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	<title>Jitendra Muchhal &#124; Jitendra Muchhal Website &#124; J Muchhal &#124; जीतेंद्र मुछाल &#187; इंदौर और इंदौरी | इंदौर और इंदौरी अमेरिका में</title>
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		<title>मप्र के डॉक्टरों का अमेरिका में सम्मेलन कैलाश विजयवर्गीय का प्रवासी डॉक्टरों को न्योता</title>
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		<pubDate>Tue, 07 Aug 2007 12:01:28 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[इंदौर और इंदौरी]]></category>
		<category><![CDATA[कैलाश विजयवर्गीय]]></category>
		<category><![CDATA[चिकित्सा क्षेत्र]]></category>
		<category><![CDATA[मध्यप्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[मध्यप्रदेश में निवेश]]></category>
		<category><![CDATA[मप्र के डॉक्टर]]></category>

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		<description><![CDATA[मध्यप्रदेश की सरकार और नागरिक आप सभी की प्रगति से गौरवान्वित है। अपनी मातृभूमि से इतने वर्षों से दूर होने के बावजूद अपने राज्य के लिए आपका प्रेम और आत्मीयता धन्य है। राज्य शासन आपका मध्यप्रदेश में हृदय से स्वागत करता है। स्वास्थ्य और चिकित्सा के क्षेत्र में मध्यप्रदेश में निवेश और विकास की असीम संभावनाएँ हैं और सरकार आपको हर संभव सुविधाएँ और सहयोग देने के लिए तत्पर है। मध्यप्रदेश के सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने न्यूजर्सी के [...]]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><img class="alignleft size-full wp-image-2106" alt="मप्र के डॉक्टरों का अमेरिका में सम्मेलन कैलाश विजयवर्गीय का प्रवासी डॉक्टरों को न्योता " src="https://www.jmuchhal.com/wp-content/uploads/2007/08/125.jpg" width="311" height="307" /><span class="dropcap">म</span>ध्यप्रदेश की सरकार और नागरिक आप सभी की प्रगति से गौरवान्वित है। अपनी मातृभूमि से इतने वर्षों से दूर होने के बावजूद अपने राज्य के लिए आपका प्रेम और आत्मीयता धन्य है। राज्य शासन आपका मध्यप्रदेश में हृदय से स्वागत करता है। स्वास्थ्य और चिकित्सा के क्षेत्र में मध्यप्रदेश में निवेश और विकास की असीम संभावनाएँ हैं और सरकार आपको हर संभव सुविधाएँ और सहयोग देने के लिए तत्पर है।</p>
<p>मध्यप्रदेश के सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने न्यूजर्सी के अटलांटिक सिटी ट्रंप प्लाजा होटल में आयोजित मध्यप्रदेश के मेडिकल कॉलेज से पढ़े डॉक्टरों के सम्मेलन में यह उद्-गार व्यक्त किए। विजयवर्गीय ने मध्यप्रदेश के सभी डॉक्टरों को आगामी अक्टूबर में होने वाले मध्यप्रदेश निवेश सम्मेलन में &#8216;<em>राज्य अतिथि</em>&#8216; के रूप में आमंत्रित किया। हर वर्ष अगस्त के पहले सप्ताहांत में अमेरिका में बसे मध्यप्रदेश के प्रवासी डॉक्टर और उनके परिवार का तीन दिवसीय सम्मेलन होता है।</p>
<div class="simplePullQuoteRight">इंग्लैंड और भारत से डॉक्टर इस आयोजन के लिए विशेष रुप से आए थे<span></span></div>
<p>कोई 20 वर्षों पूर्व छोटे से रूप में इंदौर और ग्वालियर मेडिकल कॉलेज के सम्मेलन शुरू हुए थे। पिछले चार सालों से डॉ. राजेश काकानी तथा अन्य डॉक्टरों के प्रयासों से मध्यप्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों का सम्मेलन एक साथ होना शुरू हुआ । इस आयोजन ने अब स्थायी रूप ले लिया है। इस बार लगभग 200 लोग सम्मेलन में शरीक हुए, जिसमें अमेरिका, कनाडा, इंग्लैंड और भारत से डॉक्टर इस आयोजन के लिए विशेष रुप से आए थे। पारिवारिक माहौल में मनोरंजन और पारम्परिक खान-पान का सभी ने आनंद उठाया। इंदौर, ग्वालियर, भोपाल, जबलपुर, रायपुर और रीवा के मेडिकल कॉलेजों को इस वर्ष से औपचारिक तौर पर &#8216;<em>मप्र मेडिकल कॉलेजेस् अलुमनी एसोसिएशन ऑफ नार्थ अमेरिका</em>&#8216; में सम्मिलित कर लिया गया है।</p>
<p>इस वर्ष के मुख्य आयोजक (और संस्था की नामावली में &#8216;ग्रामसेवक&#8217;) थे इंदौर के डॉ. अनिल शर्मा। इंदौर के ही डॉ. मदन पटेल का योगदान भी उल्लेखनीय था। एक ओर जहाँ अमेरिका में 30-40 वर्षों से बसे मध्यप्रदेश के डॉ. राधू अग्रवाल, डॉ. पराशर, डॉ. महेश गुप्ता, डॉ. शर्मा सम्मेलन में मौजूद थे, वहीं दूसरी ओर युवा पीढ़ी की भी उपस्थिति थी। कार्यक्रम में एक दिन पूरे समय कैलाश विजयवर्गीय भी उपस्थित थे और उन्होंने सभी डॉक्टरों और उनके परिजनों के साथ समय बिताया। मनोरंजन संध्या में डॉक्टरों और उनके परिवारों ने कैलाशजी के साथ गीत-संगीत का आनंद लिया। अगले वर्ष के आयोजन के लिए कैलिफोर्निया में डिज्नी, लॉस एंजिल्स का नाम प्रस्तावित है।</p>
