया गया।</p>
<h3><b>आधी रात की हलचल</b></h3>
<p>प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सबसे ऊपरी मंजिल के अलावा पूरी &#8216;<em>किताब-महल</em>&#8216; बिल्डिंग में अंधेरा छाया हुआ था। इमारत के चारों ओर सशस्त्र पुलिस ने घेराबंदी कर रखी थी। 4-5 जून की रात सवा बजे एक टैक्सी <em>&#8216;किताब-महल&#8217;</em> के पास आकर रुकी। हाथ में ढेरों कागजात लिए उसमें से उतरा व्यक्ति बिल्डिंग में गया। फिर 2 बजे एक बड़ी पुलिस वैन इमारत के पास वाली गली में आकर रुकी, जिससे वहां एकत्रित पत्रकार, फोटोग्राफर एकदम चौकन्ने होकर बिल्डिंग के आसपास मंडराने लगे। रात के लगभग ढाई बजे वहां उपस्थित फोटोग्राफरों के &#8216;<em>फ्लैश-बल्व</em>&#8216; ने पूरा इलाका प्रकाशमान कर दिया, जब हर्षद मेहता और अन्य अभियुक्तों को पुलिस वैन में बैठाकर &#8216;<em>किताब-महल</em>&#8216; से आजाद मैदान पुलिस थाना ले जाया गया। पुलिस वैन के पीछे पत्रकारों, फोटोग्राफरों का काफिला बढ़ रहा था।</p>
<div class="simplePullQuoteRight">जिस समय हर्षद आदि ने कोर्ट रूम में प्रवेश किया, पूरा कमरा वकीलों, हर्षद के मित्र-सहयोगियों आदि से खचाखच भरा हुआ था<span></span></div>
<h3><b>बंद होने के पूर्व पत्नी से मुलाकात </b></h3>
<p>सीबीआई और सशस्त्र पुलिस के कड़े बंदोबस्त के बीच देर रात हर्षद और तीन अन्य अभियुक्तों को आजाद मैदान पुलिस &#8216;<em>लॉक-अप</em>&#8216; में बंद कर दिया गया। कोठरी में &#8216;बंद&#8217; करने से पूर्व हर्षद को उनकी पत्नी ज्योति मेहता से एक मुलाकात की इजाजत दी गई।</p>
<h3><b>हताशा में जूतों का सिरहना</b></h3>
<p>एकदम हताश, थके-हारे से दिखाई दे रहे हर्षद ने सामान्य मुजरिमों को हिरासत में बंद कर रखी जाने वाली अंधियारी-सी कोठरी और अपनी &#8216;<em>रात के अनूठे आशियाने</em>&#8216; पर एक नजर डाली, अपने जूते उतारे और एक कोने में जाकर बैठ गए। कुछ देर तो वे सामान्य तौर पर बैठे रहे, फिर &#8216;<em>आलती-पालती</em>&#8216; लगाकर बैठने का प्रयास किया और अंततः अपने जूतों का तकिया बनाकर नंगी, ठंडी फर्श पर कोने में दुबककर सो गए।</p>
<h3><b>ठेले की चाय और ब्रेड का नाश्ता </b></h3>
<p>सुबह हर्षद सात बजे के करीब नींद से जाग गए थे। उसके बाद वे वहां कोठरी में सभी पुलिसकर्मियों, अभियुक्तों के कौतूहल और उत्सुकता का केंद्र बने बैठे रहे। सुबह हवालात में बंद सभी अन्य अभियुक्तों की तरह हर्षद को भी थाने के सामने बनी चाय की छोटी-सी गुमटी से लेकर चाय और ब्रेड के टुकड़े &#8216;<em>नाश्ते</em>&#8216; के रूप में दिए गए।</p>
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		<title>हर्षद मेहता : बी.एस.ई. के दलालों में सरताज</title>
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		<pubDate>Tue, 04 Feb 1992 06:17:44 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[कारोबार की दुनिया]]></category>
		<category><![CDATA[बंबई स्टॉक एक्सचेंज]]></category>
		<category><![CDATA[बी.एस.ई. के दलाल]]></category>
		<category><![CDATA[शेयर दलाल]]></category>