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		<title>अमेरिका में बताई मप्र की प्रगति</title>
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		<pubDate>Mon, 21 May 2007 11:51:31 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[इंदौर और इंदौरी]]></category>
		<category><![CDATA[अमेरिका मप्र]]></category>
		<category><![CDATA[कैलाश विजयवर्गीय]]></category>
		<category><![CDATA[ग्लोबल इन्वेस्टर्स मीट]]></category>
		<category><![CDATA[मध्यप्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[मध्यप्रदेश में निवेश]]></category>
		<category><![CDATA[शिवराजसिंह चौहान]]></category>

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		<description><![CDATA[मध्यप्रदेश में निवेश और विकास की संभावनाओं को प्रचारित करने के लिए मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान के नेतृत्व में आए मंत्री और सचिव स्तर के दल का शनिवार और रविवार को न्यूयॉर्क में अंतिम पड़ाव था। दोनों ही दिन विभिन्न आयोजनों में चौहान ने निवेशकों और अमेरिका में बसे मध्यप्रदेश के मूल निवासियों के बीच प्रदेश में चल रहे विकास कार्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला और उन्हें मध्यप्रदेश में निवेश के लिए आमंत्रित किया। चौहान के साथ पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल [...]]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><img class="alignleft size-full wp-image-2071" alt="अमेरिका में बताई मप्र की प्रगति" src="https://www.jmuchhal.com/wp-content/uploads/2007/05/123.jpg" width="311" height="307" /><span class="dropcap">म</span>ध्यप्रदेश में निवेश और विकास की संभावनाओं को प्रचारित करने के लिए मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान के नेतृत्व में आए मंत्री और सचिव स्तर के दल का शनिवार और रविवार को न्यूयॉर्क में अंतिम पड़ाव था। दोनों ही दिन विभिन्न आयोजनों में चौहान ने निवेशकों और अमेरिका में बसे मध्यप्रदेश के मूल निवासियों के बीच प्रदेश में चल रहे विकास कार्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला और उन्हें मध्यप्रदेश में निवेश के लिए आमंत्रित किया। चौहान के साथ पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर और मध्यप्रदेश के सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भी सभी सभाओं में भाग लिया। योरप और अमेरिका की इस यात्रा का आयोजन मध्यप्रदेश शासन और एफआईसीसीआई के संयुक्त प्रयासों से किया गया था।</p>
<p>चौहान ने अपने उद्-बोधन में बताया कि इस वर्ष के अंत में 26 और 27 अक्टूबर को भोपाल में मध्यप्रदेश से संबंधित &#8216;<em>ग्लोबल इन्वेस्टर्स मीट</em>&#8216; का आयोजन किया जा रहा है। इसमें भाग लेने आए सभी मेहमानों को राजकीय अतिथि का दर्जा दिया जाएगा और उनकी पूरी व्यवस्था मध्यप्रदेश सरकार करेगी।</p>
<div class="simplePullQuoteRight">25 करोड़ रुपए से ऊपर के सभी प्रोजेक्ट &#8216;मेगा प्रोजेक्ट&#8217; की श्रेणी में गिने जाएँगे और उनके ऊपर स्वयं मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में बैठक में निर्णय लिया जाएगा<span></span></div>
<p>न्यूयॉर्क के हारवर्ड क्लब में चौहान ने कहा कि राज्य में प्रतिदिन 25 किलोमीटर नई सड़क बन रही है। पिछले वर्ष 6 करोड़ पेड़ लगाए गए थे और इस वर्ष का लक्ष्य 10 करोड़ पेड़ लगाना है। उनके कार्यकाल में 3 हजार 150 मेगावॉट बिजली के उत्पादन की क्षमता बढ़ी है। 25 करोड़ रुपए से ऊपर के सभी प्रोजेक्ट &#8216;मेगा प्रोजेक्ट&#8217; की श्रेणी में गिने जाएँगे और उनके ऊपर स्वयं मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में बैठक में निर्णय लिया जाएगा।</p>
<p>मप्र बिरला समूह के चेयरमैन राजेन्द्र लोढ़ा ने भी प्रदेश में निवेश के अपने समूह के सुखद अनुभव का ब्योरा देते हुए सभी को मध्यप्रदेश में निवेश के लिए विचार करने पर जोर दिया। मध्यप्रदेश की प्रगति पर एक दृश्य-श्रव्य प्रस्तुति भी उपस्थित लोगों को काफी पसंद आयी। भोपाल के निकट एक आईटी पार्क के लिए राजीव कौल से अनुबंध पर भी हस्ताक्षर पर आदान-प्रदान हुआ। &#8216;<em>मध्यप्रदेश सेंटर</em>&#8216; के रूप में सेंट लुईस शहर में दफ्तर शुरू किया जाएगा जिसकी संभाल वहाँ के डॉ. व्यास और स्वयंसेवक करेंगे और राज्य शासन उसका दैनिक खर्च वहन करेगा।</p>
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		<title>अमेरिका में मध्यप्रदेश के डॉक्टरों का सम्मेलन</title>
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		<pubDate>Tue, 09 Aug 2005 06:45:43 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[इंदौर और इंदौरी]]></category>
		<category><![CDATA[मध्यप्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[मध्यप्रदेश के डॉक्टर]]></category>
		<category><![CDATA[महात्मा गाधी मेडिकल कॉलेज इंदौर]]></category>
		<category><![CDATA[शब-ए-मालवा]]></category>

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		<description><![CDATA[4 से 7 अगस्त 2005 को मेनहटन से करीब 100 मील दूर न्यूयॉर्क राज्य के सुरम्य हडसन वैली रिसोर्ट में मानो अपना मध्यप्रदेश उतर आया था। मौका था- इंदौर, ग्वालियर, भोपाल और मध्यप्रदेश के अन्य मेडिकल कॉलेजों में पढ़े और वर्तमान में अमेरिका-कनाडा में कार्यरत डॉक्टरों और उनके परिवारों के वार्षिक सम्मेलन का। महात्मा गाधी मेडिकल कॉलेज, इंदौर और गजरा राजा मेडिकल कॉलेज, ग्वालियर से पढ़े और अमेरिका में बसे डॉक्टर्स यूं तो करीब बीस सालों से वार्षिक तौर पर [...]]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><img src="https://www.jmuchhal.com/wp-content/uploads/2005/08/172.jpg" alt="17" width="311" height="307" class="alignleft size-full wp-image-3233" /><span class="dropcap">4</span> से 7 अगस्त 2005 को मेनहटन से करीब 100 मील दूर न्यूयॉर्क राज्य के सुरम्य हडसन वैली रिसोर्ट में मानो अपना मध्यप्रदेश उतर आया था। मौका था- इंदौर, ग्वालियर, भोपाल और मध्यप्रदेश के अन्य मेडिकल कॉलेजों में पढ़े और वर्तमान में अमेरिका-कनाडा में कार्यरत डॉक्टरों और उनके परिवारों के वार्षिक सम्मेलन का।</p>
<p>महात्मा गाधी मेडिकल कॉलेज, इंदौर और गजरा राजा मेडिकल कॉलेज, ग्वालियर से पढ़े और अमेरिका में बसे डॉक्टर्स यूं तो करीब बीस सालों से वार्षिक तौर पर अमेरिका या कनाडा के विभिन्न स्थानों पर मिलते रहते हैं। ग्वालियर से पढ़े डॉ. सतीश आनंद और इंदौर से पधारे डॉ. राजेश काकानी के प्रयासों से 2003 में नियाग्रा फाल्स में पहली बार इंदौर-ग्वालियर का मिला-जुला मिलन समारोह हुआ। तब से इस वार्षिक मिलन को एक सामूहिक और वृहद रूप देकर मध्यप्रदेश के सारे मेडिकल कॉलेजों के डॉक्टर्स का पारिवारिक मिलन संयुक्त कर लिया गया है। अधिकांश की सुविधा को देखते हुए इसे अगस्त माह के पहले सप्ताहांत पर निर्धारित कर लिया गया है।</p>
<p>पूर्व छात्र-छात्रा मिलन के अलावा इस समूह की यह भी विशेषता है कि संप्रदाय, राजनीति और &#8216;<em>किस्सा कुर्सी का</em>&#8216; से दूर रहते हुए हर वर्ष यह समूह अपने आने वाले वर्षों के वार्षिक समारोह के मुख्य आयोजक मनोनीत कर लेता है। मजे की बात यह है कि मुख्य आयोजक को ऑर्गनाइजिंग सेक्रेटरी नहीं बल्कि &#8216;<em>ग्राम सेवक</em>&#8216; की उपाधि दी जाती है।</p>
<p>आने वाले वार्षिक सम्मेलन की रूप रेखा और प्रावधान इन्हीं मनोनीत प्रतिनिधियों के होते हैं। इस वर्ष के मिलन के ग्राम सेवक थे इंदौर के मूल निवासी डॉ. राजेश काकानी। उनके साथ के डॉक्टर कार्यकर्ताओं के मार्गदर्शन और सहयोग से ही ये आयोजन इतना सफल रहा।</p>
<div class="simplePullQuoteLeftRed">शब-ए-मालवा को जीवंत करने के लिए संगीत संध्या भी आयोजित थी, जिसमें इंदौर मूल के कलाकार कुमार सुनील मुंगी की संगीत निशा आयोजित की गई थी<span></span></div>
<p><strong>समागम का मुख्य उद्देश्य</strong></p>