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		<category><![CDATA[स्टॉक एक्सचेंज]]></category>
		<category><![CDATA[हर्षद मेहता]]></category>

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		<description><![CDATA[वर्ष 1991-92 के लिए 26 करोड़ का एडवांस इन्कम टैक्स जमा करवाने वाले हर्षद मेहता का आखिर इतिहास क्या है? इतनी कम समयावधि में यह व्यक्ति शीर्ष तक कैसे पहुंचा, यह सवाल सभी के मन में कौंध रहा है? दिनांक 10 फरवरी की सुबह राष्ट्र के प्रमुख वित्तीय अखबारों में आधे पृष्ठ का एक ध्यानाकर्षक विज्ञापन प्रकाशित हुआ था। विज्ञापन का शीर्षक था, &#8216;हर्षद मेहता झूठ बोलता है।&#8217; हर्षद मेहता की ही कंपनी ग्रोमोर रिसर्च एंड एसेट्‌स मैनेजमेंट लि. द्वारा [...]]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><img class="alignleft size-full wp-image-1557" alt="हर्षद मेहता : बी.एस.ई. के दलालों में सरताज" src="https://www.jmuchhal.com/wp-content/uploads/1992/02/54.jpg" width="311" height="307" /><span class="dropcap">व</span>र्ष 1991-92 के लिए 26 करोड़ का एडवांस इन्कम टैक्स जमा करवाने वाले हर्षद मेहता का आखिर इतिहास क्या है? इतनी कम समयावधि में यह व्यक्ति शीर्ष तक कैसे पहुंचा, यह सवाल सभी के मन में कौंध रहा है? दिनांक 10 फरवरी की सुबह राष्ट्र के प्रमुख वित्तीय अखबारों में आधे पृष्ठ का एक ध्यानाकर्षक विज्ञापन प्रकाशित हुआ था। विज्ञापन का शीर्षक था, &#8216;<em>हर्षद मेहता झूठ बोलता है</em>।&#8217; हर्षद मेहता की ही कंपनी ग्रोमोर रिसर्च एंड एसेट्‌स मैनेजमेंट लि. द्वारा जारी इस विज्ञापन में विगत कुछ महीनों से चर्चित शेयर दलाल, हर्षद मेहता के कार्यकलापों का विस्तृत बयान दिया गया। इसी के साथ अब तक सिर्फ &#8216;<em>लीडिंग बुल</em>&#8216; या &#8216;<em>बिग बुल</em>&#8216; के नाम से पहचाने जाने वाले व्यक्ति से सभी परिचित हो गए। और वह व्यक्ति है- हर्षद मेहता। शेयर बाजार के प्रति बढ़ते आकर्षण और इसमें छुपी द्रुतगामी कमाई ने असंख्य लोगों को इस ओर आकृष्ट किया है। इस बढ़ती हुई रुचि का सबसे अधिक फायदा स्टॉक एक्सचेंज के सदस्य, शेयर दलालों को मिला।</p>
<p>इसकी सीधा-सा उदाहरण यह है कि आज एक मोटे अनुमान से सिर्फ बंबई स्टॉक एक्सचेंज में प्रतिदिन औसतन 500 करोड़ रुपए का कामकाज होता है। एक प्रतिशत की दलाली के हिसाब से रोजाना सिर्फ बीएसई के दलाल 5 करोड़ रुपए की कमाई कर लेते हैं। परंतु सभी दलालों की दिलचस्पी महज दलाली से नहीं होती। कुछेक ऐसे भी हैं, जो दूसरों का नाम भर लेकर वास्तव में खुद ही के लिए व्यवसाय करने लगते हैं। विगत वर्ष में तेजी में आया एक ऐसा नाम उभरा था 29 वर्षीय निमेष शाह का, जिसने सेंचुरी और हेक्स्ट के शेयरों की करोड़ों की खरीद की थी और उसका नाम भारत के सर्वोच्च व्यक्तिगत आयकरदाता के रूप में प्रसिद्ध हो गया था।</p>
<p><strong>दलालों में सरताज&#8230;</strong></p>
<div class="simplePullQuoteRight">एक प्रतिशत की दलाली के हिसाब से रोजाना सिर्फ बीएसई के दलाल 5 करोड़ रुपए की कमाई कर लेते हैं<span></span></div>