<p>आत्मीयता और प्रेम से सराबोर इस समागम में सभी का मुख्य उद्देश्य था- एक दूसरे से परिवार सहित मिलना, हाल-चाल जानना और अपने बीते दिनों की सुनहरी यादों में खो जाना। और जहां इंदौरी और मध्यप्रदेश वालों का कोई मिलन हो, तो फिर भला गाना-बजाना और इंदौरी खाना दूर कैसे रह सकता है। इस सुदूर होटल में भी दाल-बाटी से लेकर मालपुआ और पोहे-सेंव जैसे सारे परम्परागत इंदौरी भोज का तीन दिनों तक मानो सुरुचिपूर्ण &#8216;<em>फूड फेस्टीवल</em>&#8216; चल रहा था, जिसका सभी ने तबीयत से आनंद उठाया। शब-ए-मालवा को जीवंत करने के लिए संगीत संध्या भी आयोजित थी, जिसमें इंदौर मूल के कलाकार कुमार सुनील मुंगी की संगीत निशा आयोजित की गई थी। आनंद और उल्लास के माहौल में देर रात तक गाने बजाने के बावजूद इन्हीं डॉक्टर्स ने मिलन समारोह की एक सुबह चिकित्सा में हो रहे नए शोध के &#8216;<em>कंटीन्यूइंग एजुकेशन</em>&#8216; में बिताई।</p>
<p>अनुमान है कि सिर्फ इंदौर से पढ़े हुए ही शायद अमेरिका में 400 से अधिक डॉक्टर्स होना चाहिए, फिर ग्वालियर, भोपाल और राज्य के दूसरे कॉलेजों से और। सम्मेलन की पुस्तिका में मध्यप्रदेश के अमेरिका में बसे जिन भी डॉक्टर्स की सूचना उपलब्ध थी, उनकी डायरेक्टरी भी प्रकाशित की गई। मूलतः मध्यप्रदेश से आने वाले डॉक्टर्स गोया 1950 या उससे कुछ पहले के दशक से अमेरिका में आ रहे हैं। 1960 और 1970 के दशकों में यह अपने चरम पर था। 1990 के मध्य तक आते-आते अमेरिका के निवासी कानून में परिवर्तन और बेहत सख्ती के कारण मध्यप्रदेश और भारत से डॉक्टर्स का आना कुछ कम हो गया है।</p>
<p>सम्मेलन में 1960 के दशक से भी कुछ डॉक्टर्स थे और सबसे &#8216;<em>कनिष्ठ</em>&#8216; डॉक्टर्स 1994-95 के आसपास के थे। इनमें से अधिकांश डॉक्टर्स ने अपने कार्यक्षेत्रों में बहुत नाम और समृद्धि कमाई है। और ये डॉक्टर्स अपनी मेहनत, समर्पण और काबिलियत से अमेरिका के चिकित्सा जगत में शीर्ष स्थानों तक पहुंचे हैं। आर्थिक और पेशेवर प्रगति के चरम पर होने और इतने वर्षों में अमेरिका में रहने के बावजूद इनकी सादगी, मिलनसारिता और इंदौरी अपनापन पूरी तरह बरकरार है, जो वाकई काबिले तारीफ है। कुल मिलाकर कोई 80 डॉक्टर्स के परिजनों सहित कोई 225 लोग इस मिलन में अमेरिका और कनाडा के सभी प्रांतों से शरीक हुए। इनमें बहुमत इंदौर और उसके बाद ग्वालियर मेडिकल कॉलेज के पूर्व छात्रा-छात्राओं का था। इनमें से तीन डॉक्टर्स तो पहले 17 वर्षों से अनवरत्‌ अमेरिका में ग्वालियर मेडिकल कॉलेज के मिलन समारोह में शरीक हो रहे हैं।</p>
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		<title>जननी जन्मभूमिश्च</title>
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		<pubDate>Sat, 21 Dec 2002 06:44:29 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[इंदौर और इंदौरी]]></category>
		<category><![CDATA[इंदौर शहर]]></category>
		<category><![CDATA[इंदौरी]]></category>
		<category><![CDATA[जननी जन्मभूमिश्च]]></category>
		<category><![CDATA[पलक मुछाल]]></category>
		<category><![CDATA[भारतीय प्रवासी दिवस]]></category>
		<category><![CDATA[मां अहिल्या की नगरी इंदौर]]></category>

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		<description><![CDATA[क्या सोचता है हजारों मील दूर बैठा एक &#8216;इंदौरी&#8216; अपने शहर के लिए? या सोचता भी है क्या एक &#8216;इंदौरी&#8216; अपने पैतृक शहर के लिए? क्या एक &#8216;इंदौरी&#8216; सिर्फ इसलिए अधिक गौरवशाली हो जाता है क्योंकि वह शहर या देश से दूर चला गया है? क्या वह अपने इंदौर की उन्नति के लिए कुछ करना चाहता है? क्या उसे अपने शहर से कुछ आशा है? निश्चित है कि महोत्सव के दौरान इन सभी विषयों पर गहरा विचार-मंथन और आदान-प्रदान होगा। [...]]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><img class="alignleft size-full wp-image-1477" alt="जननी जन्मभूमिश्च " src="https://www.jmuchhal.com/wp-content/uploads/2002/12/16.jpg" width="311" height="307" />क्या सोचता है हजारों मील दूर बैठा एक &#8216;<em>इंदौरी</em>&#8216; अपने शहर के लिए? या सोचता भी है क्या एक &#8216;<em>इंदौरी</em>&#8216; अपने पैतृक शहर के लिए? क्या एक &#8216;<em>इंदौरी</em>&#8216; सिर्फ इसलिए अधिक गौरवशाली हो जाता है क्योंकि वह शहर या देश से दूर चला गया है?</p>
<p>क्या वह अपने इंदौर की उन्नति के लिए कुछ करना चाहता है? क्या उसे अपने शहर से कुछ आशा है? निश्चित है कि महोत्सव के दौरान इन सभी विषयों पर गहरा विचार-मंथन और आदान-प्रदान होगा।</p>
<p>किसी भी मां के जीवन का सर्वाधिक गौरव उसकी संतान और उनके गौरव में निहित होता है। आज का दिन वात्सल्यमयी मां अहिल्या की नगरी इंदौर के गौरव का दिन है। देश-विदेश के कोने-कोने से &#8216;<em>इंदौरी</em>&#8216; अपनी जननी जन्मभूमि का गौरव बढ़ाने आज से &#8216;<em>इंदौर गौरव महोत्सव</em>&#8216; में शरीक होंगे। और मुझ जैसे कई हजारों और भी हैं, जो तन से तो आज इंदौर में उत्सव में शामिल होने मौजूद नहीं हैं, लेकिन जिनके मन के हर स्पंदन में इंदौर जुड़ा है।</p>
<div class="simplePullQuoteRightGreen">अपने शहर को देखकर गर्व होता है। याद आता है शहर के रिश्तों का अपनापन, जहां व्यावसायिक लेन-देन से शुरू हुए संबंध भी गहरी मित्रता में बदल जाते हैं<span></span></div>
<p>क्या सोचता है हजारों मील दूर बैठा एक &#8216;<em>इंदौरी</em>&#8216; अपने शहर के लिए? या सोचता भी है क्या एक &#8216;इंदौरी&#8217; अपने पैतृक शहर के लिए? क्या एक &#8216;<em>इंदौरी</em>&#8216; सिर्फ इसलिए अधिक गौरवशाली हो जाता है क्योंकि वह शहर या देश से दूर चला गया है? क्या वह अपने इंदौर की उन्नति के लिए कुछ करना चाहता है? क्या उसे अपने शहर से कुछ आशा है? निश्चित है कि महोत्सव के दौरान इन सभी विषयों पर गहरा विचार-मंथन और आदान-प्रदान होगा। मैं तो यहां चंद शब्दों में अपने विचार आज के पावन दिन आपके साथ बांटना चाहता हूं। इंदौर गौरव महोत्सव के ठीक बाद 9 जनवरी को नई दिल्ली में बहुत बड़े स्तर पर &#8216;<em>भारतीय प्रवासी दिवस</em>&#8216; का आयोजन किया जा रहा है। अब हर साल 9 जनवरी को प्रवासी भारतीय दिवस मनाया जाएगा। इसी दिन गांधीजी दक्षिण अफ्रीका से स्वदेश लौटे थे।</p>
<p>आज मुझे इंदौर की बहुत याद आ रही है। आज ही क्यों, ऐसा कौन-सा दिन है कि मुझे और मुझ जैसे हजारों को इंदौर की याद नहीं आती। सच तो यह है कि &#8216;<em><strong>यू केन टेक एन इंदौरी आउट ऑफ इंदौर, बट यू केन नेवर टेक आउट इंदौर फ्रॉम एन इंदौरी</strong></em>&#8216; (एक इंदौरी तो इंदौर के बाहर जा सकता है लेकिन इंदौर किसी भी इंदौरी के दिल से कभी बाहर नहीं जाता)। शायद हर शहर के प्रवासी शहर वाले को अपने शहर से इतना ही लगाव हो, कदाचित नहीं भी, लेकिन अपने इंदौर की मत पूछिए, आंख और मुंह दोनों में पानी आ जाता है।</p>
<p><strong>इंदौर के प्रति लगाव</strong></p>
<p>लेकिन चूंकि शहर और शहर वालों से इतना लगाव है और उसके अतीत का गौरव देखा है, तो उसके वर्तमान को देखकर बहुत दुःख होता है। कभी-कभी क्रोध भी आता है। हां, परिवर्तन प्रकृति का नियम है, लेकिन प्रगति और विकास की ओर, एक ऐसी व्यवस्था की ओर नहीं जहां व्यवस्था सिर्फ एक शब्द बनकर रह गई हो। मैं तो साल में कुछ दिनों के लिए इंदौर आता हूं लेकिन देखता क्या हूं? आधुनिक जीवन की मूलभूत जरूरतों में इतनी कटौती&#8230; सड़क, पानी, बिजली, रोजगार सभी में! यह सही है कि हर तरह के प्रशासन की अपनी मजबूरियाँ हैं जो गोया दूर से नजर नहीं आतीं, लेकिन इसी देश में जब इंदौर के आकार-प्रकार के बराबर शहरों से गुजरते हैं, तो अधिकांश में ऐसा क्यों नहीं लगता? कई बार तो उनकी प्रगति देखकर मन में मानो जलन-सी होती है कि अपना इंदौर ऐसा क्यों नहीं, जबकि वह इन सबसे दशकों पहले बहुत आगे था।</p>
<p>इंदौर का नाम लेते ही पोहे-जलेबी, कचोरी, प्रकाश-आकाश की सेंव से मुंह में पानी आ जाना हर इंदौरी को बहुत अच्छा लगता है, फिर वह चाहे कहीं भी हो और कितने ही सालों से इंदौर के बाहर हो। साथ ही याद आता है शहर के रिश्तों का अपनापन, जहां व्यावसायिक लेन-देन से शुरू हुए संबंध भी गहरी मित्रता में बदल जाते हैं। मन गद्‌गद्‌ हो जाता है जब छप्पन दुकान पर पुराना पान वाला, जेलरोड पर दर्जी और छावनी के आपके पैतृक डॉक्टर महीनों-बरसों बाद मिलने पर इतनी आत्मीयता से कुशलक्षेम पूछते हैं और पेट जवाब दे देता है तथा जाने के दिन आ जाते हैं, लेकिन भोजन के बुलावे और मनुहार फिर भी अधूरी ही रह जाती है। मैं इंदौर सिर्फ इसलिए नहीं आना चाहता क्योंकि वहाँ मेरे अपने रहते हैं बल्कि इसलिए कि मुझे इंदौर आकर बहुत खुशी होती है। अपने शहर को देखकर गर्व होता है।</p>
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		<title>पद्‌मभूषण सम्मान की सूचना से अभिभूत हैं डॉ. राणावत</title>
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		<pubDate>Mon, 29 Jan 2001 05:58:51 +0000</pubDate>
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				<category><![CDATA[इंदौर और इंदौरी]]></category>
		<category><![CDATA[इंदौर]]></category>
		<category><![CDATA[डॉ. चितरंजन राणावत]]></category>
		<category><![CDATA[डॉ. राणावत]]></category>