<p>गत वर्ष के प्रमुख तेजड़िए अगर निमेष शाह थे, तो इस साल वह निस्संदेह हर्षद मेहता हैं। इनकी नजरें जा टिकीं एसीसी और अपोलो टायर के शेयरों पर और फिर जो राष्ट्रव्यापी खरीद शुरू हुई कि 12 दिसंबर 91 से 2 जनवरी 92 तक की सेटलमेंट अवधि में एसीसी के भाव 2955 से 3300 और अपोलो टायर के भाव 111 से 174 तक पहुंच गए। यह लेख लिखे जाने के दिन एसीसी 4110 और अपोलो टायर 212 के शीर्ष पर पहुंच चुका है और अभी भी तेजी सभी प्रतिबंधों के बावजूद अविरल जारी है। तेज भाव वृद्धि को देखते हुए हर स्टॉक एक्सचेंज में दलालों ने जमकर एसीसी-अपोलो टायरों को <em>&#8216;माथे मार दिया&#8217;</em>। (शार्ट सेल किया-बिना डिलीवरी का माल बेचना इस आशा से कि भाव घटने पर खरीद कर लेंगे)। परंतु उन दलालों को शायद यह ज्ञात नहीं था कि यह तेजड़िया वाकई <em>&#8216;तेज&#8217;</em> है। 3 जनवरी को &#8216;<em>पटावत</em>&#8216; (सेटलमेंट) के दिन हर्षद मेहता ने जब दोनों शेयरों की डिलीवरी मांगी, तो सभी स्तंभित रह गए। सभी को आशा थी कि भारी खरीदी का भुगतान न कर पाने की स्थिति में हर्षद मेहता सौदों का &#8216;<em>बदला</em>&#8216; देकर उन्हें अगले सेटलमेंट पर &#8216;<em>केरी-ओवर</em>&#8216; कर देगा। परंतु हुआ इसका ठीक विपरीत। हर्षद मेहता ने दलालों और बीएसई अधिकारियों के &#8216;<em>सट्‌टात्मक खरीद</em>&#8216; के आरोप को गलत सिद्ध करते हुए अपनी पूरी खरीद का एक चेक से भुगतान कर एसीसी और अपोलो टायर के लाखों शेयरों की डिलीवरी मांग ली। इस पर दोनों ही शेयरों में बेचवाल दलालों को &#8216;ऊंधा बदला&#8217; या &#8216;<em>बेकवर्डेशन चार्ज</em>&#8216; जमा करना पड़ा, जिसकी नौबत स्टॉक एक्सचेंज में बहुत कम आती है।</p>
<p>&#8216;<em>सट्‌टे</em>&#8216; के आरोप के अलावा मेहता पर यह भी आरोप लगाया गया कि एक ओर तो उन्होंने लाखों शेयरों की डिलीवरी मांगी, दूसरी ओर &#8216;<em>शॉर्ट सेल</em>&#8216; वाले दलालों को &#8216;<em>ऊंधा बदला</em>&#8216; भरने के लिए रुपए भी उन्होंने ने ही दिए। इसके अलावा एसीसी में ग्रोमोर की &#8216;<em>होल्डिंग</em>&#8216; 5.4 प्रतिशत और अपोलो टायर में 5 प्र.श. के लगभग हो गई, जिससे इन कंपनियों के टेक ओवर की आशंका व्यक्त की जाने लगी है। इन्हीं विवादों का स्पष्टीकरण करने के लिए ग्रोमोर ने 10 जनवरी के अपने विज्ञापन में लिखा कि &#8216;हर्षद मेहता और ग्रोमोर की एसीसी और अपोलो टायर में रुचि सिर्फ आकर्षक वित्तीय निवेश हेतु है, न कि कंपनी हथियाने के लिए। ग्रोमोर के सभी निवेश गहन अध्ययन और विश्लेषण पर आधारित रहते हैं और 90 प्र.श. खरीद का डिलीवरी लेकर भुगतान किया जाता है। ग्रोमोर की एसीसी पर नजर अगस्त 89 में 300 के भाव से और अपोलो टायर पर सितंबर 89 में 62 के भाव से है। ग्रोमोर का अगर कंपनी टेक ओवर का इरादा हो, तो वह संबंधित मैनेजमेंट की पूर्ण जानकारी में रहता है, जैसा कि मजदा इंडस्ट्री और मजदा पैकेजिंग के मामले में हुआ है। इन दोनों कंपनियों का ग्रोमोर ने अधिग्रहण कर लिया है।</p>
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