		<category><![CDATA[पद्‌मभूषण पुरस्कार]]></category>
		<category><![CDATA[भारतीय डॉक्टर]]></category>

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		<description><![CDATA[गणतंत्र दिवस की संध्या पर न्यूयॉर्क स्थित भारतीय उच्चायोग में न्यूयॉर्क इलाके के गणमान्य नागरिकों के कार्यक्रम में कुछ अलग-सा माहौल था। एक-दूसरे से मिलने और गणतंत्र दिवस की बधाई से पहले लोग एक-दूसरे से गुजरात में आए भूकम्प से विनाश की ज्यादा बातें कर रहे थे। इंदौर से जुड़े होने पर गर्व मेरी नजर अचानक पड़ी विश्व प्रसिद्ध अस्थि रोग विशेषज्ञ और भारत सरकार द्वारा पद्‌मभूषण से अलंकृत डॉ. चितरंजन राणावत पर, जो वहां उच्चायोग के सभागार में दाखिल [...]]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><img class="alignleft size-full wp-image-1459" alt="पद्‌मभूषण सम्मान की सूचना से अभिभूत हैं डॉ. राणावत" src="https://www.jmuchhal.com/wp-content/uploads/2001/01/8.jpg" width="311" height="307" /><span class="dropcap">ग</span>णतंत्र दिवस की संध्या पर न्यूयॉर्क स्थित भारतीय उच्चायोग में न्यूयॉर्क इलाके के गणमान्य नागरिकों के कार्यक्रम में कुछ अलग-सा माहौल था। एक-दूसरे से मिलने और गणतंत्र दिवस की बधाई से पहले लोग एक-दूसरे से गुजरात में आए भूकम्प से विनाश की ज्यादा बातें कर रहे थे।</p>
<p><strong>इंदौर से जुड़े होने पर गर्व</strong></p>
<p>मेरी नजर अचानक पड़ी विश्व प्रसिद्ध अस्थि रोग विशेषज्ञ और भारत सरकार द्वारा पद्‌मभूषण से अलंकृत डॉ. चितरंजन राणावत पर, जो वहां उच्चायोग के सभागार में दाखिल हो ही रहे थे। मैंने तुरंत सारे इंदौर की ओर से बढ़कर डॉ. राणावत को पद्‌मभूषण पर हार्दिक बधाई और शुभकामना व्यक्त की और कहा कि हमें आपके इंदौर से जुड़े होने पर गर्व है। अत्यंत सहजता से धन्यवाद कहते हुए डॉ. राणावत ने अपनी चिर-परिचित सी मुस्कान की झलक दे दी। पूछने पर उन्होंने बताया कि उन्हें तो पहले इस अवॉर्ड के बारे में कुछ भी नहीं मालूम था और उनके अलंकरण की सूचना उन्हें न्यूयॉर्क में भारतीय उच्चायुक्त शशि त्रिपाठी ने फोन करके दी।</p>
<div class="simplePullQuoteRightGolden">मैंने डॉ. राणावत से पूछा कि कैसा लग रहा है तो निःश्छलता से बोले &#8216;अच्छा ही लग रहा है&#8217;<span></span></div>
<p>पास खड़ी श्रीमती राणावत ने तो चुटकी लेते हुए कहा कि डॉ. राणावत को तो ठीक से पुरस्कार का नाम भी नहीं पता था। मैंने डॉ. राणावत से पूछा कि कैसा लग रहा है तो निःश्छलता से बोले &#8216;<em>अच्छा ही लग रहा है</em>&#8216;। वे और उनकी पत्नी आपस में कयास लगाने लगे कि यह पुरस्कार कौन तय करता है और राष्ट्रपति भवन से यह नाम की घोषणा कैसे होती है। श्रीमती राणावत ने डॉ. राणावत को बताया कि संगीत से जुड़ी दो हस्तियों को सबसे बड़ा अलंकरण मिला है पर उस अलंकरण का नाम वे भूल रही थीं।</p>
<div>
<p><strong>डॉ. राणावत से बातचीत</strong></p>
<p>मैंने डॉ. राणावत से पूछा कि आपकी अगली हिन्दुस्तान और इंदौर यात्रा, हंसकर बोले अभी तो कुछ तय नहीं, पर देखिए शायद जब यह अलंकरण समारोह हो तब। अमेरिकन महिला होने के बावजूद बातचीत से श्रीमती राणावत तुरंत भांप गईं कि यह कोई इंदौर वाला डॉ. राणावत को बधाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि वे 1969 में पहली बार इंदौर गई थीं और आखिरी बार पिछले साल और इन दोनों के बीच इंदौर में बहुत बदलाव आया है।</p>
</div>
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		<title>न्यूयॉर्क में एक इन्दौरी शाम</title>
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		<pubDate>Mon, 20 Nov 2000 06:42:56 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[इंदौर और इंदौरी]]></category>
		<category><![CDATA[इन्दौर]]></category>
		<category><![CDATA[इन्दौर महापौर]]></category>
		<category><![CDATA[इन्दौरी शाम]]></category>
		<category><![CDATA[कैलाश विजयवर्गीय]]></category>
		<category><![CDATA[गांधी हॉल]]></category>
		<category><![CDATA[डायस्पार्क]]></category>

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		<description><![CDATA[गांधी हॉल का पुनर्जीवन, गोमा की फेल, गुलमोहर कॉलोनी, गांधी मार्ग पर पार्किंग की परेशानी, यह सब विषय सुनकर आप साफ बता सकते हैं कि कुछ इन्दौर वाले अपने शहर के सुनहरे कल और दुःखद आज की चर्चा कर रहे हैं। जी हां, चर्चा थी भी इन्दौर के ही संबंध में और कर भी रहे थे सब इन्दौर वाले ही, लेकिन सात समंदर पार। इन्दौर के महापौर कैलाश विजयवर्गीय इन दिनों अमेरिका की यात्रा पर हैं और यात्रा के अंतिम [...]]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><img class="alignleft size-full wp-image-1475" alt="न्यूयॉर्क में एक इन्दौरी शाम " src="https://www.jmuchhal.com/wp-content/uploads/2000/11/15.jpg" width="311" height="307" /><span class="dropcap">गां</span>धी हॉल का पुनर्जीवन, गोमा की फेल, गुलमोहर कॉलोनी, गांधी मार्ग पर पार्किंग की परेशानी, यह सब विषय सुनकर आप साफ बता सकते हैं कि कुछ इन्दौर वाले अपने शहर के सुनहरे कल और दुःखद आज की चर्चा कर रहे हैं।</p>
<p>जी हां, चर्चा थी भी इन्दौर के ही संबंध में और कर भी रहे थे सब इन्दौर वाले ही, लेकिन सात समंदर पार। इन्दौर के महापौर कैलाश विजयवर्गीय इन दिनों अमेरिका की यात्रा पर हैं और यात्रा के अंतिम पड़ाव न्यूयॉर्क में आज की शाम उन्होंने गुजारी न्यूयॉर्क में बसे इन्दौर के चंद अनिवासियों के साथ। इन्दौर में चल रहे अपने कार्यकाल में सुधार के अपने सपनों के साथ और यहां रह रहे इन्दौरवासियों के सुझाव सुनने में।</p>
<p>इन्दौर के प्रति सभी के मन में पीड़ा थी और इसलिए शहर के सुधार में अपना योगदान देने का सभी ने विजयवर्गीय को आश्वासन दिया, लेकिन साथ में यह आग्रह भी किया कि अगर कोई भी योजना पूर्ण ध्येय और लगन के साथ की जाए तो निश्चित ही इन्दौर के सभी अनिवासी उसमें अपने सामर्थ्य अनुसार भाग लेंगे, क्योंकि सभी के मन में इन्दौर के लिए बहुत प्रेम है।</p>
<p>विजयवर्गीय ने सभी को आश्वासन दिया कि वे शीघ्र ही कोई योजना का पूरा प्रारूप इन्दौर के अनिवासियों के सामने पेश करेंगे और उसे पूर्ण निष्ठा से कार्यान्वित भी करेंगे। उन्होंने अमेरिका में रह रहे इन्दौरवासियों की एक डायरेक्टरी बनाने और कुछ समय बाद अमेरिका में रहने वाले सारे इन्दौरवासियों के एक सम्मेलन को आयोजित करने का भी प्रस्ताव दिया।</p>
<div class="simplePullQuoteRightPerpal">आपके खून में कुछ कर गुजरने की गर्मी है, इसलिए शायद आपको सर्दी नहीं लगती <span></span></div>
<p>विजयवर्गीय ने सभी इन्दौर वालों की न्यूयॉर्क में प्रगति पर बहुत प्रसन्नता व्यक्त की, अपनी शुभकामना दी और यह भी कहा कि महापौर के रूप में वे इन्दौर के लिए कुछ करने का प्रयास जरूर करेंगे, जिसमें यातायात समस्या, सड़कों की हालत, इन्दौर के बाग-बगीचों का उत्थान आदि भी शामिल हैं।</p>
<p>सभी से मिलने के बाद विजयवर्गीय इन्दौर के सुवि इन्फर्मेशन्स की न्यूयॉर्क इकाई डायस्पार्क के मेनहट्टन कार्यालय भी गए और इन्दौर से जन्मी कंपनी की प्रगति पर अपनी बधाई दी। न्यूयॉर्क में आज काफी सर्दी थी और सभी लोग अपने कोट-जैकेट में थे, लेकिन विजयवर्गीय तो अपनी चिर-परिचित पोशाक कुर्ता-पायजामा और केसरिया दुपट्‌टे में ही थे। किसी ने उनसे पूछ लिया कि क्या आपको सर्दी नहीं लगती? विजयवर्गीय ने कहा नहीं तो, मुझे तो महसूस नहीं हो रही। तभी एक दूसरे इन्दौर वासी ने कहा &#8216;आपके खून में कुछ कर गुजरने की गर्मी है, इसलिए शायद आपको सर्दी नहीं लगती।&#8217;</p>
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		<title>इस धूल को तरसते हैं हम !</title>
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		<pubDate>Wed, 01 Dec 1999 06:11:27 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[इंदौर और इंदौरी]]></category>
		<category><![CDATA[अमेरिका]]></category>
		<category><![CDATA[इंदौर]]></category>
		<category><![CDATA[धूल]]></category>
		<category><![CDATA[धूल-मिट्टी]]></category>
		<category><![CDATA[ब्रज-वृंदावन]]></category>
		<category><![CDATA[मध्यप्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[मातृभूमि]]></category>

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		<description><![CDATA[धुआं उगलते टेम्पो, सड़क के नाम पर सिर्फ एक रास्ता, गड्‌ढों और &#8216;दचकों&#8217; भरा सफर (यानी सफर तय करना हो हिंदी में लेकिन यात्रा के अंत तक सफर हो अंग्रेजी का)। इंदौर और मध्यप्रदेश के क्या हाल हो गए हैं। &#8216;सड़क&#8216; तो जैसे भूगोल की किताब में मीलों तय करने के बजाय सीधे इतिहास की किताबों के पन्ने में खंडहरों की तरह दफन हो गई है। अभी तक तो सिर्फ दोपहिया वाहन चालक ही मुंह पर अंतरिक्षमय, जैन साधुसम कुछ [...]]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><img class="alignleft size-full wp-image-1996" alt="इस धूल को तरसते हैं हम ! " src="https://www.jmuchhal.com/wp-content/uploads/1999/12/15.jpg" width="311" height="307" /><span class="dropcap">धु</span>आं उगलते टेम्पो, सड़क के नाम पर सिर्फ एक रास्ता, गड्‌ढों और <em>&#8216;दचकों&#8217;</em> भरा सफर (यानी सफर तय करना हो हिंदी में लेकिन यात्रा के अंत तक सफर हो अंग्रेजी का)। इंदौर और मध्यप्रदेश के क्या हाल हो गए हैं। &#8216;<em>सड़क</em>&#8216; तो जैसे भूगोल की किताब में मीलों तय करने के बजाय सीधे इतिहास की किताबों के पन्ने में खंडहरों की तरह दफन हो गई है। अभी तक तो सिर्फ दोपहिया वाहन चालक ही मुंह पर अंतरिक्षमय, जैन साधुसम कुछ लगा कर रखते थे, परंतु यहां तो मैंने पलासिया चौराहे पर ट्रैफिक पुलिस मैन को भी वह पहने हुए देखा। तो अब जनता ही नहीं, वरन्‌ प्रशासन के अंग भी इसे अपनी नियति मानकर स्वीकार कर चुके हैं। और तो और, अपने मित्र जे.पी. से मिला, पांच मिनट की मुलाकात में ढेरों बार खांसी। पूछने पर हताश होकर बोला, ये तो यार अब इंदौर में रहने वाले हर व्यक्ति, जो स्कूटर-साइकिल पर घूमता हो, उसको होना तय है।</p>
<p>सिर्फ दो ही इलाज हैं। या तो दिनभर ऑफिस के बाहर निकलो नहीं या फिर सिर्फ एयरकंडीशंड गाड़ी में घूमो, अमूमन यह नामुमकिन है। यह तो रहा रहवासी होने के दुःख-दर्द का नजारा। वहीं अमेरिका के &#8216;<em>स्वस्थ</em>&#8216; माहौल से आते ही परिवार सहित शादी के चल समारोह में मैं जब शरीक हुआ, तो बरात और घोड़ी और &#8216;<em>राष्ट्रीय नौशाद</em>&#8216; बैंड के साथ-साथ &#8216;थिरकने&#8217; का भी अवसर प्राप्त हुआ- &#8216;<em>मेरे देश की धरती सोना उगले&#8217;, &#8216;होहोऽऽ&#8230;.निंबुड़ा निंबुड़ा</em>&#8216; और फिर तोरण द्वार पर बजने वाला वो गीत, जिसका कॉपीराइट पूरे भारत के हर बैण्ड के पास है- &#8216;<em>बहारों फूल बरसाओ</em>&#8216;- इन धुनों को सुन कर जो दिल को ठंडक पहुंचती है, उसका अंदाजा सिर्फ अनिवासी ही लगा सकते हैं, जिन्हें ये बैंड, बरात, घोड़ी नसीब ही नहीं होते।</p>
<div class="simplePullQuoteLeftOrange">न्यूयॉर्क में महीने में सिर्फ एक बार औपचारिकतावश जूते साफ करने की आदत से मेरे मुंह से अनायास ही निकल गया। जीजाजी शायद समझ नहीं पाएंगे। पर ‘इस धूल को कितना तरसते हैं हम।’<span></span></div>
<p><strong>इस धूल को कितना तरसते हैं हम !</strong></p>
<p>अपने भाई, जीजी-जीजाजी के साथ बरात चलने के पहले आधा-पौन घंटा <em>&#8216;डांस&#8217;</em> और &#8216;<em>फुगड़ी</em>&#8216; करने के बाद जब औरों की तरह मैंने भी अपने जूतों को देखा, जो श्यामवर्ण होकर भी धूल-मिट्टी की परत से श्वेतमय हो चले थे तो अनायास ही दूसरों के मुंह से निकल पड़ा &#8216;<em>उफ</em>&#8216; कितनी धूल उड़ती है यहां पर, जूते की पॉलिश खराब हो गई। वहीं न्यूयॉर्क में महीने में सिर्फ एक बार औपचारिकतावश जूते साफ करने की आदत से मेरे मुंह से अनायास ही निकल गया। जीजाजी शायद समझ नहीं पाएंगे। पर &#8216;<em>इस धूल को कितना तरसते हैं हम।</em>&#8216;</p>
<p>ये वो धूल-मिट्टी है, जिसने अमेरिका में साफ मोजे-जूते पहनने वाले मेरे पांवों से पिछले साल सीधे न्यूयॉर्क के प्लेन से उतरकर ब्रज-वृंदावन में पांच-सात कोस की गिरिराज परिक्रमा लगवा दी, जबकि पूरा मार्ग कंकड़, कीचड़, गोबर और धूल-मिट्टी से सराबोर था। एक नजर में वही धूल-मिट्टी है जो पांव में छाले और फेफड़े में दमा कर देती है और दूसरी नजर में वही ब्रज रज और मातृभूमि की मिट्टी आस्था और श्रद्धाभरे पांवों को कोमल मरहम-सा सहला देती है। शायद फर्क इसीलिए है कि &#8216;<em>इस धूल को बहुत तरसते हैं हम।</em>&#8216; सहस्राब्दी की ढलान पर खड़े हुए कभी-कभी डर भी लगता है कि कहीं यह मिट्टी गरीबी और गड़बड़ी की &#8216;<em>गर्द</em>&#8216; में न बदल जाए। वैसे, अपने राग और रस को बरकरार रख पाए तो इस &#8216;<em>रज</em>&#8216; को, सारी दुनिया को अपने बस में करने की अद्‌भुत क्षमता है। तभी तो हम जैसे गृहविरही अनिवासी पुलक और श्रद्धा से यह कह पाते हैं कि &#8216;<em>इस धूल को बहुत तरसते हैं हम!</em>&#8216;</p>
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